Jasbir Singh nain
Jasbir Singh nain Dec 26, 2021

कालाष्टमी🙏🙏 शुभ प्रभात जी 🌅🌅🙏🙏 26 दिसंबर, 2021 (रविवार) हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत किया जाता है। कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि भगवान काल भैरव को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव, शिव जी के ही रूद्रावतार हैं। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। भगवान भैरव के अष्ट स्वरुप हैं जिनमें से गृहस्थ जीवन जीने वाले साधारण जन को बटुक भैरव की आराधना करनी चाहिए। ये भगवान भैरव का सौम्य स्वरुप हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी भगवान भैरव के भक्तों का अहित करता है उसे तीनों लोक में कही भी शरण प्राप्त नहीं होती है। इनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियों, भय और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त होती है। कालाष्टमी पूजा विधि अष्टमी तिथि के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके व्रत का संकल्प करें। अब मंदिर की साफ-सफाई करके भगवान के सामने दीपक प्रज्वलित करें। कालभैरव भगवान के साथ भगवान शिव की भी विधि-विधान से पूजा  करें। इसके बाद पूरे दिन व्रत करें और रात को पुनः पूजन करें। भगवान कालभैरव की पूजा रात्रि के समय करने का विधान है। धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें हलवा, मीठी पूरी और जलेबी आदि का भोग लगाना चाहिए। वहीं पर बैठकर भैरव चालीसा का पाठ करें। पाठ पूर्ण हो जाने के पश्चात आरती करें। कालाष्टमी महत्व कालाष्टमी पर भगवान कालभैरव की पूजा आराधना करने से शत्रु बाधा से मुक्ति प्राप्त होती है। इसी के साथ जातक को अंजान भय, ग्रह दोष आदि से भी मुक्ति प्राप्त होती है। भगवान कालभैरव अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं। कालाष्टमी के दिन व्रत रखकर भगवान भैरव की पूजा से साधक के जीवन के संकट और समस्याएं दूर हो जाती हैं। कालाष्टमी व्रत कथा पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। जब इस बात पर बहस बढ़ गई, तो इसका समाधान खोजने के लिए सभी देवताओं को बुलाकर बैठक की गई।   इसके बाद सभी से यह प्रश्न किया गया कि तीनों में श्रेष्ठ कौन है? इस पर सभी देवों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और उत्तर खोज लिया। उस बात का समर्थन शिवजी और विष्णु ने तो किया, परंतु ब्रह्माजी ने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिव जी को क्रोध आ गया। इसके बाद शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। भगवान भैरव के अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को ‘महाकालेश्वर’ व दंडाधिकारी के नाम से भी जाना जाता है। शिव जी के इस स्वरुप को देखकर देवता भी भयभीत हो गए।    भगवान शिव के रुद्रावतार भगवान भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। ब्रह्माजी के सिर को काटने के कारण भगवान भैरव पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया।  इसके बाद भगवान शिव ने भैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति का उपाय बताते हुए उन्हें पृथ्वी लोग पर जाकर प्रायश्चित करने को कहा। इस तरह से कई वर्षों के पश्चात अंत में जाकर काशी में इनकी यात्रा पूर्ण हुई। जिसके बाद ये काशी में ही स्थापित हो गए। इस तरह से ब्रह्महत्या के पाप का प्रायश्चित करने के कारण इनका नाम ‘दंडपाणी’ भी पड़ा।

कालाष्टमी🙏🙏 शुभ प्रभात जी 🌅🌅🙏🙏

26 दिसंबर, 2021 (रविवार)



हिंदू धर्म के अनुसार प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत किया जाता है। कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि भगवान काल भैरव को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव, शिव जी के ही रूद्रावतार हैं। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। भगवान भैरव के अष्ट स्वरुप हैं जिनमें से गृहस्थ जीवन जीने वाले साधारण जन को बटुक भैरव की आराधना करनी चाहिए। ये भगवान भैरव का सौम्य स्वरुप हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी भगवान भैरव के भक्तों का अहित करता है उसे तीनों लोक में कही भी शरण प्राप्त नहीं होती है। इनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियों, भय और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त होती है।



कालाष्टमी पूजा विधि

अष्टमी तिथि के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके व्रत का संकल्प करें।

अब मंदिर की साफ-सफाई करके भगवान के सामने दीपक प्रज्वलित करें।

कालभैरव भगवान के साथ भगवान शिव की भी विधि-विधान से पूजा  करें।

इसके बाद पूरे दिन व्रत करें और रात को पुनः पूजन करें।

भगवान कालभैरव की पूजा रात्रि के समय करने का विधान है।
धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करनी चाहिए।

इसके साथ ही उन्हें हलवा, मीठी पूरी और जलेबी आदि का भोग लगाना चाहिए।

वहीं पर बैठकर भैरव चालीसा का पाठ करें। पाठ पूर्ण हो जाने के पश्चात आरती करें।



कालाष्टमी महत्व

कालाष्टमी पर भगवान कालभैरव की पूजा आराधना करने से शत्रु बाधा से मुक्ति प्राप्त होती है। इसी के साथ जातक को अंजान भय, ग्रह दोष आदि से भी मुक्ति प्राप्त होती है। भगवान कालभैरव अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं। कालाष्टमी के दिन व्रत रखकर भगवान भैरव की पूजा से साधक के जीवन के संकट और समस्याएं दूर हो जाती हैं।

कालाष्टमी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। जब इस बात पर बहस बढ़ गई, तो इसका समाधान खोजने के लिए सभी देवताओं को बुलाकर बैठक की गई।
 

इसके बाद सभी से यह प्रश्न किया गया कि तीनों में श्रेष्ठ कौन है? इस पर सभी देवों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए और उत्तर खोज लिया। उस बात का समर्थन शिवजी और विष्णु ने तो किया, परंतु ब्रह्माजी ने शिवजी को अपशब्द कह दिए। इस बात पर शिव जी को क्रोध आ गया।

इसके बाद शिवजी ने उस क्रोध में अपने रूप से भैरव को जन्म दिया। भगवान भैरव के अवतार का वाहन काला कुत्ता है। इनके एक हाथ में छड़ी है। इस अवतार को ‘महाकालेश्वर’ व दंडाधिकारी के नाम से भी जाना जाता है। शिव जी के इस स्वरुप को देखकर देवता भी भयभीत हो गए। 
 
भगवान शिव के रुद्रावतार भगवान भैरव ने क्रोध में ब्रह्माजी के 5 मुखों में से 1 मुख को काट दिया, तब से ब्रह्माजी के पास 4 मुख ही हैं। ब्रह्माजी के सिर को काटने के कारण भगवान भैरव पर ब्रह्महत्या का पाप आ गया।



इसके बाद भगवान शिव ने भैरव को ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति का उपाय बताते हुए उन्हें पृथ्वी लोग पर जाकर प्रायश्चित करने को कहा। इस तरह से कई वर्षों के पश्चात अंत में जाकर काशी में इनकी यात्रा पूर्ण हुई। जिसके बाद ये काशी में ही स्थापित हो गए। इस तरह से ब्रह्महत्या के पाप का प्रायश्चित करने के कारण इनका नाम ‘दंडपाणी’ भी पड़ा।

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कामेंट्स

Brajesh Sharma Dec 26, 2021
सुप्रभात स्नेह वंदन ॐ सूर्य देवाय नमः जय श्री राधे कृष्णा जी... ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव आप का दामन हमेशा खुशियों से भरा रहे इसी शुभकामना के साथ जय श्री राधे राधे जी राम राम जी

Ramkumar Ojhaiya Dec 26, 2021
जय श्रीगणेश जय भोलेनाथ हर हर महादेव जय सूर्यदेव जय भैरूनाथ 🙏

योगेश जानी Dec 26, 2021
ॐ सूयॅदेवाय नमः शुभ रविवार आप का दिन शुभहो नमस्ते

🇮🇳kamlesh Goyal🇮🇳🍫 Dec 26, 2021
ओम सूर्य देवाय नमः राधे-राधे जी जय श्री कृष्णा जी शुभ प्रभात वंदन जी सूर्य देव भगवान की कृपा ठाकुर जी का आशीर्वाद आप सभी भाई बहनो पर बना रहे ठाकुर जी आप के परिवार को सदा खुश रखे आपका दिन मंगलमय हो🥀🥀🌸🙏🙏🌸🥀🥀

R.K.SONI (Ganesh Mandir) Dec 26, 2021
shubh sanday ji🌹 Radhe Radhe ji👌v. beautiful post today ji👌🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏

R.K.SONI (Ganesh Mandir) Dec 26, 2021
shubh sanday ji🌹 Radhe Radhe ji👌v. beautiful post today ji👌🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Dec 26, 2021
🌞ॐ भष्कराय नमः🌞 🌻सुप्रभात वंदन जी🌻 🌹आपका दिन मंगलमय हो🌹 🎎यदि बनना है निडर और विद्वान, तो करो रविवार को भास्कर का ध्यान । मार्तण्ड की आराधना यदि हम करते हैं, तो दिनकर मनुष्य में मधुर वाणी और अच्छे विचारों को उजागर कर, जीवन से बुरे विचारों को दूर करते है । समृद्धि का यही है कहना, 🙏🌹नमस्ते जी🌹🙏

madan pal 🌷🙏🏼 Dec 26, 2021
ओम सूर्योदय देव नमः शूभ सध्यां वंदन जी आपका हर पल शूभ मगल हों जी आपका हर पल 🌷🌷🌷🌷🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

Shivsanker Shukla Dec 27, 2021
ओम नमः शिवाय शुभ दोपहर भैया जी

Shivsanker Shukla Dec 27, 2021
हर हर महादेव जय भोलेनाथ की

my mandir Jan 25, 2022

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Garima Gahlot Rajput Jan 25, 2022

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PRABHAT KUMAR Jan 25, 2022

🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 🔛🔛 *#जय_श्री_राम_जय_जय_महावीर_हनुमान* 🔛🔛 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *🌜 मधुर सपनों के साथ शुभ रात्रि प्रिय आदरणीय साथियों 🌛* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🚩🚩 *#महावीर_हनुमान_ऐसे_बने_महाशक्तिशाली* 🚩🚩 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *वाल्मीकि रामायण के अनुसार, बाल्यकाल में जब हनुमान सूर्यदेव को फल समझकर खाने को दौड़े और सूर्य को निगल लिया तो हनुमान से अपरिचित तो घबराकर देवराज इंद्र ने हनुमानजी पर वज्र का वार किया। वज्र के प्रहार से हनुमान निश्तेज हो गए। यह देखकर वायुदेव बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने समस्त संसार में वायु का प्रवाह रोक दिया। संसार में हाहाकार मच गया। तब परमपिता ब्रह्मा ने हनुमान को स्पर्श कर पुन: चैतन्य किया। उस समय सभी देवताओं ने हनुमानजी को वरदान दिए। इन वरदानों से ही हनुमानजी परम शक्तिशाली बन गए।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *1. भगवान सूर्य ने हनुमानजी को अपने तेज का सौवां भाग दिया । उन्होंने कहा की शास्त्रों का यह बहुत बड़ा ग्यानी होता और इसका यश सभी लोको में फैलेगा | बाद में सूर्य हनुमान जी के गुरु भी बने |* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *2. धर्मराज यमराज ने हनुमानजी को वरदान दिया कि यह मेरे दण्ड से अवध्य और निरोग होगा।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *3. धन के देवता कुबेर ने वरदान दिया कि इस बालक को युद्ध में कभी विषाद नहीं होगा तथा मेरी गदा संग्राम में भी इसका वध न कर सकेगी।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *4. भगवान शंकर ने यह वरदान दिया कि यह मेरे और मेरे शस्त्रों द्वारा भी अवध्य रहेगा।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *5. देवशिल्पी विश्वकर्मा ने वरदान दिया कि मेरे बनाए हुए जितने भी शस्त्र हैं, उनसे यह अवध्य रहेगा और चिंरजीवी होगा।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *6. देवराज इंद्र ने हनुमानजी को यह वरदान दिया कि यह बालक आज से मेरे वज्र द्वारा भी अवध्य रहेगा।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *7. जलदेवता वरुण ने यह वरदान दिया कि दस लाख वर्ष की आयु हो जाने पर भी मेरे पाश और जल से इस बालक की मृत्यु नहीं होगी।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *8. परमपिता ब्रह्मा ने हनुमानजी को वरदान दिया कि यह बालक दीर्घायु, महात्मा और सभी प्रकार के ब्रह्दण्डों से बचा रहेगा | यह अपने अनुसार अपने आकार और छोटा और बड़ा कर पायेगा | युद्ध में कोई भी इसे जीत नहीं पाएगा। यह अपनी गति को भी तीव्र या मंद कार्य पायेगा ।* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *9. इसके अलावा जब हनुमान ने श्री राम की दीर्घआयु की कामना से सम्पूर्ण शरीर पर सिंदूर लगा लिया तब उन्हें माता सीता ने अमर होने का आशीर्वाद दे दिया | तब से बालाजी अष्ट चिरंजीवी में से एक है |* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛🔛

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Garima Gahlot Rajput Jan 25, 2022

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Dheeraj Shukla Jan 25, 2022

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Deepak Jan 25, 2022

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