Rameshannd Guruji
Rameshannd Guruji Nov 27, 2021

*आज दि 27 नवम्बर शनिवार श्री सालासर बालाजी के प्रातःकाल दर्शन* श्रीसालासर धाम चूरू -राजस्थान

*आज दि 27 नवम्बर शनिवार श्री सालासर बालाजी के प्रातःकाल दर्शन* 
श्रीसालासर धाम चूरू -राजस्थान

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. "करमन घाट हनुमान मन्दिर" पोस्ट - 3/3 अन्तिम (एक ऐसा हनुमान मन्दिर जहाँ डर कर बेहोश हो गया था मुगल सम्राट औरंगज़ेब !) सेनापति खुद औरंगज़ेब के सामने पहुँचा और बोला - "जहाँपनाह ! आपके हुक्म के मुताबिक हमने उस हनुमान मन्दिर को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन हम उसे तोड़ने के लिए एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाये, जहाँपनाह ! जरूर उस मन्दिर में कोई रूहानी ताकत है। मन्दिर के पुजारी ने भी कहा था कि हनुमान हिन्दुओं के सब देवताओं में सबसे ताकतवर देवता है। जहाँपनाह ! की इजाज़त हो तो मेरी सलाह है कि हम अब उस मन्दिर की तरफ नज़र भी न डालें।" अपने सेनापति की नाकामी और बिन मांगी सलाह से गुस्से में भरा औरंगज़ेब चीखते हुए बोला - "खामोश, बेवकूफ ! अगर तुम्हारी जगह कोई और होता तो हम अपनी तलवार से उसके टुकड़े कर देते। तुम पर इसलिये रहम कर रहे हैं क्योंकि तुमने बहुत सालों से हमारे वफादार हो। सुनो ! अब सेना की कमान मेरे हाथ रहेगी, मोर्चा मैं सम्हालूँगा। कल हम उस हनुमान मन्दिर जायेंगे और मैं खुद औज़ार से उस मन्दिर को तोडूँगा। देखता हूँ कैसे वो हिन्दू देवता हनुमान मेरे फौलादी हाथों से अपने मन्दिर को टूटने से बचाता है। मैं ललकारता हूँ उस हनुमान को।" अगले दिन सुबह आलमगीर औरंगज़ेब एक बड़े से लश्कर के साथ उस हनुमान मन्दिर को तोड़ने चल पड़ा। हालाँकि उसके वो सैनिक पिछले दिन की घटना को याद कर मन में बेहद घबराये हुए थे पर अपने ज़ालिम बादशाह का हुक्म भी उन्हें मानना था वरना वो उन्हें मारकर गोलकुंडा के मुख्य चौक पर टांग देता। मन ही मन हनुमान जी से क्षमा माँगते हुए वो सिपाही चुपचाप मन्दिर की तरफ बढ़ने लगे। मन्दिर पहुँचकर औरंगज़ेब ने आदेश दिया की भीतर जो भी लोग हैं तुरन्त बाहर आ जाएं वरना जान से जायेंगे। "विनाश काले विपरीत बुद्धि" मन ही मन कहते हुए मन्दिर के अन्दर से सभी पुजारी और कर्मचारी बाहर आ गए। उनकी तरफ अपनी अंगारों से भरी लाल ऑंखें तरेरता हुआ गुस्से से भरा औरंगजेब बोला - "अगर किसी ने भी अपना मुँह खोला तो उसकी ज़बान के टुकड़े टुकड़े कर दूँगा, खामोश एक तरफ खड़े रहो और चुपचाप सब देखते रहो।" (वो नहीं चाहता था कि पुजारी फिर से कुछ बोले या उसे टोके और उसका काम रुक जाए) वहाँ खड़े सब लोग भय से भरे खड़े थे और औरंगज़ेब की बेवकूफी को देख रहे थे। औरंगज़ेब ने एक बड़ा सा सब्बल लिया और बादशाही अकड़ के साथ मन्दिर की तरफ बढ़ने लगा। उस समय जैसे हवा भी रुक गयी थी, एक महापाप होने जा रहा था, भयातुर दृष्टि से सब औरंगजेब की इस करतूत को देख रहे थे जो "पवनपुत्र" को हराने के लिए कदम बढ़ा रहा था। अगले पलों में क्या होगा इस बात से अंजान और आस पास के माहौल से बेखबर, घमण्ड से भरा हुआ औरंगजेब मन्दिर की मुख्य दीवार के पास पहुँचा और जैसे ही उसने दीवार तोड़ने के लिए सब्बल से प्रहार करने के लिए हाथ उठाया ! उसे मन्दिर के भीतर से एक भीषण गर्जन सुनाई पड़ा, इतना तेज़ और भयंकर की कान के पर्दे फट जाएँ, जैसे हजारों बिजलियाँ आकाश में एक साथ गरज पड़ी हों। यह गर्जन इतना भयंकर था कि हजारों मन्दिर तोड़ने वाला और हिंदुस्तान के अधिकतर हिस्से पर कब्जा जमा चुका औरंगज़ेब भी डर के मारे मूर्तिवत स्तब्ध और जड़ हो गया, और उसने अपने दोनों हाथों से अपने कान बन्द कर लिए। वो भीषण गर्जन बढ़ता ही जा रहा था। औरंगज़ेब भौचक्का रह गया था। औरंगज़ेब जड़ हो चुका था, निशब्द हो चुका था। काल को भी कंपा देने वाले उस भीषण गर्जन को सुनकर वो पागल होने वाला था। लेकिन अभी उसे और हैरान होना था। उस भीषण गर्जन के बाद मन्दिर से आवाज़ आयी - "अगर मन्दिर तोडना चाहते हो राजन ! तो कर मन घाट" (यानि "हे राजा ! अगर मन्दिर तोडना चाहते हो तो पहले दिल मजबूत करो") डर और हैरानी भरा हुआ औरंगज़ेब इतना सुनते ही बेहोश हो गया। इसके बाद क्या हुआ उसे पता भी न चला। मन्दिर के भीतर से आते इस घनघोर गर्जन और आवाज़ को वहाँ खड़े पुजारी और भक्तगण समझ गए की ये उनके इष्ट देव श्री हनुमानजी की ही आवाज़ है। उन सभी ने वहीं से बजरंगबली को दण्डवत प्रणाम किया और उनकी स्तुति की। उधर बेहोश हुए औरंगज़ेब को सम्हालने उसके सैनिक दौड़े और उसे मन्दिर से निकाल कर वापस किले में ले गए। हनुमान जी के शब्दों से ही उस मन्दिर का नया नाम पड़ा जो आज तक उसी नाम से जाना जाता है - "करमन घाट हनुमान मन्दिर" इस घटना के बाद लोगो में इस मन्दिर के प्रति अगाध श्रद्धा हुई और इस मन्दिर से जुड़े अनेकों चमत्कारिक अनुभव लोगों को हुए। सन्तानहीन स्त्रियों को यहाँ आने से निश्चित ही सन्तान प्राप्त होती है और अनेक गम्भीर लाइलाज बीमारियों के मरीज यहाँ हनुमान जी की कृपा से स्वस्थ हो चुके हैं। यह प्रसिद्ध मन्दिर तेलंगाना राज्य में हैदराबाद सागर रोड़ पर स्थित है। ----------:::×:::---------- (समाप्त) "जय श्रीराम" " कुमार रौनक कश्यप " *****************************************

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