geeta
geeta Nov 28, 2021

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. " प्रार्थना " "प्रार्थना ईश्वर के प्रति अंतर आत्मा से निकली हुई पुकार है, इस पुकार में बनावटीपन नहीं होता है।हृदय की गहराई से निकली हुई पुकार कभी भी निष्फल नहीं होती क्योकि इसमें गहन आस्था और प्रबल विश्वास होता है, और इसका परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है।" "हमारे प्राचीन ग्रंथो में भक्तो के द्वारा की गयी अंतरात्मा की पुकार और ईश्वर द्वारा उस पुकार के प्रत्युतर के कई उदाहरण है।" "जब ये पुकार द्रोपदी, मीरा, प्रहलाद, आदि के श्रद्धा, आस्था व विश्वास से भरे हृदय से निकली तो भगवान ने उनकी सहायता की।" "जब व्यक्ति मन और वाणी को एक करके विश्वास के साथ किसी सकारात्मक मनोकामना के लिए प्रार्थना करता है तो ईश्वर उस पवित्र ह्रदय से निकली हुई प्रार्थना को स्वीकार करता है।प्रार्थना के माध्यम से व्यक्ति पर ईश्वरीय प्रेम और कृपा की वृष्टि होती है, यह कृपा वृष्टि व्यक्ति को कष्टों से छुटकारा दिलाती है और सही मार्गदर्शन प्रदान करती है।" "प्रार्थना व्यक्ति के मन को नियंत्रित करती है, उसके चित्त की शुद्धि करती है, चेतना परिष्कृत और विकसित होती है।प्रार्थना देवत्व की अनुभूति का श्रेष्ठ माध्यम है।" "सच्ची श्रद्धा तथा विश्वास से युक्त प्रार्थना करने से ह्रदय में शान्ति की धारा प्रवाहित होती है तथा आत्मा में आनंद की वृष्टि होती है।व्यक्ति की शुभ और कल्याणकारी कामना अवश्य पूर्ण होती है।" "अंतःकरण को मलीन बनाने वाली कुत्सित भावनाओ तथा स्वार्थ एवं संकीर्णताओं से छुटकारा मिलता है।शरीर स्वस्थ तथा परिपुष्ट, मन सूक्ष्म तथा उन्नत और आत्मा पवित्र तथा निर्मल हो जाती है।दुःख के स्थान पर सुख का आनंद प्राप्त होता है।" "प्रार्थना व्यक्ति में यह भाव उत्पन्न करती है कि वह समस्या का सामना करने के लिए अकेला नहीं है बल्कि उसके साथ दिव्य शक्ति भी है।भिन्न-भिन्न धर्म के अनुयायी भिन्न-भिन्न तरीकों से प्रार्थना करते हैं परन्तु सभी धर्मो में प्रार्थना का एक ही लक्ष्य है ईश्वर से निकटता, उसका सानिध्य, उसकी कृपा दृष्टि और उसका मार्गदर्शन प्राप्त करना।" "प्रार्थना करने के लिए किसी निश्चित औपचारिकता की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना के लिए कुछ समय तक शांत होकर बैठे, अपने मन को ईश्वरीय सत्ता पर केन्द्रित कीजिये।ईश्वर से सरल और स्वाभाविक तरीके से बात करिए क्योंकि उससे बात करने के लिए औपचारिक शब्दों की आवश्यकता नहीं है।" "प्रार्थना करते समय आश्वस्त होइए कि ईश्वर आपके साथ है और वह आपकी सहायता कर रहा है।वह आपकी ओर दिव्य शक्ति प्रवाहित कर रहा है, शुभाशीष दे रहा है तथा आपकी कल्याणकारी प्रार्थना को स्वीकार कर रहा है।प्रार्थना से दिन की शुरुआत करने से व्यक्ति के मन में उत्साह, उल्लास व आत्मविश्वास भर जाता है..!! ~~~०~~~ "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *************************************************

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Kailash Prasad Jan 22, 2022

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. " श्री राधा रानी की कसम " "वृन्दावन का एक भक्त ठाकुर जी को बहुत प्रेम करता था, भाव विभोर हो कर नित्य प्रतिदिन उनका श्रृंगार करता था। आनंदमय हो कर कभी रोता तो कभी नाचता। "एक दिन श्रृंगार करते हुए जैसे ही मुकट लगाने लगा, तभी मुकट ठाकुर गिरा देते। एक बार दो बार कितनी बार लगाया पर छलिया तो आज लीला करने में लगे थे। अब भक्त को गुस्सा आ गया, वो ठाकुर से कहने लगा तोह को तेरे बाबा की कसम मुकट लगाई ले पर ठाकुर तो ठाकुर है, वो किसी की कसम माने ही नही। "जब नही लगाया तो भक्त बोला तो को तेरी मइया की कसम। ठाकुर जी माने नही। अब भक्त का गुस्सा और बढ़ गया। उसने सबकी कसम दे दी। तोहे मेरी कसम.. तोरी गायिओ की कसम.. तोरे सखाँ की कसम.. तोरी गोपियों की कसम.. तोरे ग्वालों की कसम.. सबकी कसम दे दी,पर ठाकुर तो टस से मस ना हुए।" "अब भक्त बहुत परेशान हो गया और दुखी भी। फिर खीज गया और गुस्से में बोला- ऐ गोपियन के रसिया.. ऐ छलिया, गोपियन के दीवाने, तो को तोरी राधा की कसम है, अब तो मुकुट लगाले।बस फिर क्या था.. ठाकुर जी ने झट से मुकट धारण कर लिया।" "अब भक्त भी चिढ़ गया। अपनी कसम दी, गोप-गोपियों की, माँ, बाबा, ग्वालन की दी। किसी की नही सुनी लेकिन राधा की दी तो मान गये।अगले दिन फिर जब भक्त श्रंगार करने लगा तो इस बार ठाकुर ने बाँसुरी गिरा दी।भक्त हल्के से मुस्कराया और बोला- इस बार तोह को अपनी नही मेरी राधा की कसम। तो भी ठाकुर ने झट से बांसुरी लगा ली।" "अब भक्त आनंद में आकर कर झर-झर रोने लगा। भक्त कहता है- मै समझ गया मेरे ठाकुर, तो को राधा भाव समान निश्चल निर्मल प्रेम ही पसंद है। समर्पण पसंद है,इसलिये राधा से प्रेम करत है।" "अपने भाव को राधा भाव समान निर्मल बना कर रखे अपने प्रेम को पूर्ण-समर्पण रखे सरलता में ही प्रभु है।" . "हे मेरी राधे जू, सारी रौनक देख ली ज़माने की मगर, जो सुकून तेरे चरणों में है, वो कहीं नहीं..!!" ~~~०~~~ "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *************************************************

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. " साधना क्या है." "पत्थर पर यदि बहुत पानी एकदम से डाल दिया जाए तो पत्थर केवल भीगेगा,फिर पानी बह जाएगा और पत्थर सूख जाएगा।किन्तु वह पानी यदि बूंद-बूंद पत्थर पर एक ही जगह पर गिरता रहेगा, तो पत्थर में छेद होगा और कुछ दिनों बाद पत्थर टूट भी जाएगा।" "इसी प्रकार निश्चित स्थान पर नाम स्मरण की साधना की जाएगी तो उसका परिणाम अधिक होता है ,चक्की में दो पाटे होते हैं। उनमें यदि एक स्थिर रहकर, दूसरा घूमता रहे तो अनाज पिस जाता है और आटा बाहर आ जाता है। " "यदि दोनों पाटे एक साथ घूमते रहेंगे तो अनाज नहीं पिसेगा और परिश्रम व्यर्थ होगा।" "इसी प्रकार मनुष्य में भी दो पाटे हैं :- "एक मन और दूसरा शरीर। " "उसमें मन स्थिर पाटा है और शरीर घूमने वाला पाटा है। " "अपने मन को भगवान के प्रति स्थिर किया जाए और शरीर से गृहस्थी के कार्य किए जाएं। " "प्रारब्ध रूपी खूँटा शरीर रूपी पाटे में बैठकर उसे घूमाता है और घूमाता रहेगा, लेकिन मन रूपी पाटे को सिर्फ भगवान के प्रति स्थिर रखना है। देह को तो प्रारब्ध पर छोड़ दिया जाए और मन को नाम-सुमिरन में विलीन कर दिया जाए तो :- " यही नाम साधना है..!!" ~~~०~~~ "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *************************************************

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' " अनुभवी संदेश " "एक युवा युगल के पड़ोस में एक वरिष्ठ नागरिक युगल रहते थे , जिनमे पति की आयु लगभग अस्सी वर्ष थी , और पत्नी की आयु उनसे लगभग पांच वर्ष कम थी ." "युवा युगल उन वरिष्ठ युगल से बहुत अधिक लगाव रखते थे , और उन्हें दादा दादी की तरह सम्मान देते थे . इसलिए हर रविवार को वो उनके घर उनके स्वास्थ्य आदि की जानकारी लेने और कॉफी पीने जाते थे ." "युवा युगल ने देखा कि हर बार दादी जी जब कॉफ़ी बनाने रसोईघर में जाती थी तो कॉफ़ी की शीशी के ढक्कन को दादा जी से खुलवाती थी ." "इस बात का संज्ञान लेकर युवा पुरुष ने एक ढक्कन खोलने के यंत्र को लाकर दादी जी को उपहार स्वरूप दिया ताकि उन्हें कॉफी की शीशी के ढक्कन को खोलने की सुविधा हो सके ." "उस युवा पुरुष ने ये उपहार देते वक्त इस बात की सावधानी बरती की दादा जी को इस उपहार का पता न चले ! उस यंत्र के प्रयोग की विधि भी दादी जी को अच्छी तरह समझा दी ." "उसके अगले रविवार जब वो युवा युगल उन वरिष्ठ नागरिक के घर गया तो वो ये देख के आश्चर्य में रह गया कि दादी जी उस दिन भी कॉफी की शीशी के ढक्कन को खुलवाने के लिए दादा जी के पास लायी ! " "युवा युगल ये सोचने लगे कि शायद दादी जी उस यंत्र का प्रयोग करना भूल गयी या वो यंत्र काम नही कर रहा ! "जब उन्हें एकांत में अवसर मिला तो उन्होंने दादी जी से उस यंत्र के प्रयोग न करने का कारण पूछा . दादी जी के उत्तर ने उन्हें निशब्द कर दिया..! " "दादी जी ने कहा - "ओह ! कॉफी की शीशी के ढक्कन को मैं स्वयं भी अपने हाथ से , बिना उस यंत्र के प्रयोग के आसानी से खोल सकती हूँ , पर मैं कॉफी की शीशी का ढक्कन उनसे इसलिए खुलवाती हूँ कि उन्हें ये अहसास रहे कि आज भी वो मुझसे ज्यादा मजबूत हैं . और मैं उन्हीं पर आश्रित हूँ , इसीलिए वे हमारे घर के पुरुष हैं ! " "इस बात से मुझे भी ये लाभ मिलता है कि मैं ये महसूस करती हूँ कि मैं आज भी उन पर निर्भर हूँ , और वो मेरे लिए आज भी बहुत महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं . यही बात हम दोनों के स्नेह के बंधन को शक्ति प्रदान करती है ." "किसी भी युगल की एकजुटता ही उनके सम्बन्ध की बुनियाद होती है ! अब हम दोनों के पास अधिक आयु नही बची है , इसलिए हमारी एकजुटता हम दोनों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है ." "(शिक्षा:-उस युवा युगल को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सीख मिली. वरिष्ठ नागरिक चाहे घर में किसी भी प्रकार की आमदनी का कोई सहयोग ना दे रहे हों, पर उनके अनुभव हमें पल पल महत्वपूर्ण सीख देते रहते हैं..!!)" ~~~०~~~ "जय जय श्री राधे" " कुमार रौनक कश्यप " *************************************************

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Bindu Singh Jan 21, 2022

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