anju
anju Oct 16, 2021

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Ravi Kumar Taneja Dec 5, 2021

*🕉शुभ रविवार 05 दिसंबर,2021🕉* *🌈"जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम ! तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर!!"🌈* 🌞श्री सूर्य भगवान अर्घ्य मंत्र 🌞 1💥ॐ मित्राय नमः 2💥ॐ रवये नमः 3💥ॐ सूर्याय नमः 4💥ॐ भानवे नमः 5💥ॐ खगाय नमः 6💥ॐ पूष्णे नमः 7💥ॐ हिरण्यगर्भाय नमः 8💥ॐ मरीचये नमः 9💥ॐ आदित्याय नमः 10💥ॐ सवित्रे नमः 11💥ॐ अर्काय नमः 12💥ॐ भास्कराय नमः 13💥ॐ श्रीसवितृ सूर्यनारायणाय नमः *🌲क्षमा एक करता है,* *मुक्त दो लोग होते हैं !!* *🌲शुक्रिया अदा करना* और ... *माफ़ी माँगना* दो गुण जिस व्यक्ति के पास है... वो सबके क़रीब और... सबके लिए *अजीज़* होता है ... *🌲जिसका दिल साफ होता है* *उसका सब कुछ माफ होता है* *🌻ख़ुश रहें..!! 🌻स्वस्थ रहें..!! 🌻मस्त रहें..!!* 🏹परम कृपालु सूर्य देव जी की असीम कृपा दृष्टि आप पर हमेशा बनी रहे 🙏🌹🙏 सूर्य देव की कृपा से आप हमेशा स्वस्थ रहे,मस्त रहे,सदा मुस्कुराते रहे!!!🙏🌺🙏 🙏शुभ प्रभात स्नेह वंदन जी 🙏 🕉🏹🙏🌷🙏🌷🙏🏹🕉

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Neetu Bhati Dec 5, 2021

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Goldy Kurveti Dec 5, 2021

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sn vyas Dec 5, 2021

🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🚩 *"सनातन परिवार"* 🚩 *की प्रस्तुति* 🔴 *आज का प्रात: संदेश* 🔴 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘ *परमात्मा ने सुंदर सृष्टि का निर्माण किया और इस समस्त सृष्टि को ज्ञान से परिपूर्ण कर दिया | उस ज्ञान को कण कण में पहुंचाने के लिए प्रकृति में अनेकों उदाहरण भी भर दिए | फिर मनुष्य की रचना करके इस धरती पर अनेकों महापुरुष तो भेजे ही साथ ही समय-समय पर स्वयं अवतार लेकर के उस ज्ञान का प्रसार मानव मात्र में करने का प्रयास किया | इतना सब होने के बाद भी मनुष्य कहीं ना कहीं से ज्ञान प्राप्त करने से चूक गया | यदि किसी को भी कुछ प्राप्त नहीं हो रहा है या फिर कोई परीक्षार्थी परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो रहा है तो यह मान लेना चाहिए कि उसने तैयारी ठीक से नहीं की है , उसने अध्ययन एवं पठन नहीं किया है , तभी वह परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुआ | ज्ञान का प्रकाश चारों ओर फैला हुआ है परंतु जब तक अज्ञान का दीपक हृदय से नहीं बुझेगा तब तक ज्ञान हृदय में प्रवेश नहीं कर सकता | अज्ञान क्या है ? मनुष्य का अहंकार , मनुष्य की थोथी विद्वता | यह ऐसा अज्ञान का दीपक है जो मनुष्य के हृदय में जलता रहता है जिसके कारण ज्ञान हृदय में प्रवेश नहीं कर पाता | जिस प्रकार एक छोटे से कमरे में मनुष्य दीपक जला कर बैठता है तो उसे पूर्णिमा के चंद्रमा का प्रकाश नहीं दिखाई पड़ता है और जब वह अपने कमरे के दीपक को बुझाता है उसी के थोड़ी देर बाद पूर्णिमा का पूर्ण प्रकाश उसके कमरे में फैल जाता है , उसी प्रकार मनुष्य के हृदय में जब तक अज्ञान रूपी छोटा दीपक जल रहा है अब तक ज्ञान रूपी पूर्णिमा का प्रकाश उसके हृदय में कदापि नहीं प्रवेश कर सकता | जिस दिन अहंकार , अज्ञान रूपी दीपक मनुष्य अपने हृदय से बुझा देता है उसी दिन उसके हृदय में ज्ञान रूपी प्रकाश प्रसारित होने लगता है | मैं ही श्रेष्ठ हूं , जो मुझे आता है वह और किसी को नहीं आता यह भाव जब तक मनुष्य के हृदय में रहेगा तब तक उसे ज्ञान नहीं प्राप्त हो सकता क्योंकि उसके मन का भाव बन जाता है कि मेरे जैसा ज्ञानी कोई दूसरा है ही नहीं | ऐसे मनुष्य जीवन के अंधकार में अपने दिन व्यतीत करके सब कुछ जानते हुए भी कुछ नहीं जान पाते और इस धरा धाम से जाने का समय आ जाता है | इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सर्वप्रथम अपने ह्रदय अर्थात छोटे कमरे के अज्ञानता रूपी दीपक को बुझाना पड़ेगा तभी उसे बाहर फैले हुए ज्ञान का प्रकाश प्राप्त हो पाएगा |* *आज के युग में पहले की अपेक्षा ज्ञान का प्रसार हो रहा है | संचार माध्यम इसका सशक्त स्रोत बन गया है | मनुष्य अपने पुराणों का अध्ययन न करके सब कुछ संचार माध्यम से ही प्राप्त कर लेना चाहता है और जिस दिन वो थोड़ा बहुत जान जाता है उस दिन उसे ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे हृदय में अर्थात छोटे से कमरे में जो प्रकाश है वही हमारे लिए पर्याप्त है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" ऐसे सभी लोगों से यही निवेदन करना चाहूंगा कि हृदय के अहंकार एवं स्वयं को ज्ञानी समझने वाले अज्ञानता रूपी दीपक को बुझा कर इससे बाहर निकल कर देखिए समस्त सृष्टि में ज्ञान का प्रकाश फैला हुआ है | परंतु कुछ लोग अपनी इस अज्ञानता से बाहर नहीं निकल पाते हैं जिसका परिणाम यह होता है कि उन्हें ज्ञान रूपी पूर्णिमा के चंद्रमा का प्रकाश जीवन भर नहीं मिल पाता और वे कूप मंडूक ही बने रह जाते हैं | आज विद्वानों की पूरी सेना संचार माध्यमों पर दिखाई पड़ती है , इंटरनेट के माध्यम व्हाट्सएप एवं अन्य कई स्थानों पर सत्संग चर्चाएं भी खूब जोर शोर से हो रही है परंतु यहां भी अध्ययन का अभाव स्पष्ट दिखाई पड़ता है , क्योंकि हृदय में जो अज्ञानता रूपी दीपक प्रकाशित हो रहा है वह बाहरी प्रकाश को भीतर आने ही नहीं दे रहा है | यही कारण है कि प्राय: इन संचार माध्यमों पर सत्संग विवाद का कारण बनता जा रहा है | "एको$हम द्वितीयोनास्ति" की भावना मनुष्य को अज्ञानता के अंधकार की ओर ले जा रही है | इस संसार में परमात्मा के सिवाय कोई भी पूर्ण नहीं है परंतु स्वयं को पूर्ण दिखाने का प्रयास करने वाला मनुष्य अपने स्वभाव से विवश होकर के ऐसे कृत्य कर रहा है , जिसके कारण ना तो उसे कुछ प्राप्त हो पा रहा है और ना ही कोई अन्य उसके ज्ञान का लाभ ले पा रहा है | आवश्यकता है कि ज्ञान के प्रकाश को और फैलाया जाए जिससे कि अज्ञानता रूपी दीपक स्वत: बुझ जाय | और यह तभी होगा जब हम स्वाध्याय की प्रवृत्ति अपनायेंगे , क्योंकि यह अकाट्य सत्य है कि हमें सब कुछ संचार माध्यम एवं इंटरनेट से नहीं प्राप्त हो सकता | जिस प्रकार कुएं में पड़े हुए मेंढक को ऐसा प्रतीत होता है कि जितना आसमान दिख रहा है वह सब मैंने देख लिया है उसी प्रकार कुछ लोग अज्ञानता का दीपक जलाकर यह समझ लेते हैं कि जितना ज्ञान है हमने सब प्राप्त कर लिया है | ऐसे लोगों से यही कहना है कि अज्ञानता रूपी कुँयें से बाहर निकल कर देखो ज्ञान का आसमान बहुत ही विस्तृत है |* *जब तक अज्ञानता का दीपक नहीं बुझाया जाएगा तब तक ज्ञान रूपी प्रकाश अपना प्रभाव नहीं दिखा पाएगा और अज्ञानता का दीपक बुझाने के लिए सद्गुरु की शरण में जाकर उनके द्वारा दिए गए निर्देश को मानना ही सुगम एवं सरल मार्ग है |* 🌺💥🌺 *जय श्री हरि* 🌺💥🌺 🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 सभी भगवत्प्रेमियों को आज दिवस की *"मंगलमय कामना"*----🙏🏻🙏🏻🌹 ♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵️ *सनातन धर्म से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा (सतसंग) करने के लिए हमारे व्हाट्सऐप समूह----* *‼ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼ से जुड़ें या सम्पर्क करें---* आचार्य अर्जुन तिवारी प्रवक्ता श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा संरक्षक संकटमोचन हनुमानमंदिर बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी (उत्तर-प्रदेश) 9935328830 🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟

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