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🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🕉️ 🌹👉 *मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य उसके चेहरे, पहनावे, धन या बाहरी व्यक्तित्व में नहीं, बल्कि उसकी आत्मिक पवित्रता में होता है। पवित्र आत्मा वह है जिसके मन में स्वार्थ, छल, ईर्ष्या, घृणा और अहंकार कम होते हैं, तथा प्रेम, सत्य, दया, करुणा और शुभभावनाएँ अधिक होती हैं।* *ऐसे व्यक्ति के पास बैठकर ही शांति का अनुभव होता है। उसके शब्दों में मधुरता, व्यवहार में विनम्रता और कर्मों में सच्चाई दिखाई देती है। यही गुण उसे लोगों के बीच सम्मान और विश्वास दिलाते हैं। बाहरी सुंदरता समय के साथ बदल जाती है, लेकिन आत्मा की पवित्रता जीवनभर व्यक्ति के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाए रखती है।*🌹 *जिस प्रकार सीप के भीतर छिपा मोती उसकी सबसे बड़ी सुंदरता होता है, उसी प्रकार मनुष्य के भीतर की पवित्रता उसके व्यक्तित्व का अनमोल मोती है। यह आकर्षण आँखों से नहीं, बल्कि हृदय से महसूस किया जाता है।*🌹 🌹*यदि हम चाहते हैं कि लोग हमें केवल हमारे रूप या उपलब्धियों के कारण नहीं, बल्कि हमारे चरित्र के कारण याद रखें, तो सबसे पहले अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को पवित्र बनाना होगा। क्योंकि सच्चा आकर्षण शरीर का नहीं, आत्मा की पवित्रता का होता है।🌹* 🌹🌞आपका दिन मंगलमय हो।🌹 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

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