
Rama Devi Sahu
6 hours ago
भगवान वामन अवतार और राजा महाबलि की संपूर्ण कथा (विस्तार से) 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 यह कथा श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कंध 8), विष्णु पुराण तथा अन्य पुराणों में वर्णित है। भगवान विष्णु का वामन अवतार उनके दस प्रमुख अवतारों में पाँचवाँ अवतार माना जाता है। यह कथा केवल एक दैत्य राजा के पराभव की नहीं, बल्कि भक्ति, सत्य, दान, विनम्रता और भगवान की कृपा का अद्भुत उदाहरण है। --- 1. राजा महाबलि कौन थे? राजा महाबलि महान भक्त प्रह्लाद के पौत्र और विरोचन के पुत्र थे। यद्यपि वे दैत्य कुल में जन्मे थे, लेकिन उनमें दान, सत्य और धर्म का अद्भुत गुण था। वे प्रजा से अत्यंत प्रेम करते थे और किसी याचक को कभी खाली हाथ नहीं लौटाते थे। अपनी वीरता और पराक्रम से उन्होंने पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल—तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। यहाँ तक कि देवराज इंद्र भी अपना स्वर्गलोक छोड़ने को विवश हो गए। --- 2. देवताओं की चिंता जब देवताओं ने अपना राज्य खो दिया, तब वे अपनी माता अदिति के पास पहुँचे। अदिति अपने पुत्रों की दशा देखकर अत्यंत दुखी हुईं। उन्होंने अपने पति महर्षि कश्यप से उपाय पूछा। कश्यप ऋषि ने उन्हें भगवान विष्णु की आराधना के लिए पयोव्रत करने का उपदेश दिया। --- 3. भगवान विष्णु का प्रकट होना अदिति ने अत्यंत श्रद्धा से व्रत किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और बोले— > "माता! मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर देवताओं की रक्षा करूँगा।" कुछ समय बाद भगवान विष्णु ने अदिति के गर्भ से जन्म लिया। वे एक तेजस्वी बाल ब्राह्मण के रूप में प्रकट हुए। उनका नाम पड़ा—वामन। --- 4. वामन भगवान का दिव्य स्वरूप वामन भगवान अत्यंत सुंदर थे। हाथ में कमंडल कंधे पर यज्ञोपवीत हाथ में दण्ड सिर पर छत्र शरीर से दिव्य तेज निकल रहा था। यद्यपि वे आकार में छोटे थे, लेकिन उनका तेज करोड़ों सूर्यों के समान था। --- 5. राजा बलि का अश्वमेध यज्ञ उधर राजा बलि नर्मदा नदी के तट पर भव्य अश्वमेध यज्ञ कर रहे थे। देश-विदेश से ऋषि, मुनि, विद्वान और याचक वहाँ उपस्थित थे। राजा बलि ने घोषणा कर रखी थी— > "जो भी याचक आएगा, उसे इच्छानुसार दान दिया जाएगा।" इसी समय वामन भगवान वहाँ पहुँचे। --- 6. भगवान ने माँगी केवल तीन पग भूमि राजा बलि ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया। उन्होंने कहा— > "ब्राह्मण कुमार! जो चाहो माँग लो। सोना, रत्न, हाथी, घोड़े, राज्य—जो इच्छा हो।" वामन भगवान मुस्कुराए और बोले— > "राजन्! मुझे केवल तीन पग भूमि चाहिए।" सभा में बैठे सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। --- 7. शुक्राचार्य की चेतावनी राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य ने तुरंत पहचान लिया कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं। उन्होंने राजा बलि से कहा— > "दान मत दो। ये तुम्हारा सब कुछ ले लेंगे।" लेकिन राजा बलि बोले— > "यदि स्वयं भगवान मेरे द्वार पर याचक बनकर आए हैं, तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा? मैं अपने वचन से पीछे नहीं हटूँगा।" --- 8. दान की प्रतिज्ञा राजा बलि ने संकल्प लेकर तीन पग भूमि दान देने का निश्चय किया। कथा के अनुसार शुक्राचार्य ने कमंडल की टोंटी में प्रवेश कर जल निकलने से रोकने का प्रयास किया। तब भगवान वामन ने कुशा की नोक से टोंटी खोली, जिससे शुक्राचार्य की एक आँख घायल हो गई। इसके बाद राजा बलि ने विधिपूर्वक दान दे दिया। --- 9. त्रिविक्रम का विराट रूप दान स्वीकार करते ही वामन भगवान का शरीर बढ़ने लगा। वे इतने विशाल हो गए कि उनका सिर आकाश से भी ऊपर पहुँच गया। उनकी आँखें सूर्य और चन्द्रमा जैसी प्रतीत होने लगीं। उनके चरणों से समस्त ब्रह्मांड प्रकाशित हो उठा। यह भगवान का त्रिविक्रम रूप था। --- 10. पहला और दूसरा चरण भगवान ने पहले चरण में पूरी पृथ्वी नाप ली। दूसरे चरण में स्वर्ग, दिशाएँ, ग्रह, नक्षत्र और सम्पूर्ण ब्रह्मांड को माप लिया। अब तीसरे चरण के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा। --- 11. तीसरा चरण भगवान ने पूछा— > "राजा बलि! अब तीसरा चरण कहाँ रखूँ?" राजा बलि ने हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा— > "प्रभु! अब मेरे पास कुछ नहीं बचा। कृपया अपना तीसरा चरण मेरे सिर पर रख दीजिए।" भगवान मुस्कुराए। उन्होंने अपना चरण राजा बलि के मस्तक पर रखा। राजा बलि पूर्णतः भगवान के चरणों में समर्पित हो गए। --- 12. भगवान का वरदान भगवान विष्णु राजा बलि की सत्यनिष्ठा, दानशीलता और भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा— तुम्हें सुतल लोक का राजा बनाया जाता है। वहाँ किसी प्रकार का दुःख नहीं हो

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 25, 2026
Very good Morning ji 🌹🌷

Rakesh Kumar
Aug 25, 2026
good morning ji 🙏