sachin jain
sachin jain Dec 6, 2021

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Gopalchandra porwal Jan 27, 2022

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sn vyas Jan 27, 2022

🌱🐁🌱🐀🌱🐁🌱🐀🌱🐁 *🙏🏻सादर वन्दे 🙏🏻* *🚩धर्म यात्रा 🚩* *🌷चिंतामन गणेश मन्दिर , सिहोर म.प्र.🌷* सम्पूर्ण भारत में चिंतामन सिद्ध गणेशजी की चार स्वयंभू प्रतिमाएँ स्थापित है , जो की सवाई माधोपुर ( राजस्थान ) , उज्जैन स्थित चिन्तामन गणेश , गुजरात में सिद्धपुर एवं मध्य प्रदेश में यह मन्दिर भोपाल से 39 कि.मी. दूर सिहोर में , गोपालपुर में स्थित है । गर्भगृह में भगवान श्री गणेशजी की मुर्ति है और उनके साथ रिद्धि -- सिद्धि गणेशजी के आजू-बाजू में विराजमान है। भगवान श्री गणेशजी ने चांदी का मुकुट धारण किया है। गणेशजी यहाँ पर स्वयंभू है , अर्थात श्री गणेशजी यहाँ पर स्वयं उत्पन्न हुए हैं। उन्हें विराजमान नहीं किया गया है। यहाँ बहुत अच्छा लगता है , बहुत शांति मिलती है । मुख्य गणेश मन्दिर के बाहर और भी बहुत सारे मन्दिर बने हुए हैं। गणेश मन्दिर के बाहर , बरगद के पेड़ के नीचे श्री बटुकेश्वर , श्री धन कुबेर मन्दिर बना हुआ था। यहाँ पर हनुमान जी और श्री काल भैरव जी की प्रतिमा भी विराजमान है । इस मन्दिर को पूरी तरह लोहे की जालियां से कवर कर दिया गया है। मन्दिर के पीछे की तरफ दीवार में स्वास्तिक बनाया जाता है।यहाँ पर लोग का विश्वास है , कि स्वास्तिक बनाने से लोगों की इच्छाएं पूरी होती हैं और यहाँ पर जब लोग आते हैं , तो उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। जब लोगों की इच्छाएं पूरी होती है। तब वह दोबारा श्री गणेशजी के दर्शन करने के लिए आते हैं और फिर स्वास्तिक को सीधा बनाते हैं। गणेश मन्दिर के ठीक पीछे ही शीतला माता का मन्दिर भी बना हुआ है लोगों शीतला माता के दर्शन भी करते हैं। कहा जाता है कि सम्राट विक्रमादित्य सीवना नदी से कमल पुष्प के रूप में प्रगट हुए भगवान् श्री गणेश को रथ में लेकर जा रहे थे । सुबह होने पर रथ जमीन में धंस गया तथा रथ में रखा कमल पुष्प श्री गणेश प्रतिमा में परिवर्तित होने लगा ।यह प्रतिमा जमीन में धंसने लगी , आज भी यह प्रतिमा जमीन में आधी धंसी हुई है ।बाद में इसी स्थान पर गणेश मन्दिर का निर्माण कराया गया । इतिहासकारों के अनुसार , मराठा पेशवा बाजीराव प्रथम को , स्थानीय रहवासियों ने , यहाँ पर विराजित भगवान् श्री गणेश की महिमा के बारे में बताया , जिसे सुन पेशवा बाजीराव ने रात्री के समय ही यहाँ विराजित श्री गणेश की प्रतिमा के दर्शन की ठानी एवं दर्शन करके मनोकामना की । मनोकामना पूर्ण होने पर पेशवा बाजीराव द्वारा श्री गणेश प्रतिमा को अन्यत्र ले जाना चाहा । स्थानीय नागरिकों द्वारा उन्हें प्रतिमा को कहीं और न ले जाने का विनम्र अनुरोध किया परन्तु बाजीराव पेशवा अपनी जिद पर अड़े रहे , तब रात्री के समय बाजीराव पेशवा को निंद्रा अवस्था में श्री गणेश द्वारा क्षणिक स्वप्न के माध्यम से यह सन्देश दिया कि राजन तुम मुझे अन्यत्र ले जाने का प्रयास मत करो में मां पार्वती के भक्तों की इच्छा अनुसार यही बिराजूंगा और यह स्थान भी सिद्ध हो गया है , तब बाजीराव पेशवा चिंतामन श्री गणेश मन्दिर के रूप में जाना जाता है । बताया जाता है कि श्री गणेशजी के मन्दिर में विराजित गणेशजी की प्रतिमा की आँखों में हीरे जड़े हुए थे। 150 वर्ष पूर्व तक इस मन्दिर में ताला नहीं लगाया जाता था , तब चोरों ने मूर्ति की आँखों में लगे हीरो की चोरी कर ली , तब श्री गणेशजी की प्रतिमा की आँखों में से 21 दिन तक दूध की धारा बही थी।तब भगवान श्री गणेशजी ने पुजारी को स्वप्र देकर कहा कि में खंडित नहीं हुआ हूँ । तुम मेरी आँखों में चाँदी के नेत्र लगवा दो। तभी से भगवान श्री गणेश की आँखों में चाँदी के नेत्र लगाए गए हैं , तब से जन-जन में उनके प्रति आस्था बढ़ गई। *सीहोर* , इंदौर भोपाल राजमार्ग पर , भोपाल से करीब 38 कि.मी. , देवास से करीब 117 कि.मी. और इंदौर से करीब 158 कि.मी, दूर स्थित है l 🌱🐁🌱🐀🌱🐁🌱🐀🌱🐁

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kaluram Godara Jan 26, 2022

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