Vijay Sharma
Vijay Sharma Sep 10, 2021

🙏🙏!! श्री गणेशाय नमः !! 🙏🙏 🌷शुभ 🌷संध्या 🌷वंदन 🌷 जी 🌷 🌷🌷💚🌷🌷💙🌷🌷❤️🌷💜🌷🌷

🙏🙏!! श्री गणेशाय नमः !! 🙏🙏
     🌷शुभ 🌷संध्या 🌷वंदन 🌷 जी 🌷
🌷🌷💚🌷🌷💙🌷🌷❤️🌷💜🌷🌷

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Babbu Bhai Oct 26, 2021

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Rama Devi Sahu Oct 26, 2021

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jyoti Oct 26, 2021

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Kailash Prasad Oct 26, 2021

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Ramesh agrawal Oct 26, 2021

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@mahaveer1698 Oct 26, 2021

💐🌻💐🌻💐🌻💐🌻 *♨श्री कृष्णःशरणं मम♨* *‼जय श्रीकृष्ण ‼* *श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!* *꧁!! Զเधॆ Զเधॆ !!꧂* 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *दीनानाथ सहाय दीन कर* *सब प्रकार निर्धन दुखीयारो,* *कर्म हीन जड़ मति मन न्यारो,* *रत छल बल कुसंग वर !!* *दीनानाथ सहाय दीन कर* *दीन से भयो पतित दुरभागी,* *तन सुख साधन विषयानुरागी,* *पशु से हीन अधम नर !!* *दीनानाथ सहाय दीन कर* *तुम सम दर्शी जग के स्वामी,* *सहज कृपाल सुनि"जड़ कामि"* *कारण रहित कृपा कर !!* *दीनानाथ सहाय दीन कर* 🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻🌺🌻 : 🔆🏵🔆🏵🔆🏵🔆🏵🔆 *श्यामबाबा सैं करले पुकार,* *पार तेरी नैया करै ।* *लाग्यो है मोटो दरबार,* *पार तेरी नैया करै ।।* 🏵 *मन मांही तेरै वो ही लगन लगाई,* *धजाबन्ध धारी तेरी करसी सुणाई,* *खेनै वाले के हाथ हजार,* *पार तेरी नैया करै ।। लाग्यो है ....* 🔆 *लीलै घोड़े वाळो तेरी भीड़ बंटावै,* *अटक्योड़ा तेरा काम पटावै,* *मतना करै तूं विचार,* *पार तेरी नैया करै ।। लाग्यो है ....* 🏵 *शीश को दानी तेरो देव बडेरो,* *मिटज्या जनम-मरण को फेरो,* *चाल पड़ै रुजगार,* *पार तेरी नैया करै ।। लाग्यो है ....* 🔆 *श्यामबहादुर 'शिव' तेरो साथी,* *वो ही समधी, वो ही नाती,* *खोल देवै दया का द्वार,* *पार तेरी नैया करै ।। लाग्यो है* .... 🏵🔆🏵 धजाबन्ध = ध्वजाबन्ध रुजगार = रोजगार, व्यापार 🏵🔆🏵️🔆🏵️🔆🏵️ *‼️जय श्री श्याम ‼️* 🏵🔆🏵🔆🏵🔆🏵🔆🏵 🎠🦚♻️🏹🏹🏹♻️🦚🎠 *खाटूवाला श्याम जी, यो करता कमाल,* *अपने प्रेमी को देखो, कर दे मालामाल,* *खाटूवाला श्याम जी, यो करता कमाल ॥* *खाटू आके जिसने भी, शीश है झुकाया,* *श्याम जी ने सदा उसका, साथ है निभाया....* *तीनबाण धारी तेरी, बन जाए ढाल,* *खाटूवाला श्याम जी, यो करता कमाल ॥* *दुनिया ये कुछ ना देगी, दुनिया सयानी,* *भरदे भंडार तेरे, शीश का दानी.......* *क्यूँ तू फिर सोचे प्यारे, खाटूजी ने चाल,* *खाटूवाला श्याम जी, यो करता कमाल ॥* *सांवरा सलोना मेरा, लख दातारी,* *मस्ती मे झूम रही, दुनिया ये सारी...* *प्रेमी का पूछो ना यारो कैसा है हाल,* *खाटूवाला श्याम जी, यो करता कमाल ॥* *श्याम और प्रेमी के बीच ना आना,* *दीपक ना जाने कौन किस का दीवाना..* *श्याम कृपा से जीवन होता निहाल,* *खाटूवाला श्याम जी, यो करता कमाल ॥* 🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴🪴

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. कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी (अहोई अष्टमी) का एक नाम है 'बहुलाष्टमी'। क्या है इसकी मान्यताएँ :- "बहुलाष्टमी" मथुरा के पास अरिता नाम का गाँव है, जहाँ पर राधा और कृष्ण नाम के दो कुण्ड हैं। राधा कुण्ड के विषय में मान्यता है कि यदि किसी दंपत्ति को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है और वे अहोई अष्टमी (कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी) की मध्य रात्रि को इस कुण्ड में स्नान करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति हो सकती है। कृष्ण कुण्ड से जुड़ी कथा इस कुण्ड के संबंध में प्रचलित कथा के अनुसार कंस भगवान श्रीकृष्ण का वध करना चाहता था। इसके लिए कंस ने अरिष्टासुर राक्षस को भी भेजा था। अरिष्टासुर बछड़े का रूप बनाकर श्रीकृष्ण की गायों में शामिल हो गया और बाल-ग्वालों को मारने लगा। श्रीकृष्ण ने बछड़े के रूप में छिपे राक्षस को पहचान लिया और उसे पकड़कर जमीन पर पटककर उसका वध कर दिया। यह देखकर राधा ने श्रीकृष्ण से कहा कि उन्हें गो-हत्या का पाप लग गया है और इस पापा की मुक्ति के लिए उन्हें सभी तीर्थों के दर्शन करने चाहिए। राधा के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने देवर्षि नारद से इसका उपाय पूछा। देवर्षि नारद ने उन्हें उपाय बताया कि वह सभी तीर्थों का आह्वान करके उन्हें जल रूप में बुलाएं और उन तीर्थों के जल को एकसाथ मिलाकर स्नान करें। ऐसा करने से गो-हत्या के पाप से मुक्ति मिल जाएगी। देवर्षि के कहने पर श्रीकृष्ण ने एक कुण्ड में सभी तीर्थों के जल को आमंत्रित किया और कुण्ड में स्नान करके पापमुक्त हो गए। उस कुण्ड को कुष्ण कुण्ड कहा जाता है, जिसमें स्नान करके श्रीकृष्ण गौ-हत्या के पाप से मुक्त हुए थे। कृष्ण कुण्ड का निर्माण श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी से किया था। नारद के कहने पर श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी के एक छोटा-सा कुण्ड खोदा और सभी तीर्थों के जल से उस कुण्ड में आने की प्रार्थना की। भगवान के बुलाने पर सभी तीर्थ वहाँ जल रूप में आ गए। माना जाता है कि तभी से सभी तीर्थों का अंश जल रूप में यहाँ स्थित है। श्रीकृष्ण के बनाए कुण्ड को देखकर राधा ने उस कुण्ड के पास ही अपने कंगन से एक और छोटा-सा कुण्ड खोदा। जब भगवान ने उस कुण्ड को देखा तो हर रोज उसी कुण्ड में स्नान करने का और उनके बनाए कृष्ण कुण्ड से भी ज्यादा प्रसिद्ध होने का वरदान दिया। उस कुण्ड को देवी राधा ने बनाया था, इसीलिए वह राधा कुण्ड के नाम से प्रसिद्ध हुआ। अहोई अष्टमी तिथि पर इन दोनों कुण्डों का निर्माण हुआ था। इसीलिए अहोई अष्टमी पर यहाँ स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। हर साल अहोई अष्टमी पर राधा कुण्ड में बड़ी संख्या में लोग स्नान करते है। यहाँ स्नान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। मान्यता है कि निसंतान दम्पतियों को यहाँ स्नान करने से सन्तान रत्न की प्राप्ति होती है। कृष्ण कुण्ड और राधा कुण्ड की विशेषता है कि दूर से देखने पर कृष्ण कुण्ड का जल काला और राधा कुण्ड का जल सफेद दिखाई देता है। जो कि श्रीकृष्ण के काले वर्ण के होने का और देवी राधा के सफेद वर्ण के होने का प्रतीक है। ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" "कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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