Seemma Valluvar
Seemma Valluvar Jan 4, 2022

जनक ने कहा – ज्ञान कैसे प्राप्त होता है ? मुक्ति कैसे होती है ? और वैराग्य कैसे प्राप्त होता है ? प्रभु ! यह मुझसे कहिये ।1। अष्टावक्र ने कहा – मुक्ति चाहता है तो विषयों को विष के समान छोड़ दे और क्षमा, दया, सरलता, सन्तोष और सत्य को अमृत के समान सेवन कर ।2। तू न पृथ्वी है, न जल है, न अग्नि है, न वायु है, न आकाश है । मुक्ति के लिए अपने को इन सबका साक्षी चैतन्यरूप जान ।3। यदि देह को अपने से अलग कर और चैतन्य में विश्राम कर स्थित है तो अभी ही सुखी, शान्त और बन्ध-मुक्त हो जाएगा ।4। तू ब्राह्मण आदि वर्ण नहीं है और न तू किसी आश्रम वाला है, न आँख आदि इन्द्रियों का विषय है । तू असंग, निराकार और विश्व का साक्षी है, ऐसा जानकर सुखी हो ।5। हे विभो ! धर्म और अधर्म, सुख और दुःख मन के हैं । तेरे लिए नहीं । तू न कर्ता है, न भोक्ता है । तू तो सर्वदा मुक्त ही है ।6। तू एक सबका द्रष्टा है और सदा ही मुक्त है । तेरा बन्धन यही है कि तू अपने को छोड़कर दूसरे को द्रष्टा देखता है ।7। ‘मैं कर्ता हूँ’, ऐसा अहंकाररूपी विशाल काले सर्प से दंशित हुआ तू, ‘ मैं कर्ता नहीं हूँ’, ऐसे विश्वास रूपी अमृत को पीकर सुखी हो ।8। ‘मैं एक विशुद्ध बोध हूँ’ ऐसी निश्चय रूपी अग्नि से गहन अज्ञान को जलाकर तू शोक रहित हुआ सुखी हो ।9। यहाँ यह विश्व रस्सी में सर्प के समान भासता है । यही आनन्द-परमानन्द रूपी बोध है । अतः तू सुखपूर्वक विचर ।10। मुक्ति का अभिमानी मुक्त है, और बद्ध का अभिमानी बद्ध है । यहाँ यह किवदन्ती सत्य ही है कि जैसी मति वैसी ही गति होती है ।11। आत्मा साक्षी है, व्यापक है, पूर्ण है, एक है, मुक्त है, चैतन्यस्वरूप है, क्रियारहित है, असंग है, निस्पृह है, शान्त है । यह भ्रम से संसारी जैसा भासता है ।12। ‘मैं अभासरूप हूँ’ ऐसे भ्रम को एवं बाहर-भीतर के भाव को छोड़कर तू कूटस्थ बोधरूप एवं अद्वैत, आत्मा का विचार कर ।13। हे पुत्र ! तू बहुत काल से देहाभिमान के पाश से बँधा हुआ है । उसी पाश को ‘मैं बोध हूँ’ इस ज्ञान की तलवार से काटकर तू सुखी हो ।14। तू असंग है, क्रिया रहित है, स्वयंप्रकाश है और निरञ्जन है । तेरा बन्धन यही है कि तू समाधि के लिए अनुष्ठान करता है ।15। यह संसार तुझमें व्याप्त है, तुझी में पिरोया है । यथार्थतः तू चैतन्यस्वरूप है । अतः क्षुद्रचित्त को मत प्राप्त हो ।16। तू निरपेक्ष, निर्विकार, स्वनिर्भर है । शान्ति और मुक्ति का स्थान है, अगाध बुद्धिरूप है, क्षोभ-शून्य है । अतः चैतन्यमात्र में निष्ठा वाला हो ।17। साकार को मिथ्या जान, निराकार को निश्चल जान । इस तत्व के उपदेश से संसार में पुनः उत्पत्ति नहीं होती ।18। जिस तरह दर्पण अपने में प्रतिबिम्बित रूप के भीतर और बाहर स्थित है । उसी प्रकार परमात्मा इस शरीर के भीतर और बाहर स्थित है ।19। जिस प्रकार सर्वव्यापी एक आकाश घट के भीतर और बाहर स्थित है, उसी तरह नित्य और निरन्तर ब्रह्म सब भूतों में स्थित है ।20। ध्यान और एकांत यानी, “एक” का भी अंत...🧘‍♂️मैंने भगवान से पूछा इन मानवता के दुश्मन जेहादियों का अंत क्यों नहीं होता।भगवान ने कहा तुम्हारी प्रार्थना व संकल्प में दम ही नहीं है।ध्यान व ओंकार का साथ तुम लोगों ने छोड़ जो दिया है। जय श्री राम 🙏🌺🌺🌺🌺🚩

जनक ने कहा – ज्ञान कैसे प्राप्त होता है ? मुक्ति कैसे होती है ? और वैराग्य कैसे प्राप्त होता है ? प्रभु ! यह मुझसे कहिये ।1।

अष्टावक्र ने कहा – मुक्ति चाहता है तो विषयों को विष के समान छोड़ दे और क्षमा, दया, सरलता, सन्तोष और सत्य को अमृत के समान सेवन कर ।2।

तू न पृथ्वी है, न जल है, न अग्नि है, न वायु है, न आकाश है । मुक्ति के लिए अपने को इन सबका साक्षी चैतन्यरूप जान ।3।

यदि देह को अपने से अलग कर और चैतन्य में विश्राम कर स्थित है तो अभी ही सुखी, शान्त और बन्ध-मुक्त हो जाएगा ।4।

तू ब्राह्मण आदि वर्ण नहीं है और न तू किसी आश्रम वाला है, न आँख आदि इन्द्रियों का विषय है । तू असंग, निराकार और विश्व का साक्षी है, ऐसा जानकर सुखी हो ।5।

हे विभो ! धर्म और अधर्म, सुख और दुःख मन के हैं । तेरे लिए नहीं । तू न कर्ता है, न भोक्ता है । तू तो सर्वदा मुक्त ही है ।6।

तू एक सबका द्रष्टा है और सदा ही मुक्त है । तेरा बन्धन यही है कि तू अपने को छोड़कर दूसरे को द्रष्टा देखता है ।7।

‘मैं कर्ता हूँ’, ऐसा अहंकाररूपी विशाल काले सर्प से दंशित हुआ तू, ‘ मैं कर्ता नहीं हूँ’, ऐसे विश्वास रूपी अमृत को पीकर सुखी हो ।8।

‘मैं एक विशुद्ध बोध हूँ’ ऐसी निश्चय रूपी अग्नि से गहन अज्ञान को जलाकर तू शोक रहित हुआ सुखी हो ।9।

यहाँ यह विश्व रस्सी में सर्प के समान भासता है । यही आनन्द-परमानन्द रूपी बोध है । अतः तू सुखपूर्वक विचर ।10।

मुक्ति का अभिमानी मुक्त है, और बद्ध का अभिमानी बद्ध है । यहाँ यह किवदन्ती सत्य ही है कि जैसी मति वैसी ही गति होती है ।11।

आत्मा साक्षी है, व्यापक है, पूर्ण है, एक है, मुक्त है, चैतन्यस्वरूप है, क्रियारहित है, असंग है, निस्पृह है, शान्त है । यह भ्रम से संसारी जैसा भासता है ।12।

‘मैं अभासरूप हूँ’ ऐसे भ्रम को एवं बाहर-भीतर के भाव को छोड़कर तू कूटस्थ बोधरूप एवं अद्वैत, आत्मा का विचार कर ।13।

हे पुत्र ! तू बहुत काल से देहाभिमान के पाश से बँधा हुआ है । उसी पाश को ‘मैं बोध हूँ’ इस ज्ञान की तलवार से काटकर तू सुखी हो ।14।

तू असंग है, क्रिया रहित है, स्वयंप्रकाश है और निरञ्जन है । तेरा बन्धन यही है कि तू समाधि के लिए अनुष्ठान करता है ।15।

यह संसार तुझमें व्याप्त है, तुझी में पिरोया है । यथार्थतः तू चैतन्यस्वरूप है । अतः क्षुद्रचित्त को मत प्राप्त हो ।16।

तू निरपेक्ष, निर्विकार, स्वनिर्भर है । शान्ति और मुक्ति का स्थान है, अगाध बुद्धिरूप है, क्षोभ-शून्य है । अतः चैतन्यमात्र में निष्ठा वाला हो ।17।

साकार को मिथ्या जान, निराकार को निश्चल जान । इस तत्व के उपदेश से संसार में पुनः उत्पत्ति नहीं होती ।18।

जिस तरह दर्पण अपने में प्रतिबिम्बित रूप के भीतर और बाहर स्थित है । उसी प्रकार परमात्मा इस शरीर के भीतर और बाहर स्थित है ।19।

जिस प्रकार सर्वव्यापी एक आकाश घट के भीतर और बाहर स्थित है, उसी तरह नित्य और निरन्तर ब्रह्म सब भूतों में स्थित है ।20।

ध्यान और एकांत यानी, “एक” का भी अंत...🧘‍♂️मैंने भगवान से पूछा इन मानवता के दुश्मन जेहादियों का अंत क्यों नहीं होता।भगवान ने कहा तुम्हारी प्रार्थना व संकल्प में दम ही नहीं है।ध्यान व ओंकार का साथ तुम लोगों ने छोड़ जो दिया है।

जय श्री राम 🙏🌺🌺🌺🌺🚩

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कामेंट्स

Runa Sinha Jan 4, 2022
Jai Shri Ram 🌹🙏🌹 Good morning. Bhagwan Shri Ram aur unke param bhakta Hanuman ji ki kripa aap sapariwar par bani rahe,bahan💖 🙏

Anup Kumar Sinha Jan 4, 2022
जय श्री राम 🙏🙏 शुभ दोपहर वंदन, बहना । भगवान राम के परम भक्त, मारुतिनंदन हनुमानजी हमेशा आप पर अपनी कृपा बनाये रखें । आपका दिन शुभ हो 🙏🌻

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 Jan 4, 2022
जय श्री राम जी जय हनुमान जी शुभ दोपहर नमस्कार मेरी प्यारी बहना जी 🙏🌹🙏राम भक्त हनुमानजी आप के सभी कष्टों को दूर करे आप को सुख और शांति प्रदान करे आप का हर पल मंगलमय हो सुखमय हो मेरी प्यारी बहना जी 🙏🙌🌿🌾🌿🌾🌿🌾🌿

kamala Maheshwari Jan 4, 2022
जय श्री राम जय हनुमान जी जय बाकैविहारी जय शनिदेव जी जयकानहाकी कृपादृष्टि सदैव बनी रहे जय श्री कृष्णा जी जय श्रीराम♦️💠🚩

GOVIND CHOUHAN Jan 4, 2022
Jai Shree Ram 🌷 Jai Siyaram 🌷 Jai Jai Jai Bajarang Bali 🌷🙏🙏 Shubh Sandhiya Vandan Jiii 🙏🙏

‼️kamlesh Goyal‼️ Jan 4, 2022
जय श्री राम बहन राधे-राधे जी शुभ संध्या वंदन जी🥀🙏🥀

Anup Kumar Sinha Jan 4, 2022
जय श्री राधे कृष्ण 🙏🙏 शुभ रात्रि वंदन, बहना 🙏🍁

Anil Jan 4, 2022
good night 🌷🌺🌺🌺🌷

Runa Sinha Jan 4, 2022
💞🍭Jai Shri Krishna 🍭💞 💞🍭Radhe Radhe🍭💞 💞🍭Good night bahan🙏🍭💞

GOVIND CHOUHAN Jan 4, 2022
Jai Shree Ram 🌷 Jai Siyaram 🌷 Jai Jai Jai Bajarang Bali 🌷🙏🙏 Shubh Raatri Vandan Jiii 🙏🙏

Ravi Kumar Taneja Jan 4, 2022
🔔🙏🙏🕉🙏🙏🔔 *🌹राम राम जी 🌹* *नमस्कार, शुभ रात्री स्नेह वंदन जी,आपका जीवन मंगलमय हो🙏💐🙏* *🏹दूसरों की गलतीयों से सीखने में ही बुद्धिमानी है क्योंकि ज़िंदगी इतनी बड़ी नहीं होती कि सारी गलतियां खुद करके सीखा जाए!* *🏹हमेशा अपनी छोटी-छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इंसान पहाड़ों से नहीं छोटे-छोटे पत्थरों से ही ठोकर खाता है!!!* जय जय जय बजरंग बली 🙏🌺🙏 जय श्री राम 🙏💐🙏 प्रभु श्रीराम आपको और आपके परिवार को शांति, सुख-समृद्धि, मान-सन्मान, यश-कीर्ति, वैभव-ऐश्वर्य प्रदान करें, प्रभु श्रीराम जी से हमारी यही प्रार्थना है !!!🙏🌹🙏 *‼️सदैव प्रसन्न रहिये!* *जो प्राप्त है,पर्याप्त है‼️* 🕉🦚🦢🙏🌹🙏🦢🦚🕉

Rajesh Rajesh Jan 5, 2022
OM GAN GANPATAYE NAMAH SHUBH PRABHAT BEHENA GANPATTI BAPPA KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGAL MAY HO AAP OR AAP KA PARIVAR HAMESA KHUS RAHE SWATH BEHENA

🥀 Suresh Kumar 🥀 Jan 5, 2022
राधे राधे जी 🙏 शुभ प्रभात वंदन मेरी बहन। 🍎🍎🌹🙏🌹🍎🍎

SANTOSH YADAV Jan 5, 2022
जय श्री गणेश शुभ बुधवार वंदन जी

Anup Kumar Sinha Jan 5, 2022
जय श्री गणेश 🙏🙏 शुभ संध्या वंदन, बहना । प्रथम पूज्य गौरीनंदन भगवान गणेश आप सपरिवार पर प्रसन्न रहें और आपकी हर मनोकामना पूर्ण करें 🙏💐

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Jan 5, 2022
🌹शुभरात्रि वंदन दीदी🌹 👏आप सभी पर भगवान श्री गणेश जी की कृपा निरंतर बनी रहे 💐 🎎आपका रात्रि मंगलमय हो 🎎 🙏🌹 नमस्ते जी 🌹🙏

RAKESH SHARMA Jan 6, 2022
HARDIK SHUBH KAMANAYE SE MANGALMAY SUPRABHATAM VANDAN AVM NAMAN 🌹🙏🌹🙏🌹🙏

RAKESH SHARMA Jan 6, 2022
NARAYAN NARAYAN HARI HARE AASHIRWAD KRP SE SADEV AANANDMAY SWASTH PRAGATISHEEL RAHE 🌹🙏🌹🙏🌹🙏

pandey ji Jan 22, 2022

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prakash patel Jan 22, 2022

🏹 રામાયણ🏹 અરણ્ય-કાંડ ✍️ ૨૩ ભક્તિમાર્ગ બધી ઈન્દ્રિયોને ઈશ્વરની સેવામાં લગાવવાનું કહે છે, આંખ પ્રભુ માટે,કાન પ્રભુ માટે,આખું શરીર પ્રભુ માટે. આંખથી પ્રભુ ને બધે જોવાના,કાનથી પ્રભુ ને બધે સાંભળવાના,હાથ-પગ થી બધે પ્રભુની સેવા કરવાની.આમ બધે જ પ્રભુ નું દર્શન થાય તે જ પ્રભુ નું સાચું ધ્યાન.યોગીઓ આંખો મીંચીને બેસે છે,તો યે ઘણી વખત પ્રભુને નથી પામતા,પણ ગોપીઓ ઉઘાડી આંખે પ્રભુનાં સર્વ જગ્યાએ દર્શન કરતી હતી. બધે પ્રભુનાં દર્શન થાય તે જ જ્ઞાન.તે જ ધ્યાન.,તે જ સમાધિ. બળ-જબરી થી ઇન્દ્રિયો ના દરવાજા બંધ કરવાથી તે બંધ થતા નથી, તે કદીક ઓચિંતા ઉઘડી જાય છે,ને ભયાનક વંટોળ અંદર ધસી આવે છે. વિશ્વામિત્ર નું મેનકા થી પતન એ એનું ઉદાહરણ છે. તેથી ભક્તો ઇન્દ્રિયોના દરવાજા બંધ કરવા કરતાં એ દરવાજાઓ પર પ્રભુ ને પધરાવવાનું પસંદ કરે છે. દશે ઇન્દ્રિયો ને પ્રભુ તરફ વાળે છે અને મન-બુદ્ધિ થી પ્રભુ નું સ્મરણ કરે છે, ભક્તિ નો સહુથી સલામત માર્ગ આ છે. સીતાજી,શ્રીરામનું ધ્યાન કરે છે અને શ્રીરામ એ સીતાજીનું ધ્યાન કરે છે, ભક્ત ભગવાન નું અને ભગવાન ભક્ત નું ધ્યાન કરે છે. એકવાર નારદજી વૈકુંઠ-લોકમાં આવ્યા,તો તેમણે ભગવાન ને ધ્યાનમાં બેઠેલા જોયા. નારદજી ને નવાઈ લાગી,તેમણે પ્રભુ ને પૂછ્યું-પ્રભુ,તમે કોનું ધ્યાન કરો છો? ત્યારે ભગવાન કહે કે-હું મારા ભક્તોનું ધ્યાન કરું છું. નારદજી કહે –શું ભક્તો તમારાથી શ્રેષ્ઠ છે? ભગવાન કહે- હા,છે જ. નારદ કહે –માન્યામાં આવતું નથી. ભગવાન કહે –તો હું સાબિત કરી બતાડું.બોલો,જગતમાં મોટામાં મોટું કોણ? નારદ કહે-પૃથ્વી. ભગવાન કહે -પૃથ્વી તો શેષનાગના ફણા પર રહેલી છે,અને શેષનાગ નો મહાદેવજી ના હાથનું કડું છે,તો, શિવજી –સમેત આખો કૈલાશ રાવણે ઉઠાવેલો,અને એ જ રાવણ ને બગલમાં રાખી ને વાલી સંધ્યા કરતો હતો. તો, એ વાલી ને રામે એક જ બાણથી મારેલો. ત્યારે નારદે કહ્યું-ત્યારે તો આપ જ મોટા,હું કહેતો હતો તે સાચું જ હતું. ભગવાન કહે છે કે-હું શેનો મોટો? મારો ભક્ત મને એની હૈયા ની દાબડીમાં પુરી રાખે છે. તુલસીદાસજી એ બરાબર જ કહ્યું છે કે-રામ સે અધિક રામ સર દાસા.રામનો દાસ રામથી ચડી જાય. મહાત્માઓ કહે છે કે-માટે બીજું કશું બનવું છોડીને રામના ભક્ત બનો.તે ઉંચામાં ઉંચી પદવી છે. વારંવાર મન ને રામ-સ્વ-રૂપ માં લીન કરો.ધ્યાન માં તન્મયતા થતાં દેહભાન જશે,અને જગતનું ભાન ભુલાશે.જેમ જેમ સંસાર નું વિસ્મરણ થતું જશે તેમ તેમ આનંદ ની માત્ર વધતી જશે ને છેલ્લે, આનંદ-આનંદ-પરમાનંદ થઇ રહેશે. એક ખાંડ ની પૂતળી હતી,તે સાગરનું ઊંડાણ માપવા ગઈ,ગઈ તે ગઈ,પછી આવી જ નહિ, પોતે જ સાગર થઇ ગઈ. મન આ ખાંડ ની પૂતળી જેવું છે,તે જે ઈશ્વરમાં મળી ગયું,તો પછી જુદું થઇ શકતું નથી. જીવનો પરમાત્મા માં લય થઇ જાય છે.જીવ –શિવ એક થઇ જાય છે. પરમાત્મા દરિયા જેવા વિશાળ છે.જ્ઞાની પુરુષો પરમાત્મા ના રૂપ સાથે એવા મળી જાય છે કે- તે પછી કહી શકતા કે –હું જાણું છું. તે તો કહે છે કે-હું જાણું છું કે હું જાણતો નથી. ધ્યાન કરનારનું “હું-પણું” ઈશ્વરમાં મળી જાય છે.આ અદ્વૈત છે. પછી જીવ નું જીવ-પણું રહેતું નથી,જીવ-ભાવ એ પરમાત્મ-ભાવ બની જાય છે. ઈયર ભમરી બની જાય છે,ધ્યાન કરનાર જે સ્વરૂપ નું ધ્યાન કરે તે સ્વરૂપ ની શક્તિ તેનામાં આવે છે. પરમાત્મા સાથે તેનું અનુસંધાન થતાં પરમાત્મા ની કૃપા તેના પર વરસે છે. બંધ નો દરવાજો ખૂલી જતાં જેમ પાણી નો ધોધ વહે છે તેમ,પરમાત્મા ની કૃપા તેના પર વરસે છે. તુલસીદાસજી કહે છે કે-જેના પર પ્રભુ કૃપા કરે છે,તે જ પ્રભુને જાણી શકે છે,અને પ્રભુ ને જાણ્યા પછી પોતે પણ પ્રભુ જ બની જાય છે.એના “હું” નો “તું” થઇ જાય છે. https://m.facebook.com/groups/367351564605027/permalink/641945637145617/ 🏹 ॐ શ્રી રામ જય રામ જય જય રામ 🙏🏼🌹🌹જય શ્રી કૃષ્ણ 🙏

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Ramesh soni Jan 21, 2022

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Ashok Sharma Jan 22, 2022

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