सुप्रभात 🙏🌹

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. .─⊱━━━━⊱⊰━━━━━⊰─ ●/ *जय श्री राधे कृष्णा जी*👏 /▌✧​ *मैं ... पिता रह गया* ✧​ / \ *एक बार अवश्य पढ़ें* ☆ ● ════════❥ ❥ ❥ तुम और मैं पति पत्नी थे, तुम माँ बन गईं ~ मैं पिता रह गया. ★ तुमने घर सम्भाला, मैंने कमाई लेकिन तुम .... "माँ के हाथ का खाना" बन गई, मैं कमाने वाला पिता रह गया. ★ बच्चों को चोट लगी, और तुमने गले लगाया, मैंने समझाया. तुम ममतामयी माँ बन गई , मैं पिता रह गया. ★ बच्चों ने गल्तियाँ करी, तुम पक्ष ले कर "understanding Mom" बन गईं और मैं ... "पापा नहीं समझते" वाला पिता रह गया. ★ "पापा नाराज होंगे" कह कर तुम बच्चों की बेस्ट फ्रेंड बन गईं और मैं .... गुस्सा करने वाला पिता रह गया. ★ तुम्हारे आँसू में माँ का प्यार और मेरे छुपे हुए आँसुओं में मैं निष्ठुर पिता रह गया. ★ तुम चंद्रमा की तरह शीतल बनतीं चली गईं और पता नहीं कब ... मैं सूर्य की अग्नि सा पिता रह गया. ★ तुम धरती माँ, भारत माँ और मदर नेचर बनतीं गईं , और मैं ... जीवन को प्रारंभ करने का दायित्व लिए सिर्फ एक पिता रह गया. ★ .─⊱━━━━⊱⊰━━━━━⊰─ 🔔 ●/ जय श्री राधे कृष्णा जी 👏 /▌ जय जय श्री राधे / \ 🌹🙏🌹 ☆ ● ════════❥ ❥ ❥

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(((( सत्संग श्रवण का फल )))) . एक था मजदूर,मजदूर तो था, साथ-ही-साथ किसी संत महात्मा का प्यारा भी था। सत्संग का प्रेमी था। . उसने शपथ खाई थी! मैं उसी का बोझ उठाऊँगा, उसी की मजदूरी करूँगा, जो सत्संग सुने अथवा मुझे सुनाये. . प्रारम्भ में ही यह शर्त रख देता था। जो सहमत होता, उसका काम करता। . एक बार कोई सेठ आया तो इस मजदूर ने उसका सामान उठाया और सेठ के साथ वह चलने लगा। . जल्दी-जल्दी में शर्त की बात करना भूल गया। आधा रास्ता कट गया तो बात याद आ गई। . उसने सामान रख दिया और सेठ से बोला:- “सेठ जी ! मेरा नियम है कि मैं उन्हीं का सामान उठाऊँगा, जो कथा सुनावें या सुनें। अतः आप मुझे सुनाओ या सुनो। . सेठ को जरा जल्दी थी। वह बोला- “तुम ही सुनाओ।” मजदूर के वेश में छुपे हुए संत की वाणी से कथा निकली। . मार्ग तय होता गया। सेठ के घर पहुंचे तो सेठ ने मजदूरी के पैसे दे दिये। मजदूर ने पूछा:- “क्यों सेठजी ! सत्संग याद रहा ?” . “हमने तो कुछ सुना नहीं। हमको तो जल्दी थी और आधे रास्ते में दूसरा कहाँ ढूँढने जाऊँ ? इसलिए शर्त मान ली और ऐसे ही ‘हाँ… हूँ…..’ करता आया। हमको तो काम से मतलब था, कथा से नहीं।” . भक्त मजदूर ने सोचा कि कैसा अभागा है ! मुफ्त में सत्संग मिल रहा था और सुना नहीं ! . यह पापी मनुष्य की पहचान है। उसके मन में तरह-तरह के ख्याल आ रहे थे. . अचानक उसने सेठ की ओर देखा और गहरी साँस लेकर कहा:- “सेठ! कल शाम को सात बजे आप सदा के लिए इस दुनिया से विदा हो जाओगे। . अगर साढ़े सात बजे तक जीवित रहें तो मेरा सिर कटवा देना।” . जिस ओज से उसने यह बात कही, सुनकर सेठ काँपने लगा। . भक्त के पैर पकड़ लिए। भक्त ने कहा:- “सेठ! जब आप यमपुरी में जाएँगे तब आपके पाप और पुण्य का लेखा जोखा होगा, हिसाब देखा जाएगा। . आपके जीवन में पाप ज्यादा हैं, पुण्य कम हैं। अभी रास्ते में जो सत्संग सुना, थोड़ा बहुत उसका पुण्य भी होगा। . आपसे पूछा जायेगा कि कौन सा फल पहले भोगना है ? पाप का या पुण्य का ? . तो यमराज के आगे स्वीकार कर लेना कि पाप का फल भोगने को तैयार हूँ पर पुण्य का फल भोगना नहीं है, देखना है। . पुण्य का फल भोगने की इच्छा मत रखना। . मरकर सेठ पहुँचे यमपुरी में। चित्रगुप्तजी ने हिसाब पेश किया। . यमराज के पूछने पर सेठ ने कहा:- “मैं पुण्य का फल भोगना नहीं चाहता और पाप का फल भोगने से इन्कार नहीं करता। . कृपा करके बताइये कि सत्संग के पुण्य का फल क्या होता है ? मैं वह देखना चाहता हूँ।” . पुण्य का फल देखने की तो कोई व्यवस्था यमपुरी में नहीं थी। पाप- पुण्य के फल भुगताए जाते हैं, दिखाये नहीं जाते। . यमराज को कुछ समझ में नहीं आया। ऐसा मामला तो यमपुरी में पहली बार आया था। . यमराज उसे ले गये धर्मराज के पास। धर्मराज भी उलझन में पड़ गये। . चित्रगुप्त, यमराज और धर्मराज तीनों सेठ को ले गये। सृष्टि के आदि परमेश्वर के पास । . धर्मराज ने पूरा वर्णन किया। परमपिता मंद-मंद मुस्कुराने लगे। और तीनों से बोले:- “ठीक है. जाओ, अपना-अपना काम सँभालो।” . सेठ को सामने खड़ा रहने दिया। सेठ बोला:- “प्रभु ! मुझे सत्संग के पुण्य का फल भोगना नहीं है, अपितु देखना है।” . प्रभु बोले:- “चित्रगुप्त, यमराज और धर्मराज जैसे देव आदरसहित तुझे यहाँ ले आये और तू मुझे साक्षात देख रहा है, . इससे अधिक और क्या देखना है ?” . एक घड़ी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध। तुलसी सत्संग साध की, हरे कोटि अपराध।। . जो चार कदम चलकर के सत्संग में जाता है, तो यमराज की भी ताकत नहीं.. उसे हाथ लगाने की। . सत्संग-श्रवण की महिमा इतनी महान है. सत्संग सुनने से पाप-ताप कम हो जाते हैं। पाप करने की रूचि भी कम हो जाती है। बल बढ़ता है तथा कमजोरियां दूर होने लगती हैं,, ((((((( जय जय श्री राधे ))))))) ~~~~~~~~~~~~~~~~~

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