Poonam Aggarwal
Poonam Aggarwal Sep 19, 2021

🥀🥀* ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव*🥀🥀🙏 🥀🔱🔱🥀🔱🔱🥀🔱🔱🥀🔱🔱 *🌹क्यों जरूरी है श्राद्ध क्या है पितृ पक्ष का महत्व और क्या है सही विधि 🌹🙏🏻* भारतीय महीनों की गणना के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को सृष्टि पालक भगवान विष्णु के प्रतिरूप श्रीकृष्ण का जन्म धूमधान से मनाया गया है। तदुपरांत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को प्रथम देव गणेशजी का जन्मदिन यानी गणेश महोत्सव के बाद भाद्र पक्ष माह की पूर्णिमा से अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का महापर्व शुरू हो जाता है। इसको महापर्व इसलिए बोला जाता है क्योंकि नौदुर्गा महोत्सव नौ दिन का होता है दशहरा पर्व दस दिन का होता है पर यह पितृ पक्ष सोलह दिनों तक चलता है। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार अश्विन माह के कृष्ण पक्ष से अमावस्या तक अपने पितरों के श्राद्ध की परंपरा है। यानी कि 12 महीनों के मध्य में छठे माह भाद्र पक्ष की पूर्णिमा से यानी आखिरी दिन से 7वें माह अश्विन के दिनों में यह पितृ पक्ष का महापर्व मनाया जाता है। सूर्य भी अपनी प्रथम राशि मेष से भ्रमण करता हुआ जब छठी राशि कन्या में एक माह के लिए भ्रमण करता है तब ही यह सोलह दिन का पितृ पक्ष मनाया जाता है। उपरोक्त ज्योतिषीय पारंपरिक गणना का महत्व इसलिए और भी बढ़ जाता है क्योंकि शास्त्रों में भी कहा गया है कि आपको सीधे खड़े होने के लिए रीढ़ की हड्डी यानी बैकबोन का मजूबत होना बहुत आवश्यक है जो शरीर के लगभग मध्य भाग में स्थित है और जिसके चलते ही हमारे शरीर को एक पहचान मिलती है। उसी तरह हम सभी जन उन पूर्वजों के अंश हैं अर्थात हमारी जो पहचान है यानी हमारी रीढ़ की हड्डी मजबूत बनी रहे उसके लिए हर वर्ष के मध्य में अपने पूर्वजों को अवश्य याद करें और हमें सामाजिक और पारिवारिक पहचान देने के लिए श्राद्ध कर्म के रूप में अपना धन्यवाद अर्थात अपनी श्रद्धाजंलि दें। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में हमारे पूर्वज मोक्ष प्राप्ति की कामना लिए अपने परिजनों के निकट अनेक रूपों में आते हैं। इस पर्व में अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व उनकी आत्मा की शांति देने के लिए श्राद्ध किया जाता है और उनसे जीवन में खुशहाली के लिए आशीर्वाद की कामना की जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार जिस तिथि में मातापिता दादादादी आदि परिजनों का निधन होता है। इन 16 दिनों में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना उत्तम रहता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उसी तिथि में जब उनके पुत्र या पौत्र द्वारा श्राद्ध किया जाता है तो पितृ लोक में भ्रमण करने से मुक्ति मिलकर पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। हमारे पितरों की आत्मा की शांति के लिए ‘श्रीमद भागवत् गीता’ या ‘भागवत पुराण’ का पाठ अति उत्तम माना जाता है। ज्योतिष में नवग्रहों में सूर्य को पिता व चंद्रमा को मां का कारक माना गया है। जिस तरह सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण लगने पर कोई भी शुभ कार्य का शुभारंभ मना होता है वैसे ही पितृ पक्ष में भी मातापिता दादादादी के श्राद्ध के पक्ष के कारण शुभ कार्य शुरू करने की मनाही रहती है जैसेविवाह मकान या वाहन की खरीदारी इत्यादि। कैसे करें श्राद्ध पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध सामान्यत दोपहर 12 बजे के लगभग करना ठीक माना जाता है। इसे किसी सरोवर नदी या फिर अपने घर पर भी किया जा सकता है। परंपरा अनुसार अपने पितरों के आवाहन के लिए भात काले तिल व घिक का मिश्रण करके पिंड दान व तर्पण किया जाता है। इसके पश्चात विष्णु भगवान व यमराज की पूजाअर्चना के साथसाथ अपने पितरों की पूजा भी की जाती है। अपनी तीन पीढ़ी पूर्व तक के पूर्वजों की पूजा करने की मान्यता है। ब्राह्मण को घर पर आमंत्रित कर सम्मानपूर्वक उनके द्वारा पूजा करवाने के उपरांत अपने पूर्वजों के लिए बनाया गया विशेष भोजन समर्पित किया जाता है। फिर आमंत्रित ब्राह्मण को भोजन करवाया जाता है। ब्राह्मण को दक्षिणा फल मिठाई और वस्त्र देकर प्रसन्न किया जाता है व चरण स्पर्श कर सभी परिवारजन उनसे आशीष लेते हैं। पित पृक्ष में पिंड दान अवश्य करना चाहिए ताकि देवों व पितरों का आशीर्वाद मिल सके। अपने पितरों के पसंदीदा भोजन बनाना अच्छा माना जाता है। सामान्यत पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों के लिए कद्दू की सब्जी दालभात पूरी व खीर बनाना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद पूरी व खीर सहित अन्य सब्जियां एक थाली में सजाकर गाय कुत्ता कौवा और चींटियों को देना अति आवश्यक माना जाता है। कहा जाता है कि कौवे व अन्य पक्षियों द्वारा भोजन ग्रहण करने पर ही पितरों को सही मायने में भोजन प्राप्त होता है क्योंकि पक्षियों को पितरों का दूत व विशेष रूप से कौवे को उनका प्रतिनिधि माना जाता है। पितृ पक्ष में अपशब्द बोलना ईर्ष्या करना क्रोध करना बुरा माना जाता है व इनका त्याग करना ही चाहिए। इस दौरान घर पर लहसुन प्याज नॉनवेज और किसी भी तरह के नशे का सेवन वर्जित माना जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे शु्द्ध घी का दिया जलाकर गंगा जल दूध घी अक्षत व पुष्प चढ़ाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। घर में गीता का पाठ करना भी इस अवधि में काफी अच्छा माना गया है। यह सब करके आप अपने पितरों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यदि इस अवसर पर अपने पूर्वजों के सम्मान में उनके नाम से प्याऊ स्कूल धर्मशाला आदि के निर्माण में सहयोग करें तो माना जाता है कि आपके पूर्वज आप पर अति कृपा बनाए रखते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि पितरों को धन से नहीं बल्कि भावना से प्रसन्न करना चाहिए। विष्णु पुराण में भी कहा गया है कि निर्धन व्यक्ति जो नाना प्रकार के पकवान बनाकर अपने पितरों को विशेष भोजन अर्पित करने में सक्षम नहीं हैं वे यदि मोटा अनाज या चावल या आटा और यदि संभव हो तो कोई सब्जीसाग व फल भी यदि पितरों को प्रति पूर्ण आस्था से किसी ब्राह्मण को दान करता है तो भी उसे अपने पूर्वजों का पूरा आशीर्वाद मिल जाता है। यदि मोटा अनाज व फल देना भी मुश्किल हो तो वो सिर्फ अपने पितरों को तिल मिश्रित जल को तीन उंगुलियों में लेकर तर्पण कर सकता है ऐसा करने से भी उसकी पूरी प्रक्रिया होना माना जाता है। श्राद्ध व तर्पण के दौरान ब्राह्मण को तीन बार जल में तिल मिलाकर दान देने व बाद में गाय को घास खिलाकर सूर्य देवता से प्रार्थना करते हुए कहना चाहिए कि मैंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो किया उससे प्रसन्न होकर मेरे पितरों को मोक्ष दें तो इससे आपके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है व व्यक्ति का पूर्ण श्राद्ध का फल प्राप्त हो जाता है। यदि मातापिता दादादादी इत्यादि किसी के निधन की सही तिथि का ज्ञान नहीं हो तो इस पर्व के अंतिम दिन यानी अमावस्या पर उनका श्राद्ध करने से पूर्ण फल मिल जाता है। ‼️ राम राम सा राधे राधे जी ‼️🙏 ‼️🔱‼️🔱‼️🔱‼️🔱‼️

🥀🥀* ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव*🥀🥀🙏
     🥀🔱🔱🥀🔱🔱🥀🔱🔱🥀🔱🔱
        *🌹क्यों जरूरी है श्राद्ध क्या है पितृ पक्ष का महत्व और क्या है सही विधि 🌹🙏🏻*

भारतीय महीनों की गणना के अनुसार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को सृष्टि पालक भगवान विष्णु के प्रतिरूप श्रीकृष्ण का जन्म धूमधान से मनाया गया है। तदुपरांत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को प्रथम देव गणेशजी का जन्मदिन यानी गणेश महोत्सव के बाद भाद्र पक्ष माह की पूर्णिमा से अपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का महापर्व शुरू हो जाता है। 

इसको महापर्व इसलिए बोला जाता है क्योंकि नौदुर्गा महोत्सव नौ दिन का होता है दशहरा पर्व दस दिन का होता है पर यह पितृ पक्ष सोलह दिनों तक चलता है।

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार अश्विन माह के कृष्ण पक्ष से अमावस्या तक अपने पितरों के श्राद्ध की परंपरा है। यानी कि 12 महीनों के मध्य में छठे माह भाद्र पक्ष की पूर्णिमा से यानी आखिरी दिन से 7वें माह अश्विन के दिनों में यह पितृ पक्ष का महापर्व मनाया जाता है। 

सूर्य भी अपनी प्रथम राशि मेष से भ्रमण करता हुआ जब छठी राशि कन्या में एक माह के लिए भ्रमण करता है तब ही यह सोलह दिन का पितृ पक्ष मनाया जाता है। 

उपरोक्त ज्योतिषीय पारंपरिक गणना का महत्व इसलिए और भी बढ़ जाता है क्योंकि शास्त्रों में भी कहा गया है कि आपको सीधे खड़े होने के लिए रीढ़ की हड्डी यानी बैकबोन का मजूबत होना बहुत आवश्यक है जो शरीर के लगभग मध्य भाग में स्थित है और जिसके चलते ही हमारे शरीर को एक पहचान मिलती है। 

उसी तरह हम सभी जन उन पूर्वजों के अंश हैं अर्थात हमारी जो पहचान है यानी हमारी रीढ़ की हड्डी मजबूत बनी रहे उसके लिए हर वर्ष के मध्य में अपने पूर्वजों को अवश्य याद करें और हमें सामाजिक और पारिवारिक पहचान देने के लिए श्राद्ध कर्म के रूप में अपना धन्यवाद अर्थात अपनी श्रद्धाजंलि दें।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में हमारे पूर्वज मोक्ष प्राप्ति की कामना लिए अपने परिजनों के निकट अनेक रूपों में आते हैं। इस पर्व में अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व उनकी आत्मा की शांति देने के लिए श्राद्ध किया जाता है और उनसे जीवन में खुशहाली के लिए आशीर्वाद की कामना की जाती है।

 ज्योतिषीय गणना के अनुसार जिस तिथि में मातापिता दादादादी आदि परिजनों का निधन होता है। इन 16 दिनों में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध करना उत्तम रहता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उसी तिथि में जब उनके पुत्र या पौत्र द्वारा श्राद्ध किया जाता है तो पितृ लोक में भ्रमण करने से मुक्ति मिलकर पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हो जाता है। हमारे पितरों की आत्मा की शांति के लिए ‘श्रीमद भागवत् गीता’ या ‘भागवत पुराण’ का पाठ अति उत्तम माना जाता है।

ज्योतिष में नवग्रहों में सूर्य को पिता व चंद्रमा को मां का कारक माना गया है। जिस तरह सूर्य ग्रहण व चंद्र ग्रहण लगने पर कोई भी शुभ कार्य का शुभारंभ मना होता है वैसे ही पितृ पक्ष में भी मातापिता दादादादी के श्राद्ध के पक्ष के कारण शुभ कार्य शुरू करने की मनाही रहती है जैसेविवाह मकान या वाहन की खरीदारी इत्यादि।

 कैसे करें श्राद्ध पितृ पक्ष में तर्पण और श्राद्ध सामान्यत दोपहर 12 बजे के लगभग करना ठीक माना जाता है। इसे किसी सरोवर नदी या फिर अपने घर पर भी किया जा सकता है।

 परंपरा अनुसार अपने पितरों के आवाहन के लिए भात काले तिल व घिक का मिश्रण करके पिंड दान व तर्पण किया जाता है। इसके पश्चात विष्णु भगवान व यमराज की पूजाअर्चना के साथसाथ अपने पितरों की पूजा भी की जाती है। 

अपनी तीन पीढ़ी पूर्व तक के पूर्वजों की पूजा करने की मान्यता है। ब्राह्मण को घर पर आमंत्रित कर सम्मानपूर्वक उनके द्वारा पूजा करवाने के उपरांत अपने पूर्वजों के लिए बनाया गया विशेष भोजन समर्पित किया जाता है।

 फिर आमंत्रित ब्राह्मण को भोजन करवाया जाता है। ब्राह्मण को दक्षिणा फल मिठाई और वस्त्र देकर प्रसन्न किया जाता है व चरण स्पर्श कर सभी परिवारजन उनसे आशीष लेते हैं।
पित पृक्ष में पिंड दान अवश्य करना चाहिए ताकि देवों व पितरों का आशीर्वाद मिल सके।

 अपने पितरों के पसंदीदा भोजन बनाना अच्छा माना जाता है। सामान्यत पितृ पक्ष में अपने पूर्वजों के लिए कद्दू की सब्जी दालभात पूरी व खीर बनाना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद पूरी व खीर सहित अन्य सब्जियां एक थाली में सजाकर गाय कुत्ता कौवा और चींटियों को देना अति आवश्यक माना जाता है। 

कहा जाता है कि कौवे व अन्य पक्षियों द्वारा भोजन ग्रहण करने पर ही पितरों को सही मायने में भोजन प्राप्त होता है क्योंकि पक्षियों को पितरों का दूत व विशेष रूप से कौवे को उनका प्रतिनिधि माना जाता है। पितृ पक्ष में अपशब्द बोलना ईर्ष्या करना क्रोध करना बुरा माना जाता है व इनका त्याग करना ही चाहिए।

 इस दौरान घर पर लहसुन प्याज नॉनवेज और किसी भी तरह के नशे का सेवन वर्जित माना जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे शु्द्ध घी का दिया जलाकर गंगा जल दूध घी अक्षत व पुष्प चढ़ाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। 

घर में गीता का पाठ करना भी इस अवधि में काफी अच्छा माना गया है। यह सब करके आप अपने पितरों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यदि इस अवसर पर अपने पूर्वजों के सम्मान में उनके नाम से प्याऊ स्कूल धर्मशाला आदि के निर्माण में सहयोग करें तो माना जाता है कि आपके पूर्वज आप पर अति कृपा बनाए रखते हैं।

यह महत्वपूर्ण है कि पितरों को धन से नहीं बल्कि भावना से प्रसन्न करना चाहिए। विष्णु पुराण में भी कहा गया है कि निर्धन व्यक्ति जो नाना प्रकार के पकवान बनाकर अपने पितरों को विशेष भोजन अर्पित करने में सक्षम नहीं हैं वे यदि मोटा अनाज या चावल या आटा और यदि संभव हो तो कोई सब्जीसाग व फल भी यदि पितरों को प्रति पूर्ण आस्था से किसी ब्राह्मण को दान करता है तो भी उसे अपने पूर्वजों का पूरा आशीर्वाद मिल जाता है। 

यदि मोटा अनाज व फल देना भी मुश्किल हो तो वो सिर्फ अपने पितरों को तिल मिश्रित जल को तीन उंगुलियों में लेकर तर्पण कर सकता है ऐसा करने से भी उसकी पूरी प्रक्रिया होना माना जाता है।

 श्राद्ध व तर्पण के दौरान ब्राह्मण को तीन बार जल में तिल मिलाकर दान देने व बाद में गाय को घास खिलाकर सूर्य देवता से प्रार्थना करते हुए कहना चाहिए कि मैंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो किया उससे प्रसन्न होकर मेरे पितरों को मोक्ष दें तो इससे आपके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है व व्यक्ति का पूर्ण श्राद्ध का फल प्राप्त हो जाता है। 

यदि मातापिता दादादादी इत्यादि किसी के निधन की सही तिथि का ज्ञान नहीं हो तो इस पर्व के अंतिम दिन यानी अमावस्या पर उनका श्राद्ध करने से पूर्ण फल मिल जाता है।   ‼️ राम राम सा राधे राधे जी ‼️🙏
         ‼️🔱‼️🔱‼️🔱‼️🔱‼️

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कामेंट्स

PAWAN GUPTA Sep 20, 2021
ॐ नमः शिवाय हर हर महादेव🙏🙏 शुभ संध्या वन्दन जी🌹🙏🙏

kamala Maheshwari Sep 20, 2021
सर्वपितृ को सादर नमन जय भोलेनाथ की जयश्री बाकैविहरीकी कान्हा की कृपादृष्टि सदैवआपपर और आपके परिवार बनी रहे आपका दिन मंगलमय हो जय श्री कृष्णा जी 💠♦️💠♦️💠♦️💠♦️💠♦️💠♦️💠

Alka Devgan Sep 20, 2021
Om Ganeshay namah 🙏 Om Namah Shivaya 🙏 God bless you and your family aapka har pal mangalmay n shubh ho bahna ji very beautiful post di 👌👌👌👌👌 Pitra Paksha ki aap sabhi ko hardik shubhkamnaye di Bhole Nath ji aap sabhi ko kushiyan pradhan karein di aap sabhi par sada kirpa karein shubh ratri vandan bahna ji Har Har Mahadev ji 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Bhagat ram Sep 20, 2021
🌹🌹 जय श्री कृष्णा राधे राधे जी 🙏🙏💐🌺🌿🌹🌹 शुभ रात्रि वंदन जी 🙏🙏💐🌺🌿🌹🌺🌿🌹

हरे रामा हरे कृष्णा Sep 20, 2021
राधे राधे जय श्री कृष्ण🙏 शुभ रात्रि वंदन जी🙏 आप का हर पल मंगलमय हो 🙏 जय श्री राम जय हनुमान🙏🌹

R H BHAtt Sep 20, 2021
Har mahadav Har har mahadav om namah shivaya Shubh ratri ji Vandana ji Jai matage

......j Sep 20, 2021
Om namah shivay ji beautiful good night ji my sweet sister sweet dremes ji mere sister 🌻🙏🏻🌻

Saumya sharma Sep 20, 2021
ओम् नमः शिवाय 🙏शुभ रात्रि विश्राम प्यारी बहना जी 🙏जिस तरह हर रात के बाद सुबह जरूर आती है, उसी तरह हर परेशानी, हर तकलीफ के बाद सुख जरूर आता है, बस पूरी श्रृद्धा से ईश्वर पर भरोसा करें,वह अवश्य ही सुख रूपी सुबह का आगाज़ करते हैं ☺ईश्वर की कृपा से आपके जीवन में सपरिवार सुख रूपी सुबह बनी रहे ☺🌹🙏

🙋ANJALI😊MISHRA 🙏 Sep 20, 2021
*☘️श्री शिवाय नमस्तुभ्यं*☘️ॐ नमः शिवाय*🔱राम राम मेरी प्यारी बहना जी शुभ रात्रि वंदन🌹🙏भगवान् शंकर जी एवं माता पार्वती आपका सदा कल्याण करें🙏आप एवम् आप के परिवार को तन ,मन ,धन, से सदैव सुखी एवं स्वास्थ्य रखें.. काशी विश्वनाथ भगवान की कृपा सदा बनी रहे आप पर 🙌जय श्री राधे कृष्ण जी 🙏हर हर महादेव☆🌿 उमापति महादेव की जय 🙏🚩🌿🙏

ooooo Sep 21, 2021
🙏🙏Har Har mahadev ji pyaar Sister ji good Afternoon ji🌷😊🌷👌👌 jai shree Radhe krishna ji🌷🌷🌷🌷

Shyam Pandit0174gmailcom Sep 21, 2021
ओम श्री राम भक्त हनुमान नमन जय श्री राम ज़ी ईश्वर आप सभी को खुश रेख जी कैसे हो पूनम जी

dhruvwadhwani Sep 21, 2021
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय

dhruvwadhwani Sep 21, 2021
हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव हर-हर महादेव

dhruvwadhwani Sep 21, 2021
जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल जय महाकाल

dhruvwadhwani Sep 21, 2021
जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ

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Vandana Singh Oct 14, 2021

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Naresh Narwal Oct 15, 2021

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