🚩भाष्कर देव का आशीर्वाद सपरिवार आपको मिले 🌹आपकी मनोकामनाएं दिवाकर देव पूरी करे 🙏ॐ मित्राय नमः 🙏

🚩भाष्कर देव का आशीर्वाद सपरिवार आपको मिले
🌹आपकी मनोकामनाएं दिवाकर देव पूरी करे
                     🙏ॐ मित्राय नमः 🙏

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कामेंट्स

GD Bansal Jul 30, 2022
🙏🌻।। ॐ श्री सूर्यदेवाय नमः ।।🌻🙏

मदन पाल सिंह Jul 30, 2022
ओम सूर्ययाय देवाय नमः जी शूभ प्रभात वंदन जी सूर्य देव भगवान् जी कि कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🌷🌷🌷🙏🏼🙏🏼🙏🏼🚩

Anil Jul 31, 2022
good morning ji 🌹🙏🌹

GD Bansal Jul 31, 2022
🙏🌻।। ॐ श्री सूर्यदेवाय नमः ।।🌻🙏।। आपको सपरिवार हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं ।।🌻🙏

Sudha Mishra Jul 31, 2022
Om Suryadevay Namah 🙏🌹 Shubh sandhya vandan ji 🌹 Aapka har pal Shubh v mangalmay ho 🙏🌹

Sudha Mishra Jul 31, 2022
Om Suryadevay Namah 🙏🌹 Shubh sandhya vandan ji 🌹 Aapka har pal Shubh v mangalmay ho 🙏🌹

Sudha Mishra Jul 31, 2022
Om Suryadevay Namah 🙏🌹 Shubh sandhya vandan ji 🌹 Aapka har pal Shubh v mangalmay ho 🙏🌹

🥀 Preeti Jain 🥀 Jul 31, 2022
पेड़ों पर झूले, सावन की फुहार मुबारक हो आपको तीज का त्योहार👌✍️ हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं✍️✍️🥀🥀🥀🥀🥀☕👈🙏🙏🚩🌹🙏 राधे राधे जय श्री कृष्णा शुभ संध्या जी जय जिनेंद्र

Anup Kumar Sinha Jul 31, 2022
ऊॅं सूर्यदेवाय नमः 🙏🙏 शुभ रात्रि वंदन,भाई जी । आरोग्य के देवता भगवान सूर्य आपको हमेशा निरोग रखें । आपका हर पल शुभ एवं मंगलमय हो 🙏🌺

Runa Sinha Jul 31, 2022
जय श्री राधे राधे 🙏शुभ रात्रि वंदन भाई 🙏 राधा रानी की कृपा आप पूरे परिवार पर बनी रहे🌿🙏🌿

Hemant Kasta Aug 1, 2022
Tashmai Shree Sury Narayan Devtay Namah, Beautiful Post, Anmol Massage, Dhanyawad Adaraniy Brother Ji Namaskar, Aap Aur Aapka Parivar Har Din Har Pal Khushiyo Se Bhara Rahe.

Ashwin r chauhan Aug 1, 2022
ॐ सूर्य देवाय नमः आरोग्य के देवता सूर्य नारायण देव की कृपा आप पर आप के पुरे परिवार पर सदेव बनी रहे आप का हर पल मंगल एवं शुभ रहे भगवान सूर्य नारायण देव आप की हर मनोकामना पूरी करे आप का आने वाला दिन शुभ रहे शुभ दोपहर वंदन भाईजी

Shuchi Singhal Jul 30, 2022

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Ramesh Agrawal Jul 30, 2022

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Ramesh Agrawal Jul 30, 2022

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R S Sharma Jul 30, 2022

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Narandra Singh Rao Jul 30, 2022

नमस्ते जी 🙏🕉️ जीवात्मा(आत्मा रुह soul) का परिचय- आत्मा अति सूक्ष्म है,परमाणुओं से भी सूक्ष्म। जो भी इकाइयां हैं चाहे नैनो मीटर, पिको मीटर आदि उनसे भी सूक्ष्म। एक सुई की नोक से भी कम जगह पर विश्व की सभी आत्माएं रखी जा सकती हैं।अतः उसे देखा ही नही जा सकता। आत्मा के रहने के स्थान के विषय में ऋषियों ने तीन स्थान बताये हैं -हृदय मस्तिष्क कंठ 1) जीवात्मा किसे कहते है ? उत्तर = एक ऐसी वस्तु जो अत्यंत सूक्ष्म है, अत्यंत छोटी है , एक जगह रहने वाली है, जिसमें ज्ञान अर्थात् अनुभूति का गुण है, जिस में रंग रूप गंध भार (वजन) नहीं है, कभी नाश नहीं होता, जो सदा से है और सदा रहेगी, जो मनुष्य-पक्षी-पशु आदि का शरीर धारण करती है तथा कर्म करने में स्वतंत्र है उसे जीवात्मा कहते हैं । 2) जीवात्मा के दुःखों का कारण क्या है ? उत्तर = जीवात्मा के दुःखों का कारण मिथ्याज्ञान है । 3) क्या जीवात्मा स्थान घेर सकती है ? उत्तर = नहीं, जीवात्मा स्थान नहीं घेरती । एक सुई की नोक पर विश्व की सभी जीवात्माएँ आ सकती हैं । 4) जीवात्मा की प्रलय मे क्या स्थिति होती है क्या उस समय उसमें ज्ञान होता है ? उत्तर = प्रलय अवस्था मे बद्ध जीवात्माएँ मूर्च्छित अवस्था में रही है । उसमें ज्ञान होता है परंतु शरीर, मन आदि साधनो के अभाव से प्रकट नहीं होता । 5) प्रलय काल मे मुक्त आत्माएं किस अवस्था में रहती है ? उत्तर = प्रलय काल में मुक्त आत्माएँ चेतन अवस्था मे रहती है और ईश्वर के आनन्द में मग्न रहती है । 6)जीवात्मा के पर्यायवाची शब्द क्या क्या है ? उत्तर = आत्मा, जीव, इन्द्र, पुरुष, देही, उपेन्द्र, वेश्वानर आदि अनेक नाम वेद आदि शास्त्र में आये हैं । 7) क्या जीवात्मा अपनी इच्छा से दुसरे शरीर मे प्रवेश कर सकता है ? उत्तर = सामान्यता नहीं कर सकता,अपवाद रुप में मुक्त वा योगी आत्मायें कर सकती हैं। मुक्ति का समय कितना है ? उत्तर - 1 महाकल्प -( ऋग्वेद 1 मंडल, 24 सूक्त, 2 मन्त्र ) = 31 नील 10 खरब 40 अरब वर्ष मुक्ति का समय है । 9)जीवात्मा स्त्री है या पुरुष है या नपुंसक है ? उत्तर = जीवात्मा तीनो भी नहीं, ये लिंग तो शरीरों के हैं । 10) क्या जीवात्मा ईश्वर का अंश है ? उत्तर = नहीं , जीवात्मा ईश्वर का अंश नहीं है । ईश्वर अखण्ड है उसके अंश= टुकडे नहीं होते है। 11) क्या जीवात्मा का कोई भार,रुप,आकार, आदि है ? उत्तर = नहीं । 12 ) जीवात्मा की मुक्ति एक जन्म में होती है या अनेक जन्म मे होती है ? उत्तर = जीवात्मा की मुक्ति एक जन्म मे नहीं अपितु अनेक जन्मो मे होती है । 13) क्या जीवात्मा मुक्ति मे जाने के बाद पुनः संसार में वापस आता है ? उत्तर = जी हाँ । जीवात्मा मुक्ति में जाने का बाद पुनः शरीर धारण करने के लिए वापस आता है । 14) जीवात्मा के लक्षण क्या है? उत्तर = जीवात्मा के लक्षण इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, ज्ञान, सुख, दुःख की अनुभूति करना है । 15) मेरा मन मानता नहीं,यह कथन ठीक है ? उत्तर = नहीं,जड़ मन को चलाने वाला चेतन जीवात्मा है । 16) क्या जीवात्मा कर्मो का फल स्वयं भी ले सकता है ? उत्तर = हाँ । जीवात्मा कुछ कर्मो का फल स्वयं भी ले सकता है जैसै चोरी का दण्ड भर कर । किंतु अपने सभी कर्मो का फल जीवात्मा स्वयं नहीं ले सकता है । 17) क्या जीवात्मा कर्म करते हुऐ थक जाता है ? उत्तर = नहीं, जीवात्मा कर्मो को करते हुवे थकता नहीं है अपितु शरीर, इन्द्रियाँ का सामर्थ्य घट जाता है । 18) जीवात्मा में कितनी स्वाभाविक शक्तियाँ हैं ? उत्तर = 24 स्वाभाविक शक्तियाँ हैं । 19) शास्त्रों में आत्मा को जानना क्यों आवश्यक बताया गया है ? उत्तर = जीवात्मा के स्वरूप को जानने से शरीर, इन्द्रिय और मन पर अधिकार प्राप्त हो जाता है , परिणाम स्वरुप आत्मज्ञानी बुरे कामों से बच कर उत्तम कार्यों को ही करता है । 20) जीवात्मा का स्वरूप ( गुण, कर्म, स्वभाव, लम्बाई, चौड़ाई, परिमाण ) क्या है ? उत्तर = जीवात्मा अणु स्वरूप, निराकार, अल्पज्ञ, अल्पशक्तिमान है, वह चेतन है और कर्म करने मे स्वतंत्र है, वाल की नोंक के दश हजारवें भाग से भी सूक्ष्म है । यह अपनी विशेष स्वतंत्र सत्ता रखता है । 21) जीवात्मा शरीर मे कहाँ रहता हे ? उत्तर = जीवात्मा मुख्य रूप से शरीर में स्थान विशेष जिसका नाम ह्रदयादेश है,वहाँ रहता है किन्तु गौण रूप से नेत्र, कण्ठ इत्यादि स्थानों में भी वह निवास करता है । २२) क्या, मनुष्य, पशु पक्षी , कीट पतंग आदि शरीरों में जीवात्मा भिन्न भिन्न होते है या एक ही प्रकार के होते है ? उत्तर = आत्मा तो अनेक है किन्तु हर एक आत्मा एक समान है | मनुष्य, पशु, पक्षी आदि कीट पतंग के शरीरो में भिन्न-भिन्न जीवात्माएं नहीं किन्तु एक ही प्रकार की जीवात्माएं है | शरीरों का भेद है आत्माओ का नहीं | २३) जीवात्मा शरीर क्यों धारण करता है? कब से कर रहा है और कब तक करेगा ? उत्तर = जीवात्मा, अपने कर्मफल को भोगने और मोक्ष को प्राप्त करने के लिए शरीर को धारण करता है। संसार के प्रारम्भ से यह शरीर धारण करता आया है और जब तक मोक्ष को प्राप्त नहीं करता तब तक शरीर धारण करता रहेगा | २४) क्या मरने के बाद जीव, भूत, प्रेत, डाकन आदि भी बनकर भटकता है ? उत्तर = मरने के बाद जीव न तो भूत, प्रेत बनता है और न ही भटकता है | यह लोगों के अज्ञान के कारण बनी हुई मिथ्या मान्यता है | २५) शरीर में जीवात्मा कब अाता है ? उत्तर = जब गर्भ धारणा होता है तभी जीवात्मा आ जाता है ,कुछ विद्वानों की धारणाये हैं कि तीसरे महीने में अथवा ८ या ९ वे महीने में आता है | २६) क्या जीव और ब्रह्म (ईश्वर) एक ही है ? अथवा क्या ' आत्मा सो परमात्मा 'एक ही है ? उत्तर = जीव और ब्रह्म एक ही नहीं है अपितु दोनों अलग-अलग पदार्थ हैं जिनके गुण कर्म स्वभाव भिन्न-भिन्न हैं | अतः यह मान्यता ठीक नहीं गलत है | २७) क्या जीव ईश्वर बन सकता है ? उत्तर- जीव कभी भी ईश्वर नहीं बन सकता है। २८) क्या जीवात्मा एक वस्तु है ? उत्तर = हाँ , जीवात्मा एक चेतन वस्तु है, वैदिक दर्शनों में वस्तु उसको कहा गया है, जिसमे कुछ गुण कर्म, स्वभाव होते हों | २९) क्या जीवात्मा शरीर को छोड़ने में और नए शरीर को धारण करने में स्वतंत्र है ? उत्तर = जीवात्मा नए शरीर को धारण करने में स्वतंत्र नहीं है अपितु ईश्वर के अधीन है | ईश्वर जब एक शरीर में जीवात्मा का भोग पूरा हो जाता है तो जीवात्मा को निकाल लेता है और उसे नया शरीर प्रदान करता है | मनुष्य आत्मा हत्या करके शरीर छोड़ने में स्वतंत्र भी है | ३०) निराकार अणु स्वरुप वाला जीवात्मा इतने बड़े शरीरों को कैसे चलता है ? उत्तर = जैसी बिजली बड़े=बड़े यंत्रों को चला देती है ऐसे ही निराकार होते हुए भी जीवात्मा अपनी प्रयत्न रुपी चुम्बकीय शक्ति से शरीरों को चला देता है | ३१) मनुष्य के मरने के बाद ८४ लाख योनियों में घूमने के बाद ही मनुष्य जन्म मिलता है | क्या यह मान्यता सही है ? उत्तर = नहीं, मनुष्य के मृत्यु के बाद तुरंत अथवा कुछ जन्मों के बाद ( अपने कर्फल भोग अनुसार ) मनुष्य जन्म मिल सकता है | ३२) शरीर छोड़ने के बाद (मृत्यु पश्च्यात) कितने समय में जीवात्मा दूसरा शरीर धारण करता है ? उत्तर = जीवात्मा शरीर छोड़ने के बाद (मृत्यु पश्च्यात) ईश्वर की व्यवस्था के अनुसार कुछ पलों में शीघ्र ही दूसरे शरीर को धारण कर लेता है | यह सामान्य नियम है | ३३) क्या इस नियम का कोई अपवाद भी होता है ? उत्तर = जी हाँ , इस नियम का अपवाद होता है | मृत्यु पश्च्चात जब जीवात्मा एक शरीर को छोड़ देता है लेकिन अगला शरीर प्राप्त करने के लिए अपने कर्मोंनुसार माता का गर्भ उपलब्ध नहीं होता है तो कुछ समय तक ईश्वर की व्यवस्था में रहता है | पश्च्चात अनुकूल माता-पिता मिलने से ईश्वर की व्यवस्थानुसार उनके यहाँ जन्म लेता है | ३४) जीवात्मा की मुक्ति क्या है और कैसे प्राप्त होती है ? उत्तर = प्रकृति के बंधन से छूट जाने और ईश्वर के परम आनंद को प्राप्त करने का नाम मुक्ति है | यह मुक्ति वेदादि शास्त्रों में बताये गए योगाभ्यास के माध्यम से समाधी प्राप्त करके समस्त अविद्या के संस्कारों को नष्ट करके ही मिलती है | ३५) मुक्ति में जीवात्मा की क्या स्थिति होती है, वह कहाँ रहता है? बिना शरीर इन्द्रियों के कैसे चलता, खाता, पीता है ? उत्तर = मुक्ति में जीवात्मा स्वतंत्र रूप से समस्त ब्रम्हांड में भ्रमण करता है और ईश्वर के आनंद से आनंदित रहता है तथा ईश्वर की सहायता से अपनी स्वाभाविक शक्तियों से घूमने फिरने का काम करता है | मुक्त अवस्था में जीवत्मा को शरीरधारी जीव की तरह खाने पीने की आवश्यकता नहीं होती है | ३६) जीवात्मा की सांसारिक इच्छायें कब समाप्त होती है ? उत्तर = जब ईश्वर की प्राप्ति हो जाती है और संसार के भोगों से वैराग्य हो जाता है तब जीवात्मा की संसार के भोग पदार्थ को प्राप्त करने की इच्छायेंं समाप्त हो जाती हैं | ३७) जीवात्मा वास्तव में क्या चाहता है ? उत्तर = जीवात्मा पूर्ण और स्थायी सुख , शांति, निर्भयता और स्वतंत्रता चाहता है | ३८)भोजन कौन खाता है शरीर या जीवात्मा ? उत्तर = केवल जड़ शरीर भोजन को खा नहीं सकता और केवल चेतन जीवात्मा को भोजन की आवश्यकता नहीं है। शरीर में रहता हुआ जीवात्मा मन इन्द्रियादि साधनों से कार्य लेने के लिए भोजन खाता है । ३९) एक शरीर में एक ही जीवात्मा रहता है या अनेक भी रहते हैं ? उत्तर = एक शरीर में कर्ता और भोक्ता एक ही जीवात्मा रहता है, अनेक जीवात्माएं नहीं रहते | हाँ, दूसरे शरीर से युक्त दूसरा जीवात्मा तो किसी शरीर में रह सकता है, जैसे माँ के गर्भ में उसका बच्चा | ४० ) जीवात्मा शरीर में विभू (व्यापक) है या परिच्छन( एकदेेेशी) ? उत्तर = शरीर में जीवात्मा एकदेशी है व्यापक नहीं, यदि व्यापक होता तो शरीर के घटने बढ़ने के कारण यह नित्य नहीं रह पायेगा | ४१) जीव की परम उन्नति, सफलता क्या है ? उत्तर = जीवात्मा की परम उन्नति आत्मा-परमात्मा का साक्षातकार करके परम शांतिदायक मोक्ष को प्राप्त करना है | ४२) क्या जीवात्मा को प्राप्त होने वाले सुख दुःख अपने ही कर्मों के फल होते है ? या बिना ही कर्म किये दूसरों के कर्मों के कारण भी सुख दुःख मिलते हैं ? उत्तर = जीवात्मा को प्राप्त होने वाले सुख दुःख अपने कर्मों के फल होते है किन्तु अनेक बार दूसरे के कर्मों के कारण भी परिणाम प्रभाव के रूप में ( फल रूप में नहीं ) सुख दुःख प्राप्त हो जाते है | ४३) किन लक्षणों के आधार पर यह कह सकते है की किस व्यक्ति ने जीवात्मा का साक्षात्कार कर लिया है ? उत्तर = मन, इन्द्रियों पर अधिकार करके सत्यधर्म न्यायाचरण के माध्यम से शुभकर्मों को ही करना और असत्य अधर्म के कर्मों को न करना तथा सदा शांत, संतुष्ट और प्रसन्न रहना इस बात का ज्ञापक होता है कि इस व्यक्ति ने आत्मा का साक्षात्कार कर लिया है | ४४) क्या ईश्वर जीवात्मा के पाप क्षमा करता है? उत्तर - ईश्वर कभी किसी मनुष्य के किए हुए पाप कर्म को क्षमा नहीं करता । मनुष्य जो पाप कर्म करता है उसका फल उसे दुख रूप में अवश्य ही भोगना पडता है जो मनुष्य यह सोचता है कि उसके द्वारा किए जा रहे पाप कर्म को कोई देख नहीं रहा है यह उस मनुष्य की सबसे बडी अज्ञानता है मूर्खता है क्योंकि ईश्वर कण कण में विद्धमान है और स्वंय उस पाप कर्म को करने वाले मनुष्य के अंदर बैठा हुआ,मनुष्य द्वारा मन,वचन और इन्द्रियों के द्वारा किए जा रहे पाप व पुण्य कर्म को देख रहा है जो मनुष्य पाप कर्म कर देता है परंतु बाद में उसका पश्चाताप करता है और आगे से पाप कर्म नहीं करने की प्रतिज्ञा करता है प्रति दिन ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना और उपासना करता है ईश्वर उस मनुष्य की आत्मा के बल को इतना बढा देता है कि जब दुख उसके जीवन में आता है तो वह दुख से घबराता नहीं है योगीराज श्री कृष्ण जी महाराज ने गीता के अन्दर कहा है"अवश्यमेव हि भोक्तव्यं कृतं कर्मः शुभाशुभम्" मनुष्य जो भी शुभ और अशुभ कार्य करता है उनका फल उसे सुख व दुख रूप में अवश्य ही भोगना पडता है इसलिए जो भी कोई गुरू या व्यक्ति आपसे कहे कि किसी पर विशावास करने से,वह ईश्वर से आपके पाप कर्म को क्षमा करा देगा अथवा फलां मंदिर या तीर्थ स्थान पर जाने ,दान देने या स्थान करने से आपका पाप कर्म ईश्वर क्षमा कर देगा , यह समझिए वह ठग है और आपको धोखा दे रहा है क्योंकि ईश्वर अपनी न्याय व्यवस्था में किसी की सहायता नहीं लेता और ना ही किसी की सिफारिशें मानता है |

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R S Sharma Jul 28, 2022

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mymandir Jul 28, 2022

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Rajni Jul 30, 2022

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Narandra Singh Rao Jul 30, 2022

अवश्य पढ़ें..... अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा महल में झाड़ू लगा रही थी तो द्रौपदी उसके समीप गई उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बोली, "पुत्री भविष्य में कभी तुम पर दुख, पीड़ा या घोर से घोर विपत्ति भी आए तो कभी अपने किसी नाते-रिश्तेदार की शरण में मत जाना सीधे भगवान की शरण में जाना उत्तरा हैरान होते हुए माता द्रौपदी को निहारते हुए बोली:-आप ऐसा क्यों कह रही हैं माता?" द्रौपदी बोली:-क्योंकि यह बात मेरे ऊपर भी बीत चुकी है। जब मेरे पांचों पति कौरवों के साथ जुआ खेल रहे थे, तो अपना सर्वस्व हारने के बाद मुझे भी दांव पर लगाकर हार गए। फिर कौरव पुत्रों ने भरी सभा में मेरा बहुत अपमान किया मैंने सहायता के लिए अपने पतियों को पुकारा मगर वो सभी अपना सिर नीचे झुकाए बैठे थे। पितामह भीष्म, द्रोण, धृतराष्ट्र सभी को मदद के लिए पुकारती रही मगर किसी ने भी मेरी तरफ नहीं देखा, वह सभी आंखे झुकाए आंसू बहाते रहे फिर मैने भगवान श्रीद्वारिकाधीश को पुकारा:-हे प्रभु अब आपके सिवाय मेरा कोई भी नहीं है। भगवान तुरंत आए और मेरी रक्षा करी। इसलिए वेटी जीवन में जब भी संकट आये आप भी उन्हें ही पुकारना जब द्रौपदी पर ऐसी विपत्ति आ रही थी तो द्वारिका में श्रीकृष्ण बहुत विचलित हो रहे थे। क्योंकि उनकी सबसे प्रिय भक्त पर संकट आन पड़ा था रूकमणि उनसे दुखी होने का कारण पूछती हैं तो वह बताते हैं मेरी सबसे बड़ी भक्त को भरी सभा में नग्न किया जा रहा है। रूकमणि बोलती हैं, "आप जाएं और उसकी मदद करें। "श्रीकृष्ण बोले," जब तक द्रोपदी मुझे पुकारेगी नहीं मैं कैसे जा सकता हूं। एक बार वो मुझे पुकार लें तो मैं तुरंत उसके पास जाकर उसकी रक्षा करूंगा तुम्हें याद होगा जब पाण्डवों ने राजसूर्य यज्ञ करवाया तो शिशुपाल का वध करने के लिए" मैंने अपनी उंगली पर चक्र धारण किया तो उससे मेरी उंगली कट गई उस समय "मेरी सभी 16 हजार 108 पत्नियां वहीं थी कोई वैद्य को बुलाने भागी तो कोई औषधि लेने चली गई" मगर उस समय "मेरी इस भक्त ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़ा और उसे मेरी उंगली पर बांध दिया । आज उसी का ऋण मुझे चुकाना है लेकिन जब तक वो मुझे पुकारेगी नहीं मैं नहीं जाऊंगा अत: द्रौपदी ने जैसे ही भगवान कृष्ण को पुकारा प्रभु तुरंत ही दौड़े चले गये हमारे जीवन में भी कही संकट आते रहते है प्रभु-स्मरण, उनके प्रति किया "सत्-कर्म" हमारी सहयाता के लिए भगवान को बिवस कर देता है और तुरन्त संकट टल जाता है 🙏🙏जय श्री कृष्ण 🙏🙏

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