ये भेद भाव क्यों???

ये भेद भाव क्यों???

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dalipjotwani Jan 28, 2022

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alok kumar Jan 27, 2022

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dalipjotwani Jan 28, 2022

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dalipjotwani Jan 27, 2022

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shiv Charan Bhulwana Jan 28, 2022

ॐ आध्यात्मिक ज्ञान ॐ श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 ॐ समं पश्यन्हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम्! न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम्!! 28 !! यथार्थ देखता है क्योंकि जो पुरुष सबमें समभाव से स्थित परमेश्वर को समान देखता हुआ अपने द्वारा अपने को नष्ट नहीं करता, इससे वह परम गतिको प्राप्त होता है!! 28!! सभी में समभाव से स्थित परमेश्वर समान देखता हुआ अपने द्वारा अपने को नष्ट नहीं करता, क्योंकि वह जाग चुका है! उसने निजस्वरूप और ब्रह्मस्वरुप को पहचान लिया है! उसे उस परम्सक्ताका बोद्ध जो सब में समभाव से विराजमान है जानकर चेतन्य है इसलिए परम गति को प्राप्त होता है! धन्यवाद जी शिवचरण परमार भुलवाना श्रीराधे जय श्री राधे राधे जी

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