Jasbir Singh nain
Jasbir Singh nain Oct 16, 2021

प्रदोष व्रत शुभ प्रभात 🙏🙏🙏🌷🪔शिव कृपा पाने के लिए 17 अक्टूबर को रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत, जानें किस मनोकामना के लिए कब और कैसे रखें ये व्रत प्रदोष व्रत हर माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है. कहते हैं कि प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाया जा सकता है. इस बार ये व्रत 17 अक्टूबर, रविवार के दिन रखा जाएगा. रविवार के दिन होने के कारण इसका नाम रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा. इस दिन शिव जी भगवान के साथ सूर्यदेव का आशीर्वाद भी पाया जा सकता है. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में ही करनी चाहिए. प्रदोष काल का मतलब होता है सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले का समय. इस समय में भगवान शिव की पूजा की जाती है. कहते हैं कि प्रदोष काल में पूजा, जप, साधना आदि करने पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. सुख-संपत्ति और सौभाग्य का वरदान दिलाने वाला प्रदोष व्रत को प्रारंभ करने से पहले इसके नियम को जान लेना जरूरी है. आइए जानते हैं कि किसी कामना के लिए कब और कैसे रखा जाता है प्रदोष व्रत. पुत्र कामना के लिए अगर आप पुत्र प्राप्ति के लिए प्रदोष व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो बता दें कि भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए ये व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू करना चाहिए. और वो भी तब जब उस दिन शनिवार पड़े. अर्थात शुक्ल पक्ष का शनि प्रदोष व्रत से व्रत की शुरुआत करें. रोगों से मुक्ति पाने के लिए किसी लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं और उससे जीवनभर के लिए मुक्ति पाना चाहते हैं तो भगवान शिव के प्रदोष व्रत की शुरुआत रवि प्रदोष व्रत से करें. सुख–समृद्धि और सुयोग्य जीवनसाथी के लिए जीवन में सुख-समृद्धि के साथ-साथ सुंदर, सुयोग्य जीवनसाथी की मनोकामना रखने वाले व्यक्ति को शुक्र प्रदोष व्रत से ही प्रदोष व्रत की शुरुआत करनी चाहिए. अगर मां लक्ष्मी आपसे रूठ गई है और कर्ज से छुटकारा पाना चाहते हैं तो ये व्रत सोम प्रदोष व्रत से शुरू करना चाहिए. प्रदोष व्रत विधि भगवान शिव की कृपा पाने के लिए भक्त प्रदोष व्रत रखते हैं. इस दिन स्नान-ध्यान करने के बाद 'मम पुत्रादि प्राप्ति कामनया प्रदोष व्रत महं करिष्ये' उच्चारण करते हुए हाथ में कुछ धन, पुष्प आदि रखकर भगवान शिव के नाम का संकल्प करें. कहते हैं कि सूर्यास्त के समय एक बार फिर से स्नान करें और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें. भक्ति भाव के साथ इस दिन प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें. इस दौरान 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का कम से कम एक माला जप जरूर करें. पूजा के बाद भगवान का प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें.

प्रदोष व्रत                               शुभ प्रभात 🙏🙏🙏🌷🪔शिव कृपा पाने के लिए 17 अक्टूबर को रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत, जानें किस मनोकामना के लिए कब और कैसे रखें ये व्रत
प्रदोष व्रत


 हर माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत  रखा जाता है. कहते हैं कि प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाया जा सकता है. इस बार ये व्रत 17 अक्टूबर, रविवार के दिन रखा जाएगा. रविवार के दिन होने के कारण इसका नाम रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा. इस दिन शिव जी भगवान के साथ सूर्यदेव का आशीर्वाद भी पाया जा सकता है. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में ही करनी चाहिए. प्रदोष काल का मतलब होता है सूर्यास्त के बाद और रात्रि से पहले का समय. इस समय में भगवान शिव की पूजा की जाती है.  


कहते हैं कि प्रदोष काल में पूजा, जप, साधना आदि करने पर भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. सुख-संपत्ति और सौभाग्य का वरदान दिलाने वाला प्रदोष व्रत को प्रारंभ करने से पहले इसके नियम को जान लेना जरूरी है. आइए जानते हैं कि किसी कामना के लिए कब और कैसे रखा जाता है प्रदोष व्रत.



पुत्र कामना के लिए


अगर आप पुत्र प्राप्ति के लिए प्रदोष व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो बता  दें कि भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए ये व्रत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से शुरू करना चाहिए. और वो भी तब जब उस दिन शनिवार पड़े. अर्थात शुक्ल पक्ष का शनि प्रदोष व्रत से व्रत की शुरुआत करें. 


रोगों से मुक्ति पाने के लिए


किसी लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं और उससे जीवनभर के लिए मुक्ति पाना चाहते हैं तो भगवान शिव के प्रदोष व्रत की शुरुआत रवि प्रदोष व्रत से करें.  


सुख–समृद्धि और सुयोग्य जीवनसाथी के लिए


जीवन में सुख-समृद्धि के साथ-साथ सुंदर, सुयोग्य जीवनसाथी की मनोकामना रखने वाले व्यक्ति को शुक्र प्रदोष व्रत से ही प्रदोष व्रत की शुरुआत करनी चाहिए. 



अगर मां लक्ष्मी आपसे रूठ गई है और कर्ज से छुटकारा पाना चाहते हैं तो ये व्रत सोम प्रदोष व्रत से शुरू करना चाहिए. 


प्रदोष व्रत विधि


भगवान शिव की कृपा पाने के लिए भक्त प्रदोष व्रत रखते हैं. इस दिन स्नान-ध्यान करने के बाद 'मम पुत्रादि प्राप्ति कामनया प्रदोष व्रत महं करिष्ये' उच्चारण करते हुए हाथ में कुछ धन, पुष्प आदि रखकर भगवान शिव के नाम का संकल्प करें. कहते हैं कि सूर्यास्त के समय एक बार फिर से स्नान करें और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें. भक्ति भाव के साथ इस दिन प्रदोष व्रत कथा सुनें या पढ़ें. इस दौरान 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र का कम से कम एक माला जप जरूर करें. पूजा के बाद भगवान का प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें.

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कामेंट्स

Renu Singh Oct 17, 2021
Om Surya Devay Namah 🙏🌹 Shubh Prabhat Vandan Bhai ji Surya Bhagwan Aap Sapriwar ko sda Sukhi Swasth aur Nirog rakhein Aàpka Din Shubh Avam Mangalmay ho Bhai Ji 🙏🌹

Munesh Tyagi Oct 17, 2021
Om shree bhaskaraya namo namah Shubh prabhat vandan Ji aapka har pal mangalmay ho

योगेश जानी Oct 17, 2021
ॐ सूयॅदेवाय नमः शुभ रविवार आप का दिन शुभहो नमस्ते

Rani Oct 17, 2021
om suryay namah 🙏🌹suprbhat vandan bhai ji🌹🌿shree sury narayan ji ki kripa sadaiv aap ke pure pariwar pr bni rhe 🌿🌺aap ka har pal subh magalmay ho🌹🌿🙏

Bindu Singh Oct 17, 2021
Jai shree krishna ji Radhe Radhe ji 🌷🙏🏼👌

Jasbir Singh nain Nov 26, 2021

काल भैरव जयंती 27 नवम्बर, 2021 (शनिवार) शुभ प्रभात जी 🪔🪔🪴🙏🙏 भगवान काल भैरव को भगवान शिव का रुद्र रुप बताया गया है। वैसे तो हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मासिक कालाष्टमी व्रत किया जाता है। लेकिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव जंयती के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव भगवान का अवतरण हुआ था। इस साल काल भैरव जंयती 27 नवंबर, शनिवार के दिन पड़ रही है। भगवान शिव का रुद्र रुप कहे जाने वाले काल भैरव भगवान की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन प्रातः काल उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। रात्रि के समय काल भैरव की पूजा की जाती है। बता दें कि भगवान काल भैरव को दंडापणि (जिसके हाथों में दंड हो) कहा जाता है। काल भैरव दयालु, कल्याण करने वाले और अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देव कहे जाते हैं, वहीं अनैतिक कार्य करने वालों के लिए ये दंडनायक भी हैं। इतना ही नहीं, काल भैरव भगवान को लेकर ये मान्यता भी है कि भगवान कैल भैरव के भक्तों के साथ कोई अहित करता है तो उसे तीनों लोकों में कहीं भी शरण नहीं मिलती। कालभैरभ जयंती शुभ मुहूर्त- मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ- 27 नवंबर 2021, शनिवार को प्रातः 05 बजकर 43 मिनट से मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष अष्टमी समापन- 28 नवंबर 2021, रविवार को प्रातः 06:00 बजे पूजा विधि इस दिन सुबह उठ जाएं। इसके बाद सभी नित्यकर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर लें। स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इसके बाद घर के मंदिर में या किसी शुभ स्थान पर कालभैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अब इसके चारों तरफ गंगाजल छिड़क लें। फिर उन्हें फूल अर्पित करें। फिर नारियल, इमरती, पान, मदिरा, गेरुआ आदि चीजें अर्पित करें। फिर कालभैरव के समक्ष चौमुखी दीपक जलाएं और धूप-दीप करें। फिर भैरव चालीसा का पाठ करें। फिर भैरव मंत्रों का 108 बार जाप करें। इसके बाद आरती करें और पूजा संपन्न करें। व्रत कथा पौराणिक कथा के अनुसार एक बार की बात है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों में श्रेष्ठता की लड़ाई चली। इस बात पर बहस बढ़ गई, तो सभी देवताओं को बुलाकर बैठक की गई। सबसे यही पूछा गया कि श्रेष्ठ कौन है? सभी ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और उत्तर खोजा लेकिन उस बात का समर्थन शिवजी और विष्णु ने तो किया, परंतु ब्रह्माजी ने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिवजी को क्रोध आ गया और शिवजी ने अपना अपमान समझा। शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। इस भैरव अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को ‘महाकालेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है इसलिए ही इन्हें दंडाधिपति कहा गया है। शिवजी के इस रूप को देखकर सभी देवता घबरा गए। भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। इस प्रकार ब्रह्माजी के सिर को काटने के कारण भैरवजी पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया। ब्रह्माजी ने भैरव बाबा से माफी मांगी तब जाकर शिवजी अपने असली रूप में आए। भैरव बाबा को उनके पापों के कारण दंड मिला इसीलिए भैरव को कई दिनों तक भिखारी की तरह रहना पड़ा। इस प्रकार कई वर्षों बाद वाराणसी में इनका दंड समाप्त होता है। इसका एक नाम ‘दंडपाणी’ पड़ा था। इसी के साथ काल भैरव अवतार से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है।  काल भैरव जयंती पर किए जाने वाले उपाय काल भैरव जयंती के दिन भगवान शिव की पूजा करने से भगवान भैरव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ‘ॐ नम: शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें और साथ ही मन में अपनी मनोकामना कहें। मान्यता है कि इससे आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि इस दिन ऐसे मंदिर में जाकर पूजन करें जहां बहुत कम लोग जाते हो या फिर कई दिनों से किसी ने पूजा न की हो। ऐसा माना जाता है कि जो भैरव बहुत कम पूजे जाते हैं उनका पूजन करने से भगवान भैरव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इस दिन मंदिर जाकर दीपक प्रज्वलित करें और भगवान भैरव को नारियल, जलेबी का भोग लगाएं। भगवान भैरव का वाहन श्वान यानी कुत्ता माना गया है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने के साथ ही कुत्ते को भोजन अवश्य करवाएं। खासतौर पर काले कुत्ते को भोजन कराएं। इससे काल भैरव के साथ शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। ऐसा करने से सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

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my mandir Nov 26, 2021

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my mandir Nov 25, 2021

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Garima Gahlot Rajput Nov 26, 2021

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