Nageswar Rao
Nageswar Rao Nov 26, 2021

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Radhe Krishna Dec 3, 2021

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Jagruti patel Dec 3, 2021

भक्ति और मुक्ति :- "साथ" चलने के लिए" सतगुरु "का साथ चाहिए "आँसू "रोकने के लिए "सतगुरु" का प्यार चाहिए "जिन्दा "रेहने के लिए "सतगुरु" का आशिर्वाद चाहिए "जिन्दगी "ख़ुशी से "जीने "के लिए " सेवा" सत्संग" "सिमरण "और "ध्यान "चाहिए" बाहर है प्रकृति. अंदर है सृष्टि बाहर है मन. अंदर है स्वयं बाहर है मृत्यु. अंदर है जीवन बाहर है रुदन. अंदर है आनंद बाहर है नरक. अंदर है स्वर्ग बाहर है मन्नत. अंदर है जन्नत बाहर है दौड़. अंदर है विश्राम बाहर है व्यवधान. अंदर है समाधान बाहर है नश्वर. अंदर है शास्वत बाहर है व्याधि. अंदर है समाधि बाहर है कामी. अंदर है अंतर्यामी बाहर है भ्रांति. अंदर है शांति बाहर है आत्मा. अंदर है परमात्मा जय सच्चिदानंद जी आत्मा को परमात्मा इसलिए कहा जाता है क्यों कि मनुष्य का शरीर भक्ति करने के लिए दिया गया है l एक यही योनि एसी है जिसमें भक्ति करने का अवसर मिलता है l मानव योनि मैं आने का अर्थ है भक्ति करके मुक्ति प्राप्त करना l

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Radha bansal Dec 3, 2021

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