yadubala sharma
yadubala sharma Aug 26, 2021

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SanJay Singh Oct 19, 2021

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हनुमान चालीसा ब्रह्मदत्त हनुमान चालीसा ।। दोहा ।। श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि बरनउँ रघुबर विमल जसु, जो दायकु पल चारि ।। बुद्धिहीन तनु जानिक, सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुद्धि विघा देहु मोहि, हरहु कलेश विकार ।। ।। चैपाई।। जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जय कपीस तिहुं लोग उजागर ।। रामदूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।। महावीर विक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।। कंचन बरन विराज सुवेसा । कानन कुण्डल कुंचित केसा ।। हाथ वज्र औ ध्वजा विराजै । कांधे मूंज जनेऊ साजै ।। शंकर सुवन केसरी नन्दन । तेज प्रताप महा जगवन्दन ।। विघावान गुणी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।। सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा । विकट रुप धरि लंक जरावा ।। भीम रुप धरि असुर संहारे । रामचन्द्रजी के काज संवारे ।। लाय संजीवन लखन जियाये । श्री रघुवीर हरषि उर लाये ।। रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।। सहस बदन तुम्हरो यश गावै । अस कहि श्री पति कंठ लगावै ।। सनकादिक ब्रहादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।। यह कुबेर दिकपाल जहां ते । कवि कोबिद कहि सके कहां ते ।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ।। तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ।। जुग सहस्त्र योजन पर भानू । लाल्यो ताहि मधुर फल जानू ।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही । जलधि लांघि गए अचरज नाहीं ।। दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।। राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ।। आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक ते कांपै ।। भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ।। नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ।। संकट ते हनुमान छुड़ावै । मन क्रम वचन ध्यान जो लावै ।। सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ।। और मनोरथ जो कोई लावै । सोइ अमित जीवन फल पावै ।। चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ।। साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकन्दन राम दुलारे ।। अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता । अस वर दीन जानकी माता ।। राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।। तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ।। अन्तकाल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ।। और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेई सर्व सुख करई ।। संकट कटै मिटे सब पीरा । जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ।। जय जय जय हनुमान गुसांई । कृपा करहु गुरुदेव की नाई ।। जो शत बार पाठ कर सोई । छूटहिं बंदि महासुख होई ।। जो यह पढ़े हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ।। तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजे नाथ हृदय महं डेरा ।। ।। दोहा ।। पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।... ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ जय श्री राम

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vinod Kumar Singh Oct 18, 2021

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Avtar singh bartwal Oct 19, 2021

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Asha Shrivastava Oct 18, 2021

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