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my mandir Nov 25, 2021

गुरुवार विशेष 25 नवंबर 2021 जय हरि नारायण

गुरुवार विशेष 25 नवंबर 2021

जय हरि नारायण

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कामेंट्स

sonia Nov 26, 2021
सुप्रभात

sonia Nov 26, 2021
जय श्री हरि

rs Nov 26, 2021
jay Shri palanhaar

lndu Malhotra Nov 26, 2021
Sarve Bhavantu Sukhina Sarve santu Niramaya Sarve Bhadrani Paschintu MAA Kaschid Dukh Bhag Bhivet Jaijai 🙏🚩🙏

Brijasha Bhat Nov 26, 2021
ऊँ नमः भगवते वासुदेवाय🙏🙏

KAPIL DEV Nov 26, 2021
हरि ॐ तत्शत ॐ श्री मात्रे नमः जय श्री महाकाल की जय हर हर महादेव कि जय ॐ नमः शिवाय ॐ शिव शक्ति की जय हरि ॐ तत्शत

KAPIL DEV Nov 26, 2021
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

KAPIL DEV Nov 26, 2021
हरि ॐ तत्शत ॐ श्री मात्रे नमः जय श्री महाकाल की जय हर हर महादेव कि जय ॐ नमः शिवाय ॐ शिव शक्ति की जय हरि ॐ तत्शत

KAPIL DEV Nov 26, 2021
हरि ॐ तत्शत ॐ श्री मात्रे नमः जय श्री महाकाल की जय हर हर महादेव कि जय ॐ नमः शिवाय ॐ शिव शक्ति की जय हरि ॐ तत्शत

गिरीराज Dec 2, 2021
श्रीमन नारायण नारायण नारायण हरि हरि भगवान विष्णु कृपा करें कृपा माता रानी आपकी जय हो जय महालक्ष्मी मां जय हो

Hema devi Dec 4, 2021
आने वाला सुबह आपके लिए बहुत-बहुत शुभ

Hema devi Dec 4, 2021
सूर्य भगवान की आपका बहुत-बहुत मुबारक हो

Deepak Jan 21, 2022

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Dheeraj Shukla Jan 21, 2022

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Dheeraj Shukla Jan 20, 2022

+34 प्रतिक्रिया 5 कॉमेंट्स • 22 शेयर
Dheeraj Shukla Jan 19, 2022

+49 प्रतिक्रिया 11 कॉमेंट्स • 19 शेयर

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Jasbir Singh nain Jan 21, 2022

संकष्टी चतुर्थी स्पेशल 21 जनवरी , 2022 (शुक्रवार) शुभ प्रभात जी 🌅🪔🙏🙏🙏🙏🙏🙏 संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित होती है। जिसका मतलब होता है ‘कठिन समय से मुक्ति पाना’। महीने में दो चतुर्थी आती है, लेकिन पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को अर्थात कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इसके अलावा इसे द्विजप्रिय संकष्टी के नाम से भी जाना जाता है। भारत के उत्तरी एवं दक्षिणी राज्यों में संकष्टी चतुर्थी का व्रत बड़े ही धूम धाम से किया जाता है। गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है और हर शुभ कार्य से पहले उन्हें ही पूजा जाता है। इसीलिए इस दिन व्रत रखने वालों के गणेशजी हर दुख दर्द हर लेते हैं। इस दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान से भगवान गणेशजी की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी आयु और खुशहाली के लिए भगवान गणेश का पूजन करती हैं और उपवास रखती हैं। आइए अब जानते है संकष्टी चतुर्थी के व्रत की पूजा विधि के बारे में। इस दिन सुबह स्नान करके साफ हल्के लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें। उसके बाद भगवान गणपति के चित्र को लाल रंग का कपड़ा बिछाकर रखें। भगवान गणेश की पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करें। अब भगवान गणपति के सामने दीया जलाएं और लाल गुलाब के फूलों से भगवान गणपति को सजाएं। पूजा में रोली, मोली, चावल, दुर्वा, चंदन, फूल और तांबे के लौटे में जल अर्पित करें। प्रसाद के रूप में तिल के लड्डू, गुड़, केला और मोदक चढ़ाए जा सकते हैं। भगवान गणपति के सामने धूप दीप जलाकर उनकी विधिवत पूजा करें और दिन भार व्रत का पालन करें। फिर शाम के समय भगवान गणेश की प्रतिमा को ताजे फूलों से सजाए और व्रत कथा पढ़ें। इसके बाद संकष्टी चतुर्थी व्रत पारण करें। इस विधि से पूजा करने से भगवान गणेशजी आपके सारे दु:ख दर्द हर देंगे। तो आइए अब जानते है कि संकष्टी चतुर्थी के क्या करें और क्या ना करें। इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा करते समय गणेश जी की आरती, मंत्र और गणेश चालीसा का पाठ करें और भगवान श्री गणेश की पूजा के दौरान संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत की कथा अवश्य पढ़ें अथवा सुनें। इसी के साथ गणेश जी को शमी का पत्ता या बेलपत्र अर्पित करें। जिन व्यक्तियों का इस दिन व्रत होता है वे केवल फल, साबूदाना, मूंगफली और आलू ग्रहण करें। इसी के साथ अब जानेंगे कि व्रत के दौरान हमें किन-किन बातों का विशेष तौर से ध्यान रखना चाहिए। भगवान गणेशजी को तुलसी कभी नहीं चढ़ाई जाती है। इसलिए इस दिन भी आप गणेशजी को तुलसी ना चढ़ाएं। संकष्टी चतुर्थी के दिन किसी की बुराई ना करें, किसी स्त्री का अपमान ना करें। संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा एक बार की बात है माता पार्वती और भगवान शिव नदी के पास बैठे हुए थे, तभी अचानक माता पार्वती ने चौपड़ खेलने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की। लेकिन समस्या की बात यह थी कि वहां उन दोनों के अलावा तीसरा कोई नहीं था जो खेल में निर्णायक की भूमिका निभाए। इस समस्या का समाधान निकालते हुए शिव और पार्वती ने मिलकर एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसमें जान डाल दी। मिट्टी से बने बालक को दोनों ने यह आदेश दिया कि तुम खेल को अच्छी तरह से देखना और यह फैसला लेना कि कौन जीता और कौन हारा। खेल शुरू हुआ जिसमें माता पार्वती बार-बार भगवान शिव को मात देकर विजयी हो रही थीं। खेल चलते रहा लेकिन एक बार गलती से बालक ने माता पार्वती को हारा हुआ घोषित कर दिया। बालक की इस गलती ने माता पार्वती को बहुत क्रोधित कर दिया जिसकी वजह से गुस्से में आकर बालक को श्राप दे दिया और वह लंगड़ा हो गया। बालक ने अपनी भूल के लिए माता से बहुत क्षमा मांगी और उसे माफ़ कर देने को कहा। बालक के बार-बार निवेदन को देखते हुए माता ने कहा कि अब श्राप वापस तो नहीं हो सकता लेकिन वह एक उपाय बता सकती हैं जिससे वह श्राप से मुक्ति पा सकेगा। तभी माता ने कहा कि संकष्टी वाले दिन पूजा करना, जहां पर कुछ कन्याएं आती हो और तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और उस व्रत को सच्चे मन से करना। बालक ने व्रत की विधि को जानकर पूरी श्रद्धापूर्वक और विधि अनुसार उसे किया। उसकी सच्ची आराधना से भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उसकी इच्छा पूछी। तभी बालक ने माता पार्वती और भगवान शिव के पास जाने की अपनी इच्छा को ज़ाहिर किया। गणेश ने उस बालक की मांग को पूरा कर दिया और उसे शिवलोक पंहुचा दिया, लेकिन जब वह पहुंचा तो वहां उसे केवल भगवान शिव ही मिले। माता पार्वती भगवान शिव से नाराज़ होकर कैलाश छोड़कर चली गई होती हैं। जब शिवजी ने उस बच्चे को पूछा की तुम यहां कैसे आए तो उसने बताया कि गणेश की पूजा से उसे यह वरदान प्राप्त हुआ है। यह जानने के बाद भगवान शिव ने भी पार्वती को मनाने के लिए उस व्रत को किया जिसके बाद माता पार्वती भगवान शिव से प्रसन्न होकर वापस कैलाश लौट आती हैं। नमस्कार।

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