SONU NAREDA
SONU NAREDA Dec 7, 2021

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Meena Sharma Jan 24, 2022

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Meena Sharma Jan 24, 2022

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Meena Sharma Jan 24, 2022

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सभी श्री राम भक्तों को एवं सभी हनुमान भक्तों को शुभ मंगलवार की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं समस्त दोस्तों मित्रों साथियों की तरफ से आज आपको शुभ हो मंगलवार की2️⃣5️⃣➖0️⃣1️⃣➖2️⃣0️⃣2️⃣2️⃣➖ शुभ तिथि 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 श्रीरामचंद्र कृपाल भजमन 🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄🌄 श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम।। कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरमा पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम।। भजु दीन बंधू दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम।। रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम।। सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभुषणं। आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर धुषणं।। इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम। मम हृदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम।। ।।इति संपूर्णम्।। प्रस्तुतकर्ता ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़

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Seemma Valluvar Jan 25, 2022

*अष्टावक्र—गीता का जन्म* #जनक ने धर्म सभा बुलाई थी। उसमें बड़े बड़े पंडित आए। उसमें अष्टावक्र के पिता भी गए। *अष्टावक्र आठ जगह से टेढ़ा था, इसलिए तो नाम पड़ा अष्टावक्र।* दोपहर हो गई। अष्टावक्र की मां ने कहा कि तेरे पिता लौटे नहीं, भूख लगती होगी, तू जाकर उनको बुला ला। *अष्टावक्र गया। धर्म सभा चल रही थी, विवाद चल रहा था। अष्टावक्र अंदर गया। उसको आठ जगह से टेढ़ा देख कर सारे पंडितजन हंसने लगे।* वह तो कार्टून मालूम हो रहा था। इतनी जगह से तिरछा आदमी देखा नहीं था। एक टांग इधर जा रही है, दूसरी टांग उधर जा रही है, एक हाथ इधर जा रहा है, दूसरा हाथ उधर जा रहा है, एक आंख इधर देख रही है, दूसरी आंख उधर देख रही है। उसको जिसने देखा वही हंसने लगा कि यह तो एक चमत्कार है! सब को हंसते देख कर.. .यहां तक कि जनक को भी हंसी आ गई। मगर एकदम से धक्का लगा, क्योंकि अष्टावक्र बीच दरबार में खड़ा होकर इतने जोर से खिलखिलाया कि जितने लोग हंस रहे थे सब एक सकते में आ गए और चुप हो गए। जनक ने पूछा कि मेरे भाई, और सब क्यों हंस रहे थे, वह तो मुझे मालूम है, क्योंकि मैं खुद भी हंसा था, मगर तुम क्यों हंसे? उसने कहा मैं इसलिए हंसा कि ये चमार बैठ कर यहां क्या कर रहे हैं! *अष्टावक्र ने चमार की ठीक परिभाषा की, क्योंकि इनको चमड़ी ही दिखाई पड़ती है। मेरा शरीर आठ जगह से टेढ़ा है, इनको शरीर ही दिखाई पड़ता है। ये सब चमार इकट्ठे कर लिए हैं और इनसे धर्म सभा हो रही है और ब्रह्मज्ञान की चर्चा हो रही है? इनको अभी आत्मा दिखाई नहीं पड़ती। है कोई यहां जिसको मेरी आत्मा दिखाई पड़ती हो? क्योंकि आत्मा तो एक भी जगह से टेढ़ी नहीं है।* वहां एक भी नहीं था। कहते हैं, जनक ने उठ कर अष्टावक्र के पैर छुए। और कहा कि आप मुझे उपदेश दें। इस तरह अष्टावक्र—गीता का जन्म हुआ। और अष्टावक्र गीता भारत के ग्रंथों में अद्वितीय है। श्रीमद्भगवद्गीता से भी एक दर्जा ऊपर! इसलिए *श्रीमद्भगवद्गीता को मैंने गीता कहा है और अष्टावक्र गीता को महागीता कहा है।* उसका एक—एक वचन हीरों से भी तौला जाए, हजारों हीरों से भी तौला जाए, तो भी पलड़ा उस वचन का ही भारी रहेगा, हीरों का भारी नहीं हो सकता। सारे सूत्र ध्यान के हैं और समाधि के हैं। *तो तुम समझ लेना, जब तक तुम्हें शरीर ही दिखाई पड़ता है अपना और दूसरों का तब तक तुम चमार ही हो। मेरे हिसाब से सभी शूद्र पैदा होते हैं, कभी—कभी कोई ब्राह्मण हो पाता है— कोई बुद्ध, कोई कृष्ण, कोई महावीर, कोई रैदास, कोई फरीद, कोई नानक। कभी कभी कोई ब्राह्मण हो पाता है; नहीं तो लोग शूद्र ही पैदा होते हैं, शूद्र ही मर जाते हैं। तो यह सूत्र तुम्हारे संबंध में भी है, तुम्हारे ही संबंध में है!* जय श्री राम 🙏🌺🌺🌺🌺🚩

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