🌹🕉️🙏🏼ओम नमो विष्णु हरि जी🙏🏼🕉️🌹👏🌹🕉️🙏🏼 जय श्री मां लक्ष्मी जी 🙏🏼🕉️🌹👏🌹🕉️🙏🏼 शूभ प्रभात वंदन जी 🙏🏼🕉️🌹👏🌹🕉️🙏🏼 सभी भाई बहनों को प्रणाम जी 👏🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡🧡

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कामेंट्स

Brajesh Sharma Jan 20, 2022
🙏🚩🎋🙏🎋🚩🙏🎋🚩🙏 ॐ नमों भगवते वासुदेवाय श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा ॐ नमः शिवाय.. हर हर महादेव खुश रहें मस्त रहें स्वस्थ रहें व्यस्त रहें 💥🇮🇳🌞🙏🚩🎋🌞🙏🚩🎋 राम राम जी

योगेश जानी Jan 20, 2022
ॐ नमः भगवते वासुदेवाय शुभ गुरूवार आपका दिन शुभहो नमस्ते

SANTOSH YADAV Jan 20, 2022
जय श्री गणेश जय श्री लक्ष्मी नारायण शुभ गुरुवार वंदन जी

indraj Jan 20, 2022
Om namo bhagvate vasudevay namah 🙏 Jai Shri Radhe krishna ji 🙏 bhagwan shri lakshmi Narayan ji ka ashirwad aap or apke parivar par sadev bna rhe ji apka har pal Shubh or mangalmay ho ji 🙏🙏🌷🌷

Pradeep Kumar Jan 20, 2022
Radhe Krishna Radhe Krishna Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe Radhe

kamala Maheshwari Jan 20, 2022
जयश्री हरि  बिष्णु भगवान की जय बांके बिहारी जी की जय जयश्री राधे रानी की जय जय कान्हा की कृपादृष्टि सदैव आपके उपर बनी रहे जय श्री कृष्णा जी ❤️💠🔥💠👍💠

🌷p kumar🌷 Jan 20, 2022
🙏🌷सुप्रभात🌷🙏 🙏🌷जय श्री राम🌷🙏 🙏🌷जय हनुमान🌷🙏 🙏🌷जय माता की🌷🙏 🙏🌷ॐ नमः शिवाय🌷🙏 🙏🌷हर हर महादेव🌷🙏 🙏🌷जय श्री महाकाल🌷🙏 🙏🌷ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🌷🙏 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️ 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Sushil Kumar Sharma 🙏🙏🌹🌹 Jan 20, 2022
Good Afternoon My Bhai ji 🙏🙏 Om Namo Bhagwate Vasudevay Namah 🙏🙏🌹🌹 Om Namo Lakshmi Narayan Namah 🙏🙏🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹.

🛕काशी विश्वनाथ धाम🛕Drs Jan 20, 2022
🌹 श्री हरि ॐ वंदन जी🌹 👏आप सभी पर श्री हरि विष्णु जी और मां लक्ष्मी जी की कृपा निरंतर बनी रहे 💐 🎎आपका दिन शुभ व मंगलमय हो 🎎 🙏🌹 नमस्ते जी 🌹🙏

Anup Kumar Sinha Jan 20, 2022
जय श्री हरि विष्णु 🙏🙏 शुभ दोपहर वंदन, भाई जी । माता लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु की कृपा सदैव आप सपरिवार पर बनी रहे 🙏🍁

Runa Sinha Jan 20, 2022
जय श्री हरि विष्णु 🙏💥माता लक्ष्मी की कृपा आप पर सदा बनी रहे💥 शुभ दोपहर बंधन भाई🙏💥

Yashwant kunwar { women} Jan 20, 2022
ऊं नमो नारायणा 🙏🌹🙏 नमस्कार शुभ मंगलकामनाएं 💐

ಗಿರಿಜಾ ನೂಯಿ Jan 20, 2022
🙏🙏 Good Evening Ji🌹🌹 🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️Om Shri Bhagavate Vasudevay Namo Namah🙏🌷🎆💐🙏 Super Video Devotional Song Ji👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌 Have a blessed day,Shri Lakshmi Narayana ‌ ji bless you & your family always be happy, healthy & wealthy dear brother ji🙏🙏🙏🙏🌷🌷🌷🌷🌸🌸🌸🌸🍎🍈🍍🍓🍏🍐🍒🍊💐💐💐💐

Saumya sharma Jan 20, 2022
ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🙏शुभ संध्या वंदन भाई जी 🙏🌙🌹प्रभु करुणा के सागर,ये ही पालन कर्ता,दुःखों को हरने वाले,ये हैं सुख कर्ता🙏लक्ष्मीनारायण जी की कृपा से आप सपरिवार स्वस्थ, समृद्ध व प्रसन्न रहें ☺🌹🙏

Saumya sharma Jan 20, 2022
very beautiful post bhai g👌👌👌👌👌🙏🌹 ☺

K. Rajan May 18, 2022

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heera May 18, 2022

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PDJOSHI May 18, 2022

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Sandhya Dwivedi May 18, 2022

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smt neelam sharma May 18, 2022

मोहि लियो, मो मन मदन गोपाल। देखत ही छवि भई बावरी, ललित-त्रिभंगी लाल। कासों, केहि विधि, कहा कहूँ अब, सब हँसिहैं दै ताल। दोउ नैना धैना करि बैठे, मैं ना समझी चाल। टोना सों कछु कै गयो मो पै, भई हाल बेहाल। तुम 'कृपालु' निज भाग सराहिय, फँसे न जो येहि जाल।। भावार्थ:- ( एक सखी का प्यारे श्यामसुन्दर से प्रथम मधुर-मिलन एवं उसका अपने आप से कहना।)- हाय ! हाय !! आज तो मदनमोहन ने मेरा मन ही मोहित कर लिया। मैं उनकी तीन जगह से टेढ़ी अनुपम रूप-माधुरी को देखते ही पागल-सी हो गई। अब यह बात भला किस प्रकार एवं किससे कहूँ? यदि कहूँ तो भी सुनने वाले ताली बजा बजाकर मेरी हँसी उड़ायेंगे। ये मेरी दोनों आँखें बिना मुझसे पूछे ही उनसे छेड़छाड़ कर बैठीं। मैं भोली भाली इन आँखों की चाल को बिल्कुल ही न समझ सकी। देखते ही उसने मेरे ऊपर कुछ जादू सा कर दिया एवं मैं तत्क्षण ही अपनी सुधि-बुधि खो बैठी। अब मैं प्रियतम से मिलने के लिए अत्यन्त ही व्याकुल हूँ। 'श्री कृपालु जी' कहते हैं कि हे कृपालु ! तुम अपने भाग्य की भूरि - भूरि सराहना करो जो उस छलिया के रूप - सौन्दर्य के जाल में नहीं पड़े, अन्यथा तुम्हारा भी हाल उपर्युक्त गोपी की भाँति ही होता। 🌹🙏जय श्री हरि 🙏🌹

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🌲🕉️🌹🌻॥ श्री हरि ॥🌻🌹🕉️🌲 ॥ ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ॥ बृहस्पतिदेव महाराज की जय हो🌻🌻🙏🙏 *तुलसी और विष्णु की कहानी : : सावर्णि मुनि की पुत्री तुलसी अपूर्व सुंदरी थी। उनकी इच्छा थी कि उनका विवाह भगवान नारायण के साथ हो। इसके लिए उन्होंने नारायण पर्वत की घाटी में स्थित बदरीवन में घोर तपस्या की। दीर्घ काल तक तपस्या के उपरांत ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया और वर मांगने को कहा। तुलसी ने कहा- “सृष्टिकर्ता ब्रह्मदेव ! आप अन्तर्यामी है। सबके मन की बात जानते है, फिर भी मैं अपनी इच्छा बताती हूं। मैं चाहती हूं कि भगवान श्री नारायण मुझे पति रूप में मिले।” ब्रह्मा ने कहा-“तुम्हारा अभीष्ट तुम्हें अवश्य मिलेगा। अपने पूर्व जन्म में किसी अपराध के कारण तुम्हें शाप मिला है। इसी प्रकार भगवान श्री नारायण के एक पार्षद को भी दानव-कुल में जन्म लेने का शाप मिला है। दानव कुल में जन्म ने के बाद भी उसमे नारायण का अंश विद्यमान रहेगा। इसलिए इस जन्म में पूर्व जन्म के पाप के शमन के लिए सम्पूर्ण नारायण तो नहीं, नारायण के अंश से युक्त दानव-कुल जन्मे उस शापग्रस्त पार्षद से तुम्हारा विवाह होगा। शाप-मुक्त होने पर भगवान श्री नारायण सदा सर्वदा के लिए तुम्हारे पति हो जायेंगे।” तुलसी ने ब्रह्मा के इस वर को स्वीकार किया, क्योंकि मानव-कुल में जन्म के कारण उसे मायावी भोग तो भोगना ही था। तुलसी बदरीवन में ही रहने लगी। नारायण का वह पार्षद दानव कुल में शंखचूड़ के नाम से पैदा हुआ था। कुछ दिनों के बाद वह भ्रमण करता हुआ बदरीवन में आया। यहां तुलसी को देखते ही वह उस पर मुग्ध हो गया। तुलसी के सामने उसने अपने साथ विवाह का प्रस्ताव रखा। इतने में ही वहां ब्रह्मा जी आ गए और तुलसी से कहा-“तुलसी ! शंखचूड़ को देखो, कैसा देवोपम इसका स्वरूप है। दानव कुल में जन्म लेने के बाद भी लगता है जैसे इसके शरीर में नारायण का वास हो। तुम प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर लो।” तुलसी को भी लगा कि उसकी तपस्या पूर्ण हुई। उसे इच्छित फल मिला है। शंखचूड़ के साथ उसका गांधर्व-विवाह हो गया और वह शंखचूड़ के साथ उसके महल में पत्नी बनकर आ गई। शंखचूड़ ने अपनी परम सुंदरी सती साध्वी पत्नी तुलसी के साथ बहुत दिनों तक राज्य किया। उसने अपने राज्य का इतना विस्तार किया कि देवलोक तक उसके अधिकार में आ गया। स्वर्ग का सुख भोगने वाले देवताओं की दशा भिखारियों जैसे हो गई। शंखचूड़ किसी को कष्ट नहीं देता था, पर अधिकार और राज्य छिन जाने से सारे देवता मिलकर ब्रह्मा,विष्णु और शिव की सभा में गए तथा अपनी विपत्ति सुनाई। ब्रह्मा जी ने कहा-“तुलसी परम साध्वी है। उसका विवाह शंखचूड़ से मैंने ही कराया था। शंखचूड़ को तब तक नहीं हराया या मारा जा सकता है जब तक तुलसी को न छला जाए।” विष्णु ने कहा -“शंखचूड़ पूर्व जन्म में मेरा पार्षद था। शाप के कारण उसे दैत्यकुल में जन्म लेना पड़ा। इस जन्म में भी मेरा अंश उसमे व्याप्त है। साथ ही तुलसी के पतिव्रत-धर्म से वह अजेय है।” फिर देवताओं की सहमति से भगवान शिव ने शंखचूड़ के पास सन्देश भेजा कि या तो वह देवताओं का राज्य लौटा दे, या फिर उनसे युद्ध करे। शंखचूड़ शंकर के पास पहुंचा। उसने कहा-“देवाधिदेव ! आपके लिए देवताओं का पक्ष लेना उचित नहीं है। राज्य बढ़ाना हर राजा का कर्तव्य है। मैं किसी को दुखी नहीं कर रहा हूं। देवताओं से कहिए वे मेरी प्रजा होकर रहे। मैंने आपका भी कोई अपकार नहीं किया है। हमारा आपका युद्ध शोभा नहीं देता। अगर आप हार गए तो बड़ी लज्जा की बात होगी। मैं हार गया तो आपकी कीर्ति बहुत अधिक नहीं बढ़ेगी।” भगवान शंकर हंसे। वे तो सब रहस्य समझते थे। तुलसी और शंखचूड़ के पूर्व-जन्म के शाप की अवधि लगभग पूरी हो चुकी थी। बोले- “इसमें कीर्ति और लज्जा की बात नहीं। तुम देवों का राज्य लौटाकर उन्हें उनके पद पर प्रतिष्ठित होने दो। युद्ध से बचने का यही एक उपाय है। ” शंखचूड़ ने कहा-“मैंने युद्ध के बल से देवलोक जीता है। कोई उसे युद्ध के द्वारा ही वापस ले सकता है। यह मेरा अंतिम उत्तर है। मैं जा रहा हूं।” ऐसा कहकर शंखचूड़ चला गया। उसने अपनी पत्नी तुलसी को सारी बात बताई और कहा-“कर्म-भोग सब काल-सूत्र में बंधा है। जीवन में हर्ष, शोक, भय, सुख-दुःख, मंगल-अमंगल काल के अधीन है। हम तो केवल निमित्त है। सम्भव है, भगवान शिव देवों का पक्ष लेकर मुझसे युद्ध करे। तुम चिंता मत करना। तुम्हारा सती तेज मेरी रक्षा करेगा।” दूसरे दिन भगवान शंकर के नेतृत्व में देवताओं ने युद्ध छेड़ दिया। शंखचूड़ ने भीषण वाणों की वर्षा कर उनका वेग रोका। उसके प्रहार से देवता डगमगाने लगे। उसने दानवी शक्ति का प्रयोग कर मायावी युद्ध आरम्भ किया। युद्ध स्थल पर वह किसी को दिखाई नहीं देता था, पर उसके अस्त्र-शस्त्र प्रहार कर देवों को घायल कर रहे थे। देवगण अपने अस्त्र चलाएं तो किस पर चलाएं, क्योंकि कोई शत्रु सामने था ही नहीं। कई दिनों तक इस तरह भयंकर युद्ध चला। शंखचूड़ पराजित नहीं हुआ। तब शिव ने विष्णु से कहा-“विष्णु ! कुछ उपाय करो, अन्यथा मेरा तो सारा यश मिट्टी में मिल जाएगा।” विष्णु ने सोचा-‘बल से तो शंखचूड़ को हराया नहीं जा सकता, इसलिए छल का सहारा लेना होगा। उन्होंने तुरन्त अपना स्वरूप शंखचूड़ जैसा बनाया और अस्त्र-शस्त्र से सज्जित हो तुलसी के पास आए, बोले-“प्रिये ! मैं युद्ध जीत गया। सारे देवता भगवान शंकर समेत हार गए। इस ख़ुशी में आओ मैं तुम्हे अंक से लगा लूं।” पति को प्रत्यक्ष खड़ा देख तथा विजय का समाचार सुन वह दौड़कर मायावी शंखचूड़ के गले से लिपट गई। इस प्रकार पति-पत्नी दोनों ने आलिंगन हो खूब ख़ुशी मनाई। पर-पुरुष के साथ इस प्रकार के व्यवहार से उसका सती-तेज नष्ट हो गया। उसका सती-तेज जो शंखचूड़ की कवच के रूप में रक्षा कर रहा था, वह कवच नष्ट हो गया। शंखचूड़ शक्तिहीन हो गया, यह जानते ही भगवान शंकर ने अपने त्रिशूल से प्रहार किया। त्रिशूल के लगते ही शंखचूड़ जलकर भस्म हो गया। शंखचूड़ के मरने को जानकर विष्णु अपने असली स्वरूप में आ गए। सामने अपने पति शंखचूड़ के स्थान पर भगवान विष्णु को खड़ा देख तुलसी बहुत विस्मित हुई। उसको पता लग गया कि स्वयं नारायण ने उसके साथ छल किया है। क्रोध में आकर उसने शाप दिया-“एक सती स्त्री का सतीत्व भंग करने के अपराध में तुम ह्रदयहीन पत्थर हो जाओ।” विष्णु ने तुलसी के शाप को शिरोधार्य कर कहा-“देवी ! तुम्हारे तथा शंखचूड़ के कल्याण के लिए मुझे ऐसा करना पड़ा। तुम दोनों को शापमुक्त करना था। तुम भी अब शरीर त्याग कर तुलसी बिरवा के रूप में जन्म लोगी और मेरी पूजा तुलसी दल से होगी। मैं शालग्राम पत्थर बनूंगा। मेरे शीश पर तुम आदर से विराजमान होओगी। तुम्हारे पति की हड्डियों के चूर्ण से शंख की उत्तपति होगी। उस शंख ध्वनि से देवताओं तथा मेरी पूजा-आराधना होगी। जहां शंख ध्वनि होगी, वहां मंगलमय मैं विराजमान रहूंगा। तुमने पूर्व जन्म में बदरीवन में मुझे पाने के लिए बड़ी तपस्या की थी। अब अगले जन्म में मैं नारायण प्रस्तर के रूप में बद्रीनाथ वन में स्थापित होऊंगा और मेरी पूजा अर्चना फल-फूल से न होकर तुम्हारे तुलसी दल से होगी। मेरे शीश पर विराजमान होकर तुम मुझसे भी ऊंचा पद प्राप्त करोगी।* 🌷💠🌷🙏🙏

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