sukhadev awari
sukhadev awari Oct 14, 2021

Radhe-Radhe ji

Radhe-Radhe ji

+46 प्रतिक्रिया 6 कॉमेंट्स • 16 शेयर

कामेंट्स

🌷p kumar🌷 Oct 14, 2021
🙏🌷सुप्रभात🌷🙏 🙏🌷जय श्री राम🌷🙏 🙏🌷जय हनुमान🌷🙏 🙏🌷जय माता की🌷🙏 🙏🌷ॐ नमः शिवाय🌷🙏 🙏🌷हर हर महादेव🌷🙏 🙏🌷जय श्री महाकाल🌷🙏 🙏🌷ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🌷🙏 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Manoj Gupta AGRA Oct 14, 2021
jai shree radhe krishna ji 🙏🙏🌷🌸 jai mata di 🙏🙏🌷

💥꧁🔥🔥🔥🔥🔥🔥 ꧂💥 🌷☘🌹🍂🍃💐🌻🌸🌺💐. ꧁श्रीसिद्धिविनायक पंचांग꧂ 🍃🌷☘🌹🌻☘️🌸🌺💐 ┈━❀꧁🐀🐁🐀 ꧂❀┅┉ 🔔°•🔔•°🔔°•🌄•°🔔°•🔔•°🔔 🦚🦚🦚🦚 ॐ श्री गणेशाय नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधायः नमः। ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः । एकदंष्ट्रोत्कटो देवो गजवक्त्रो महाबल:। नागयज्ञोपवीतेन नानाभरण भूषित:॥ सवार्थसम्पद् उध्दारो गणाध्यक्षो वरप्रद:। भीमस्य तनयो देवो नायकोsथ विनायक:॥ करोतु मे महाशांति भास्करार्चनतत्पर:॥ सुप्रभातम् अथ् पंचांगम् दिनाँक 08-12- 2021 बुधवार अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर, हरियाणा, पिन कोड- 134 007 🙏🙏🙏 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 --- समाप्तिकाल--- 📒 तिथि पंचमी 21:27:54 ☄️ नक्षत्र श्रवण 22:40:04 🛑 करण : 💥 बव 10:30:21 💥 बालव 21:27:54 🔓 पक्ष शुक्ल 🛑 योग घ्रुव 13:07:52 🗝️ वार बुधवार 🌄 सूर्योदय 07:06:35 🌃 चन्द्रोदय 11:07:59 🌜 चन्द्र राशि मकर 🐊 🌌 सूर्यास्त 17:22:02 🌑 चन्द्रास्त 21:42:59 ☃️ ऋतु हेमंत 🛑 शक सम्वत 1943 प्लव 🛑 कलि सम्वत 5123 🛑 दिन काल 10:15:27 🛑 विक्रम सम्वत 2078 🛑 मास अमांत मार्गशीर्ष 🛑 मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष ⚫ दुष्टमुहूर्त 11:53:48 - 12:34:49 ⚫ कंटक 15:59:59 - 16:41:01 ⚫ यमघण्ट 09:09:40 - 09:50:42 👿 राहु काल 12:14:18 - 13:31:14 ⚫ कुलिक 11:53:48 - 12:34:49 ⚫ कालवेला 07:47:36 - 08:28:38 ⚫ यमगण्ड 08:23:30 - 09:40:26 ⚫ गुलिक 10:57:22 - 12:14:18 🛑 दिशा शूल उत्तर 🔥🔥🔥🔥 होरा 🛑बुध 07:06:35 - 07:57:52 🛑चन्द्रमा 07:57:52 - 08:49:09 🛑शनि 08:49:09 - 09:40:26 🛑बृहस्पति 09:40:26 - 10:31:44 🛑मंगल 10:31:44 - 11:23:01 🛑सूर्य 11:23:01 - 12:14:18 🛑शुक्र 12:14:18 - 13:05:36 🛑बुध 13:05:36 - 13:56:53 🛑चन्द्रमा 13:56:53 - 14:48:10 🛑शनि 14:48:10 - 15:39:28 🛑बृहस्पति 15:39:28 - 16:30:45 🛑मंगल 16:30:45 - 17:22:02 🛑सूर्य 17:22:02 - 18:30:49 🛑शुक्र 18:30:49 - 19:39:35 🛑बुध 19:39:35 - 20:48:22 🔥🔥🔥🔥 चोघडिया ⛩️लाभ 07:06:35 - 08:23:30 ⛩️अमृत 08:23:30 - 09:40:26 ⚫काल 09:40:26 - 10:57:22 ⛩️शुभ 10:57:22 - 12:14:18 👿रोग 12:14:18 - 13:31:14 ⚫उद्वेग 13:31:14 - 14:48:10 🛑चल 14:48:10 - 16:05:06 ⛩️लाभ 16:05:06 - 17:22:02 ⚫उद्वेग 17:22:02 - 19:05:12 ⛩️शुभ 19:05:12 - 20:48:22 💥💥💥किस चौघड़िया में क्या करें 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। शास्त्रानुसार प्रत्येक चौघड़िया में निम्नानुसार कार्य किये जाने प्रस्तावित होते हैं:- 👉🏿🛑 चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । 👉🏿⚫उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । 👉🏿⛩️शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । 👉🏿⛩️लाभ में व्यापार करें । 👉🏿☘️रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । 👉🏿⚫काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । 👉🏿⛩️अमृत में सभी शुभ कार्य । 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ꧁ दैनिक ग्रह गोचर ꧂ 🌞 सूर्य - वृश्चिक 🦂 🌙 चन्द्र - मकर 🐊 ⚫ मंगल - वृश्चिक 🦂 ⚫ बुध - वृश्चिक 🦂 ⚫ बृहस्पति - कुम्भ 🏺 ⚫ शुक्र - मकर 🐊 14:03 से ⚫ शनि - मकर 🐊 😈 राहु - वृष 🐂 👖 केतु - वृश्चिक 🦂 ------------------------------------ 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 व्रत एवम् त्योहार 15 दिसम्बर तक ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिसंबर (मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी से पोष कृष्ण त्रयोदशी तक) सन् 2021 ईसवीं, विक्रमी संवत 2078, शाका 1943, हिजरी 1443 । सूर्य दक्षिणायन- उत्तरायण, दक्षिण गोल, हेमंत -शिशिर ऋतु:, ग्रह दर्शन- प्रातः मंगल पूर्व क्षितिज में दिखेगा, सायं शुक्र पश्चिम में, उससे ऊपर शनि होगा। गुरु पश्चिम कपाल में दिखेगा ।बुध अस्त है। व्रत त्योहार 15 दिसंबर तक ☘️☘️☘️ 🛑8 दिसंबर बुधवार 👉शुक्र मकर में 14:03 👉श्री पंचमी 👉श्री राम विवाह उत्सव 👉नाग पंचमी 🛑 9 दिसंबर गुरुवार पंचक प्रारंभ 10:10 स्कंद (गुह)षष्टि, मंगल अनुराधा में 25:05 👉बुध मूल 1 🏹धनु में 30:05 चंपा षष्टि 🛑शुक्रवार 10 दिसंबर भद्रा 19:10 से 31:12 तक मित्र विष्णु सप्तमी 🛑 शनिवार 11 दिसंबर दुर्गा अष्टमी 🛑रविवार 12 दिसंबर नंदा नवमी, गण्ड मूल 24:00 🛑सोमवार 13 दिसंबर पंचक समाप्त 26:05 🛑 मंगलवार 14 दिसंबर भद्रा 10:35 से 23:36 तक मोक्षदा एकादशी व्रत श्री गीता जयंती गण्ड मूल 28:40 तक 🛑बुधवार 15 दिसंबर 👉💥सूर्य मूल 1 धनु🏹 में 27:42 👉पौष सक्रांति प्रातः 10:06 तक गुरु धनिष्ठा 4 में 8:14 अखंड द्वादशी 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दैनिक भविष्यफल 👩‍❤️‍👨🦀🦁👩🏻‍🦱⚖️🏹🐬 ✒️ नोटः प्रस्तुत भविष्यफल में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है । पूरी जानकारी के लिए किसी देवेज्ञ या भविष्यवक्ता से मिल सकते हैं। 🤷🏻‍♀ आज जिन भाई-बहनों /मित्रों का 🎂जन्मदिन या विवाह की वर्षगांठ 🥁📯 है , उन सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ तथा शुभ आशीर्वाद । प्रभु आपकी जीवन यात्रा सफल करें । 🐐मेष भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। साझेदारी में नवीन प्रस्ताव प्राप्त हो सकेंगे। शत्रु सक्रिय रहेंगे। गर्व-अहंकार को दूर करें। राजनीतिक व्यक्तियों से लाभकारी योग बनेंगे। मनोबल बढ़ने से तनाव कम होगा। 🐂वृष बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा सफल रहेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। जोखिम न लें। अपने व्यसनों पर नियंत्रण रखें। पत्नी के बतलाए रास्ते पर चलने से लाभ की संभावना बनती है। यात्रा से लाभ। वाहन-मशीनरी खरीदी के योग हैं। व्यवसाय में अड़चनें आएंगी। 👩‍❤️‍👨मिथुन फालतू खर्च होगा। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। व्यावसायिक योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पाएगा। परिवार की चिंता रहेगी। आय से व्यय अधिक होंगे। अजनबियों पर विश्वास से हानि हो सकती है। 🦀कर्क धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट व कचहरी के कार्य बनेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। चोट व रोग से बचें। कार्य-व्यवसाय में लाभ होने की संभावना है। दांपत्य जीवन में अनुकूलता रहेगी। सामाजिक समारोहों में भाग लेंगे। सुकर्मों के लाभकारी परिणाम मिलेंगे। 🦁सिंह प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रोजगार में वृद्धि होगी। यात्रा का शुभ योग होने के साथ ही कठिन कार्य में भी सफलता मिल सकेगी। रिश्तेदारों से संपत्ति संबंधी विवाद हो सकता है। व्यापार-नौकरी में लाभ होगा। पुराना रोग उभर सकता है। प्रयास सफल रहेंगे। 👩🏻‍🦱कन्या पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार मिलेंगे। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी। मन में उत्साह रहेगा, जिससे कार्य की गति बढ़ेगी। आपके कार्यों को समाज में प्रशंसा मिलेगी। भागीदारी में आपके द्वारा लिए गए निर्णयों से लाभ होगा। ⚖️तुला प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। कानूनी अड़चन दूर होगी। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। स्वास्थ्य संबंधी समस्या हल हो सकेगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। अपनी वस्तुएँ संभालकर रखें। रुका धन मिलेगा। भ्रम की स्थिति बन सकती है। 🦂वृश्चिक जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। मितव्ययिता को ध्यान में रखें। कुटुंबियों से संबंध सुधरेंगे। शत्रुओं से सावधान रहें। व्यापार लाभप्रद रहेगा। खर्चों में कमी करें। सश्रम किए गए कार्य पूर्ण होंगे। 🏹धनु स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। अच्छे लोगों से भेंट होगी जो आपके हितचिंतक रहेंगे। योजनाएं फलीभूत होंगी। नौकरी में पदोन्नाति के योग हैं। आलस्य से बचकर रहें। परिवार की मदद मिलेगी। 🐊मकर रोजगार में वृद्धि होगी। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। अर्थ संबंधी कार्यों में सफलता से हर्ष होगा। सुखद भविष्य का स्वप्न साकार होगा। विचारों से सकारात्मकता बढ़ेगी। दुस्साहस न करें। व्यापार में इच्छित लाभ होगा। 🏺कुंभ नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। नेत्र पीड़ा हो सकती है। अधिकारी वर्ग विशेष सहयोग नहीं करेंगे। ऋण लेना पड़ सकता है। यात्रा आज नहीं करें। परिवार के कार्यों को प्राथमिकता दें। आपकी बुद्धिमत्ता सामाजिक सम्मान दिलाएगी। 🦈मीन किसी के भरोसे न रहकर अपना कार्य स्वयं करें। महत्वपूर्ण कार्यों में हस्तक्षेप से नुकसान की आशंका है। परिवार में तनाव रहेगा। व्यापार-व्यवसाय मध्यम रहेगा। कष्ट, भय, चिंता व बेचैनी का माहौल बन सकता है। दु:खद समाचार मिल सकता है, धैर्य रखें। आपका दिन शुभ हो । ACHARYA ANIL PARASHAR VADIC,KP ASTROLOGER .

+11 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 39 शेयर
yogi Dec 7, 2021

+8 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 5 शेयर

꧁🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥꧂ 💥꧁श्रीसिद्धिविनायक पंचांग꧂💥 🌷☘🌹💐🍂🌹🍄🍁🪴🌻 ┈━❀꧁ 🐀🐁🐀 ꧂❀┅┉ 🔔°•🔔•°🔔°•🌄•°🔔°•🔔•°🔔 🦚🦚🦚🦚 ॐ हं हनुमते नमः ।। ॐ मंगलाय नमः,ॐ भूमि पुत्राय नमः ॐ ऋण हर्त्रे नमः,ॐ धन प्रदाय नमः, ॐ स्थिर आसनाय नमः, ॐ महा कायाय नमः, ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः, ॐ लोहिताय नमः, ॐ लोहिताक्षाय नमः, ॐ साम गानाम कृपा करे नमः, ॐ धरात्मजाय नमः,ॐ भुजाय नमः ॐ भौमाय नमः,ॐ भुमिजाय नमः ॐ भूमि नन्दनाय नमः ॐ अंगारकाय नमः,ॐ यमाय नमः ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः ॐ वृष्टि कर्ते नमः,ॐ वृष्टि हराते नमः ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः। सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 07-12-2021 मंगलवार, अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड 134007 🙏🏿🙏🏿🙏🏿 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 --समाप्तिकाल--- 📒 तिथि चतुर्थी 23:42:50 ☄️ नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 24:11:48 🛑 करण : वणिज 13:04:26 विष्टि 23:42:50 🔓 पक्ष शुक्ल 🛑 योग वृद्धि 16:22:24 🗝️ वार मंगलवार 🌄 सूर्योदय 07:05:50 🌃 चन्द्रोदय 10:16:00 🌜 चन्द्र 🏹 धनु - 07:44:46 तक 🌌 सूर्यास्त 17:21:54 🌑 चन्द्रास्त 20:34:59 ☃️ ऋतु हेमंत 🛑 शक सम्वत 1943 प्लव 🛑 कलि सम्वत 5123 🛑 दिन काल 10:16:05 🛑 विक्रम सम्वत 2078 🛑 मास अमांत मार्गशीर्ष 🛑 मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष 🎷 शुभ समय 🥁 अभिजित 11:53:20 - 12:34:24 ⚫ दुष्टमुहूर्त 09:09:02 - 09:50:07 ⚫ कंटक 07:46:54 - 08:27:58 ⚫ यमघण्ट 10:31:11 - 11:12:15 👿 राहु काल 14:47:53 - 16:04:54 ⚫ कुलिक 13:15:29 - 13:56:33 ⚫ कालवेला 09:09:02 - 09:50:07 ⚫ यमगण्ड 09:39:51 - 10:56:51 ⚫ गुलिक 12:13:52 - 13:30:53 🛑 दिशा शूल उत्तर 💥💥💥💥 होरा 🛑मंगल 07:05:50 - 07:57:10 🛑सूर्य 07:57:10 - 08:48:30 🛑शुक्र 08:48:30 - 09:39:51 🛑बुध 09:39:51 - 10:31:11 🛑चन्द्रमा 10:31:11 - 11:22:32 🛑शनि 11:22:32 - 12:13:52 🛑बृहस्पति 12:13:52 - 13:05:12 🛑मंगल 13:05:12 - 13:56:33 🛑सूर्य 13:56:33 - 14:47:53 🛑शुक्र 14:47:53 - 15:39:14 🛑बुध 15:39:14 - 16:30:34 🛑चन्द्रमा 16:30:34 - 17:21:55 🛑शनि 17:21:54 - 18:30:38 🛑बृहस्पति 18:30:38 - 19:39:21 🛑मंगल 19:39:21 - 20:48:04 💥💥💥💥 चोघडिया ☘️रोग 07:05:50 - 08:22:50 ⚫उद्वेग 08:22:50 - 09:39:51 🛑चल 09:39:51 - 10:56:51 ⛩️लाभ 10:56:51 - 12:13:52 ⛩️अमृत 12:13:52 - 13:30:53 ⚫काल 13:30:53 - 14:47:53 👿शुभ 14:47:53 - 16:04:54 ☘️रोग 16:04:54 - 17:21:54 ⚫काल 17:21:54 - 19:04:59 ⛩️लाभ 19:04:59 - 20:48:04 💥💥💥किस चौघड़िया में क्या करें 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। शास्त्रानुसार प्रत्येक चौघड़िया में निम्नानुसार कार्य किये जाने प्रस्तावित होते हैं:- 👉🏿🛑 चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । 👉🏿⚫उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । 👉🏿⛩️शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । 👉🏿⛩️लाभ में व्यापार करें । 👉🏿☘️रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । 👉🏿⚫काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । 👉🏿⛩️अमृत में सभी शुभ कार्य । 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ꧁ दैनिक ग्रह गोचर ꧂ 🌞 सूर्य - वृश्चिक 🦂 🌙 चन्द्र - 🐊 मकर प्रातः 07:44:47 से ⚫ मंगल - वृश्चिक 🦂 ⚫ बुध - वृश्चिक 🦂 ⚫ बृहस्पति - कुम्भ 🏺 ⚫ शुक्र - धनु 🏹 ⚫ शनि - मकर 🐊 😈 राहु - वृष 🐂 👖 केतु - वृश्चिक 🦂 ------------------------------------ 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 व्रत एवम् त्योहार 15 दिसम्बर तक ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिसंबर (मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी से पोष कृष्ण त्रयोदशी तक) सन् 2021 ईसवीं, विक्रमी संवत 2078, शाका 1943, हिजरी 1443 । सूर्य दक्षिणायन- उत्तरायण, दक्षिण गोल, हेमंत -शिशिर ऋतु:, ग्रह दर्शन- प्रातः मंगल पूर्व क्षितिज में दिखेगा, सायं शुक्र पश्चिम में, उससे ऊपर शनि होगा। गुरु पश्चिम कपाल में दिखेगा ।बुध अस्त है। व्रत त्योहार 15 दिसंबर तक ☘️☘️☘️ 🛑7 दिसंबर मंगलवार भद्रा 13:07 से 23:41 तक 👉राहु कृतिका 3, 👉केतु अनुराधा 1 में 20:27 🛑8 दिसंबर बुधवार 👉शुक्र मकर में 14:03 श्री पंचमी श्री राम विवाह उत्सव नाग पंचमी 🛑 9 दिसंबर गुरुवार पंचक प्रारंभ 10:10 स्कंद (गुह)षष्टि, मंगल अनुराधा में 25:05 👉बुध मूल 1 🏹धनु में 30:05 चंपा षष्टि 🛑शुक्रवार 10 दिसंबर भद्रा 19:10 से 31:12 तक मित्र विष्णु सप्तमी 🛑 शनिवार 11 दिसंबर दुर्गा अष्टमी 🛑रविवार 12 दिसंबर नंदा नवमी, गण्ड मूल 24:00 🛑सोमवार 13 दिसंबर पंचक समाप्त 26:05 🛑 मंगलवार 14 दिसंबर भद्रा 10:35 से 23:36 तक मोक्षदा एकादशी व्रत श्री गीता जयंती गण्ड मूल 28:40 तक 🛑बुधवार 15 दिसंबर 👉💥सूर्य मूल 1 धनु🏹 में 27:42 👉पौष सक्रांति प्रातः 10:06 तक गुरु धनिष्ठा 4 में 8:14 अखंड द्वादशी 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दैनिक भविष्यफल 👩‍❤️‍👨🦀🦁👩🏻‍🦱⚖️🏹🐬 ✒️ नोटः प्रस्तुत भविष्यफल में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है । पूरी जानकारी के लिए किसी देवेज्ञ या भविष्यवक्ता से मिल सकते हैं। 🤷🏻‍♀ आज जिन भाई-बहनों /मित्रों का 🎂जन्मदिन या विवाह की वर्षगांठ 🥁📯 है , उन सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ तथा शुभ आशीर्वाद । प्रभु आपकी जीवन यात्रा सफल करें :- 🐐मेष अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। नौकरी में अधिकार बढ़ेंगे। व्यावसायिक समस्या का हल निकलेगा। नई योजना में लाभ की संभावना है। घर में मांगलिक आयोजन हो सकते हैं। जीवनसाथी से संबंध घनिष्ठ होंगे। रोजगार मिलेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। 🐂वृष शुभ समाचार प्राप्त होंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। मान बढ़ेगा। स्वजनों से मेल-मिलाप होगा। नौकरी में ऐच्छिक पदोन्नति की संभावना है। पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। किसी की आलोचना न करें। खानपान का ध्यान रखें। आर्थिक संपन्नता बढ़ेगी। 👩‍❤️‍👨मिथुन गीत-संगीत में रुचि बढ़ेगी। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। पुराना रोग उभर सकता है। शोक समाचार मिल सकता है। भागदौड़ रहेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। अधूरे कामों में गति आएगी। व्यावसायिक गोपनीयता भंग न करें। 🦀कर्क घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। धनलाभ होगा। व्यापार-व्यवसाय में उन्नति के योग हैं। वाणी पर संयम आवश्यक है। जीवनसाथी से मदद मिलेगी। सामाजिक यश-सम्मान बढ़ेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। यात्रा सफल रहेगी। प्रयास सफल रहेंगे। वाणी पर नियंत्रण रखें। 🦁सिंह परिवार के सहयोग से दिन उत्साहपूर्ण व्यतीत होगा। योजनानुसार कार्य करने से लाभ की संभावना है। आर्थिक सुदृढ़ता रहेगी। धनार्जन होगा। संतान के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। बेचैनी दूर होगी। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। कोर्ट व कचहरी में अनुकूलता रहेगी। 👩🏻‍🦱कन्या नए अनुबंध होंगे। नई योजना बनेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रसन्नता रहेगी। कार्य में व्यय की अधिकता रहेगी। दांपत्य जीवन में भावनात्मक समस्याएँ रह सकती हैं। व्यापार में नए अनुबंध आज नहीं करें। राजमान प्राप्त होगा। ⚖️तुला व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रसन्नता रहेगी। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। पारिवारिक उन्नति होगी। सुखद यात्रा के योग बनेंगे। पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। स्वविवेक से कार्य करना लाभप्रद रहेगा। 🦂वृश्चिक लाभ के अवसर मिलेंगे। प्रसन्नता रहेगी। कुछ मानसिक अंतर्द्वंद्व पैदा होंगे। पारिवारिक उलझनों के कारण मानसिक कष्ट रहेगा। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कोर्ट व कचहरी के काम निबटेंगे। धैर्य एवं संयम रखकर काम करना होगा। यात्रा आज न करें। 🏹धनु भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। बेरोजगारी दूर होगी। लाभ होगा। मान-प्रतिष्ठा में कमी आएगी। कामकाज में बाधाएं आ सकती हैं। कर्मचारियों पर व्यर्थ संदेह न करें। आर्थिक लाभ मिलने से एक्स्ट्रा खर्च उठा पाएंगे। शत्रु सक्रिय रहेंगे। स्वास्थ्य कमजोर होगा। 🐊मकर कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। राजकीय कार्य में परिवर्तन के योग बनेंगे। आलस्य का परित्याग करें। आपके कामों की लोग प्रशंसा करेंगे। व्यापार लाभप्रद रहेगा। नई कार्ययोजना के योग प्रबल हैं। ऐश्वर्य पर व्यय होगा। स्वास्थ्‍य कमजोर रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। 🏺कुंभ व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। कानूनी मामले सुधरेंगे। धन का प्रबंध करने में कठिनाई आ सकती है। आहार की अनियमितता से बचें। व्यापार, नौकरी में उन्नति होगी। लेन-देन में सावधानी रखें। बकाया वसूली के प्रयास सफल रखें। 🦈मीन व्यापार-व्यवसाय सामान्य रहेगा। दूरदर्शिता एवं बुद्धि चातुर्य से कठिनाइयां दूर होंगी। राज्य तथा व्यवसाय में सफलता मिलने के योग हैं। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। पुराना रोग उभर सकता है। चोट व दुर्घटना से बचें। वस्तुएं संभालकर रखें। बाकी सामान्य रहेगा। आपका दिन शुभ हो । ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER.

+13 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 16 शेयर
sukhadev awari Dec 6, 2021

+61 प्रतिक्रिया 14 कॉमेंट्स • 8 शेयर

. "श्रीब्रज-रज महिमा" एक बार प्रयाग राज का कुम्भ योग था। चारों ओर से लोग प्रयाग-तीर्थ जाने के लिये उत्सुक हो रहे थे। श्रीनन्द महाराज तथा उनके गोष्ठ के भाई-बन्धु भी परस्पर परामर्श करने लगे कि हम भी चलकर प्रयाग-राज में स्नान-दान-पुण्य कर आवें। किन्तु कन्हैया को यह कब मंज़ूर था। प्रातः काल का समय था, श्रीनन्द बाबा वृद्ध गोपों के साथ अपनी बैठक के बाहर बैठे थे कि तभी सामने से एक भयानक काले रंग का घोड़ा सरपट भागता हुआ आया। भयभीत हो उठे सब कि कंस का भेजा हुआ कोई असुर आ रहा है। वह घोड़ा आया और ज्ञान-गुदड़ी वाले स्थल की कोमल-कोमल रज में लोट-पोट होने लगा। सबके देखते-देखते उसका रंग बदल गया, काले से गोरा, अति मनोहर रूपवान हो गया वह। श्रीनन्दबाबा सब आश्चर्यचकित हो उठे। वह घोड़ा सबके सामने मस्तक झुका कर प्रणाम करने लगा। श्रीनन्दमहाराज ने पूछा-'कौन है भाई तू ? कैसे आया और काले से गोरा कैसे हो गया ? वह घोड़ा एक सुन्दर रूपवान विभूषित महापुरुष रूप में प्रकट हो हाथ जोड़ कर बोला- "हे व्रजराज ! मैं प्रयागराज हूँ। विश्व के अच्छे बुरे सब लोग आकर मुझमें स्नान करते हैं और अपने पापों को मुझमें त्याग कर जाते हैं, जिससे मेरा रंग काला पड़ जाता है। अतः मैं हर कुम्भ से पहले यहाँ श्रीवृन्दावन आकर इस परम पावन स्थल की धूलि में अभिषेक प्राप्त करता हूँ। मेरे समस्त पाप दूर हो जाते हैं। निर्मल-शुद्ध होकर मैं यहाँ से आप व्रजवासियों को प्रणाम कर चला जाता हूँ। अब मेरा प्रणाम स्वीकार करें।" इतना कहते ही वहाँ न घोड़ा था न सुन्दर पुरुष। श्रीकृष्ण बोले- "बाबा ! क्या विचार कर रहे हो ? प्रयाग चलने का किस दिन मुहूर्त है ?" नन्दबाबा और सब व्रजवासी एक स्वर में बोल उठे- "अब कौन जायेगा प्रयागराज ? प्रयागराज हमारे व्रज की रज में स्नान कर पवित्र होता है, फिर हमारे लिये वहाँ क्या धरा है ?" सबने अपनी यात्रा स्थगित कर दी। ऐसी महिमा है श्रीब्रज रज व श्रीधाम वृन्दावन की। धनि धनि श्रीवृन्दावन धाम॥ जाकी महिमा बेद बखानत, सब बिधि पूरण काम॥ आश करत हैं जाकी रज की, ब्रह्मादिक सुर ग्राम॥ लाडिलीलाल जहाँ नित विहरत, रतिपति छबि अभिराम॥ रसिकनको जीवन धन कहियत, मंगल आठों याम॥ नारायण बिन कृपा जुगलवर, छिन न मिलै विश्राम॥ ----------:::×:::---------- "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

+13 प्रतिक्रिया 3 कॉमेंट्स • 5 शेयर
yogi Dec 6, 2021

+26 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 0 शेयर

. श्रीनन्दकिशोरदास गोस्वामी प्रभु (श्रृंगारवट वृन्दावन) बंग देश के बाँकुड़ा जिले के पुरुणिया पाट के श्रीरसिकानन्द प्रभु के कनिष्ठ पुत्र श्रीनन्दकिशोरदास गोस्वामी श्रीश्रीमन् नित्यानन्द प्रभुकी सातवीं पीढ़ी में थे। वे शैशव से ही विषयविरक्त थे। नित्यानन्द-सन्तान होने के नाते वैष्णव शिष्टाचार के अनुसार वैष्णव मात्र के पूज्य थे। छोटे-बड़े, गृहस्थ और त्यागी सब उसी दृष्टि से उनका आदर करते थे। पर यह उनके 'तृणादपि सुनीचेन' भाव के प्रतिकूल था। इससे उन्हें हार्दिक कष्ट होता था। उनकी प्रबल इच्छा थी भगवत्-कृपालब्ध किसी विशिष्ट वैष्णव के आनुगत्य में भजन-शिक्षा ग्रहण करने की। यह भी नित्यानन्द प्रभु के वंशज होने के कारण उनके लिए सम्भव नहीं था। जो सभी वैष्णवों के पूज्य थे और स्वयं आचार्य स्वरूप थे, उन्हें कोई वैष्णव अपने अनुगत मानकर भजन-शिक्षा कैसे देता ? इसलिए वे चुपचाप घर छोड़कर वृन्दावन चले गये। उस समय गौड़ीय वैष्णव समाज के मुकुटमणि श्रीविश्वनाथ चक्रवर्तीपाद वृन्दावन में रहते थे। उनसे उन्होंने बिना अपने स्वरूप का परिचय दिये भजन-शिक्षा देने और शास्त्राध्ययन कराने की प्रार्थना की। विश्वनाथ चक्रवर्तीपाद ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की। कुछ दिन वे उनके आनुगत्य में भजन और शास्त्राध्ययन करते रहे। किसी ने न जाना कि वे नित्यानन्द-सन्तान हैं। पर उनकी मां उनके बिना किसी से कहे घर छोड़कर चले जाने के कारण बहुत दुःखी थीं। उन्होंने उन्हें खोजने के लिए कई भक्तों को इधर उधर भेज रखा था। उनमें से एक उन्हें खोजते-खोजते वृन्दावन में चक्रवर्तीपाद के पास जा पहुंचे। चक्रवर्तीपाद को उन्होंने नंदकिशोरदास जी का परिचय देते हुए उनकी मां की दारुण व्यथा का वर्णन किया और घर लौटकर उनकी इच्छानुसार विवाह करने की आज्ञा देने का अनुरोध किया। पर उनकी माँ उनके बिना किसी से कहे घर छोड़कर चले जाने के कारण बहुत दुःखी थीं। उन्होंने उन्हें खोजने के लिए कई वैष्णवों को इधर उधर भेज रखा था। उनमें से एक उन्हें खोजते-खोजते वृन्दावन में चक्रवर्ती पाद के पास जा पहुँचे। चक्रवर्तीपाद को उन्होंने उनके स्वरूप का परिचय देते हुए उनकी माँ की दारुण व्यथा का वर्णन किया और घर लौटकर उनकी इच्छानुसार विवाह करने की आज्ञा देने का अनुरोध किया। चक्रवर्तीपाद परमपूज्या माँ गोस्वामिनी की इच्छा की अवहेलना कैसे करते ? उन्होंने नन्दकिशोर गोस्वामी से कहा–'आपने मुझे अपने शिक्षा गुरु के रूप में अङ्गीकार किया है। मैं यदि कुछ गुरु-दक्षिणा माँगूं तो देंगे ?' 'क्यों नहीं ? आप आज्ञा करें।' नन्दकिशोरजी ने तुरन्त कहा। 'मेरी गुरु-दक्षिणा रूप में आप अब माँ की आज्ञानुसार घर लौट जायें और विवाह करें।' नन्दकिशोरजी घर लौट गये, विवाह किया और एक पुत्र को जन्म दिया। उसके पश्चात् वे फिर गृह त्यागकर वृन्दावन चले गये। अपने साथ सम्वत् १८१५ की वादशाही सनद के साथ श्रीश्रीनिताइ-गौरांग विग्रह लेते गये, जिनकी आज भी शृङ्गारवट में विधिवत् सेवा-पूजा चल रही है। उनका अलौकिक प्रभाव देख तत्कालीन जोधपुर के राजा ने उन्हें बहुत-सी भू-सम्पत्ति प्रदान की, जिसका उनके वंशज निताइ-गौरांग की सेवा में उपयोग कर रहे हैं। श्रीपाद नन्दकिशोरजी के पास भोंदू नाम का एक व्रजवासी बालक रहता था, जो उनकी गैयों की देखभाल करता था। उसे लोग भोंदू इसलिए कहते थे कि उसे छल-कपट और चतुराई छूकर भी नहीं गये थे। उससे यदि उपहास में कोई कुछ झूठ भी कह देता, तो वह उसे मान लेता। शंका करना तो उसे आता ही न था। वह नित्य बालभोग-प्रसाद पाकर श्रीपाद की गायें चराने जमुनापार भांडीरवन में जाया करता। उससे किसी ने कहा था कि भांडीरवन में नन्दलाल ग्वाल-वाल सहित गायें चराने जाते हैं। वह यह सोचकर खुश होता कि किसी दिन उनसे भेंट होगी, तब वह उनसे मित्रता कर लेगा और उनके साथ खेला-कूदा करेगा। भोले-भाले भोंदू के हृदय की भाव-तरङ्ग उमड़-घुमड़कर जा टकरायी भक्तवत्सल भगवान् के मन-मन्दिर से। उनमें भी एक अपूर्व आलोड़न की सृष्टि हुई और जाग पड़ी एक नयी वासना भोंदू के साथ मित्रता कर खेल-कूद का आनन्द लेने की। तो हो गयी एक दिन भेंट दोनों में। भेंट को मित्रता में बदलते देर न लगी। भोंदू नित्य कुछ खाने-पीने की सामग्री अपने साथ ले जाता। नन्दलाल और उनके साथी ग्वाल-बाल उसके साथ खाते-पीते, खेलते और नाचते कूदते। कई दिन श्रीपाद ने देखा भोंदू को सामान सिर पर ढोकर ले जाते। एक दिन उन्होंने पूछा–'भोंदू, यह क्या ले जा रहा है ?" 'जे दाल-बाटी के ताईं है श्रीपाद।' 'दाल-बाटी ? किसके लिए ?' 'नन्दलाल और बिन के साथी ग्वाल-बालन के लिए। हम सब मिलके रोज दाल-बाटी बनामें हैं।' 'नन्दलाल ! कौनसे नन्दलाल रे ?' 'बेई बंसीबारे, जो भांडीरवन में गैया चरामें हैं।' 'बंसीबारे ! भांडीरवन में गैया चरामें हैं ! अच्छा, बता तो उनका मुखारविन्द और वेशभूषा कैसी है ?' 'बे बड़े मलूक हैं। सिर पै मोर-मुकुट धारन करे हैं। कानन में कुण्डल, गले में बनमाला धारन करे हैं और पीरे रंग को ओढ़ना ओढ़े हैं। सच बे बड़े मलूक लगै हैं।' श्रीपाद आश्चर्यचकित नेत्रों से भोंदू की ओर देखते रह गये। उन्हें उसकी बात का विश्वास नहीं हो रहा था। पर वे विश्वास किये बिना रह भी नहीं सक रहे थे; क्योंकि वे जानते थे भोंदू झूठ नहीं बोलता। उन्होंने कहा–'अच्छा भोंदू, एक दिन नन्दलाल और उनके साथियों को यहाँ ले आना। उनसे कहना श्रीपाद के यहाँ आपका दाल-बाटी का निमन्त्रण है। वे आ जायेंगे न ?' ‘आमेंगे च्यौं नई। मैं विनकू ले आऊँगो' भोंदूने खुश होकर कहा। उस दिन भाँडीरवन जाते समय भोंदू सोच रहा था–'आज नन्दलाल से श्रीपाद के निमन्त्रण की कहूँगा, तो वह कितना खुश होगा !' पर जब उसने उनमे निमन्त्रण की बात कही, तो वे बोले–'हम काऊकौ नौतौ-औतौ नायं खामें।' भोंदू का चेहरा सुस्त पड़ गया। उसने कहा–'नायँ नन्दलाल, तोको चलनौ परैगौ। मैंनै श्रीपाद से कह दी है, मैं तोय ले जाऊँगौ।' 'नायें, हम नायें जायें। हमकू श्रीपाद सों कहा करनौ ?' नन्दलाल ने गरदन हिलाकर मुँह बिचकाते हुए कहा। भोंदू रोष करना नहीं जानता था, पर उस समय उसे रोष आ गया। उसने नन्दलाल से कुछ नहीं कहा। पर वह अपनी गैयों को अलग कर कहीं अन्यत्र जाने लगा, जैसे वह नन्दलाल से कह रहा हो–'तुझे श्रीपाद से कुछ नहीं करना, तो मुझे भी तुझमे कुछ नहीं करना। बस, हो चुकी मेरी-तेरी मैत्री।' वह थोड़ी दूर ही जा पाया था कि नन्दलालने पुकारा–'भोंदू, ओ भोंदू ! नैक सुन जा।' भोंदू क्या अब सुनने वाला था ? वह और भी तेजी से गैयों को हाँकने लगा। भोंदू सुनने वाला नहीं था, तो भगवान् भी उसे छोड़ने वाले कब थे ? वे भागे उसके पीछे-पीछे। वाह रे व्रज के भगवान् ! तुम्हें 'भगवान्' कहते भी वाणी लजाती है। भगवान्, जो अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड की सृष्टि, स्थिति और प्रलयकर्ता हैं, ब्रह्मा, विष्णु और महेश जिनके अंश के भी अंश हैं, वे क्या किसी व्यक्ति के पीछे ऐसे भागते हैं, जैसे उनकी उससे कोई अपनी गरज अटकी हो, जैसे उसके रूठ जाने से उनका त्रिलोकी का साम्राज्य छिन जाने वाला हो ! पर वे जिसके पीछे भागें वह भागकर जाय कहाँ ? नन्दलाल जा खड़े हुए भोंदू का रास्ता रोककर उसके सामने और बोले–'सुनें नायँ ?' उनका स्वर ऊँचा था, पर उसमें विनय का भाव था। भोंदू ने उनके नेत्रों की ओर देखा, तो वे सजल थे। उसने कहा–'कहा कहँ ?' 'मैं कहूँ, मैं श्रीपाद को निमन्त्रण अस्वीकार नायँ करूँ। मैं तो कहूँ, मैं शृङ्गारवट नायँ जाऊँगौ तू तौ भोरौ है, जानें नायँ शृङ्गारवट राधारानी को ठौर है। हुआँ दाऊ दादा कैसे जायगौ ? मेरे सखा कैसे जायेंगे ? श्रीपादकूँ ह्याँई आवनी होयगौ अपने माथे पै सामग्री लैकें। वे अपने हाथ से दाल-बाटी बनामेंगे, तो हम पामेंगे।' भोंदू प्रसन्न हो गया। उसने उसी प्रसन्न मुद्रा में श्रीपाद से जाकर सब कुछ निवेदन किया। श्रीपाद दूसरे दिन प्रचुर सामग्री अपने मस्तक पर वहनकर भांडीरवन ले गये। वे राम-कृष्ण और ग्वाल-बालो के साथ उनका क्रीड़ा विनोद देखकर कृतार्थ हुए। थोड़ी देर में सब कुछ अन्तर्हित हो गया। तब वे मूच्छित हो भूमि पर गिर पड़े। उस समय उन्हें आदेश हुआ–'अधीर न हो। घर जाओ और मेरी लीला स्थलियों का वर्णन करो।' इस आदेश का पालन कर श्रीपाद ने 'श्रीवृन्दावन-लीलामृत' और 'श्रीश्रीरसकलिका' नाम के दो ग्रंथों का प्रणयन किया। ० ० ० पुस्तक: व्रज के भक्त (प्रथम खण्ड) "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

+14 प्रतिक्रिया 2 कॉमेंट्स • 15 शेयर
sukhadev awari Dec 6, 2021

+35 प्रतिक्रिया 7 कॉमेंट्स • 0 शेयर

꧁🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚꧂ 💥꧁श्रीसिद्धिविनायक पंचांग꧂💥 🌷☘🌹🍂🍃💐🌻🌸🌺💐. ┈━❀꧁ 🐀🐁🐀 ꧂❀----- 🔔°•🔔•°🔔°•🌄•°🔔°•🔔•°🔔 ☘️☘️☘️☘️ जय श्री महाकालेश्वर विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कर्णामृताय शशिशेखर धारणाय कर्पूरकान्ति धवलाय जटाधराय दारिद्र्यदुःख दहनाय नमश्शिवाय गौरीप्रियाय रजनीश कलाधराय कालान्तकाय भुजगाधिप कङ्कणाय गङ्गाधराय गजराज विमर्धनाय दारिद्र्यदुःख दहनाय नम:शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः । ॐ श्रां श्रीं श्रीं सः चन्द्राय नमः । सुप्रभातम् ॐ श्रीगणेशाय नमः अथ् पंचांगम् दिनाँक 06-12-2021 सोमवार अक्षांश- 30°:36", रेखांश 76°:80" अम्बाला शहर हरियाणा, पिन कोड- 134 007 ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ ॐ भोलेनाथ नमः, ॐ कैलाश पति नमः,ॐ भूतनाथ नमः, ॐ नंदराज नमः,ॐ नन्दी की सवारी नमः, ॐ ज्योतिलिंग नमः,ॐ महा काल नमः ॐ रुद्रनाथ नमः,ॐ भीमशंकर नमः ॐ नटराज नमः ॐ प्रलेयन्कार नमः,ॐ चंद्रमोली नमः, ॐ डमरूधारी नमः,ॐ चंद्रधारी नमः ॐ मलिकार्जुन नमः,ॐ भीमेश्वर नमः, ॐ विषधारी नमः,ॐ बम भोले नमः, ॐ ओंकार स्वामी नमः, ॐ ओंकारेश्वर नमः, ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः ॐ विश्वनाथ नमः,ॐ अनादिदेव नमः, ॐ उमापति नमः,ॐ गोरापति नमः, ॐ गणपिता नमः,ॐ भोले बाबा नमः, ॐ शिवजी नमः,ॐ शम्भु नमः, ॐ नीलकंठ नमः ॐ महाकालेश्वर नमः,ॐ त्रिपुरारी नमः, ॐ त्रिलोकनाथ नमः,ॐ त्रिनेत्रधारी नमः, ॐ बर्फानी बाबा नमः,ॐ जगतपिता नमः, ॐ मृत्युन्जन नमः,ॐ नागधारी नमः, ॐ रामेश्वर नमः,ॐ लंकेश्वर नमः, ॐ अमरनाथ नमः,ॐ केदारनाथ नमः, ॐ मंगलेश्वर नमः,ॐ अर्धनारीश्वर नमः, ॐ नागार्जुन नमः,ॐ जटाधारी नमः, ॐ नीलेश्वर नमः,ॐ गलसर्पमाला नमः, ॐ दीनानाथ नमः,ॐ सोमनाथ नमः, ॐ जोगी नमः,ॐ भंडारी बाबा नमः, ॐ बमलेहरी नमः,ॐ गोरीशंकर नमः, ॐ शिवाकांत नमः,ॐ महेश्वराए नमः, ॐ महेश नमः,ॐ ओलोकानाथ नमः, ॐ आदिनाथ नमः,ॐ देवदेवेश्वर नमः, ॐ प्राणनाथ नमः,ॐ शिवम् नमः, ॐ महादानी नमः,ॐ शिवदानी नमः, ॐ संकटहारी नमः,ॐ महेश्वर नमः, ॐ रुंडमालाधारी नमः, ॐ जगपालनकर्ता नमः ॐ पशुपति नमः,ॐ संगमेश्वर नमः, ॐ दक्षेश्वर नमः,ॐ घ्रेनश्वर नमः, ॐ मणिमहेश नमः,ॐ अनादी नमः, ॐ अमर नमः, ॐ आशुतोष महाराज नमः ॐ विलवकेश्वर नमः,ॐ अचलेश्वर नमः, ॐ अभयंकर नमः,ॐ पातालेश्वर नमः, ॐ धूधेश्वर नमः,ॐ सर्पधारी नमः, ॐ त्रिलोकिनरेश नमः,ॐ हठ योगी नमः, ॐ विश्लेश्वर नमः,ॐ नागाधिराज नमः, ॐ सर्वेश्वर नमः,ॐ उमाकांत नमः, ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः,ॐ त्रिकालदर्शी नमः ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः,ॐ महादेव नमः ॐ गढ़शंकर नमः,ॐ मुक्तेश्वर नमः, ॐ नटेश्वर नमः,ॐ गिरजापति नमः, ॐ भद्रेश्वर नमः,ॐ त्रिपुनाशक नमः, ॐ निर्जेश्वर नमः,ॐ किरातेश्वर नमः, ॐ जागेश्वर नमः, ॐ अबधूतपति नमः, ॐ भीलपति नमः,ॐ जितनाथ नमः, ॐ वृषेश्वर नमः, ॐ भूतेश्वर नमः ॐ बैजनाथ नमःॐ नागेश्वर नमः 🙏🏿🙏🏿🙏🏿 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ -----समाप्तिकाल---- 📒तिथि तृतीया 26:34:05 ☄️ नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 26:19:42 🛑 करण : 🛑 तैतिल 16:10:42 🛑 गर 26:34:05 🔓 पक्ष शुक्ल 🛑 योग गण्ड 20:04:07 🗝️ वार सोमवार 🌄 सूर्योदय 07:05:04 🌃 चन्द्रोदय 09:15:00 🌜 चन्द्र राशि धनु 🏹 🌌 सूर्यास्त 17:21:49 🌑 चन्द्रास्त 19:25:00 ☃️ ऋतु हेमंत 🛑 शक सम्वत 1943 प्लव 🛑 कलि सम्वत 5123 🛑 दिन काल 10:16:44 🛑 विक्रम सम्वत 2078 🛑 मास अमांत मार्गशीर्ष 🛑 मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष 🎷 शुभ समय 🥁 अभिजित 11:52:53 - 12:34:00 ⚫ दुष्टमुहूर्त : 12:34:00 - 13:15:07 14:37:21 - 15:18:28 ⚫ कंटक 09:08:25 - 09:49:32 ⚫ यमघण्ट 11:52:53 - 12:34:00 👿 राहु काल 08:22:10 - 09:39:15 ⚫ कुलिक 14:37:21 - 15:18:28 ⚫ कालवेला 10:30:39 - 11:11:46 ⚫ यमगण्ड 10:56:21 - 12:13:26 ⚫ गुलिक 13:30:32 - 14:47:37 🛑 दिशा शूल पूर्व 💥💥💥💥होरा 🛑चन्द्रमा 07:05:04 - 07:56:28 🛑शनि 07:56:28 - 08:47:52 🛑बृहस्पति 08:47:52 - 09:39:15 🛑मंगल 09:39:15 - 10:30:39 🛑सूर्य 10:30:39 - 11:22:03 🛑शुक्र 11:22:03 - 12:13:27 🛑बुध 12:13:27 - 13:04:50 🛑चन्द्रमा 13:04:50 - 13:56:14 🛑शनि 13:56:14 - 14:47:38 🛑बृहस्पति 14:47:38 - 15:39:01 🛑मंगल 15:39:01 - 16:30:25 🛑सूर्य 16:30:25 - 17:21:49 🛑शुक्र 17:21:49 - 18:30:29 🛑बुध 18:30:29 - 19:39:09 🛑चन्द्रमा 19:39:09 - 20:47:49 💥💥💥💥 चोघडिया ⛩️अमृत 07:05:04 - 08:22:10 👿काल 08:22:10 - 09:39:15 ⛩️शुभ 09:39:15 - 10:56:21 ☘️रोग 10:56:21 - 12:13:26 ⚫उद्वेग 12:13:26 - 13:30:32 🛑चल 13:30:32 - 14:47:37 ⛩️लाभ 14:47:37 - 16:04:43 ⛩️अमृत 16:04:43 - 17:21:49 🛑चल 17:21:49 - 19:04:49 ☘️रोग 19:04:49 - 20:47:49 💥💥💥किस चौघड़िया में क्या करें 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। शास्त्रानुसार प्रत्येक चौघड़िया में निम्नानुसार कार्य किये जाने प्रस्तावित होते हैं:- 👉🏿🛑 चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें । 👉🏿⚫उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें । 👉🏿⛩️शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें । 👉🏿⛩️लाभ में व्यापार करें । 👉🏿☘️रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें । 👉🏿⚫काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है । 👉🏿⛩️अमृत में सभी शुभ कार्य । 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ꧁ दैनिक ग्रह गोचर ꧂ 🌞 सूर्य - वृश्चिक 🦂 🌙 चन्द्र - धनु 🏹 ⚫ मंगल - वृश्चिक 🦂 ⚫ बुध - वृश्चिक 🦂 ⚫ बृहस्पति - कुम्भ 🏺 ⚫ शुक्र - धनु 🏹 ⚫ शनि - मकर 🐊 😈 राहु - वृष 🐂 👖 केतु - वृश्चिक 🦂 ------------------------------------ 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 व्रत एवम् त्योहार 15 दिसम्बर तक ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दिसंबर (मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी से पोष कृष्ण त्रयोदशी तक) सन् 2021 ईसवीं, विक्रमी संवत 2078, शाका 1943, हिजरी 1443 । सूर्य दक्षिणायन- उत्तरायण, दक्षिण गोल, हेमंत -शिशिर ऋतु:, ग्रह दर्शन- प्रातः मंगल पूर्व क्षितिज में दिखेगा, सायं शुक्र पश्चिम में, उससे ऊपर शनि होगा। गुरु पश्चिम कपाल में दिखेगा ।बुध अस्त है। व्रत त्योहार 15 दिसंबर तक ☘️☘️☘️ 🛑 6 दिसंबर सोमवार जमादिउलाव्वल मास प्रारंभ 🛑7 दिसंबर मंगलवार भद्रा 13:07 से 23:41 तक राहु कृतिका 3, केतु अनुराधा 1 में 20:27 🛑8 दिसंबर बुधवार 👉शुक्र मकर में 14:03 श्री पंचमी श्री राम विवाह उत्सव नाग पंचमी 🛑 9 दिसंबर गुरुवार पंचक प्रारंभ 10:10 स्कंद (गुह)षष्टि, मंगल अनुराधा में 25:05 👉बुध मूल 1 🏹धनु में 30:05 चंपा षष्टि 🛑शुक्रवार 10 दिसंबर भद्रा 19:10 से 31:12 तक मित्र विष्णु सप्तमी 🛑 शनिवार 11 दिसंबर दुर्गा अष्टमी 🛑रविवार 12 दिसंबर नंदा नवमी, गण्ड मूल 24:00 🛑सोमवार 13 दिसंबर पंचक समाप्त 26:05 🛑 मंगलवार 14 दिसंबर भद्रा 10:35 से 23:36 तक मोक्षदा एकादशी व्रत श्री गीता जयंती गण्ड मूल 28:40 तक 🛑बुधवार 15 दिसंबर 👉💥सूर्य मूल 1 धनु🏹 में 27:42 👉पौष सक्रांति प्रातः 10:06 तक गुरु धनिष्ठा 4 में 8:14 अखंड द्वादशी 🌷☘🌹🌻🌸🌺💐 ┉┅━❀꧁🐀🐁🐀꧂❀━┅ दैनिक भविष्यफल 👩‍❤️‍👨🦀🦁👩🏻‍🦱⚖️🏹🐬 ✒️ नोटः प्रस्तुत भविष्यफल में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है । पूरी जानकारी के लिए किसी देवेज्ञ या भविष्यवक्ता से मिल सकते हैं। 🤷🏻‍♀ आज जिन भाई-बहनों /मित्रों का 🎂जन्मदिन या विवाह की वर्षगांठ 🥁📯 है , उन सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ तथा शुभ आशीर्वाद । भगवान जी आपकी जीवन यात्रा सफल करें । 🐐मेष कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्ययवृद्धि होगी। तनाव रहेगा। अपरिचितों पर विश्वास न करें। प्रयास में आलस्य व विलंब नहीं करना चाहिए। रुके हुए काम समय पर होने की संभावना है। विरोधी परास्त होंगे। यात्रा कष्टप्रद हो सकती है। धैर्य एवं संयम बना रहेगा। 🐂वृष कोर्ट-कचहरी में अनुकूलता रहेगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। झंझटों में न पड़ें। उधार दिया धन मिलने से राहत हो सकती है। जीवनसाथी का सहयोग उलझे मामले सुलझाने में सहायक हो सकेगा। वाहन सावधानी से चलाएँ। 👩‍❤️‍👨मिथुन बेरोजगारी दूर होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। जोखिम न लें। क्रोध एवं उत्तेजना पर संयम रखें। सत्कार्य में रुचि बढ़ेगी। प्रियजनों का पूर्ण सहयोग मिलेगा। व्यावसायिक चिंताएँ दूर होंगी। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। 🦀कर्क भूमि व भवन संबंधी कार्य लाभ देंगे। रोजगार मिलेगा। शत्रु भय रहेगा। निवेश व नौकरी लाभ देंगे। व्यापार अच्छा चलेगा। कार्य के विस्तार की योजनाएँ बनेंगी। रोजगार में उन्नति एवं लाभ की संभावना है। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। लाभदायक समाचार मिलेंगे। 🦁सिंह उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। शत्रु सक्रिय रहेंगे। शोक समाचार मिल सकता है। थकान महसूस होगी। व्यावसायिक चिंता रहेगी। संतान के व्यवहार से कष्ट होगा। सहयोगी मदद नहीं करेंगे। व्ययों में कटौती करने का प्रयास करें। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। 👩🏻‍🦱कन्या अतिथियों का आवागमन रहेगा। उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। स्वाभिमान बना रहेगा। नई योजनाओं की शुरुआत होगी। संतान की प्रगति संभव है। भूमि व संपत्ति संबंधी कार्य होंगे। पूर्व कर्म फलीभूत होंगे। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। व्यापार में इच्छित लाभ होगा। ⚖️तुला चोट, चोरी व विवाद से हानि संभव है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। कुसंगति से हानि होगी। अपने काम से काम रखें। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें। आवास संबंधी समस्या हल होगी। आलस्य न करें। सोचे काम समय पर नहीं हो पाएँगे। 🦂वृश्चिक राजकीय बाधा दूर होकर लाभ होगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। क्रोध पर नियंत्रण रखें। लाभ होगा। रुके हुए काम समय पर पूरे होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। परिवार की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। व्यापार में नई योजनाएँ बनेंगी। व्यापार अच्छा चलेगा। 🏹धनु रोमांस में समय बीतेगा। मेहनत का फल मिलेगा। कार्यसिद्धि से प्रसन्नता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। परिवार में प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। व्यापार के कार्य से बाहर जाना पड़ सकता है। कार्यपद्धति में विश्वसनीयता बनाएँ रखें। धनार्जन होगा। 🐊मकर दिन प्रेमभरा गुजरेगा। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रुका हुआ धन मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी। जल्दबाजी न करें। प्रियजनों से पूरी मदद मिलेगी। धन प्राप्ति के योग हैं। स्वयं के सामर्थ्य से ही भाग्योन्नति के अवसर आएँगे। संतान के कार्यों में उन्नति के योग हैं। 🏺कुंभ रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। विवाद न करें। सामाजिक एवं राजकीय ख्याति में अभिवृद्धि होगी। आर्थिक अनुकूलता रहेगी। रुका धन मिलने से धन संग्रह होगा। राज्यपक्ष से लाभ के योग हैं। 🦈मीन नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। स्वास्थ्य के प्रति सावधानी रखें। कार्यक्षमता एवं कार्यकुशलता बढ़ेगी। कर्म के प्रति पूर्ण समर्पण व उत्साह रखें। व्यापार में नई योजनाओं से लाभ होगा। आपका दिन शुभ हो। ACHARYA ANIL PARASHAR, VADIC,KP ASTROLOGER.

+6 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 12 शेयर

. "योगक्षेम का वहन" पोस्ट - 05 (अन्तिम) गतांक से आगे:- भगवान् बोले-‘इसमें तुम्हारा कोई दोष ही नहीं है। तुम तो मुझ पर ही निर्भर थे। मेरे आने में जो विलम्ब हुआ, यह मेरे स्वभाव का दोष है, पर अभी तक तुमने भोजन क्यों नहीं किया ?' पंडितजी ने कहा-'जब आप कह गये थे कि मैं फिर आकर मिलूँगा, तब बिना आपके आये मैं कैसे भोजन करता। आप भोजन कीजिये, उसके बाद हम लोग भी प्रसाद पायेंगे।' भगवान् ने कहा-'नहीं-नहीं चलो हम लोग एक साथ ही भोजन करें।' फिर ब्राह्मण-पत्नी ने भगवान् का संकेत पाकर दोनों को भोजन कराया। ब्राह्मण देवता ने अत्यन्त प्रेम-विह्वल होकर प्रसाद पाया। भोजन के बाद भगवान् बोले-'तुम्हारी जो इच्छा हो, सो माँग लो; तुम्हारे लिये कुछ दुर्लभ नहीं है।' ब्राह्मण ने कहा-'जब आप स्वयं ही पधार गये, तब अब भी माँगना बाकी ही रहा क्या ? नाथ ! मैं तो यही चाहता हूँ कि अब तो मेरे मन में योगक्षेम की भी इच्छा न रहे और केवल आप में ही मेरा अनन्य विशुद्ध प्रेम हो।' भगवान् 'तथास्तु' कहकर अन्तर्धान हो गये।' इसके बाद ब्राह्मण-पत्नी ने भी प्रसाद पाया। इधर जब से उन छोटे भाइयों ने अपने ज्येष्ठ भ्राता भगवद्भक्त ब्राह्मण को अलग कर दिया था, तब से वे उत्तरोत्तर नितान्त दरिद्री और दुःखी होते चले गये। उनकी इतनी हीन दशा हो गयी कि न तो उनको कहीं से कुछ उधार ही मिलता था और न माँगने पर ही। जब उन्होंने सुना कि हमारे भाई इतने धनी हो गये हैं कि उनके द्वार पर सदा याचकों की भीड़ लगी रहती है, तब वे भी अपने भाई के पास गये। परम भक्त पंडितजी ने भाइयों को आये देखकर उन्हें हृदय से लगा लिया और उनकी कुशल-क्षेम पूछी। उन्होंने उत्तर में कहा- 'आप-जैसे सज्जन पुरुष से अलग होकर हमें कुशल कहाँ ? हम तो मुँह दिखाने लायक भी नहीं हैं। फिर भी आप हम लोगों पर दया करके प्रेमसे मिलते हैं, यह आपका सौहार्द है।' बड़े भाईने कहा-नहीं-नहीं भैया ! ऐसा मत कहो। हम तीनों सहोदर भाई हैं। हम लोग कभी अलग थोड़े ही हो सकते हैं। यह तो एक होनहार थी। हम लोग जैसे प्रेम से पहले रहा करते थे, अब भी हमें वैसे ही रहना चाहिये। संसार में सहोदर भाई के समान अपना हितैषी और प्रेमी कौन है ? तुम लोगों को लज्जा या पश्चात्ताप न करके पूर्ववत् ही प्रेम करना चाहिये। यह जो कुछ ऐश्वर्य देखते हो, इसमें भैया ! मेरा क्या है। यह सब श्रीभगवान् की विभूति है। जो कोई भी भगवान् पर निर्भर हो जाता है, भगवान् सब प्रकार से उसका योगक्षेम वहन करते हैं। जैसे बालक माता पिता पर निर्भर होकर निश्चिन्त विचरता है और माता-पिता ही सब प्रकार से उसका पालन पोषण करते हैं, उसी प्रकार, नहीं-नहीं, उससे भी बढ़कर भगवान् अपने आश्रित का पालन-पोषण और संरक्षण करते हैं। यही क्या, वे तो अपने-आपको ही उसके समर्पण कर देते हैं। अतः तुमलोगोंको- अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥ (गीता ९। २२) -इस श्लोक में कही हुई बात पर विश्वास करके नित्य-निरन्तर भगवान् का ही चिन्तन करना चाहिये तथा अर्थ और भाव को समझकर नित्य श्रीगीता का अध्ययनाध्यापन करना चाहिये। इसके बाद वे दोनों भाई बड़े भाई के साथ रहकर उनकी आज्ञा के अनुसार नित्य-निरन्तर जप, ध्यान तथा गीता का पाठ करने लगे एवं थोड़े ही समयमें भगवान् की भक्ति करके भगवत्कृपा से भगवान् को प्राप्त हो गये। यह कहानी कहाँ तक सच्ची है, इसका पता नहीं है; किंतु हमें इससे यह शिक्षा ग्रहण करनी चाहिये कि भगवान् पर निर्भर होने पर भगवान् योगक्षेम का वहन करते हैं। अतः हम भी इस पर विश्वास करके भगवान् पर निर्भर हो जायँ। सबसे उत्तम बात तो यह है कि नित्य-निरन्तर भगवान् का निष्काम भाव से चिन्तन करना चाहिये। योगक्षेम की भी इच्छा न करके भगवान् में केवल अहैतुक विशुद्ध प्रेम हो, इसी के लिये प्रयत्न करना चाहिये। किंतु यदि योगक्षेम की ही इच्छा हो तो सच्चे-पारमार्थिक योगक्षेम की इच्छा करनी चाहिये। अप्राप्त की प्राप्ति का नाम ‘योग’ है और प्राप्त की रक्षा का नाम 'क्षेम' है। पारमार्थिक योगक्षेम का अभिप्राय यह है कि परमात्मा की प्राप्ति के मार्ग में जहाँ तक हम आगे बढ़ चुके हैं, उस प्राप्त साधन सम्पत्ति की तो भगवान् रक्षा करते हैं और भगवान् की प्राप्ति में जो कुछ कमी है, उसकी पूर्ति भगवान् कर देते हैं। ऐसा भगवान् ने आश्वासन दिया है। इस प्रकार समझकर और इस पर विश्वास करके भगवान् पर निर्भर एवं निर्भय हो जायँ, भगवच्चिन्तन के सिवा और कुछ भी चिन्ता न करें। जो लोग सांसारिक योगक्षेम के लिये भगवान् को भजते हैं, वे भी न भजने वालों की अपेक्षा बहुत उत्तम हैं; क्योंकि भगवान् ने अर्थार्थी, आर्त आदि भक्तों को भी उदार-श्रेष्ठ बतलाया है- 'उदाराः सर्व एवैते' (गीता ७।१८)-और ज्ञानी निष्काम अनन्य भक्त को तो अपना स्वरूप ही बतलाया है; क्योंकि उस निष्कामी ज्ञानी को एक भगवान् के सिवा अन्य कोई गति है ही नहीं। अतः हमको उचित है कि हम भगवान् के निष्काम ज्ञानी अनन्य भक्त बनें; क्योंकि ऐसा भक्त भगवान् को अत्यन्त प्रिय है। भगवान् ने कहा है- तेषां ज्ञानी नित्ययुक्त एकभक्तिर्विशिष्यते। प्रियो हि ज्ञानिनोऽत्यर्थमहं स च मम प्रियः॥ (गीता ७॥ १७) ‘उन भक्तों में नित्य मुझ में एकी भाव से स्थित अनन्यप्रेम-भक्तिवाला ज्ञानी भक्त अति उत्तम है; क्योंकि मुझको तत्त्व से जानने वाले ज्ञानी को मैं अत्यन्त प्रिय हूँ और वह ज्ञानी मुझे अत्यन्त प्रिय है।' ----------:::×:::---------- लेखनी: श्रीजयदयालजी गोयन्दका पुस्तक: 'शिक्षाप्रद ग्यारह कहानियाँ' कोडः २८३ प्रकाशक: गीताप्रेस (गोरखपुर) "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *******************************************

+11 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 8 शेयर

भारत का एकमात्र धार्मिक सोशल नेटवर्क

Rate mymandir on the Play Store
5000 से भी ज़्यादा 5 स्टार रेटिंग
डेली-दर्शन, भजन, धार्मिक फ़ोटो और वीडियो * अपने त्योहारों और मंदिरों की फ़ोटो शेयर करें * पसंद के पोस्ट ऑफ़्लाइन सेव करें
सिर्फ़ 4.5MB