Neha Sharma
Neha Sharma Sep 21, 2021

!!🥀!! सुविचार !!🥀!!..."जो व्यक्ति दूसरों की धन-सम्पति, सौंदर्य, पराक्रम, उच्च कुल, सुख, सौभाग्य और सम्मान से ईर्ष्या व द्वेष करता है वह असाध्य रोगी है। उसका यह रोग कभी ठीक नहीं होता।🌺🙏*जय श्री राधेकृष्णा🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏🌺 . "पितृपक्ष में करें गीता के सातवें अध्याय का पाठ" "सातवें अध्याय का माहात्म्य" *भगवान शिव कहते हैं–'पार्वती ! अब मैं सातवें अध्याय का माहात्म्य बतलाता हूँ, जिसे सुनकर कानों में अमृत-राशि भर जाती है। *पाटलिपुत्र नामक एक दुर्गम नगर है, जिसका गोपुर (द्वार) बहुत ही ऊँचा है। उस नगर में शंकुकर्ण नामक एक ब्राह्मण रहता था, उसने वैश्य-वृत्ति का आश्रय लेकर बहुत धन कमाया, किंतु न तो कभी पितरों का तर्पण किया और न देवताओं का पूजन ही। वह धनोपार्जन में तत्पर होकर राजाओं को ही भोज दिया करता था। *एक समय की बात है। उस ब्राह्मण ने अपना चौथा विवाह करने के लिए पुत्रों और बन्धुओं के साथ यात्रा की। मार्ग में आधी रात के समय जब वह सो रहा था, तब एक सर्प ने कहीं से आकर उसकी बाँह में काट लिया। उसके काटते ही ऐसी अवस्था हो गई कि मणि, मंत्र और औषधि आदि से भी उसके शरीर की रक्षा असाध्य जान पड़ी। तत्पश्चात कुछ ही क्षणों में उसके प्राण पखेरु उड़ गये और वह प्रेत बना। फिर बहुत समय के बाद वह प्रेत सर्पयोनि में उत्पन्न हुआ। उसका चित्त धन की वासना में बँधा था। उसने पूर्व वृत्तान्त को स्मरण करके सोचा–'मैंने घर के बाहर करोड़ों की संख्या में अपना जो धन गाड़ रखा है उससे इन पुत्रों को वंचित करके स्वयं ही उसकी रक्षा करूँगा।' *साँप की योनि से पीड़ित होकर ब्राह्मण ने एक दिन स्वप्न में अपने पुत्रों के समक्ष आकर अपना मनोभाव बताया। तब उसके पुत्रों ने सवेरे उठकर बड़े विस्मय के साथ एक-दूसरे से स्वप्न की बातें कही। उनमें से मंझला पुत्र कुदाल हाथ में लिए घर से निकला और जहाँ उसके पिता सर्पयोनि धारण करके रहते थे, उस स्थान पर गया। यद्यपि उसे धन के स्थान का ठीक-ठीक पता नहीं था तो भी उसने चिह्नों से उसका ठीक निश्चय कर लिया और लोभबुद्धि से वहाँ पहुँचकर बाँबी को खोदना आरम्भ किया। तब उस बाँबी से बड़ा भयानक साँप प्रकट हुआ और बोला–'ओ मूढ़ ! तू कौन है ? किसलिए आया है ? यह बिल क्यों खोद रहा है ? किसने तुझे भेजा है ? ये सारी बातें मेरे सामने बता।' *पुत्र बोला–'मैं आपका पुत्र हूँ। मेरा नाम शिव है। मैं रात्रि में देखे हुए स्वप्न से विस्मित होकर यहाँ का सुवर्ण लेने के कौतूहल से आया हूँ।' *पुत्र की यह वाणी सुनकर वह साँप हँसता हुआ उच्च स्वर से इस प्रकार स्पष्ट वचन बोला–'यदि तू मेरा पुत्र है तो मुझे शीघ्र ही बन्धन से मुक्त कर। मैं अपने पूर्वजन्म के गाड़े हुए धन के ही लिए सर्पयोनि में उत्पन्न हुआ हूँ।' *पुत्र ने पूछा–'पिता जी! आपकी मुक्ति कैसे होगी? इसका उपाय मुझे बताईये, क्योंकि मैं इस रात में सब लोगों को छोड़कर आपके पास आया हूँ।' *पिता बोला–'बेटा ! गीता के अमृतमय सप्तम अध्याय को छोड़कर मुझे मुक्त करने में तीर्थ, दान, तप और यज्ञ भी सर्वथा समर्थ नहीं हैं। केवल गीता का सातवाँ अध्याय ही प्राणियों के जरा मृत्यु आदि दुःखों को दूर करने वाला है। *पुत्र ! मेरे श्राद्ध के दिन गीता के सप्तम अध्याय का पाठ करने वाले ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक भोजन कराओ। इससे निःसन्देह मेरी मुक्ति हो जायेगी। वत्स ! अपनी शक्ति के अनुसार पूर्ण श्रद्धा के साथ वेदविद्या में प्रवीण अन्य ब्राह्मणों को भी भोजन कराना।' *सर्पयोनि में पड़े हुए पिता के ये वचन सुनकर सभी पुत्रों ने उसकी आज्ञानुसार तथा उससे भी अधिक किया। तब शंकुकर्ण ने अपने सर्पशरीर को त्यागकर दिव्य देह धारण किया और सारा धन पुत्रों के अधीन कर दिया। पिता ने करोड़ों की संख्या में जो धन उनमें बाँट दिया था, उससे वे पुत्र बहुत प्रसन्न हुए। उनकी बुद्धि धर्म में लगी हुई थी, इसलिए उन्होंने बावली, कुआँ, पोखरा, यज्ञ तथा देवमंदिर के लिए उस धन का उपयोग किया और अन्नशाला भी बनवायी। तत्पश्चात सातवें अध्याय का सदा जप करते हुए उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया। *हे पार्वती ! यह तुम्हें सातवें अध्याय का माहात्म्य बतलाया, जिसके श्रवणमात्र से मानव सब पातकों से मुक्त हो जाता है।' ~~~०~~~ "जय जय श्री राधेकृष्णा" 🌺🙏🌺🙏🌺🙏🌺 *************************************************

!!🥀!! सुविचार !!🥀!!..."जो व्यक्ति दूसरों की धन-सम्पति, सौंदर्य, पराक्रम, उच्च कुल, सुख, सौभाग्य और सम्मान से ईर्ष्या व द्वेष करता है वह असाध्य रोगी है। उसका यह रोग कभी ठीक नहीं होता।🌺🙏*जय श्री राधेकृष्णा🙏*शुभ प्रभात् नमन*🙏🌺
.      "पितृपक्ष में करें गीता के सातवें अध्याय का पाठ"
                    "सातवें अध्याय का माहात्म्य"

          *भगवान शिव कहते हैं–'पार्वती ! अब मैं सातवें अध्याय का माहात्म्य बतलाता हूँ, जिसे सुनकर कानों में अमृत-राशि भर जाती है। 
          *पाटलिपुत्र नामक एक दुर्गम नगर है, जिसका गोपुर (द्वार) बहुत ही ऊँचा है। उस नगर में शंकुकर्ण नामक एक ब्राह्मण रहता था, उसने वैश्य-वृत्ति का आश्रय लेकर बहुत धन कमाया, किंतु न तो कभी पितरों का तर्पण किया और न देवताओं का पूजन ही। वह धनोपार्जन में तत्पर होकर राजाओं को ही भोज दिया करता था।
          *एक समय की बात है। उस ब्राह्मण ने अपना चौथा विवाह करने के लिए पुत्रों और बन्धुओं के साथ यात्रा की। मार्ग में आधी रात के समय जब वह सो रहा था, तब एक सर्प ने कहीं से आकर उसकी बाँह में काट लिया। उसके काटते ही ऐसी अवस्था हो गई कि मणि, मंत्र और औषधि आदि से भी उसके शरीर की रक्षा असाध्य जान पड़ी। तत्पश्चात कुछ ही क्षणों में उसके प्राण पखेरु उड़ गये और वह प्रेत बना। फिर बहुत समय के बाद वह प्रेत सर्पयोनि में उत्पन्न हुआ। उसका चित्त धन की वासना में बँधा था। उसने पूर्व वृत्तान्त को स्मरण करके सोचा–'मैंने घर के बाहर करोड़ों की संख्या में अपना जो धन गाड़ रखा है उससे इन पुत्रों को वंचित करके स्वयं ही उसकी रक्षा करूँगा।'
          *साँप की योनि से पीड़ित होकर ब्राह्मण ने एक दिन स्वप्न में अपने पुत्रों के समक्ष आकर अपना मनोभाव बताया। तब उसके पुत्रों ने सवेरे उठकर बड़े विस्मय के साथ एक-दूसरे से स्वप्न की बातें कही। उनमें से मंझला पुत्र कुदाल हाथ में लिए घर से निकला और जहाँ उसके पिता सर्पयोनि धारण करके रहते थे, उस स्थान पर गया। यद्यपि उसे धन के स्थान का ठीक-ठीक पता नहीं था तो भी उसने चिह्नों से उसका ठीक निश्चय कर लिया और लोभबुद्धि से वहाँ पहुँचकर बाँबी को खोदना आरम्भ किया। तब उस बाँबी से बड़ा भयानक साँप प्रकट हुआ और बोला–'ओ मूढ़ ! तू कौन है ? किसलिए आया है ? यह बिल क्यों खोद रहा है ? किसने तुझे भेजा है ? ये सारी बातें मेरे सामने बता।'
          *पुत्र बोला–'मैं आपका पुत्र हूँ। मेरा नाम शिव है। मैं रात्रि में देखे हुए स्वप्न से विस्मित होकर यहाँ का सुवर्ण लेने के कौतूहल से आया हूँ।'
          *पुत्र की यह वाणी सुनकर वह साँप हँसता हुआ उच्च स्वर से इस प्रकार स्पष्ट वचन बोला–'यदि तू मेरा पुत्र है तो मुझे शीघ्र ही बन्धन से मुक्त कर। मैं अपने पूर्वजन्म के गाड़े हुए धन के ही लिए सर्पयोनि में उत्पन्न हुआ हूँ।'
          *पुत्र ने पूछा–'पिता जी! आपकी मुक्ति कैसे होगी? इसका उपाय मुझे बताईये, क्योंकि मैं इस रात में सब लोगों को छोड़कर आपके पास आया हूँ।'
          *पिता बोला–'बेटा ! गीता के अमृतमय सप्तम अध्याय को छोड़कर मुझे मुक्त करने में तीर्थ, दान, तप और यज्ञ भी सर्वथा समर्थ नहीं हैं। केवल गीता का सातवाँ अध्याय ही प्राणियों के जरा मृत्यु आदि दुःखों को दूर करने वाला है। 
          *पुत्र ! मेरे श्राद्ध के दिन गीता के सप्तम अध्याय का पाठ करने वाले ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक भोजन कराओ। इससे निःसन्देह मेरी मुक्ति हो जायेगी। वत्स ! अपनी शक्ति के अनुसार पूर्ण श्रद्धा के साथ वेदविद्या में प्रवीण अन्य ब्राह्मणों को भी भोजन कराना।'
          *सर्पयोनि में पड़े हुए पिता के ये वचन सुनकर सभी पुत्रों ने उसकी आज्ञानुसार तथा उससे भी अधिक किया। तब शंकुकर्ण ने अपने सर्पशरीर को त्यागकर दिव्य देह धारण किया और सारा धन पुत्रों के अधीन कर दिया। पिता ने करोड़ों की संख्या में जो धन उनमें बाँट दिया था, उससे वे पुत्र बहुत प्रसन्न हुए। उनकी बुद्धि धर्म में लगी हुई थी, इसलिए उन्होंने बावली, कुआँ, पोखरा, यज्ञ तथा देवमंदिर के लिए उस धन का उपयोग किया और अन्नशाला भी बनवायी। तत्पश्चात सातवें अध्याय का सदा जप करते हुए उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया।
          *हे पार्वती ! यह तुम्हें सातवें अध्याय का माहात्म्य बतलाया, जिसके श्रवणमात्र से मानव सब पातकों से मुक्त हो जाता है।'
                            ~~~०~~~
                       "जय जय श्री राधेकृष्णा"
                       🌺🙏🌺🙏🌺🙏🌺
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कामेंट्स

🌷JK🌷 Sep 21, 2021
🌹🌹Radhe Radhe🌹🌹 Good morning ji 🌹🌹🙏🌹🌹

Rajesh Kumar Sep 21, 2021
jai shri Krishna Neha ji Gbu and your family always be happy 🌺🌺🌺🌺

💖Poonam Sharma💖 Sep 21, 2021
🍃🍃🍃🍃🍃🍃Jay shree ram Jay hanuman Jay shree radhe krishna ji Good morning have a nice day 🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃🍃

Rajesh Rajesh Sep 21, 2021
JAI SHREE KRISHNA RADHE RADHE SHUBH PRABHAT BEHENA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER THAKOR JI KI KRUPA HAMESA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGAL MAY HO AAP OR AAP KA PARIVAR HAMESA KHUS RAHE SWATH RAHE BEHENA JAI SHREE KRISHNA

🌷JK🌷 Sep 21, 2021
🌹🌹Radhe Radhe🌹🌹 Good morning ji🙏

dhruvwadhwani Sep 21, 2021
राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय श्री राधे राधे जय जय जय जय जय जय जय

dhruvwadhwani Sep 21, 2021
जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री राधे

हरे रामा हरे कृष्णा Sep 21, 2021
जय श्री राम जय हनुमान🙏🌹 सुप्रभात वंदन जी, श्री राम भक्त हनुमान जी की कृपा दृष्टि आप एवं आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे ,आप का हर पल मंगलमय हो🙏🌹

dhruvwadhwani Sep 21, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा जय श्री राधे कृष्णा

madan pal 🌷🙏🏼 Sep 21, 2021
जय श्री राधे कृष्णा जी शूभ प्रभात वंदन जी आपका हर पल शूभ मगल हों जी 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌹🌹🌹🌹🌹

Nitin Sharma Sep 21, 2021
🚩#जय____श्री___राम🚩 🚩🚩 #जय_श्रीहनुमानजी🚩🚩 🙏..शुभ मंगलवार, सुप्रभात..🙏

Hemant Kasta Sep 21, 2021
Jai Shree Radhe Krishna Ji Namah, Radhey Radhey Ji, Beautiful Post, Anmol Massage, Gyanvarsha Mahiti, Dhanywad Vandaniy Gyani Bahena Ji Pranam, Subahka Ram Ram, Aap Aur Aapka Parivar Har Din Har Pal Khushiyo Se Bhara Rahe, Aap Sadaiv Hanste Muskurate Rahiye, Vandan Sister Ji, Jai Shree Radhe Krishna Ji, Suprabhat.

Neha Sharma Sep 21, 2021
@kamleshgoyal बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी🙏 धन्यवाद जी। जय-जय श्री राधेकृष्णा जी🙏

Neha Sharma Sep 21, 2021
@seemavalluvar1 बहुत बहुत धन्यवाद प्यारी बहना जी🙏 धन्यवाद जी। जय-जय श्री राधेकृष्णा जी🙏

🙋ANJALI😊MISHRA 🙏 Sep 21, 2021
🚩जय श्री राम🚩 ॐ हनुमते नमः🙏राम राम मेरी प्यारी बहनाजी🙏शुभ प्रभात वंदन 💐भगवान राम और बजरंगबली की कृपा सदा आप पर बनी रहें,आप एवं आपके समस्त,परिवार ,तन मन ,धन, से सदा सुखी रहें स्वस्थ रहें,🙌 जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏हर हर महादेव🍃🍀🙏🚩

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Runa Sinha Oct 18, 2021

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Malti Bansal Oct 20, 2021

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Mamta Chauhan Oct 20, 2021

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Goldy Kurveti Oct 20, 2021

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SaarthakR Prajapat Oct 20, 2021

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