🥀 Preeti Jain 🥀
🥀 Preeti Jain 🥀 Sep 22, 2022

ढाबे वाली आंटी जी...वो खाना..मिलेगा क्या" प्रमोद ने सकुचाते हुए उनसे पूछा "नए आये हो न?...ढाबे में खाना नहीं मिलेगा तो और क्या मिलेगा" उनकी अनुभवी आँखों ने उसकी सकुचाहट को पढ़ लिया "क्या लगाऊँ ?" उन्होंने पूछा "जी..अ..बस ये लोग जो खा रहे हैं..मतलब दाल रोटी.. कितने की होगी ये ?" एक दो लोग और थे जो वहाँ खाना खा रहे थे उनकी थाली में दाल रोटी सब्जी चावल देख के प्रमोद ने वही खाने को उनसे कह दिया "20 रुपैये की थाली है...चार रोटी दाल सब्जी और चावल..आराम से बैठो बेटा...लगाती हूँ" उन्होंने बड़ी ममता से कहा और रसोई में चली गईं "ओह्ह..जी पर एक बात है...मेरे पास सिर्फ...सिर्फ..उन्नीस रूपैये हैं.." प्रमोद बड़ी शर्मिन्दिगी से बोल पाया "कोई नहीं..बाद में दे देना..अब खाना खाने तो रोज ही आओगे न यहाँ" उन्होंने जाते जाते मुड़के मुस्कुराते हुए वात्सल्य प्रेम में डूबी आवाज में मुझसे कहा "जी..जी..ठीक है" वह चैन की साँस लेते हुए बोला उसके बाद खाना खाया और पैसे देकर वह अपने कमरे पे आ गया एक गरीब माँ बाप का होनहार मगर बहुत शर्मीला बेटा प्रमोद यहाँ लखनऊ में आगे पढ़ने आया था सेक्टर क्यू के पास बेलिगारद में एक सस्ता कमरा लेकर रह रहा था आज उसका पहला दिन है, बेलिगारद चौराहे ,वैसे ये है तो तिराहा पर इसे चौराहा क्यों कहते हैं किसीको नहीं पता,इसी चौराहे पर ये आंटी का ढाबा है ढाबा क्या सड़क किनारे बने एक छोटे से मकान के निचले हिस्से में एक महिला जिन्हें सब ऑन्टी कहते हैं मीनू में सिर्फ दो आइटम वाला ये ढाबा चलाती हैं ढाबे में मजबूर मगर मध्यम लोग ही खाना खाने आते हैं जो सस्ता खाना ढूँढते हैं इसलिए ढाबे की हालत और उसकी कमाई में से कौन ज्यादा खस्ताहाल है ये कहना जरा मुश्किल है अगले दिन प्रमोद फिर जाता है ढाबे में आंटी उसे देखकर मुस्कुराती हैं वह भी हल्का मुस्कुराता है शायद कल के बाद से थोड़ा सा आत्मविश्वास आया है उसने कहा "आंटी..खाना लगा दीजिये...पर आपसे एक विनती है..आप थाली से एक रोटी..कम कर दीजिये..क्योंकि मेरे पास उन्नीस रुपैये से ज्यादा खाने पे खर्च करने को नहीं हैं" उसने सोचा खाने से पहले ही साफ़ साफ़ बता दिया जाय I हालाँकि बजट बीस रुपैये का था पर एक रुपैया रोज बचा के जब छुट्टियों में घर जाऊँगा तो अपनी माँ के लिए कुछ उपहार ले जाऊँगा ये सोच के प्रमोद ने यह नीति बनाई थी "ठीक है..बैठ जाओ..अभी लगाती हूँ..." कहकर वो रसोई में चली गईं एक तरफ की दीवार से लगीं मेज कुर्सियां पड़ी थीं और दूसरी ओर एक दीवार पे जमीन से करीबन ढाई फुट ऊँचा एक प्लेटफॉर्म बना था जिसपे चूल्हा बर्तन इत्यादि रखे थे बस वही रसोई थी आंटी का कद बहुत छोटा है जिसकी वजह से रसोई का प्लेटफॉर्म उनसे थोड़ी ज्यादा ऊँचाई पे पड़ता है और उन्हें खाना बनाने के काम में काफी कठिनाई आ रही है ...थोड़ी देर बाद वो खाने की थाली ले आईं "अरे...आपतो इसमें चार रोटी ले आईं.. मैंने आपसे कहा..." मैं आगे कुछ कहता कि वो बोल पड़ीं " देखो बेटा.. मैं एक बूढ़ी अकेली औरत बस इसलिए ढाबा चलाती हूँ..कि तुम लोगों के साथ... मेरी भी दो रोटी का इंतजाम हो जाए... अब एक रुपैये के लिए क्या तेरा पेट काटूँगी" कहकर उसके सर पे हाथ फेरकर वो चली गईं ऐसे ही रोज ये क्रम चलता रहा प्रतिदिन वह ऑन्टी को ऊँचे प्लेटफॉर्म पे बड़ी मुश्किल से काम करते देखता,घुटनो में तकलीफ के कारण बैठ के कोई काम उनसे हो नहीं पाता था,खाना खाता ,उन्नीस रुपये देता कुछ हल्की फुल्की बातें उनसे होती बस ऐसे ही कुछ महीने बीत गए और फिर आज के दिन वह काफी देर से ढाबे पे आया "अरे..आज बड़ी देर कर दी तूने...सब ठीक तो है..बैठ मैं खाना लगाती हूँ" ऑन्टी की आँखों में चिंता थी, प्रमोद ने कहा "सब ठीक है और हाँ खाना तो खाऊंगा ही..पर पहले आप रसोई में आओ मेरे साथ..." उनका हाथ पकड़ के वह रसोई वाले हिस्से में उन्हें ले आया और उन्हें रसोई के प्लेटफॉर्म की ओर खड़ा किया और फिर उनके पैरों के नीचे पूजापाठ वाली दुकान से खरीदी लकड़ी की एक मजबूत चौकी रखने लगा तो वो आश्चर्य से भर गईं,उसपे खड़ी हुईं और उनकी आँखों ने न जाने कितने वर्षों के बंधे बाँध खोल दिए.. प्रमोद ने उनके पैर छुए और कहा "हैप्पी मदर्स डे.....ऑन्टी" आंटी ने प्रमोद को गले लगा लिया, और रोते हुए बोली- ऐसा बेटा भगवान सभी को दे! 🙏

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कामेंट्स

राधे राधे Sep 22, 2022
जय श्री राधे कृष्णा जी हरिओम नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः जी शुभ मधुर मंगलमय सुप्रभात वंदन जी बहनजी श्री हरि विष्णु जी माता महालक्ष्मी जी की असीम कृपा आशीर्वाद आपके घर परिवार मे सदैव ही बना रहे जी आप के घर परिवार मे सदैव ही सुख सौभाग्य समृद्धि धन यश वैभव खुशियां बनी रहे जी आप सभी का हर दिन हरपल खुशियों से भरा रहे जी आप सपरिवार खुश रहे हंसते मुस्कुराते रहे जी बहनजी श्री हरि विष्णु जी माता महालक्ष्मी जी के चरणों मे यही विनती यही प्रार्थना करते है जी आप सभी के सभी कार्य सम्पन्न हो जी आप सपरिवार सकुशल रहे आप सपरिवार स्वस्थ रहे खुश रहे हंसते मुस्कुराते रहे जी आप के घर परिवार मे हर पल आनंद मंगलबनारहेजी आप का घर आंगन खुशियों से भरा रहे जी आप सभी को जी जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏🏻🌹🙏 राम राम जी 🙏🏻🌹🙏

Ashwin r chauhan Sep 22, 2022
जय श्री कृष्ण राधे राधे जी राधा रानी की कृपा आप पर आप के पूरे परिवार पर सदेव बनी रहे आप का हर पल मंगल एवं शुभ रहे भगवान श्री कृष्णा जी आप की हर मनोकामना पूरी करें आप का आने वाला दिन शुभ रहे शुभ रात्री वंदन जी जय जिनेन्द जय महावीर जय श्री कृष्ण

Rajpal Singh Sep 22, 2022
Jai shree krishna Radhey Radhey ji good night ji 🙏🙏🙏🙏🙏

Brajesh Sharma Sep 22, 2022
श्री बांके बिहारी लाल की जय

Brajesh Sharma Sep 22, 2022
मोर मुकुट बंसी वाले की जय

Brajesh Sharma Sep 22, 2022
खुश रहें मस्त रहें स्वस्थ रहें

Panji Panchal Sep 22, 2022
नमस्कार जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति कहानी बहुत अछी

Shiv Sharan Vajpeyee Sep 22, 2022
जय श्री गणेश🙏🔱🔱🙏🌹🌹🌸🌸 जय मां आदिशक्ति🔱🔱🙏🙏🌼🌼🍁🍀🌹🌹🌿🌿🌷 हर हर महादेव शंभू🙏🙏🌻🔱🔱🌻🌿🌿🌿 जय माता दी 🙏🙏 "To make no mistakes is not in the power of man; but from their errors and mistakes the wise and good learn wisdom for the future."🙏🏿 "कोई गलती न करना मनुष्य के बूते की बात नहीं है, लेकिन अपनी त्रुटियों और गलतियों से समझदार व्यक्ति भविष्य के लिए बुद्धिमत्ता अवश्य सीख लेते हैं।" 🙏🏿 Word Of The Day *Unsolicited* *अनचाही* Good morning ji 🙏

RAJESH RAJESH Sep 23, 2022
JAI MATA DI 🙏SHUBH PRABHAT VANDAN MERI BEHENA JI 🙏MATA RANI KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGAL MAY HO AAP OR AAP KA PARIVAR HAMESA KHUS RAHE SWATH RAHE SUKHI RAHE MERI BEHENA OM SHANTI 🙏

मदन पाल सिंह Sep 23, 2022
जय श्री राधे कृष्णा जी शूभ प्रभात वंदन जी राघा रानी जी कि कृपा आप व आपके परिवार पर बनीं रहे जी 🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌷🌷🌷🌷🚩

Rakesh Sharma Sep 23, 2022
JAI SHREE RADHE KRISHNA JI H SHREE KRISHNA KARUNASINDHO DINBANDHO JAGATPATE G0PESH G0PIKAKANT RADHAKANTA NANOSTUTE NAMO NAMH 🌷🌹🌹🌷🙏 GANESHOTSAV

Rakesh Sharma Sep 23, 2022
NICE VERY NICE BEAUTIFUL EXCELLENT UR P0ST 👌👌👌👌👌👌👍🙏🥀

Dinesh Sep 23, 2022
जय श्री राधाकृष्ण जी

रिटायर्ड बेचारा करे तो क्या करे * ------------------------------------- *1. रिटायर व्यक्ति अगर देर तक सोया रहे तो....* *बीवी :* अब उठ भी जा इये ! आपके जैसा भी कोई सोता है क्या ? रिटायर हो गये तो इसका मतलब यह नहीं कि सोते ही रहियेगा....! 😐😐😐😐😐 *2. रिटायर व्यक्ति अगर जल्दी उठ जाये तो....* *बीवी:* आपको तो बुढापे में नींद पड़ती नहीं, एक दिन भी किसी को चैन से सोने नही देते हो, 5:30 बजे उठ कर बड़ बड़ करने लगते हो। अब तो आफिस भी नहीं जाना है, चुपचाप सो जाइये और सबको सोने दीजिए.....! 😢😢😢 *३. रिटायर व्यक्ति अगर घर पर ही रहे तो....* *बीवी:* सबेरा होते ही मोबाइल लेकर बैठ जाते हो और चाय पर चाय के लिए चिल्लाते रहते हो, कुछ काम अपने से भी कर लिया कीजिए । सब लोगों को कुछ न कुछ काम रहता है, कौन दिनभर पचास बार चाय बना कर देता रहे। यह नहीं होता है कि जल्दी से उठकर नहा धोकर नाश्ता पानी कर लें, अब इनके लिए सब लोग बैठे रहें....! 😢😢😢 *4. रिटायर व्यक्ति अगर घर से देर तक बाहर रहे तो....* *बीवी :* कहाँ थे आप आज पूरा दिन ? अब नौकरी भी नही है, कभी मुँह से भगवान का नाम भी ले लिया कीजिए...! 😢😢😢 *5. रिटायर व्यक्ति अगर पूजा करे तो...* *बीवी :* ये घन्टी बजाते रहने से कुछ नहीं होने वाला। अगर ऐसा होता तो इस दुनिया के रईसों में टाटा या बिल गेट्स का नाम नहीं होता, बल्कि किसी पुजारी का नाम होता...! 😢😢😢 *6. अगर रिटायर व्यक्ति खाली समय में पैसा कमाने के लिए कुछ काम करे तो...* *बीवी :* हर वक़्त काम, काम काम, आपके पास अब नौकरी भी नही सिर्फ काम का नाटक उसी से सात फेरे ले लेने चाहिए थे। हम क्या यहाँ पर बंधुआ मजदूर हैं जो सारा दिन काम करें और शाम को आपका इंतज़ार करें...? 😢😢😢 *7. रिटायर व्यक्ति अगर पत्नी को घुमाने के लिए ले जाए तो...* *बीवी :* देखिये, सक्सेना जी अपनी बीबी को हर महीने घुमाने ले जाते हैं और वो भी स्विट्ज़रलैंड और दार्जिलिंग जैसी जगहों पर, आपकी तरह "हरिद्वार" नहाने नहीं जाते....! 😢😢😢 *8. रिटायर व्यक्ति अगर अपनी जिंदगी भर की बचत से नैनीताल, मसूरी, गोवा, माउन्ट आबू, ऊटी जैसी जगहों पर घुमाने ले भी जाए तो....!* *बीवी :* अपना घर ही सबसे अच्छा, बेकार ही पैसे लुटाते फिरते है। इधर उधर बंजारों की तरह घूमते फिरो। क्या रखा है घूमने में ? इतने पैसे से अगर घर पर ही रहते तो पूरे 2 साल के लिए कपड़े खरीद सकते थे...! *9.रिटायर व्यक्ति पुराने गानों का शौक़ीन हो तो... !* *बीवी:* बुढ़ापे में गाने भाते हैं, कोई भजन या राम के नाम ही ले लिया करो.....! *10.रिटायर व्यक्ति अगर मन बहलाने के लिए फोन करे तो....!* *बीवी :* दिन भर फोन पर लगे रहते हो, हम तो नहीं करते किसी को.....फोन! *11. रिटायर व्यक्ति बन ठन कर घर में रहे तो....!* *बीवी :* बुढ़ापे में क्या सिंगार करते हो, घर में बहुएें क्या कहेंगी...! *वाह रे! रिटायर आदमी* बेचारा रिटायर्ड आदमी 🙏🙏आप ही बताइए

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Gopal Jalan Jul 30, 2022

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Ramesh Agrawal Jul 30, 2022

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*जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई* ~~~~~~~~~~~~~ *एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर* *बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में एक हीरों का हार था,* *जिसे उतार कर वहीं आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी।* *इतने में एक कौवा आया।* *उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, तो उसे लेकर उड़ गया।* *एक पेड़ पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश की, पर खा न सका।* *कठोर हीरों पर मारते-मारते चोंच दुखने लगी।* *अंतत: हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ कर वह उड़ गया।* *जब रानी के बाल सूख गए तो उसका ध्यान अपने हार पर गया,* *पर वह तो वहां था ही नहीं।* *इधर-उधर ढूंढा, परन्तु हार गायब।* *रोती-धोती वह राजा के पास पहुंची,* *बोली कि हार चोरी हो गई है, उसका पता लगाइए।* *राजा ने कहा, चिंता क्यों करती हो,* *दूसरा बनवा देंगे।* *लेकिन रानी मानी नहीं,* *उसे उसी हार की रट थी।* *कहने लगी,नहीं मुझे तो वही हार चाहिए।* *अब सब ढूंढने लगे, पर किसी को हार मिले ही नहीं।* *राजा ने कोतवाल को कहा,* *मुझ को वह गायब हुआ हार लाकर दो।* *कोतवाल बड़ा परेशान*, *कहां मिलेगा?* *सिपाही*, *प्रजा, कोतवाल-* *सब खोजने में लग गए।* *राजा ने ऐलान किया,* *जो कोई हार लाकर मुझे देगा,* *उसको मैं आधा राज्य पुरस्कार में दे दूंगा।* *अब तो होड़ लग गई प्रजा में।* *सभी लोग हार ढूंढने लगे आधा राज्य पाने के लालच में।* *ढूंढते-* *ढूंढते अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा।* *हार तो दिखाई दे रहा था,* *पर उसमें से बदबू आ रही थी।* *पानी काला था। परन्तु एक सिपाही कूदा*।*इधर* *उधर* *बहुत हाथ मारा* *पर कुछ नहीं मिला। पता नहीं कहां गायब हो गया।* *फिर कोतवाल ने देखा,* *तो वह भी कूद गया।* *दो को कूदते देखा तो कुछ उत्साही प्रजाजन भी कूद गए।* *फिर मंत्री कूदा।* *तो इस तरह उस नाले में भीड़ लग गई।* *लोग आते रहे और अपने कपडे़ निकाल-निकाल कर कूदते रहे।* *लेकिन हार मिला किसी को नहीं- कोई भी कूदता,* *तो वह गायब हो जाता।* *जब कुछ नहीं मिलता,* *तो वह निकल कर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता*। *सारे* *शरीर पर बदबूदार गंदगी,* *भीगे हुए खडे़ हैं।* *दूसरी ओर दूसरा तमाशा, बडे़-बडे़ जाने-माने ज्ञानी, मंत्री सब में होड़ लगी है, मैं जाऊंगा पहले, नहीं मैं तेरा सुपीरियर हूं, मैं जाऊंगा पहले हार लाने के लिए।* *इतने में राजा को खबर लगी। उसने सोचा, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें?* *आधे राज्य से हाथ तो नहीं धोना पडे़गा। तो राजा भी कूद गया।* *इतने में एक संत गुजरे उधर से। उन्होंने देखा तो हंसनेलगे, यह क्या तमाशा है?* *राजा, प्रजा,मंत्री, सिपाही - *सब कीचड़ मे लथपथ,* *क्यों कूद रहे हो इसमें?* *लोगों ने कहा, महाराज! बात यह है कि रानी का हार चोरी हो गई है। वहां नाले में दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे ही लोग कूदते हैं तो वह गायब हो जाता है। किसी के हाथ नहीं आता।* *संत हंसने लगे, भाई! *किसी ने ऊपर भी देखा?* *ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है। नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी परछाई है। *इस कहानी का क्या मतलब हुआ?* *जिस चीज की हम को जरूरत है,* *जिस परमात्मा को हम पाना चाहते हैं, जिसके लिए हमारा हृदय व्याकुल होता है -वह सुख शांति और आनन्द रूपी हार क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है और* *यह महसूस होता है कि इस को हम पूरा कर लेंगे। अगर हमारी यह इच्छा पूरी हो जाएगी तो हमें शांति मिल जाएगी, हम सुखी हो जाएंगे। परन्तु जब हम उसमें कूदते हैं, तो वह सुख और शांति प्राप्त नहीं हो पाती* *इसलिए सभी संत-महात्मा हमें यही संदेश देते हैं कि वह शांति, सुख और आनन्द रूपी हीरों का हार, जिसे हम संसार में परछाई की तरह पाने की कोशिश कर रहे हैं, वह हमारे अंदर ही मिलेगा, बाहर नहीं* 🙏🙏 जाग्रत रहें जाग्रत करें

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*आदमी का लालच😜* ----------------------- *एक ट्रक गेंहू के बोरे भरकर मंडी जा रहा था। जंगल का रास्ता उबड़-खाबड़ होने के कारण एक बोरा खिसक कर रास्ते में गिर गया। कुछ ही देर में कुछ चीटियां आई दस बीस दाने ले गयी, फिर कुछ चूहे आये पाव आधा किलो गेहूं खाये और चले गये। कुछ ही देर में पक्षी आये दो चार मुट्ठी दाने चुगे और उड़ गये। कुछ गायें और बकरियां आयी पांच दस किलो गेहूं खाकर चली गयीं। आख़री में एक आदमी आया और वह पूरा बोरा ही उठाकर ले गया। गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं के लिए जीता है। इसीलिए आदमी के पास सब कुछ होते हुए भी वह सबसे ज्यादा दुखी है। इसलिए जरूरत पुरी हो जाने के बाद इच्छाओं को रोकें, अन्यथा यह बढ़ती ही जायेगी, और आपके दुखों का कारण बनेगी।* *🙏।।सुप्रभात।।🙏 ओम शांति*

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Shuchi Singhal Jul 29, 2022

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