M. K. MALHOTRA
M. K. MALHOTRA Sep 29, 2021

Jai Mata Di Radhey Radhey Ji Suvichar 9212899445 Shubh Ratri

Jai Mata Di
Radhey Radhey Ji
Suvichar 9212899445
Shubh Ratri

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Shuchi Singhal Sep 29, 2021
Jai Shri Krishna Radhe Radhe Shub Ratri Bhaiya ji🙏🍁🍃

SANTOSH YADAV Sep 29, 2021
जय श्री गणेश शुभ रात्रि वंदन जी

Archana Singh Sep 29, 2021
🙏🌹ओम श्री गणेशाय नमः🌹🙏 शुभ रात्रि वंदन जी🙏🌹 आप सभी भाई बहनों पर गणपति बप्पा की असीम कृपा सदैव बनी रहे🙏🌹🌹🙏

Bindu Singh Sep 29, 2021
Jai shree krishna ji Radhe Radhe ji bhai ji good 🙏🏼

Mamta Chauhan Sep 29, 2021
Radhe radhe ji🌹🙏Shubh ratri vandan bhai ji aapka har pal mangalmay ho khushion bhra ho aapki sabhi manokamna puri ho🌹 Radhe radhe 🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹

Manoj Gupta AGRA Sep 30, 2021
jai shree radhe krishna ji 🙏🙏🌷🌸💐 shubh prabhat vandan ji 🙏🙏🌷🌸

Gd Bansal Sep 30, 2021
जय श्री लक्ष्मी नारायण ।।

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 Sep 30, 2021
जय श्री लक्ष्मी नारायण जी शुभ दोपहर नमस्कार मेरे आदरणीय भाई जी 🙏🌼🙏श्री हरि विष्णु जी की कृपा और आशीर्वाद से आपका घर संसार सदैव सुखी व स्वस्थ रहे खुशियोंभरा रहे आप का सदा मगंल हो भैया जी 🙏🙌🍎🍏🍎🍏🍎🍏🍎🍏🍎🍏

Pinu Dhiman Jai Shiva 🙏 Sep 30, 2021
अति सुन्दर प्रस्तुति भाई जी अति उत्तम शब्दावली बहुत ही सुंदर पोस्ट की है आप ने भाई जी 🙏🌼🙏👌🌹👌🌹👌🌹👌

SANTOSH YADAV Oct 2, 2021
जय श्री गणेश शुभ रात्रि वंदन जी

Ravi Kumar Taneja Oct 5, 2021
राम राम जी 🙏💐🙏 🏹परम कृपालु प्रभु श्रीरामजी की असीम कृपा दृष्टि आप सभी पर हमेशा बनी रहे 🙏🌹🙏 बजरंग बली की कृपा से आप हमेशा स्वस्थ रहे,मस्त रहे, सदा मुस्कुराते रहे!!!🙏⚘🙏 🙏शुभ दोपहर स्नेह वंदन जी 🙏 🕉🏹🙏🌷🙏🌷🙏🏹🕉

Brajesh Sharma Oct 9, 2021
प्रेम से बोलो जय माता दी जय माता दी ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव खुश रहें मस्त रहें मुस्कुराते रहें स्वस्थ रहें राम राम जी जय जय श्री राम

Brajesh Sharma Oct 14, 2021
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते जय श्री राधे कृष्णा जी... ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव खुश रहें मस्त रहें मुस्कुराते रहें स्वस्थ रहें राम राम जी जय जय श्री राम

Arti Kesarwani Oct 30, 2021
Radhe Radhe bhai Sahab ji aap Khush rahiye mast rahiye swasth rahiye ji 🙏🏻🙏🏻🌹🌹🥰

Brajesh Sharma Nov 2, 2021
जय श्री राधे राधे जी *दीप जले तो रोशन आपका जहान हो;* *पूरा आपका हर एक अरमान हो;* *माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर;* *इस धनतेरस पर आप बहुत धनवान हों!* *आज से ही आपके यहाँ धन की बरसात हो;* *माँ लक्ष्मी का वास हो, संकटों का नाश हो;* *हर दिल पर आपका राज हो;* *उन्नति का सर पर ताज हो;* *और घर में शांति का वास* *हो!,,,,,आपको व आपके समस्त* *परिवार को धनतेरस की बहुत बहुत हार्दिक* *शुभकामनाएँ*जी🚩🚩🙏🙏 राम राम सा

Shuchi Singhal Nov 27, 2021

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Shuchi Singhal Nov 25, 2021

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lalit mohan jakhmola Nov 25, 2021

****जय श्री राधे कृष्णा जी*** ##विज्ञान और संस्कार का अति सुन्दर वार्तालाप## @*एक माँ* अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने *विदेश में रहने वाले बेटे* से विडियो चैट करते वक्त *पूछ बैठी-* *"बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या नहीं?"* *बेटा बोला-* *"माँ, मैं एक जीव वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम* कर रहा हूँ। *विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन.. क्या आपने उसके बारे में सुना भी है?"* *उसकी माँ मुस्कुराई* और *बोली.....* *"मैं डार्विन के बारे में जानती हूँ बेटा.. उसने जो भी खोज की, वह वास्तव में सनातन-धर्म के लिए बहुत पुरानी खबर है।"* “हो सकता है माँ!” बेटे ने भी *व्यंग्यपूर्वक* कहा। *“यदि तुम कुछ समझदार हो, तो इसे सुनो..” उसकी माँ ने प्रतिकार किया।* *“क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है?* *विष्णु के दस अवतार ?”* बेटे ने सहमति में कहा... *"हाँ! पर दशावतार का मेरी रिसर्च से क्या लेना-देना?"* *माँ फिर बोली-* *"लेना-देना है..* *मैं तुम्हें बताती हूँ कि तुम और मि. डार्विन क्या नहीं जानते हो ?"* *“पहला अवतार था 'मत्स्य', यानि मछली।* ऐसा इसलिए कि *जीवन पानी में आरम्भ हुआ। यह बात सही है या नहीं?”* बेटा अब ध्यानपूर्वक सुनने लगा.. “उसके बाद आया *दूसरा अवतार 'कूर्म', अर्थात् कछुआ* क्योंकि *जीवन पानी से जमीन की ओर चला गया.. 'उभयचर (Amphibian)',* तो *कछुए ने समुद्र से जमीन की ओर के विकास को दर्शाया।”* *“तीसरा था 'वराह' अवतार, यानी सूअर।* जिसका मतलब *वे जंगली जानवर, जिनमें अधिक बुद्धि नहीं होती है*। *तुम उन्हें डायनासोर कहते हो।”* बेटे ने आंखें फैलाते हुए सहमति जताई.. *“चौथा अवतार था 'नृसिंह', आधा मानव, आधा पशु*। जिसने दर्शाया *जंगली जानवरों से बुद्धिमान जीवों का विकास।”* *“पांचवें 'वामन' हुए, बौना जो वास्तव में लंबा बढ़ सकता था*। क्या तुम जानते हो ऐसा क्यों है? *क्योंकि मनुष्य दो प्रकार के होते थे- होमो इरेक्टस(नरवानर) और होमो सेपिअंस (मानव),* और *होमो सेपिअंस ने विकास की लड़ाई जीत ली।”* बेटा दशावतार की प्रासंगिकता सुन के स्तब्ध रह गया.. माँ ने बोलना जारी रखा- *“छठा अवतार था 'परशुराम', जिनके पास शस्त्र (कुल्हाड़ी) की ताकत थी*। वे दर्शाते हैं उस *मानव* को, *जो गुफा और वन में रहा.. गुस्सैल और असामाजिक।”* *“सातवां अवतार थे 'मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम', सोच युक्त प्रथम सामाजिक व्यक्ति।* जिन्होंने *समाज के नियम बनाए और समस्त रिश्तों का आधार।”* *“आठवां अवतार थे 'भगवान श्री कृष्ण', राजनेता, राजनीतिज्ञ, प्रेमी।* जिन्होंने समाज के नियमों का आनन्द लेते हुए यह सिखाया कि *सामाजिक ढांचे में रहकर कैसे फला-फूला जा सकता है?*” बेटा सुनता रहा, चकित और विस्मित.. *माँ ने ज्ञान की गंगा प्रवाहित रखी -* *“नवां * थे 'महात्मा बुद्ध', वे व्यक्ति जिन्होंने नृसिंह से उठे मानव के सही स्वभाव को खोजा। उन्होंने मानव द्वारा ज्ञान की अंतिम खोज की पहचान की।”* “..और अंत में *दसवां अवतार 'कल्कि' आएगा।* *वह मानव जिस पर तुम काम कर रहे हो.. वह मानव, जो आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतम होगा।”* *बेटा अपनी माँ को अवाक् होकर देखता रह गया..* *अंत में वह बोल पड़ा-* *“ ... यह अद्भुत है माँ.. हिंदू दर्शन वास्तव में अर्थपूर्ण है!”* *मित्रों..* *वेद, पुराण, ग्रंथ, उपनिषद इत्यादि सब अर्थपूर्ण हैं। सिर्फ आपका देखने का दृष्टिकोण होना चाहिए। फिर चाहे वह धार्मिक हो या वैज्ञानिकता...🙏* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

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Malti Bansal Nov 27, 2021

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Ram Niwas Soni Nov 27, 2021

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JAGDISH BIJARNIA Nov 28, 2021

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Vandana Singh Nov 27, 2021

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Seemma Valluvar Nov 27, 2021

#दिव्य_दाम्पत्य मनु और शतरूपा ने जब अपनी पुत्री देवहूति का हाथ कर्दम ऋषि के हाथ में देने की इच्छा प्रकट की। तो कर्दम ने कहा-'मैं भोग-विलास के लिये नहीं, परंतु पत्नी के साथ नित्य सत्संग करके आत्मसुख प्राप्त करने के लिये ही विवाह करना चाहता हूँ। मुझे भोगपत्नी नहीं, धर्मपत्नी चाहिये। हमारा सम्बन्ध संसार का उपभोग करने के लिये नहीं, बल्कि नाव और नाविक की तरह संसार-सागर पार करने के लिये होगा। अत: एक पुत्र की प्राप्ति के बाद मैं संन्यास ले लूँगा। क्या आपको स्वीकार्य है?' मनु-शतरूपा बड़ी उलझन में पड़े, किंतु देवहूति ने तपस्वी की सेवा स्वीकार कर ली और वल्कल वस्त्र पहन लिये। विवाह के बाद दम्पती ने बारह वर्ष तक ब्रह्मचर्य-व्रत का पालन किया और पत्नी ने पति-सेवा के व्रत का निर्वाह किया। सेवा से प्रसन्न होकर कर्दम ने पत्नी की इच्छा को पूर्ण करना चाहा तो पत्नी ने कहा, 'और दूसरी वस्तु क्या माँगूँ ? हाथ पकड़कर लाये हो तो हाथ पकड़कर प्रभु के दरबार में भी पहुँचा दीजिये।' ऐसे दिव्य दाम्पत्य के द्वार पर ही भगवान् कपिल पुत्ररूप में पधारे। विवाह के बारे में कैसी सुन्दर जीवन-दृष्टि है। जय श्री राधेकृष्णा 🙏🌺🌺🌺🌺🚩

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