
Rama Devi Sahu
1 day ago
हे दीनबंधु करुणासिंधु! हे गोविन्द दामोदर माधवेति!हे गोवर्धन गिरिधारी! राधे राधे! 🙏 वसुदेव सुतं देवं कंस चाणूर मर्दनं! देवकी परमानंदं कृष्णं वंदे जगद्गुरूं! ****************************** विचार संजीवनी ************* बड़ी भारी गलती की बात ********************* भगवान् प्रिय, मीठे लगें- इसमें खास बात है कि भगवान् अपने हैं। संसार अपना नहीं है। यह शरीर भी अपना नहीं है। यह मिला हुआ है और बिछुड़ जायगा। भगवान् मिले हुए नहीं हैं और बिछुड़ने वाले नहीं हैं। वे सदैव साथ रहने वाले हैं। भगवान् हमारे से दूर नहीं हुए हैं, अलग नहीं हुएहैं, हमही भगवान् से विमुख हुए हैं। वे सदैव हैं और अपने हैं। इस वास्ते भगवान् को अपना मानें। संसार को अपना न मानें। मनुष्यों की उलटी धारणा हो रही है कि शरीर को, रुपये-पैसों को, घरको अपना मानते हैं। ये किसी के अपने नहीं हैं। रुपये इतने विरक्त हैं कि किसी के नहीं हैं। जिन रुपयों के लिये झूठ-कपट करते हो, बेईमानी करते हो, ठगी करते हो, धोखा देते हो, घरवालोंसे लड़ाई करते हो और जिनके लिये ससुर-जवाँई में लड़ाई हो जाय, भाई-भाई में लड़ाई होजाय, मित्र - मित्र में लड़ाई हो जाय-ऐसे लड़ाई कर लेते हो, धर्म-कर्म छोड़ देते हो, वे रुपये जाते हुए पूछते ही नहीं तुमसे। सलाह भी नहीं लेते और चले जाते हैं। फिर आप एक तरफ से क्यों अपनापन करते हो। भगवान् को याद न करो तो भी भगवान् आपके हैं। वे आपका पालन-पोषण करते हैं;आपकी रक्षा करते हैं;सब तरह से आपका कल्याण करते हैं। ऐसे प्रभु को अपना न मानना बड़ी भारी गलती की बात है। प्रभु अपने हैं और अपने होने से अपने को मीठे लगते हैं। परम् श्रद्धेय स्वामीरामसुख दासजी महाराज पुस्तक -भगवन्नाम पृष्ठ संख्या - ४६ से श्री हरि चरणों में कोटि नमन! सभी प्रभु प्रेमियों सादर प्रणाम! प्रेम से बोलिए जय श्रीराधेयय! 🙏
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 24, 2026
राधे राधे जी 🌹🙏🌹 आप को शुभ रात्री वंदन Ji 🌹🌹

Rakesh Kumar
Aug 24, 2026
jai shree shyam 🙏