🌞 *_~ वैदिक पंचांग / हिन्दू पंचांग ~_* 🌞 🌤️ *दिनांक - 06 जुलाई 2022* 🌤️ *दिन - बुधवार* 🌤️ *विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)* 🌤️ *शक संवत -1944* 🌤️ *अयन - दक्षिणायन* 🌤️ *ऋतु - वर्षा ऋतु* 🌤️ *मास -आषाढ़* 🌤️ *पक्ष - शुक्ल* 🌤️ *तिथि - सप्तमी शाम 07:48 तक तत्पश्चात अष्टमी* 🌤️ *नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी सुबह 11:44 तक तत्पश्चात हस्त* 🌤️ *योग - वरीयान सुबह 11:43 तक तत्पश्चात परिघ* 🌤️ *राहुकाल - दोपहर 12:43 से दोपहर 02:24* 🌞 *सूर्योदय - 06:03* 🌦️ *सूर्यास्त - 19:23* 👉 *दिशाशूल - उत्तर दिशा में* 🚩 *व्रत पर्व विवरण -* 🔥 *विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 🌷 *चतुर्मास व्रत की महिमा* 🌷 ➡ *गतांक से आगे........* 🙏🏻 *चतुर्मास में विशेष रूप से जल की शुद्धि होती है। उस समय तीर्थ और नदी आदि में स्नान करने का विशेष महत्त्व है। नदियों के संगम में स्नान के पश्चात् पितरों एवं देवताओं का तर्पण करके जप, होम आदि करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। ग्रहण के समय को छोड़कर रात को और संध्याकाल में स्नान न करें । गर्म जल से भी स्नान नहीं करना चाहिए। गर्म जल का त्याग कर देने से पुष्कर तीर्थ में स्नान करने का फल मिलता है।* 🙏🏻 *जो मनुष्य जल में तिल और आँवले का मिश्रण अथवा बिल्वपत्र डालकर ॐ नमः शिवाय का चार-पाँच बार जप करके उस जल से स्नान करता है, उसे नित्य महान पुण्य प्राप्त होता है। बिल्वपत्र से वायु प्रकोप दूर होता है और स्वास्थ्य की रक्षा होती है।* 🙏🏻 *चतुर्मास में जीव-दया विशेष धर्म है। प्राणियों से द्रोह करना कभी भी धर्म नहीं माना गया है। इसलिए मनुष्यों को सर्वथा प्रयत्न करके प्राणियों के प्रति दया करनी चाहिए। जिस धर्म में दया नहीं है वह दूषित माना गया है। सब प्राणियों के प्रति आत्मभाव रखकर सबके ऊपर दया करना सनातन धर्म है, जो सब पुरुषों के द्वारा सदा सेवन करने योग्य है।* 🙏🏻 *सब धर्मों में दान-धर्म की विद्वान लोग सदा प्रशंसा करते हैं। चतुर्मास में अन्न, जल, गौ का दान, प्रतिदिन वेदपाठ और हवन – ये सब महान फल देने वाले हैं।* 🙏🏻 *सतकर्म , सत्कथा, सत्पुरुषों की सेवा, संतों के दर्शन, भगवान विष्णु का पूजन आदि सत्कर्मों में संलग्न रहना और दान में अनुराग होना – ये सब बातें चतुर्मास में दुर्लभ बतायी गयी है। चतुर्मास में दूध, दही, घी एवं मट्ठे का दान महाफल देने वाला होता है। जो चतुर्मास में भगवान की प्रीति के लिए विद्या, गौ व भूमि का दान करता है, वह अपने पूर्वजों का उद्धार कर देता है। विशेषतः चतुर्मास में अग्नि में आहूति, भगवद् भक्त एवं पवित्र ब्राह्मणों को दान और गौओं की भलीभाँति सेवा, पूजा करनी चाहिए।* 🙏🏻 *पितृकर्म (श्राद्ध) में सिला हुआ वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। जिसने असत्य भाषण, क्रोध तथा पर्व के अवसर पर मैथुन का त्याग कर दिया है, वह अश्वमेघ यज्ञ का फल पाता है। असत्य भाषण के त्याग से मोक्ष का दरवाजा खुल जाता है। किसी पदार्थ को उपयोग में लाने से पहले उसमें से कुछ भाग सत्पात्र ब्राह्मण को दान करना चाहिए। जो धन सत्पात्र ब्राह्मण को दिया जाता है, वह अक्षय होता है। इसी प्रकार जिसने कुछ उपयोगी वस्तुओं को चतुर्मास में त्यागने का नियम लिया हो, उसे भी वे वस्तुएँ सत्पात्र ब्राह्मण को दान करनी चाहिए। ऐसा करने से वह त्याग सफल होता है।* 🙏🏻 *चतुर्मास में जो स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय और देवपूजन किया जाता है, वह सब अक्षय हो जाता है। जो एक अथवा दोनों समय पुराण सुनता है, वह पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के धाम को जाता है। जो भगवान के शयन करने पर विशेषतः उनके नाम का कीर्तन और जप करता है, उसे कोटि गुना फल मिलता है।* 🙏🏻 *देवशयनी एकादशी के बाद प्रतिज्ञा करना कि ”हे भगवान ! मैं आपकी प्रसन्नता के लिए अमुक सत्कर्म करूँगा।” और उसका पालन करना इसी को व्रत कहते हैं। यह व्रत अधिक गुणों वाला होता है। अग्निहोत्र, भक्ति, धर्मविषयक श्रद्धा, उत्तम बुद्धि, सत्संग, सत्यभाषण, हृदय में दया, सरलता एवं कोमलता, मधुर वाणी, उत्तम चरित्र में अनुराग, वेदपाठ, चोरी का त्याग, अहिंसा, लज्जा, क्षमा, मन एवं इन्द्रियों का संयम, लोभ, क्रोध और मोह का अभाव, वैदिक कर्मों का उत्तम ज्ञान तथा भगवान को अपने चित्त का समर्पण – इन नियमों को मनुष्य अंगीकार करे और व्रत का यत्नपूर्वक पालन करे।* ➡ *समाप्त........* 🌷 *(पद्म पुराण के उत्तर खंड, स्कंद पुराण के ब्राह्म खंड एवं नागर खंड उत्तरार्ध से संकलित)* 🙏🏻 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 2004, अंक 139, पृष्ठ संख्या 14, 15, 16* 📖 *वैदिक पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर* 📒 *वैदिक पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)* 🌞 *~ वैदिक पंचांग ~* 🌞 🙏🏻🌷🍀🌼🌹🌻🌸🌺💐🙏🏻 *🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 06 जुलाई 2022* *🔹औषधीय गुणों से युक्त : जामुन🔹* *🔹जामुनः जामुन दीपक, पाचक, स्तंभक तथा वर्षा ऋतु में अनेक उदर-रोगों में उपयोगी है । जामुन में लौह तत्त्व पर्याप्त मात्रा में होता है अतः पीलिया के रोगियों के लिए जामुन का सेवन हितकारी है ।* *🔹जामुन खाने से रक्त शुद्ध तथा लालिमायुक्त बनता है । जामुन अतिसार, पेचिश, संग्रहणी, यकृत के रोगों और रक्तजन्य विकारों को दूर करता है । मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए जामुन के बीज का चूर्ण सर्वोत्तम है ।* *🔹मधुमेहः मधुमेह के रोगी को नित्य जामुन खाना चाहिए । अच्छे पके जामुन सुखाकर, बारीक कूटकर बनाया  चूर्ण प्रतिदिन 1-1 चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है ।* *🔹प्रदररोगः जामुन के वृक्ष की छाल का काढ़ा शहद (मधु) मिलाकर दिन मे दो बार कुछ दिन तक सेवन करने से स्त्रियों का प्रदर रोग मिटता है ।* *🔹मुहाँसेः जामुन के बीज को पानी में घिसकर मुँह पर लगाने से मुहाँसे मिटते हैं ।* *🔹आवाज बैठनाः जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियाँ बना लें । दो-दो गोली नित्य चार बार चूसें । इससे बैठा गला खुल जाता है । आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है । अधिक बोलने, गाने वालों के लिए यह विशेष लाभदायक है ।* *🔹स्वप्नदोषः चार-पाँच ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह शाम पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है ।* *🔹दस्तः कैसे भी तेज दस्त हों, जामुन के पेड़ की पत्तियाँ (न ज्यादा मोटी न ज्यादा मुलायम) लेकर पीस लें । उसमें जरा सा सेंधव नमक मिलाकर उसकी गोली बना लें । एक-एक गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेने से दस्त बन्द हो जाते हैं ।* *🔹पथरीः जामुन की गुठली का चूर्ण दही के साथ सेवन करने से पथरी में लाभ होता है । दीर्घकाल तक जामुन खाने से पेट में गया बाल या लोहा पिघल जाता है ।* *🔹जामुन-वृक्ष की छाल के काढ़े के गरारे करने से गले की सूजन में फायदा होता है व दाँतों के मसूढ़ों की सूजन मिटती है व हिलते दाँत मजबूत होते हैं ।* *🔸विशेषः जामुन सदा भोजन के बाद ही खाना चाहिए । भूखे पेट जामुन बिल्कुल न खायें । जामुन के तत्काल बाद दूध का सेवन न करें । जामुन वातदोष करने वाले हैं अतः वायुप्रकृति वालों तथा वातरोग से पीड़ित व्यक्तियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए । जिनके शरीर पर सूजन आयी हो उन रोगियों को, उल्टी के रोगियों को, प्रसूति से उठी स्त्रियों को और दीर्घ कालीन उपवास करने वाले व्यक्तियों को इनका सेवन नहीं करना चाहिए । नमक छिड़ककर ही जामुन खायें । अधिक जामुन का सेवन करने पर छाछ में नमक डालकर पियें । जामुन मधुमेह, पथरी, लीवर, तिल्ली और रक्त की अशुद्धि को दूर करता है ।* *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 1997, पृष्ठ संख्या 44,45 अंक 55*

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 🌤️  *दिनांक - 06 जुलाई 2022*
🌤️ *दिन - बुधवार*
🌤️ *विक्रम संवत - 2079 (गुजरात-2078)*
🌤️ *शक संवत -1944*
🌤️ *अयन - दक्षिणायन*
🌤️ *ऋतु - वर्षा ऋतु* 
🌤️ *मास -आषाढ़*
🌤️ *पक्ष - शुक्ल* 
🌤️ *तिथि - सप्तमी शाम 07:48 तक तत्पश्चात अष्टमी*
🌤️ *नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी सुबह 11:44 तक तत्पश्चात हस्त*
🌤️ *योग - वरीयान सुबह  11:43 तक तत्पश्चात परिघ*
🌤️  *राहुकाल - दोपहर 12:43 से दोपहर 02:24*
🌞 *सूर्योदय - 06:03*
🌦️ *सूर्यास्त - 19:23*
👉  *दिशाशूल - उत्तर दिशा में*
🚩 *व्रत पर्व विवरण -*
🔥 *विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
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🌷 *चतुर्मास व्रत की महिमा* 🌷
➡ *गतांक से आगे........*
🙏🏻 *चतुर्मास में विशेष रूप से जल की शुद्धि होती है। उस समय तीर्थ और नदी आदि में स्नान करने का विशेष महत्त्व है। नदियों के संगम में स्नान के पश्चात् पितरों एवं देवताओं का तर्पण करके जप, होम आदि करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। ग्रहण के समय को छोड़कर रात को और संध्याकाल में स्नान न करें । गर्म जल से भी स्नान नहीं करना चाहिए। गर्म जल का त्याग कर देने से पुष्कर तीर्थ में स्नान करने का फल मिलता है।*
🙏🏻 *जो मनुष्य जल में तिल और आँवले का मिश्रण अथवा बिल्वपत्र डालकर ॐ नमः शिवाय का चार-पाँच बार जप करके उस जल से स्नान करता है, उसे नित्य महान पुण्य प्राप्त होता है। बिल्वपत्र से वायु प्रकोप दूर होता है और स्वास्थ्य की रक्षा होती है।*
🙏🏻 *चतुर्मास में जीव-दया विशेष धर्म है। प्राणियों से द्रोह करना कभी भी धर्म नहीं माना गया है। इसलिए मनुष्यों को सर्वथा प्रयत्न करके प्राणियों के प्रति दया करनी चाहिए। जिस धर्म में दया नहीं है वह दूषित माना गया है। सब प्राणियों के प्रति आत्मभाव रखकर सबके ऊपर दया करना सनातन धर्म है, जो सब पुरुषों के द्वारा सदा सेवन करने योग्य है।*
🙏🏻 *सब धर्मों में दान-धर्म की विद्वान लोग सदा प्रशंसा करते हैं। चतुर्मास में अन्न, जल, गौ का दान, प्रतिदिन वेदपाठ और हवन – ये सब महान फल देने वाले हैं।*
🙏🏻 *सतकर्म , सत्कथा, सत्पुरुषों की सेवा, संतों के दर्शन, भगवान विष्णु का पूजन आदि सत्कर्मों में संलग्न रहना और दान में अनुराग होना – ये सब बातें चतुर्मास में दुर्लभ बतायी गयी है। चतुर्मास में दूध, दही, घी एवं मट्ठे का दान महाफल देने वाला होता है। जो चतुर्मास में भगवान की प्रीति के लिए विद्या, गौ व भूमि का दान करता है, वह अपने पूर्वजों का उद्धार कर देता है। विशेषतः चतुर्मास में अग्नि में आहूति, भगवद् भक्त एवं पवित्र ब्राह्मणों को दान और गौओं की भलीभाँति सेवा, पूजा करनी चाहिए।*
🙏🏻 *पितृकर्म (श्राद्ध) में सिला हुआ वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। जिसने असत्य भाषण, क्रोध तथा पर्व के अवसर पर मैथुन का त्याग कर दिया है, वह अश्वमेघ यज्ञ का फल पाता है। असत्य भाषण के त्याग से मोक्ष का दरवाजा खुल जाता है। किसी पदार्थ को उपयोग में लाने से पहले उसमें से कुछ भाग सत्पात्र ब्राह्मण को दान करना चाहिए। जो धन सत्पात्र ब्राह्मण को दिया जाता है, वह अक्षय होता है। इसी प्रकार जिसने कुछ उपयोगी वस्तुओं को चतुर्मास में त्यागने का नियम लिया हो, उसे भी वे वस्तुएँ सत्पात्र ब्राह्मण को दान करनी चाहिए। ऐसा करने से वह त्याग सफल होता है।*

🙏🏻 *चतुर्मास में जो स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय और देवपूजन किया जाता है, वह सब अक्षय हो जाता है। जो एक अथवा दोनों समय पुराण सुनता है, वह पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के धाम को जाता है। जो भगवान के शयन करने पर विशेषतः उनके नाम का कीर्तन और जप करता है, उसे कोटि गुना फल मिलता है।*
🙏🏻 *देवशयनी एकादशी के बाद प्रतिज्ञा करना कि ”हे भगवान ! मैं आपकी प्रसन्नता के लिए अमुक सत्कर्म करूँगा।” और उसका पालन करना इसी को व्रत कहते हैं। यह व्रत अधिक गुणों वाला होता है। अग्निहोत्र, भक्ति, धर्मविषयक श्रद्धा, उत्तम बुद्धि, सत्संग, सत्यभाषण, हृदय में दया, सरलता एवं कोमलता, मधुर वाणी, उत्तम चरित्र में अनुराग, वेदपाठ, चोरी का त्याग, अहिंसा, लज्जा, क्षमा, मन एवं इन्द्रियों का संयम, लोभ, क्रोध और मोह का अभाव, वैदिक कर्मों का उत्तम ज्ञान तथा भगवान को अपने चित्त का समर्पण – इन नियमों को मनुष्य अंगीकार करे और व्रत का यत्नपूर्वक पालन करे।*
➡ *समाप्त........*
🌷 *(पद्म पुराण के उत्तर खंड, स्कंद पुराण के ब्राह्म खंड एवं नागर खंड उत्तरार्ध से संकलित)*
🙏🏻 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 2004, अंक 139, पृष्ठ संख्या 14, 15, 16*

📖 *वैदिक पंचांग संपादक ~ अंजनी निलेश ठक्कर*
📒 *वैदिक पंचांग प्रकाशित स्थल ~ सुरत शहर (गुजरात)*
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*🌞 ~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 06 जुलाई 2022*

*🔹औषधीय गुणों से युक्त : जामुन🔹*

*🔹जामुनः जामुन दीपक, पाचक, स्तंभक तथा वर्षा ऋतु में अनेक उदर-रोगों में उपयोगी है । जामुन में लौह तत्त्व पर्याप्त मात्रा में होता है अतः पीलिया के रोगियों के लिए जामुन का सेवन हितकारी है ।*

*🔹जामुन खाने से रक्त शुद्ध तथा लालिमायुक्त बनता है । जामुन अतिसार, पेचिश, संग्रहणी, यकृत के रोगों और रक्तजन्य विकारों को दूर करता है । मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए जामुन के बीज का चूर्ण सर्वोत्तम है ।*

*🔹मधुमेहः मधुमेह के रोगी को नित्य जामुन खाना चाहिए । अच्छे पके जामुन सुखाकर, बारीक कूटकर बनाया  चूर्ण प्रतिदिन 1-1 चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है ।*

*🔹प्रदररोगः जामुन के वृक्ष की छाल का काढ़ा शहद (मधु) मिलाकर दिन मे दो बार कुछ दिन तक सेवन करने से स्त्रियों का प्रदर रोग मिटता है ।*

*🔹मुहाँसेः जामुन के बीज को पानी में घिसकर मुँह पर लगाने से मुहाँसे मिटते हैं ।*

*🔹आवाज बैठनाः जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियाँ बना लें । दो-दो गोली नित्य चार बार चूसें । इससे बैठा गला खुल जाता है । आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है । अधिक बोलने, गाने वालों के लिए यह विशेष लाभदायक है ।*

*🔹स्वप्नदोषः चार-पाँच ग्राम जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह शाम पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है ।*

*🔹दस्तः कैसे भी तेज दस्त हों, जामुन के पेड़ की पत्तियाँ (न ज्यादा मोटी न ज्यादा मुलायम) लेकर पीस लें । उसमें जरा सा सेंधव नमक मिलाकर उसकी गोली बना लें । एक-एक गोली सुबह-शाम पानी के साथ लेने से दस्त बन्द हो जाते हैं ।*

*🔹पथरीः जामुन की गुठली का चूर्ण दही के साथ सेवन करने से पथरी में लाभ होता है । दीर्घकाल तक जामुन खाने से पेट में गया बाल या लोहा पिघल जाता है ।*

*🔹जामुन-वृक्ष की छाल के काढ़े के गरारे करने से गले की सूजन में फायदा होता है व दाँतों के मसूढ़ों की सूजन मिटती है व हिलते दाँत मजबूत होते हैं ।*

*🔸विशेषः जामुन सदा भोजन के बाद ही खाना चाहिए । भूखे पेट जामुन बिल्कुल न खायें । जामुन के तत्काल बाद दूध का सेवन न करें । जामुन वातदोष करने वाले हैं अतः वायुप्रकृति वालों तथा वातरोग से पीड़ित व्यक्तियों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए । जिनके शरीर पर सूजन आयी हो उन रोगियों को, उल्टी के रोगियों को, प्रसूति से उठी स्त्रियों को और दीर्घ कालीन उपवास करने वाले व्यक्तियों को इनका सेवन नहीं करना चाहिए । नमक छिड़ककर ही जामुन खायें । अधिक जामुन का सेवन करने पर छाछ में नमक डालकर पियें । जामुन मधुमेह, पथरी, लीवर, तिल्ली और रक्त की अशुद्धि को दूर करता है ।*

*स्रोतः ऋषि प्रसाद, जुलाई 1997, पृष्ठ संख्या 44,45 अंक 55*

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N. A.P. Aug 17, 2022

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Ajeet Tiwari Aug 17, 2022

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Ajeet Tiwari Aug 17, 2022

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vandana Aug 17, 2022

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vandana Aug 17, 2022

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Beena Sharma Aug 17, 2022

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dalipjotwani Aug 17, 2022

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