🥀 Preeti Jain 🥀
🥀 Preeti Jain 🥀 Jun 30, 2022

हरि शरणम् ,,,,,,,,,, . क्षीरसागर में एक त्रिकूट नामक एक प्रसिद्ध एवं श्रेष्ठ पर्वत था। . उसकी ऊँचाई आसमान छूती थी। उसकी लम्बाई-चौड़ाई भी चारों ओर काफी विस्तृत थी। . उसके तीन शिखर थे। पहला सोने का। दूसरा चाँदी का तीसरा लोहे का। . इनकी चमक से समुद्र, आकाश और दिशाएँ जगमगाती रहती थीं। इनके अलावा उसकी और कई छोटी चोटियाँ थीं जो रत्नों और कीमती धातुओं से बनी हुई थीं। . पर्वत की तलहटी में तरह-तरह के जंगली जानवर बसेरा बनाए हुए थे। . इसके ऊपर बहुत-सी नदियाँ और सरोवर भी थे। . इस पर्वतराज त्रिकूट की तराई में एक तपस्वी महात्मा रहते थे जिनका नाम वरुण था। . महात्मा वरुण ने एक अत्यन्त सुन्दर उद्यान में अपनी कुटी बनाई थी। इस उद्यान का नाम ऋतुमान था। . इसमें सब ओर अत्यन्त ही दिव्य वृक्ष शोभा पा रहे थे, जो सदा फलों-फूलों से लदे रहते थे। . इस उद्यान में एक बड़ा-सा सरोवर भी था जिसमें सुनहले कमल भी खिले रहते थे . क्षीरसागर से त्रिकूट पर्वत पर एक बार एक दर्दनाक घटना घट गई। . इस पर्वत के घोर जंगल में एक विशाल मतवाला हाथी रहता था। एक—गजराज। वह कई शक्तिशाली हाथियों का सरदार था। . उसके पीछे बड़े-बड़े हाथियों के झुण्ड के झुण्ड चलते थे। . इस गजराज से, उसके महान् बल के कारण बड़े-से-बड़े हिंसक जानवर भी डरते थे , छोटे जीव निर्भय होकर घूमा करते थे क्योंकि उसके रहते कोई भी हिंसक जानवर उस पर आक्रमण करने का साहस नहीं कर सकता था। . गजराज मदमस्त था। उसके सिर के पास से टपकते मद का पान करने के लिए भँवरे उसके साथ गूँजते जाते थे। . एक दिन बड़े जोर की धूप थी। वह प्यास से व्याकुल हो गया। अपने झुण्ड के साथ वह उसी सरोवर में उतर पड़ा जो त्रिकूट की तराई में स्थित था। . जल उस समय अत्यन्त शीतल एवं अमृत के समान मधुर था। . पहले तो उस गजराज ने अपनी सूँड़ से उठा-उठा जी भरकर इस अमृत-सदृश्य जल का पान किया। फिर उसमें स्नान करके अपनी थकान मिटाई। . इसके पश्चात उसका ध्यान जलक्रीड़ा की ओर गया। वह सूँड़ से पानी भर-भर अन्य हाथियों पर फेंकने लगा और दूसरे भी वही करने लगे। . मदमस्त गजराज सब कुछ भूलकर जल-क्रीड़ा का आनन्द उठाता रहा। उसे पता नहीं था कि उस सरोवर में एक बहुत बलवान ग्राह भी रहता था। . उस ग्राह ने क्रोधित होकर उस गजराज के पैर को जोरों से पकड़ लिया और उसे खींचकर सरोवर के अन्दर ले जाने लगा। . उसके पैने दातों के गड़ने से गजराज के पैर से रक्त का प्रवाह निकल पड़ा जिससे वहाँ का पानी लाल हो आया। . उसके साथ के हाथियों और हथिनियों को गजराज की इस स्थिति पर बहुत चिंता हुई। . उन्होंने एक साथ मिलकर गजराज को जल के बाहर खींचने का प्रयास किया किंतु वे इसमें सफल नहीं हुए . वे घबराकर ज़ोर-ज़ोर से चिंघाड़ने लगे। इस पर दूर-दूर से आकर हाथियों के कई झुण्डों ने गजराज के झुण्डों से मिलकर उसे बाहर खींचना चाहा किन्तु यह सम्मिलित प्रयास भी विफल रहा। . सभी हाथी शान्त होकर अलग हो गए। अब ग्राह और गजराज में घोर युद्ध चलने लगा दोनों अपने रूप में काफी बलशाली थे और हार मानने वाले नहीं थे। . कभी गजराज ग्राह को खींचकर पानी से बाहर लाता तो कभी ग्राह गजराज को खींचकर पानी के अन्दर ले जाता . किन्तु गजराज का पैर किसी तरह ग्राह के मुँह से नहीं छूट रहा था बल्कि उसके दाँत गजराज के पैर में और गड़ते ही जा रहे थे और सरोवर का पानी जैसे पूरी तरह लाल हो आया था। . गज और ग्राह के बीच युद्ध कई दिनों तक चला। अन्त में अधिक रक्त बह जाने के कारण गजराज शिथिल पड़ने लगा। उसे लगा कि अब वह ग्राह के हाथों परास्त हो जाएगा। . उसको इस समय कोई उपाय नहीं सूझा और अपनी मृत्यु को समीप पाकर उसे भगवान नारायण की याद आयी। . उसने एक कमल का फूल तोड़ा और उसे आसमान की ओर इस तरह उठाया जैसे वह उसे भगवान को अर्पित कर रहा हो। . अब तक वह ग्राह द्वारा खींचे जाने से सरोवर के मध्य गहरे जल में चला गया था और उसकी सूड़ का मात्र वह भाग ही ऊपर बचा था जिसमें उसने लाल कमल-पुष्प पकड़ रखा था। . उसने अपनी शक्ति को पूरी तरह से भूलकर और अपने को पूरी तरह असहाय घोषित कर नारायण को पुकारा। . भगवान समझ गए कि इसे अपनी शक्ति का मद जाता रहा और वह पूरी तरह से मेरा शरणागत है। . जब नारायण ने देखा कि मेरे अतिरिक्त यह किसी को अपना रक्षक नहीं मानता तो नारायण के ‘ना’ के उच्चारण के साथ ही वह गरुड़ पर सवार होकर चक्र धारण किए हुए सरोवर के किनारे पहुँच गए। . उन्होंने देखा कि गजेन्द्र डूबने ही वाला है। वह शीघ्रता से गरुड से कूद पड़े। . इस समय तक बहुत से देवी-देवता भी भगवान के आगमन को समझकर वहाँ उपस्थित हो गए थे। . सभी के देखते-देखते भगवान ने गजराज और गजेन्द्र को एक क्षण में सरोवर से खींचकर बाहर निकाला। . देवताओं ने आश्चर्य से देखा, उन्होंने सुदर्शन से इस तरह ग्राह का मुँह फाड़ दिया कि गजराज के पैर को कोई क्षति नहीं पहुँची। . ग्राह देखते-देखते तड़प कर मर गया और गजराज भगवान की कृपा-दृष्टि से पहले की तरह स्वस्थ हो गया। . जिस समय गजेन्द्र श्रीनारायण की स्तुति कर रहा था, सरोवर किनारे उपस्थित देवता आपस में भगवान के कृपालु स्वभाव के सम्बन्ध में वार्तालाप कर रहे थे। भगवान विष्णु ने गजेन्द्र का उद्धार कर उसे अपना पार्षद बना लिया। गन्धर्व,सिद्ध और देवगण उनकी लीला का गान करने लगे। गजेन्द्र की स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने सबके समक्ष कहा- “प्यारे गजेन्द्र ! जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तुम्हारी की हुई स्तुति से मेरा स्तवन करेंगे, उन्हें मैं मृत्यु के समय निर्मल बुद्धि का दान करूँगा।” . उनमें से एक ने ठीक ही कहा— ‘जब तक अपनी शक्ति पर विश्वास करते रहो, ईश्वर की सहायता नहीं मिलती। जब अपने को सर्वथा तुच्छ समझ भगवान की शरण में जाओ तभी वह तत्काल तुम्हारी रक्षा करता है। जीवन में अहंकार को मत आने दो और हमेशा याद रखो प्राणी के महतत्व में उत्पन्न देवत्व और उसके अनुसार आचरण करने वालों को ही देवों की सहायता प्राप्त होती है ! अतः परोपकार का मार्ग अपना कर अपने प्रारब्ध में दूसरों की सहायता का पुण्य संचित करे ! यही असली पूंजी है ! **** हरी शरणम **** 🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷

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कामेंट्स

RAM GIRI Jun 30, 2022
ओम भगवते वासुदेवाय नमः

rani rai Jun 30, 2022
om nmo bhgwate basudeway 🌹🙏 suprbhat vandan bahna ji🌺🌿shree hari Vishnu ji aur mata Lakshmi ji ki kripa sadaiv aap ke pure pariwar pr bni rhe 🌺🌿aap ka har pal subh magalmay ho🌺🌿🙏

Dilip Mishra Jun 30, 2022
Om namo bhagwate vasudevay namo namah 🌹🙏 Jay Jitendra bahan ji ❤️🙏

Raj Singh Jun 30, 2022
Om namo narayana 🌹🙏🏵️💐 Om namo bhagwate Vasudevay namah 🌹🙏💐🏵️ Hari Narayan 🌹🙏🏵️💐 good morning ji 🙏

🥀 Preeti Jain 🥀 Jun 30, 2022
@rajsingh37 🥀 ओम नमो श्री👌👌 महालक्ष्मी नारायण जी 🌿🥀 मां लक्ष्मी और नारायण जी का असीम कृपा 🌿🥀 आप और आपकी फैमिली पर सदा बना 🥀 रहे आपका हर पल शुभ एवं 🥀🥀 मंगलमय हो शुभ प्रभात जी आ🥀🥀ने वाला हर एक पल आपके लिए बहुत🥀🥀🌹🌹 सारी खुशियां लेकर आए जय जिनेंद्र 🙏🙏☕👈

Ranveer Soni Jun 30, 2022
🌹🌹जय श्री बृहस्पति देव🌹🌹

🥀 Preeti Jain 🥀 Jun 30, 2022
@ranveersoni 🥀 ओम नमो श्री👌👌 महालक्ष्मी नारायण जी 🌿🥀 मां लक्ष्मी और नारायण जी का असीम कृपा 🌿🥀 आप और आपकी फैमिली पर सदा बना 🥀 रहे आपका हर पल शुभ एवं 🥀🥀 मंगलमय हो शुभ प्रभात जी आ🥀🥀ने वाला हर एक पल आपके लिए बहुत🥀🥀🌹🌹 सारी खुशियां लेकर आए जय जिनेंद्र 🙏🙏☕👈

BABU TRILOCHAN Jun 30, 2022
HARIOMM NAMO NARAYAN JAY JAY JAGANNATH SWAMI NAYAN PATHA GAME VABA TUME VABA TUME VABA TUME MAHAPRAVU MAATA ANNAPURNA DEVI MAHALAKSHMI MAATANKAR JAY HEU JAY HEU JAY HEU SUVA SAKAL RA SUVA KAMANA 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹👏👏👏👏👏

kamlesh goyal Jun 30, 2022
जय श्री हरि शुभ प्रभात वंदन जी विष्णु भगवान की कृपा माता लक्ष्मी का आशीर्वाद आप सभी भाई बहनो पर बना रहे ठाकुर जी आप के परिवार को सदा खुश रखे आपका दिन मंगलमय हों आप सभी भाई बहनो को सुबह की राम राम जी🙏🙏

kamlesh goyal Jun 30, 2022
राधे-राधे मेरी बहन🙏

pappu jha Jun 30, 2022
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः🌹🌹🌹🌹 शुभ प्रभात प्यारी बहना 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹आप का हर पल मंगलमय हो 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹श्री विष्णु जी मां लक्ष्मी जी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹सबसे बड़ी जिंदगी है 🌹🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹जिंदगी से बड़ा प्यार है 🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹प्यार से बड़ी दोस्ती है🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹निभाओ तो अपना है🌹🌹🌹 🌹🌹🌹🌹🌹भूल जाओ तो सपना है🌹🌹 🌹🌹🌹ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः🌹🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

🙏🙏🌹Sushil Kumar Sharma 🙏🌹 Jun 30, 2022
Good Morning My Sweet Sister ji 🙏🙏 Om Namo Bhagwate Vasudevay Namah 🙏🙏🌹🌹🌹 Om Namo Lakshmi Narayan Namah 🌹🌹🌹 Ki Kripa Dristi Aap Our Aapke Priwar Per Hamesha Sada Bhni Rahe ji 🌹🌹🌹 Aapka Har Pal Har Din Shub Mangalmay Ho ji 🌹🌹 Aap Hamesha Khush Rahe ji 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌷🌷🌷💐💐💐💐💐🌹🌹.

🙏🙏🌹Sushil Kumar Sharma 🙏🌹 Jun 30, 2022
Very Beautiful Line ji 👌👌🙏🙏🌹🌹🌹👌👌👌👌👌👌👌👌🌹🌹🌹🌹🌹My Sister ji Thanks 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

🎋🌹🙏.🅿 🌹🙏 Jun 30, 2022
Jai shri hari jiiii..subh 02pahar vandan ji.attyant sunder prastuti👌👌 shri jagdish ji avm mata laxmi ji aapki mnokamna puri kare,"Hari sharnam Gchhami"🍒🍒🍹🍌👈🌹🌹🙏🙏🙌🙌🙋🙋

Gd Bansal Jun 30, 2022
🙏🌹।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।।🌹🙏

*जीवन की खोज-वास्तविक या परछाई* ~~~~~~~~~~~~~ *एक रानी नहाकर अपने महल की छत पर* *बाल सुखाने के लिए गई। उसके गले में एक हीरों का हार था,* *जिसे उतार कर वहीं आले पर रख दिया और बाल संवारने लगी।* *इतने में एक कौवा आया।* *उसने देखा कि कोई चमकीली चीज है, तो उसे लेकर उड़ गया।* *एक पेड़ पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश की, पर खा न सका।* *कठोर हीरों पर मारते-मारते चोंच दुखने लगी।* *अंतत: हार को उसी पेड़ पर लटकता छोड़ कर वह उड़ गया।* *जब रानी के बाल सूख गए तो उसका ध्यान अपने हार पर गया,* *पर वह तो वहां था ही नहीं।* *इधर-उधर ढूंढा, परन्तु हार गायब।* *रोती-धोती वह राजा के पास पहुंची,* *बोली कि हार चोरी हो गई है, उसका पता लगाइए।* *राजा ने कहा, चिंता क्यों करती हो,* *दूसरा बनवा देंगे।* *लेकिन रानी मानी नहीं,* *उसे उसी हार की रट थी।* *कहने लगी,नहीं मुझे तो वही हार चाहिए।* *अब सब ढूंढने लगे, पर किसी को हार मिले ही नहीं।* *राजा ने कोतवाल को कहा,* *मुझ को वह गायब हुआ हार लाकर दो।* *कोतवाल बड़ा परेशान*, *कहां मिलेगा?* *सिपाही*, *प्रजा, कोतवाल-* *सब खोजने में लग गए।* *राजा ने ऐलान किया,* *जो कोई हार लाकर मुझे देगा,* *उसको मैं आधा राज्य पुरस्कार में दे दूंगा।* *अब तो होड़ लग गई प्रजा में।* *सभी लोग हार ढूंढने लगे आधा राज्य पाने के लालच में।* *ढूंढते-* *ढूंढते अचानक वह हार किसी को एक गंदे नाले में दिखा।* *हार तो दिखाई दे रहा था,* *पर उसमें से बदबू आ रही थी।* *पानी काला था। परन्तु एक सिपाही कूदा*।*इधर* *उधर* *बहुत हाथ मारा* *पर कुछ नहीं मिला। पता नहीं कहां गायब हो गया।* *फिर कोतवाल ने देखा,* *तो वह भी कूद गया।* *दो को कूदते देखा तो कुछ उत्साही प्रजाजन भी कूद गए।* *फिर मंत्री कूदा।* *तो इस तरह उस नाले में भीड़ लग गई।* *लोग आते रहे और अपने कपडे़ निकाल-निकाल कर कूदते रहे।* *लेकिन हार मिला किसी को नहीं- कोई भी कूदता,* *तो वह गायब हो जाता।* *जब कुछ नहीं मिलता,* *तो वह निकल कर दूसरी तरफ खड़ा हो जाता*। *सारे* *शरीर पर बदबूदार गंदगी,* *भीगे हुए खडे़ हैं।* *दूसरी ओर दूसरा तमाशा, बडे़-बडे़ जाने-माने ज्ञानी, मंत्री सब में होड़ लगी है, मैं जाऊंगा पहले, नहीं मैं तेरा सुपीरियर हूं, मैं जाऊंगा पहले हार लाने के लिए।* *इतने में राजा को खबर लगी। उसने सोचा, क्यों न मैं ही कूद जाऊं उसमें?* *आधे राज्य से हाथ तो नहीं धोना पडे़गा। तो राजा भी कूद गया।* *इतने में एक संत गुजरे उधर से। उन्होंने देखा तो हंसनेलगे, यह क्या तमाशा है?* *राजा, प्रजा,मंत्री, सिपाही - *सब कीचड़ मे लथपथ,* *क्यों कूद रहे हो इसमें?* *लोगों ने कहा, महाराज! बात यह है कि रानी का हार चोरी हो गई है। वहां नाले में दिखाई दे रहा है। लेकिन जैसे ही लोग कूदते हैं तो वह गायब हो जाता है। किसी के हाथ नहीं आता।* *संत हंसने लगे, भाई! *किसी ने ऊपर भी देखा?* *ऊपर देखो, वह टहनी पर लटका हुआ है। नीचे जो तुम देख रहे हो, वह तो उसकी परछाई है। *इस कहानी का क्या मतलब हुआ?* *जिस चीज की हम को जरूरत है,* *जिस परमात्मा को हम पाना चाहते हैं, जिसके लिए हमारा हृदय व्याकुल होता है -वह सुख शांति और आनन्द रूपी हार क्षणिक सुखों के रूप में परछाई की तरह दिखाई देता है और* *यह महसूस होता है कि इस को हम पूरा कर लेंगे। अगर हमारी यह इच्छा पूरी हो जाएगी तो हमें शांति मिल जाएगी, हम सुखी हो जाएंगे। परन्तु जब हम उसमें कूदते हैं, तो वह सुख और शांति प्राप्त नहीं हो पाती* *इसलिए सभी संत-महात्मा हमें यही संदेश देते हैं कि वह शांति, सुख और आनन्द रूपी हीरों का हार, जिसे हम संसार में परछाई की तरह पाने की कोशिश कर रहे हैं, वह हमारे अंदर ही मिलेगा, बाहर नहीं* 🙏🙏 जाग्रत रहें जाग्रत करें

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*आदमी का लालच😜* ----------------------- *एक ट्रक गेंहू के बोरे भरकर मंडी जा रहा था। जंगल का रास्ता उबड़-खाबड़ होने के कारण एक बोरा खिसक कर रास्ते में गिर गया। कुछ ही देर में कुछ चीटियां आई दस बीस दाने ले गयी, फिर कुछ चूहे आये पाव आधा किलो गेहूं खाये और चले गये। कुछ ही देर में पक्षी आये दो चार मुट्ठी दाने चुगे और उड़ गये। कुछ गायें और बकरियां आयी पांच दस किलो गेहूं खाकर चली गयीं। आख़री में एक आदमी आया और वह पूरा बोरा ही उठाकर ले गया। गौर करने वाली बात ये है कि दूसरे प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं के लिए जीता है। इसीलिए आदमी के पास सब कुछ होते हुए भी वह सबसे ज्यादा दुखी है। इसलिए जरूरत पुरी हो जाने के बाद इच्छाओं को रोकें, अन्यथा यह बढ़ती ही जायेगी, और आपके दुखों का कारण बनेगी।* *🙏।।सुप्रभात।।🙏 ओम शांति*

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हरि शरणम् ,,,,,,,,,, . क्षीरसागर में एक त्रिकूट नामक एक प्रसिद्ध एवं श्रेष्ठ पर्वत था। . उसकी ऊँचाई आसमान छूती थी। उसकी लम्बाई-चौड़ाई भी चारों ओर काफी विस्तृत थी। . उसके तीन शिखर थे। पहला सोने का। दूसरा चाँदी का तीसरा लोहे का। . इनकी चमक से समुद्र, आकाश और दिशाएँ जगमगाती रहती थीं। इनके अलावा उसकी और कई छोटी चोटियाँ थीं जो रत्नों और कीमती धातुओं से बनी हुई थीं। . पर्वत की तलहटी में तरह-तरह के जंगली जानवर बसेरा बनाए हुए थे। . इसके ऊपर बहुत-सी नदियाँ और सरोवर भी थे। . इस पर्वतराज त्रिकूट की तराई में एक तपस्वी महात्मा रहते थे जिनका नाम वरुण था। . महात्मा वरुण ने एक अत्यन्त सुन्दर उद्यान में अपनी कुटी बनाई थी। इस उद्यान का नाम ऋतुमान था। . इसमें सब ओर अत्यन्त ही दिव्य वृक्ष शोभा पा रहे थे, जो सदा फलों-फूलों से लदे रहते थे। . इस उद्यान में एक बड़ा-सा सरोवर भी था जिसमें सुनहले कमल भी खिले रहते थे . क्षीरसागर से त्रिकूट पर्वत पर एक बार एक दर्दनाक घटना घट गई। . इस पर्वत के घोर जंगल में एक विशाल मतवाला हाथी रहता था। एक—गजराज। वह कई शक्तिशाली हाथियों का सरदार था। . उसके पीछे बड़े-बड़े हाथियों के झुण्ड के झुण्ड चलते थे। . इस गजराज से, उसके महान् बल के कारण बड़े-से-बड़े हिंसक जानवर भी डरते थे , छोटे जीव निर्भय होकर घूमा करते थे क्योंकि उसके रहते कोई भी हिंसक जानवर उस पर आक्रमण करने का साहस नहीं कर सकता था। . गजराज मदमस्त था। उसके सिर के पास से टपकते मद का पान करने के लिए भँवरे उसके साथ गूँजते जाते थे। . एक दिन बड़े जोर की धूप थी। वह प्यास से व्याकुल हो गया। अपने झुण्ड के साथ वह उसी सरोवर में उतर पड़ा जो त्रिकूट की तराई में स्थित था। . जल उस समय अत्यन्त शीतल एवं अमृत के समान मधुर था। . पहले तो उस गजराज ने अपनी सूँड़ से उठा-उठा जी भरकर इस अमृत-सदृश्य जल का पान किया। फिर उसमें स्नान करके अपनी थकान मिटाई। . इसके पश्चात उसका ध्यान जलक्रीड़ा की ओर गया। वह सूँड़ से पानी भर-भर अन्य हाथियों पर फेंकने लगा और दूसरे भी वही करने लगे। . मदमस्त गजराज सब कुछ भूलकर जल-क्रीड़ा का आनन्द उठाता रहा। उसे पता नहीं था कि उस सरोवर में एक बहुत बलवान ग्राह भी रहता था। . उस ग्राह ने क्रोधित होकर उस गजराज के पैर को जोरों से पकड़ लिया और उसे खींचकर सरोवर के अन्दर ले जाने लगा। . उसके पैने दातों के गड़ने से गजराज के पैर से रक्त का प्रवाह निकल पड़ा जिससे वहाँ का पानी लाल हो आया। . उसके साथ के हाथियों और हथिनियों को गजराज की इस स्थिति पर बहुत चिंता हुई। . उन्होंने एक साथ मिलकर गजराज को जल के बाहर खींचने का प्रयास किया किंतु वे इसमें सफल नहीं हुए . वे घबराकर ज़ोर-ज़ोर से चिंघाड़ने लगे। इस पर दूर-दूर से आकर हाथियों के कई झुण्डों ने गजराज के झुण्डों से मिलकर उसे बाहर खींचना चाहा किन्तु यह सम्मिलित प्रयास भी विफल रहा। . सभी हाथी शान्त होकर अलग हो गए। अब ग्राह और गजराज में घोर युद्ध चलने लगा दोनों अपने रूप में काफी बलशाली थे और हार मानने वाले नहीं थे। . कभी गजराज ग्राह को खींचकर पानी से बाहर लाता तो कभी ग्राह गजराज को खींचकर पानी के अन्दर ले जाता . किन्तु गजराज का पैर किसी तरह ग्राह के मुँह से नहीं छूट रहा था बल्कि उसके दाँत गजराज के पैर में और गड़ते ही जा रहे थे और सरोवर का पानी जैसे पूरी तरह लाल हो आया था। . गज और ग्राह के बीच युद्ध कई दिनों तक चला। अन्त में अधिक रक्त बह जाने के कारण गजराज शिथिल पड़ने लगा। उसे लगा कि अब वह ग्राह के हाथों परास्त हो जाएगा। . उसको इस समय कोई उपाय नहीं सूझा और अपनी मृत्यु को समीप पाकर उसे भगवान नारायण की याद आयी। . उसने एक कमल का फूल तोड़ा और उसे आसमान की ओर इस तरह उठाया जैसे वह उसे भगवान को अर्पित कर रहा हो। . अब तक वह ग्राह द्वारा खींचे जाने से सरोवर के मध्य गहरे जल में चला गया था और उसकी सूड़ का मात्र वह भाग ही ऊपर बचा था जिसमें उसने लाल कमल-पुष्प पकड़ रखा था। . उसने अपनी शक्ति को पूरी तरह से भूलकर और अपने को पूरी तरह असहाय घोषित कर नारायण को पुकारा। . भगवान समझ गए कि इसे अपनी शक्ति का मद जाता रहा और वह पूरी तरह से मेरा शरणागत है। . जब नारायण ने देखा कि मेरे अतिरिक्त यह किसी को अपना रक्षक नहीं मानता तो नारायण के ‘ना’ के उच्चारण के साथ ही वह गरुड़ पर सवार होकर चक्र धारण किए हुए सरोवर के किनारे पहुँच गए। . उन्होंने देखा कि गजेन्द्र डूबने ही वाला है। वह शीघ्रता से गरुड से कूद पड़े। . इस समय तक बहुत से देवी-देवता भी भगवान के आगमन को समझकर वहाँ उपस्थित हो गए थे। . सभी के देखते-देखते भगवान ने गजराज और गजेन्द्र को एक क्षण में सरोवर से खींचकर बाहर निकाला। . देवताओं ने आश्चर्य से देखा, उन्होंने सुदर्शन से इस तरह ग्राह का मुँह फाड़ दिया कि गजराज के पैर को कोई क्षति नहीं पहुँची। . ग्राह देखते-देखते तड़प कर मर गया और गजराज भगवान की कृपा-दृष्टि से पहले की तरह स्वस्थ हो गया। . जिस समय गजेन्द्र श्रीनारायण की स्तुति कर रहा था, सरोवर किनारे उपस्थित देवता आपस में भगवान के कृपालु स्वभाव के सम्बन्ध में वार्तालाप कर रहे थे। भगवान विष्णु ने गजेन्द्र का उद्धार कर उसे अपना पार्षद बना लिया। गन्धर्व,सिद्ध और देवगण उनकी लीला का गान करने लगे। गजेन्द्र की स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने सबके समक्ष कहा- “प्यारे गजेन्द्र ! जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तुम्हारी की हुई स्तुति से मेरा स्तवन करेंगे, उन्हें मैं मृत्यु के समय निर्मल बुद्धि का दान करूँगा।” . उनमें से एक ने ठीक ही कहा— ‘जब तक अपनी शक्ति पर विश्वास करते रहो, ईश्वर की सहायता नहीं मिलती। जब अपने को सर्वथा तुच्छ समझ भगवान की शरण में जाओ तभी वह तत्काल तुम्हारी रक्षा करता है। जीवन में अहंकार को मत आने दो और हमेशा याद रखो प्राणी के महतत्व में उत्पन्न देवत्व और उसके अनुसार आचरण करने वालों को ही देवों की सहायता प्राप्त होती है ! अतः परोपकार का मार्ग अपना कर अपने प्रारब्ध में दूसरों की सहायता का पुण्य संचित करे ! यही असली पूंजी है ! **** हरी शरणम **** 🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷🌿🌷

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Anup Kumar Sinha Jul 31, 2022

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Ravi Kumar Taneja Jul 30, 2022

🌞शुभ प्रभात स्नेह वंदना जी🌞 आपका जीवन मंगलमय हो 🙏 🌼ॐ भास्कराय नमः🙏 🌼ॐ आदित्याय नमः🙏 🌼ॐ भानवे नमः🙏 🌼ॐ प्रभाकराय नमः🙏 🌼ॐ दिवाकराय नमः🙏 🌼ॐ सुर्याय नमः🙏 🌼ॐ दिनेशाय नमः🙏 🌼ॐ अर्काय नमः🙏 🌼ॐ सुर्यदैवाय नमः🙏 🌼ॐ सविताय नमः🙏 🌹☘️🌹☘️🌹☘️🌹 प्रभु सूर्य देव की कृपा से आप स्वस्थ रहे, मस्त रहे, मुस्कुराते रहें, तथा प्रसन्न: रहे🕉🌞🙏🌻🙏🌞🕉 *🌈सबंध को ज्ञान एवं पैसे से भी बड़ा बताया गया है क्योकि,* *🌈जब ज्ञान और पैसा विफल हो जाता है* *🌈तब सबंध से स्थिति सम्भाली जा सकती है मधुर सबंध बनाकर जीवन सार्थक कीजिये!* *🌈लगातार हो रही असफलताओ से निराश नही होना चाहिए क्योक़ि कभी-कभी गुच्छे की आखिरी चाबी भी ताला खोल देती है!!!* *🌈हीरा बनाया है ईश्वर ने हर किसी को पर चमकता वही है जो तराशने की हद से गुज़रता है!* *🌈मंजिल दूर ही सही पर घबराना मत क्योंकि नदी कभी नहीं पूछती कि समुन्दर अभी कितना दूर है!!!* *आपका दिन मंगलमय हो👏* अपना ध्यान रखें, सुरक्षित रहें,और खुश रहें ना केवल अपने लिए बल्कि अपनो के लिए !!!😊 *सदैव प्रसन्न रहिये!* *जो प्राप्त है,पर्याप्त है!!* 🕉🏹🙏💐🙏🏹🕉

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