mahesh shukla
mahesh shukla Nov 28, 2021

ओम सूर्य देवाय नमः

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pushpa gaur Jan 21, 2022

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SUMAN SINHA Jan 20, 2022

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Ashok Kumar Jan 20, 2022

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Ashok Raghav Jan 20, 2022

भगवान विष्णु जी और माता लक्ष्मी जी एक बार भगवान विष्णु जी शेषनाग पर बेठे बेठे बोर होगये, ओर उन्होने धरती पर घुमने का विचार मन मै किया, वेसे भी कई साल बीत गये थे धरती पर आये, ओर वह अपनी यात्रा की तेयारी मे लग गये, स्वामी को तेयार होता देख कर लक्ष्मी मां ने पुछा !!आज सुबह सुबह कहा जाने कि तेयारी हो रही है?? विष्णु जी ने कहा हे लक्ष्मी मै धरती लोक पर घुमने जा रहा हुं, तो कुछ सोच कर लक्ष्मी मां ने कहा ! हे देव क्या मै भी आप के साथ चल सकती हुं???? भगवान विष्णु ने दो पल सोचा फ़िर कहा एक शर्त पर, तुम मेरे साथ चल सकती हो तुम धरती पर पहुच कर उत्तर दिशा की ओर बिलकुल मत देखना, इस के साथ ही माता लक्ष्मी ने हां कह के अपनी मनवाली। ओर सुबह सुबह मां लक्ष्मी ओर भगवान विष्णु धरती पर पहुच गये, अभी सुर्य देवता निकल रहे थे, रात बरसात हो कर हटी थी, चारो ओर हरियाली ही हरियाली थी, उस समय चारो ओर बहुत शान्ति थी, ओर धरती बहुत ही सुन्दर दिख रही थी, ओर मां लक्ष्मी मन्त्र मुग्ध हो कर धरती को देख रही थी, ओर भुल गई कि पति को क्या वचन दे कर आई है?ओर चारो ओर देखती हुयी कब उत्तर दिशा की ओर देखने लगी पता ही नही चला। उत्तर दिशा मै मां लक्ष्मी को एक बहुत ही सुन्दर बगीचा नजर आया, ओर उस तरफ़ से भीनी भीनी खुशबु आ रही थी,ओर बहुत ही सुन्दर सुन्दर फ़ुल खिले थे,यह एक फ़ुलो का खेत था, ओर मां लक्ष्मी बिना सोचे समझे उस खेत मे गई ओर एक सुंदर सा फ़ुल तोड ल *...अधिक पढ़ें* *नमस्ते 🙏 मुझे भारतीय धार्मिक हिंदी पौरणिक कहनिया पर हिन्दू धर्म की विभिन्न साहित्यिक पुस्तकें जैसे की रामायण 🏹, महाभारत, वेद, पुराण कहनिया, 📚 व सभी प्रकार की व्रत कथा, तेनालीराम, अकबर-बीरबल आदि का विशाल संग्रह मिला है आप भी जरूर इसे पढ़ें और परिवार जनों 👩‍👩‍👧‍👧 और दोस्तों को शेयर करें 👇 तुरंत डाउनलोड करें* https://play.google.com/store/apps/details?id=com.indianmusicfactory.hindipauranikkathadharmikspiritualkatharamayanmahabharatvishnu

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Rajput Dinesh singh Jan 20, 2022

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. माघ माहात्म्य अध्याय - 05 दत्तात्रेय जी कहते हैं कि हे राजन! एक प्राचीन इतिहास कहता हूँ। भृगुवंश में ऋषिका नाम की एक ब्राह्मणी थी जो बाल्यकाल में ही विधवा हो गई थी। वह रेवा नदी के किनारे विन्ध्याचल पर्वत के नीचे तपस्या करने लगी। वह जितेन्द्रिय, सत्यवक्ता, सुशील, दानशीलता तथा तप करके देह को सुखाने वाली थी। वह अग्नि में आहुति देकर उच्छवृत्ति द्वारा छठे काल में भोजन करती थी। वह वल्कल धारण करती थी और संतोष से अपना जीवन व्यतीत करती थी। उसने रेवा और कपिल नदी के संगम में साठ वर्ष तक माघ स्नान किया और फिर वहीं पर ही मृत्यु को प्राप्त हो गई। माघ स्नान के फल से वह दिव्य चार हजार वर्ष तक विष्णु लोक में वास करके सुंद और उपसुंद दैत्यों का नाश करने के लिए ब्रह्मा द्वारा तिलोत्तमा नाम की अप्सरा के रूप में ब्रह्मलोक में उत्पन्न हुई। वह अत्यन्त रुपवती, गान विद्या में अति प्रवीण तथा मुकुट कुंडल से शोभायमान थी। उसका रूप, यौवन और सौंदर्य देखकर ब्रह्मा भी चकित हो गये। वह तिलोत्तमा, रेवा नदी के पवित्र जल में स्नान करके वन में बैठी थी तब सुंद व उपसुंद के सैनिकों ने चन्द्रमा के समान उस रुपवती को देखकर अपने राजा सुंद और उपसुंद से उसके रुप की शोभा का वर्णन किया और कहने लगे कि कामदेव को लज्जित करने वाली ऎसी परम सुन्दरी स्त्री हमने कभी नहीं देखी, आप भी चलकर देखें तब वह दोनों मदिरा के पात्र रखकर वहाँ पर आए जहाँ पर वह सुन्दरी बैठी हुई थी और मदिरा के पान विह्वल होकर काम-क्रीड़ा से पीड़ित हुए और दोनों ही आपस में उस स्त्री-रत्न को प्राप्त करने के लिए विवादग्रस्त हुए और फिर आपस में युद्ध करते हुए वहीं समाप्त हो गए। उन दोनों का मरा हुआ देखकर उनके सैनिकों ने बड़ा कोलाहल मचाया और तब तिलोत्तमा कालरात्रि के समान उनको पर्वत से गिराती हुई दसों दिशाओं को प्रकाशमान करती हुई आकाश में चली गई और देव कार्य सिद्ध करके ब्रह्मा के सामने आई तो ब्रह्माजी ने प्रसन्नता से कहा कि हे चन्द्रवती मैंने तुमको सूर्य के रथ पर स्थान दिया। जब तक आकाश में सूर्य स्थित है नाना प्रकार के भोगों को भोगो। सो हे राजन! वह ब्राह्मणी अब भी सूर्य के रथ पर माघ मास स्नान के उत्तम भोगों को भोग रही है इसलिए श्रद्धावान पुरुषों को उत्तम गति पाने के लिए यत्न के साथ माघ मास में विधिपूर्वक स्नान करना चाहिए ----------:::×:::---------- " जय जय श्री हरि " " कुमार रौनक कश्यप " ********************************************

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Singh A K Jan 19, 2022

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