Uma shankar Pandey
Uma shankar Pandey Sep 15, 2021

गजाननम् भूति गणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फल चारु भक्षणम्। उमासुतम् शोकबिनाशकारकम्। नमामिविघ्नेश्वरपाद पंकजम्।। 1।। 🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵शुभ संध्या बन्दन 🏵🏵🏵🏵🏵🏵

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कामेंट्स

Shudha Mishra Sep 15, 2021
Jai shri Ganpati ji ki 🙏🌹 Shubh sandhya vandan bhai ji Ganpati bappa ji ki kripa sda aap pr aapke family pr bani rahe aapka hr pl shubh v mangalmay ho ji 🙏🏻🌹

SANTOSH YADAV Sep 15, 2021
जय श्री गणेश शुभ बुधवार वंदन जी

Uma shankar Pandey Sep 15, 2021
@mohan143 🏵🙏🏵🚩🕉गं गणपतये नमः। 🏵🙏🏵🚩🕉शुभ संध्या बन्दन

Ram Sep 15, 2021
Jay Shri ganeshay namah

Ram Sep 15, 2021
Ganpati namo namah

R.K.SONI(Ganesh Mandir) Sep 15, 2021
जय गणेश देवा जी🙏💐गणेश जी की कृपा से आप हमेशा सुखी व स्वस्थ २हे जी।अति सुन्दर प्रस्तुति👌👌👌💐💐💐🙏🙏

R.K.SONI(Ganesh Mandir) Sep 15, 2021
जय गणेश देवा जी🙏💐गणेश जी की कृपा से आप हमेशा सुखी व स्वस्थ २हे जी।अति सुन्दर प्रस्तुति👌👌👌💐💐💐🙏🙏

kamala Maheshwari Sep 15, 2021
very sweetgood night ji💠♦️💠 jai Shree Ganesh Ji💠♦️💠 jai Shree Krishna ji💠♦️💠

Uma shankar Pandey Sep 15, 2021
@ram6973 🏵🙏🏵🚩🕉गणेशाय नमः। 🏵🙏🏵🚩🕉शुभ संध्या बन्दन 🙏

Uma shankar Pandey Sep 15, 2021
@rajendrakumarsoni3 🏵🙏🏵🚩🕉धन्यवाद, बहन 🏵🙏🏵🚩🕉गं गणपतये नमः। 🏵🙏🏵🚩🕉सदा आप खुश रहें।

Uma shankar Pandey Sep 15, 2021
@rajendrakumarsoni3 🏵🙏🏵🚩🕉गं गणपतये नमः 🏵🙏🏵🚩🕉धन्यवाद, बहन। 🏵🙏🏵🚩🕉शुभ संध्या बन्दन

Uma shankar Pandey Sep 15, 2021
@kamalamaheshwar 🏵🙏🏵🚩🕉गं गणपतये नमः। 🏵🙏🏵🚩🕉सदा आप खुश रहें। स्वस्थ रहें। 🏵🙏🏵🚩🕉सुख समृध्दि शाँन्तिः की मंगलमयी कामनाओं के साथ शुभरात्रि बन्दन 🙏🙏

dhruvwadhwani Sep 21, 2021

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Radhe Krishna Sep 21, 2021

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Shuchi Singhal Sep 21, 2021

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Mamta Chauhan Sep 21, 2021

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Manoj manu Sep 21, 2021

🚩🔔जय सिया राम जी जय वीर बजरंग वली 🌹🙏 🌹🌹भक्ति की महिमा - श्री राम चरित मानस ज्ञान से :- कहेउँ ग्यान सिद्धांत बुझाई। सुनहु भगति मनि कै प्रभुताई॥ राम भगति चिंतामनि सुंदर। बसइ गरुड़ जाके उर अंतर॥1 भावार्थ:-मैंने ज्ञान का सिद्धांत समझाकर कहा। अब भक्ति रूपी मणि की प्रभुता (महिमा) सुनिए। श्री रामजी की भक्ति सुंदर चिंतामणि है। हे गरुड़जी! यह जिसके हृदय के अंदर बसती है,॥1॥ *परम प्रकास रूप दिन राती। नहिं कछु चहिअ दिआ घृत बाती॥ मोह दरिद्र निकट नहिं आवा। लोभ बात नहिं ताहि बुझावा॥2॥ भावार्थ:-वह दिन-रात (अपने आप ही) परम प्रकाश रूप रहता है। उसको दीपक, घी और बत्ती कुछ भी नहीं चाहिए। (इस प्रकार मणि का एक तो स्वाभाविक प्रकाश रहता है) फिर मोह रूपी दरिद्रता समीप नहीं आती (क्योंकि मणि स्वयं धनरूप है) और (तीसरे) लोभ रूपी हवा उस मणिमय दीप को बुझा नहीं सकती (क्योंकि मणि स्वयं प्रकाश रूप है, वह किसी दूसरे की सहायता से प्रकाश नहीं करती)॥2॥ * प्रबल अबिद्या तम मिटि जाई। हारहिं सकल सलभ समुदाई॥ खल कामादि निकट नहिं जाहीं। बसइ भगति जाके उर माहीं॥3॥ भावार्थ:-(उसके प्रकाश से) अविद्या का प्रबल अंधकार मिट जाता है। मदादि पतंगों का सारा समूह हार जाता है। जिसके हृदय में भक्ति बसती है, काम, क्रोध और लोभ आदि दुष्ट तो उसके पास भी नहीं जाते॥3॥ * गरल सुधासम अरि हित होई। तेहि मनि बिनु सुख पाव न कोई॥ दब्यापहिं मानस रोग न भारी। जिन्ह के बस सब जीव दुखारी॥4॥ भावार्थ:-उसके लिए विष अमृत के समान और शत्रु मित्र हो जाता है। उस मणि के बिना कोई सुख नहीं पाता। बड़े-बड़े मानस रोग, जिनके वश होकर सब जीव दुःखी हो रहे हैं, उसको नहीं व्यापते॥4॥ * राम भगति मनि उर बस जाकें। दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें॥ चतुर सिरोमनि तेइ जग माहीं। जे मनि लागि सुजतन कराहीं॥5॥ भावार्थ:-श्री रामभक्ति रूपी मणि जिसके हृदय में बसती है, उसे स्वप्न में भी लेशमात्र दुःख नहीं होता। जगत में वे ही मनुष्य चतुरों के शिरोमणि हैं जो उस भक्ति रूपी मणि के लिए भली-भाँति यत्न करते हैं॥5॥ * सो मनि जदपि प्रगट जग अहई। राम कृपा बिनु नहिं कोउ लहई॥ सुगम उपाय पाइबे केरे। नर हतभाग्य देहिं भटभेरे॥6॥ भावार्थ:-यद्यपि वह मणि जगत्‌ में प्रकट (प्रत्यक्ष) है, पर बिना श्री रामजी की कृपा के उसे कोई पा नहीं सकता। उसके पाने के उपाय भी सुगम ही हैं, पर अभागे मनुष्य उन्हें ठुकरा देते हैं॥6॥ * पावन पर्बत बेद पुराना। राम कथा रुचिराकर नाना॥ मर्मी सज्जन सुमति कुदारी। ग्यान बिराग नयन उरगारी॥7॥ भावार्थ:-वेद-पुराण पवित्र पर्वत हैं। श्री रामजी की नाना प्रकार की कथाएँ उन पर्वतों में सुंदर खानें हैं। संत पुरुष (उनकी इन खानों के रहस्य को जानने वाले) मर्मी हैं और सुंदर बुद्धि (खोदने वाली) कुदाल है। हे गरुड़जी! ज्ञान और वैराग्य ये दो उनके नेत्र हैं॥7॥ * भाव सहित खोजइ जो प्रानी। पाव भगति मनि सब सुख खानी॥ मोरें मन प्रभु अस बिस्वासा। राम ते अधिक राम कर दासा॥8॥ भावार्थ:-जो प्राणी उसे प्रेम के साथ खोजता है, वह सब सुखों की खान इस भक्ति रूपी मणि को पा जाता है। हे प्रभो! मेरे मन में तो ऐसा विश्वास है कि श्री रामजी के दास श्री रामजी से भी बढ़कर हैं॥8॥ * राम सिंधु घन सज्जन धीरा। चंदन तरु हरि संत समीरा॥ सब कर फल हरि भगति सुहाई। सो बिनु संत न काहूँ पाई॥9॥ भावार्थ:-श्री रामचंद्रजी समुद्र हैं तो धीर संत पुरुष मेघ हैं। श्री हरि चंदन के वृक्ष हैं तो संत पवन हैं। सब साधनों का फल सुंदर हरि भक्ति ही है। उसे संत के बिना किसी ने नहीं पाया॥9॥ * अस बिचारि जोइ कर सतसंगा। राम भगति तेहि सुलभ बिहंगा॥10॥ भावार्थ:-ऐसा विचार कर जो भी संतों का संग करता है, हे गरुड़जी उसके लिए श्री रामजी की भक्ति सुलभ हो जाती है॥10॥🌺🌿🌺जय श्री राम जी 🌺🌿🙏

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