Anupam Mohanta
Anupam Mohanta Aug 13, 2022

साधनाएं दो प्रकार की होती हैं सात्विक और तामसिक lतामसिक साधनाएं जल्दी सिद्ध होती हैं और सात्विक देर मेंl तामसिक साधना के द्वारा स्वार्थ सिद्धि और सात्विक साधना से परमार्थ होता है lपरमार्थ का मार्ग धर्म का मार्ग है जो कि लोक और परलोक दोनों के लिए लाभकारी है । इसलिए इसमें समय लगता है , किंतु तामसिक साधना सिर्फ इसी लोक के लोगों को रिझाने और स्वार्थ सिद्धि तक सीमित रहती हैl #लिंग_भैरवी और संभोग शक्ति एक दूसरे से आत्मिक रूप से जुडे हैं। लिंगम् शक्ति के बिना संभोग संभव नही है। योनि, नारी शक्ति का ज्वालामुखी है जबकि लिंग, नर ऊर्जा का प्रचंड वेग है। #सम्भोग क्रिया के द्वारा ही ये दोनों ऊर्जा एक हो जाती हैं और सृष्टि में नया सृजन करते हैं। सृष्टि मे सम्भोग और सृजन निरन्तर चलता रहता है। सम्भोग परमानन्द का क्षणिक भाग है और इसे आनन्द कहते हैं। जब ये आनन्द अनन्त हो जाता है तो परमानन्द कहलाता है। स्वयं को इस परमानन्द में स्थापित करना ही मोक्ष है। जब कोई भी आत्मा परमानन्द में लीन होती है तो वो अन्तहीन आनन्द में डूब जाती है। वो सदैव सम्भोग में रत है। वो अनन्त सम्भोग में डुबी है। यही पुर्ण समाधि है। परमपुरुष प्रकृति के साथ सदैव सम्भोगरत है। लिंग भैरवी लिंगम् शक्ति है। इस शक्ति के बिना सम्भोग का आनन्द प्राप्त नही किया जा सकता। नारी ऊर्जा, प्रेम और सम्भोग पर टिकी है। सम्भोग प्रेम का उच्चतम बिन्दु है। जो नर, नारी को प्रेम और सम्भोग मे संतुष्ट नही कर सकता, नारी उसका त्याग कर देती है। जो पुरूष, नारी को सम्भोग में पूर्ण संतुष्ट कर सकता है, नारी उसके वशीभूत हो जाती है। नारी को नर ऊर्जा लिंग से सम्भोग क्रिया के द्वारा प्राप्त होती है। नारी सदैव प्रेम की भूखी है। नारी को प्रेम से ही अपने आधीन किया जाता है। लिंग भैरवी की उपासना से लिंगम् शक्ति बढती है। ये नर ऊर्जा को और ज्यादा बलवान बना देती है जिससे नर, नारी को रति क्रिया में संतुष्ट कर, खुद भी लम्बे समय तक सम्भोग आनन्द प्राप्त करता है। लेकिन एक बात सदैव ध्यान रखें कि नारी भोग की वस्तु नही है बल्कि जननी है। याद रखिये कि आप स्वयं भी नारी से ही पैदा हुए है। नारी सदैव आदरणीय है। ऑनलाइन तन्त्र साधना सीखने के लिए संपर्क करे: बेसिक: 11000/- पूर्ण: 25000/- www.swamijee.in #OnlineTantraCourses #LearnTantra

साधनाएं दो प्रकार की होती हैं सात्विक और तामसिक lतामसिक साधनाएं जल्दी सिद्ध होती हैं और सात्विक देर मेंl तामसिक साधना के द्वारा स्वार्थ सिद्धि और सात्विक साधना से परमार्थ होता है lपरमार्थ का मार्ग धर्म का मार्ग है जो कि लोक और परलोक दोनों के लिए लाभकारी है । इसलिए इसमें समय लगता है , किंतु तामसिक साधना सिर्फ इसी लोक के लोगों को रिझाने और स्वार्थ सिद्धि तक सीमित रहती हैl #लिंग_भैरवी और संभोग शक्ति एक दूसरे से आत्मिक रूप से जुडे हैं।  लिंगम् शक्ति के बिना संभोग संभव नही है। योनि, नारी शक्ति का ज्वालामुखी है जबकि लिंग, नर  ऊर्जा का प्रचंड वेग है। #सम्भोग क्रिया के द्वारा ही ये दोनों ऊर्जा एक हो जाती हैं और सृष्टि में नया सृजन करते हैं। सृष्टि मे सम्भोग और सृजन निरन्तर चलता रहता है। सम्भोग परमानन्द का क्षणिक भाग है और इसे आनन्द कहते हैं। जब ये आनन्द अनन्त हो जाता है तो परमानन्द कहलाता है। स्वयं को इस परमानन्द में स्थापित करना ही मोक्ष है। जब कोई भी आत्मा परमानन्द में लीन होती है तो वो अन्तहीन आनन्द में डूब जाती है। वो सदैव सम्भोग में रत है। वो अनन्त सम्भोग में डुबी है। यही पुर्ण समाधि है। परमपुरुष प्रकृति के साथ सदैव सम्भोगरत है।

लिंग भैरवी लिंगम् शक्ति है। इस शक्ति के बिना सम्भोग का आनन्द प्राप्त नही किया जा सकता। नारी ऊर्जा, प्रेम और सम्भोग पर टिकी है। सम्भोग प्रेम का उच्चतम बिन्दु है। जो नर,  नारी को प्रेम और सम्भोग मे संतुष्ट नही कर सकता, नारी उसका त्याग कर देती है। जो पुरूष, नारी को सम्भोग में पूर्ण संतुष्ट कर सकता है, नारी उसके वशीभूत हो जाती है। नारी को नर ऊर्जा लिंग से सम्भोग क्रिया के द्वारा प्राप्त होती है। नारी सदैव प्रेम की भूखी है। नारी को प्रेम से ही अपने आधीन किया जाता है।

लिंग भैरवी की उपासना से लिंगम् शक्ति बढती है। ये नर ऊर्जा को और ज्यादा बलवान बना देती है जिससे नर, नारी को रति क्रिया में संतुष्ट कर, खुद भी लम्बे समय तक सम्भोग आनन्द प्राप्त करता है। लेकिन एक बात सदैव ध्यान रखें कि नारी भोग की वस्तु नही है बल्कि जननी है। याद रखिये कि आप स्वयं भी नारी से ही पैदा हुए है। नारी सदैव आदरणीय है। ऑनलाइन तन्त्र साधना सीखने के लिए संपर्क करे: बेसिक: 11000/- पूर्ण: 25000/- www.swamijee.in

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sanjeev sharma Jul 30, 2022

🇱 🇮 🇻 🇪 🇩 🇦 🇷 🇸 🇭 🇦 🇳 👣 🌹👁️🔺👁️🌹 जय कुलजा माता श्री नैना देवी जी🕉️🌺🙏🌹🌻🎇🌹👣 *🙏 ll ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ll * *🙏 जय माता श्री नैना 👁🔺👁देवी जी 🙏*🌷🔔🎊🕉️🎈🎉🍍⛳️🙏* जय माता कुलजा देवी जी आदि शक्ति जगजननी विश्वविख्यात श्री सिद्ध शक्तिपीठ माता श्री नैना देवी जी के आज के प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हिमाचल प्रदेश बिलासपुर नैना देवी से *🙏👣🎉🕉️🌷🎊👁️❗️👁️🌹👣🌷3⃣1⃣ जुलाई 🌹रविवार 🔱🎈🌹 2⃣0⃣2⃣2⃣👣🌷 🌻💐✍️...दास संजीव शर्मा🕉️👣 💐🍓 🔔🎉🙏🌷💐🌹💐👁️🔺👁️🌹👣 जेष्ठ माता श्री नैना देवी जी सदैव अपनी कृपा बनाए रखें भक्तों पर🕉️ शुभ विक्रम संवत- 2079 शक संवत-1944 *अयन* - दक्षिणायन *ऋतु* - वर्षा *मास* - श्रावण *पक्ष* - शुक्ल *तिथि* - तृतीया 01 अगस्त प्रातः 04:18 तक तत्पश्चात चतुर्थी *नक्षत्र* - मघा दोपहर 02:20 तक तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी *योग* - वरीयान् शाम 07:12 तक तत्पश्चात परिघ 🌻💐🌷 राहुकाल - शाम 05:43 से शाम 07:22 तक 🌹सूर्योदय - 06:10 🌹सूर्योस्त - 19:22 *दिशाशूल*- पश्चिम दिशा में ब्रह्म मुहूर्त - प्रातः 04:44 से प्रातः 05:27 तक निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:25 से रात्रि 01:08 तक *व्रत पर्व विवरण - तृतीया नवरात्रि 🏵️ *विशेष* - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है! रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है! सावन के तृतीया नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं सभी माता जी के भक्तों को जय माता दी🎈⛳️👣🔱🐚🔔🚼🙏

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