Preeti Jain
Preeti Jain Nov 23, 2021

2️⃣1️⃣❗1️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ *(((( संसार में सबसे बड़ा कौन ))))* . एक बार नारद जी के मन में एक विचित्र सा कौतूहल पैदा हुआ। . उन्हें यह जानने की धुन सवार हुई कि ब्रह्मांड में सबसे बड़ा और महान कौन है? . नारद जी ने अपनी जिज्ञासा भगवान विष्णु के सामने ही रख दी। भगवान विष्णु मुस्कुराने लगे। . फिर बोले, नारद जी सब पृथ्वी पर टिका है। इसलिए पृथ्वी को बड़ा कह सकते हैं। और बोले परंतु नारद जी यहां भी एक शंका है। . नारद जी का कौतूहल शांत होने की बजाय और बढ़ गया। नारद जी ने पूछा स्वयं आप सशंकित हैं फिर तो विषय गंभीर है। कैसी शंका है प्रभु? . विष्णु जी बोले, समुद्र ने पृथ्वी को घेर रखा है। इसलिए समुद्र उससे भी बड़ा है। . अब नारद जी बोले, प्रभु आप कहते हैं तो मान लेता हूं कि समुद्र सबसे बड़ा है। . यह सुनकर विष्णु जी ने एक बात और छेड़ दी, परंतु नारद जी समुद्र को अगस्त्य मुनि ने पी लिया था। इसलिए समुद्र कैसे बड़ा हो सकता है? बड़े तो फिर अगस्त्य मुनि ही हुए। . नारद जी के माथे पर बल पड़ गया। फिर भी उन्होंने कहा, प्रभु आप कहते हैं तो अब अगस्त्य मुनि को ही बड़ा मान लेता हूं। . नारद जी अभी इस बात को स्वीकारने के लिए तैयार हुए ही थे कि विष्णु ने नई बात कहकर उनके मन को चंचल कर दिया। . श्री विष्णु जी बोले, नारद जी पर ये भी तो सोचिए वह रहते कहां हैं। . आकाशमंडल में एक सूई की नोक बराबर स्थान पर जुगनू की तरह दिखते हैं। फिर वह कैसे बड़े, बड़ा तो आकाश को होना चाहिए। . नारद जी बोले, हां प्रभु आप यह बात तो सही कर रहे हैं। आकाश के सामने अगस्त्य ऋषि का तो अस्तित्व ही विलीन हो जाता है। . आकाश ने ही तो सारी सृष्टि को घेर आच्छादित कर रखा है। आकाश ही श्रेष्ठ और सबसे बड़ा है। . भगवान विष्णु जी ने नारद जी को थोड़ा और भ्रमित करने की सोची। . श्रीहरि बोल पड़े, पर नारदजी आप एक बात भूल रहे हैं। वामन अवतार ने इस आकाश को एक ही पग में नाप लिया था फिर आकाश से विराट तो वामन हुए। . नारदजी ने श्रीहरि के चरण पकड़ लिए और बोले भगवन आप ही तो वामन अवतार में थे। . फिर अपने सोलह कलाएं भी धारण कीं और वामन से बड़े स्वरूप में भी आए। इसलिए यह तो निश्चय हो गया कि सबसे बड़े आप ही हैं। . भगवान विष्णु ने कहा, नारद, मैं विराट स्वरूप धारण करने के उपरांत भी, अपने भक्तों के छोटे हृदय में विराजमान हूं। . वहीं निवास करता हूं। जहां मुझे स्थान मिल जाए वह स्थान सबसे बड़ा हुआ न। . इसलिए सर्वोपरि और सबसे महान तो मेरे वे भक्त हैं जो शुद्ध हृदय से मेरी उपासना करके मुझे अपने हृदय में धारण कर लेते हैं। . उनसे विस्तृत और कौन हो सकता है। तुम भी मेरे सच्चे भक्त हो इसलिए वास्तव में तुम सबसे बड़े और महान हो। . श्रीहरि की बात सुनकर नारद जी के नेत्र भर आए। उन्हें संसार को नचाने वाले भगवान के हृदय की विशालता को देखकर आनंद भी हुआ और अपनी बुद्धि के लिए खेद भी। . नारद जी ने कहा, प्रभु संसार को धारण करने वाले आप स्वयं खुद को भक्तों से छोटा मानते हैं। फिर भक्तगण क्यों यह छोटे-बड़े का भेद करते हैं। . मुझे अपनी अज्ञानता पर दुख है। मैं आगे से कभी भी छोटे-बड़े के फेर में नहीं पड़ूंगा। . यदि परमात्मा के प्रति हमारी पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और भक्ति है तो हम सदैव परमात्मा से परोक्ष रूप से जुड़ जाते हैं। . भगवान भक्त के वश में हैं भक्त अपनी निष्काम भक्ति से भगवान को वश में कर लेता है। . हमारे मन मे सदैव यही भाव होना चाहिए कि हे प्रभू, हे त्रिलोक के स्वामी इस संसार मे मेरा कुछ नही, यहां तक कि यह शरीर और श्वांसे भी मेरी नही है, फिर मैं आपको क्या समर्पण करूँ। . फिर भी जो कुछ भी तेरा है वह तुम्हे सौंपता हूँ। आप ही सर्वेश्वर है, आप ही नियंता है, आप ही सृजन हार और आप ही संहारक है..!! *🙏🏾🙏🏻🙏🏿जय जय श्री राधे*🙏🏼🙏🏽🙏

2️⃣1️⃣❗1️⃣1️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣
*(((( संसार में सबसे बड़ा कौन ))))*
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एक बार नारद जी के मन में एक विचित्र सा कौतूहल पैदा हुआ। 
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उन्हें यह जानने की धुन सवार हुई कि ब्रह्मांड में सबसे बड़ा और महान कौन है? 
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नारद जी ने अपनी जिज्ञासा भगवान विष्णु के सामने ही रख दी। भगवान विष्णु मुस्कुराने लगे। 
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फिर बोले, नारद जी सब पृथ्वी पर टिका है। इसलिए पृथ्वी को बड़ा कह सकते हैं। और बोले परंतु नारद जी यहां भी एक शंका है।
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नारद जी का कौतूहल शांत होने की बजाय और बढ़ गया। नारद जी ने पूछा स्वयं आप सशंकित हैं फिर तो विषय गंभीर है। कैसी शंका है प्रभु?
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विष्णु जी बोले, समुद्र ने पृथ्वी को घेर रखा है। इसलिए समुद्र उससे भी बड़ा है। 
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अब नारद जी बोले, प्रभु आप कहते हैं तो मान लेता हूं कि समुद्र सबसे बड़ा है। 
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यह सुनकर विष्णु जी ने एक बात और छेड़ दी, परंतु नारद जी समुद्र को अगस्त्य मुनि ने पी लिया था। इसलिए समुद्र कैसे बड़ा हो सकता है? बड़े तो फिर अगस्त्य मुनि ही हुए। 
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नारद जी के माथे पर बल पड़ गया। फिर भी उन्होंने कहा, प्रभु आप कहते हैं तो अब अगस्त्य मुनि को ही बड़ा मान लेता हूं। 
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नारद जी अभी इस बात को स्वीकारने के लिए तैयार हुए ही थे कि विष्णु ने नई बात कहकर उनके मन को चंचल कर दिया। 
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श्री विष्णु जी बोले, नारद जी पर ये भी तो सोचिए वह रहते कहां हैं। 
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आकाशमंडल में एक सूई की नोक बराबर स्थान पर जुगनू की तरह दिखते हैं। फिर वह कैसे बड़े, बड़ा तो आकाश को होना चाहिए। 
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नारद जी बोले, हां प्रभु आप यह बात तो सही कर रहे हैं। आकाश के सामने अगस्त्य ऋषि का तो अस्तित्व ही विलीन हो जाता है। 
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आकाश ने ही तो सारी सृष्टि को घेर आच्छादित कर रखा है। आकाश ही श्रेष्ठ और सबसे बड़ा है। 
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भगवान विष्णु जी ने नारद जी को थोड़ा और भ्रमित करने की सोची।
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श्रीहरि बोल पड़े, पर नारदजी आप एक बात भूल रहे हैं। वामन अवतार ने इस आकाश को एक ही पग में नाप लिया था  फिर आकाश से विराट तो वामन हुए। 
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नारदजी ने श्रीहरि के चरण पकड़ लिए और बोले भगवन आप ही तो वामन अवतार में थे। 
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फिर अपने सोलह कलाएं भी धारण कीं और वामन से बड़े स्वरूप में भी आए। इसलिए यह तो निश्चय हो गया कि सबसे बड़े आप ही हैं। 
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भगवान विष्णु ने कहा, नारद, मैं विराट स्वरूप धारण करने के उपरांत भी, अपने भक्तों के छोटे हृदय में विराजमान हूं। 
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वहीं निवास करता हूं। जहां मुझे स्थान मिल जाए वह स्थान सबसे बड़ा हुआ न। 
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इसलिए सर्वोपरि और सबसे महान तो मेरे वे भक्त हैं जो शुद्ध हृदय से मेरी उपासना करके मुझे अपने हृदय में धारण कर लेते हैं। 
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उनसे विस्तृत और कौन हो सकता है। तुम भी मेरे सच्चे भक्त हो इसलिए वास्तव में तुम सबसे बड़े और महान हो।
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श्रीहरि की बात सुनकर नारद जी के नेत्र भर आए। उन्हें संसार को नचाने वाले भगवान के हृदय की विशालता को देखकर आनंद भी हुआ और अपनी बुद्धि के लिए खेद भी। 
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नारद जी ने कहा, प्रभु संसार को धारण करने वाले आप स्वयं खुद को भक्तों से छोटा मानते हैं। फिर भक्तगण क्यों यह छोटे-बड़े का भेद करते हैं। 
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मुझे अपनी अज्ञानता पर दुख है। मैं आगे से कभी भी छोटे-बड़े के फेर में नहीं पड़ूंगा। 
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यदि परमात्मा के प्रति हमारी पूर्ण श्रद्धा, समर्पण और भक्ति है तो हम सदैव परमात्मा से परोक्ष रूप से जुड़ जाते हैं।
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भगवान भक्त के वश में हैं भक्त अपनी निष्काम भक्ति से भगवान को वश में कर लेता है। 
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हमारे मन मे सदैव यही भाव होना चाहिए कि हे प्रभू, हे त्रिलोक के स्वामी इस संसार मे मेरा कुछ नही, यहां तक कि यह शरीर और श्वांसे भी मेरी नही है, फिर मैं आपको क्या समर्पण करूँ।
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फिर भी जो कुछ भी तेरा है वह तुम्हे सौंपता हूँ। आप ही सर्वेश्वर है, आप ही नियंता है, आप ही सृजन हार और आप ही संहारक है..!!
   *🙏🏾🙏🏻🙏🏿जय जय श्री राधे*🙏🏼🙏🏽🙏

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कामेंट्स

Rajesh Rajesh Nov 25, 2021
OM NAMO BHAGVATE VASUDEVAY NAMAH SHUBH PRABHAT BEHENA VISNU BHAGVAN KI KRUPA AAP PER OR AAP KE PARIVAR PER SADA BANI RAHE AAP KA DIN SHUBH OR MANGAL MAY HO AAP OR AAP KA PARIVAR HAMESA KHUS RAHE SWATH RAHE SUKHI RAHE BEHENA PRANAM

Anil Nov 25, 2021
good morning 🌹🌹🌹

🎋🅿Gupta Nov 25, 2021
Ram-Ram ji.suprabhat vandan🙏🙏shri hari ji avm mata Mahalaxmi ji ka aasjirvad sda bna rahe.good morning.have a nice day.jai jinendra om shanti ji🍫🍫💐💐👏👏

dayaram birla Nov 25, 2021
om luxmi narayan namo nmah shubh prabhat preeti g shubh guruwar pratah naman 🌹❤🌹

🔴 Suresh Kumar 🔴 Nov 25, 2021
राधे राधे जी 🙏 शुभ प्रभात वंदन मेरी बहन। 💮💮🥀🙏🥀💮💮

pk jain Nov 25, 2021
good afternoon ji radhe Krishna ji

Runa Sinha Nov 25, 2021
🌿🍒 Jai Shree Hari Vishnu Bhagwan🍒🌿 🌿🍒Om Namo bhagwate vasudevay🍒🌿 🌿🍒 Good afternoon 🍒🌿

Poonam Aggarwal Nov 25, 2021
🌷🐚🌷🐚🌷🐚🌷 🌷 ॐ नमो नारायण वासुदेव 🌷 जय श्री हरि विष्णुजी की कृपा से आप के घर परिवार में सुख शांति और समृद्धि हमेशा बनी रहे 👣 आप सभी खुश और स्वस्थ रहे शुभ मंगलमय शुभकामनाओं सहित राम राम जी राधे राधे जी 🌹🙏 ‼️ हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ ‼️🙏🌷🐚🌷🐚🌷🐚🌷

santoshi thakur Nov 25, 2021
Om namo bhagavate vashudevay dhimahi dhiyo yo n prachodayat 🙏 jai shree shyam Radhe Radhe krishna sister 🌹 aapka har pal mangalmay ho ✨✨✨ God bless you 👍👍

Alka Devgan Nov 25, 2021
Om Namo Narayan ji 🙏 God bless you and your family aapka har pal mangalmay n shubh ho meri pyari bahna ji very beautiful post di Shri Hari ji aap sabhi ko kushiyan pradhan karein di aap sabhi par sada kirpa karein shubh sandhya vandan bahna ji Jai Shri Hari ji 🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Manoj manu Nov 25, 2021
🚩🌺जय श्री कृष्णा जी राधे राधे जी शुभ संध्या मधुर मंगल जी दीदी 🌿🙏

dhruvwadhwani Nov 25, 2021
om Bhagwate vasudevay namah om bhagwate vasudevay namah om bhagwate vasudevay namah om bhagwate vasudevay namah om bhagwate vasudevay namah om bhagwate vasudevay namah om bhagwate vasudevay namah

dhruvwadhwani Nov 25, 2021
jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa luxmi jai maa

dhruvwadhwani Nov 25, 2021
om sai ram om sai ram om sai ram om sai ram om sai ram om sai ram om sai ram om sai ram om sai ram om sai ram

dhruvwadhwani Nov 25, 2021
jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi jaimatadi

Archana Singh Jan 21, 2022

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Sudha Mishra Jan 21, 2022

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Neha Sharma Jan 21, 2022

🙇*जय श्री राधेकृष्णा*🙏*शुभ रात्रि नमन*🙇 li.▭▬▭▬▭▬--।।ॐ।।▭▬▭▬▭▬▭.li *🌺🤗 सखियों के श्याम 🤗🌺 □ कौन बुझावे इन प्रानन की प्यास....□* ~~~~~□-pøšț-० ४ -□~~~~~ li.▭▬▭▬▭▬--।।ॐ।।▭▬▭▬▭▬▭.li *🙏🌹Զเधे* *Զเधे*... *Զเधे* *Զเधे*🌹🙏 . *.....🌹 जय श्री राधेकृष्णा 🌹.....* 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 कौन बुझावे इन प्राननकी प्यास 'सखियों! मुझे जल पिला दो ! तृषासे कंठ सूखा जा रहा है।' चार-पाँच सखियाँ घाटपर जल भरने आयी थीं, घड़े धोकर रख दिये और सब मिलकर बातें करने लगीं। बातें भी क्या! व्रजमें कृष्ण-चर्चाके अतिरिक्त और चर्चा ही क्या होगी? तभी श्यामसुन्दरने आकर जल पिलानेका अनुरोध किया। सुनकर-देखकर सबके प्राण हरे हो गये। 'यमुनामें अथाह जल है कान्ह जू! पीलो न।'-एक सखी बोली। 'जल तो है सखी! किंतु मेरे पास पात्र जो नहीं! हाथसे लेकर जल पीऊँगा तो सारा जल झूठा हो जायेगा, इसीसे तुम्हारा निहोरा करता हूँ। अपने घड़ेसे जल पिला दोगी तो यश मानूँगा।' 'यशसे क्या बननेवाला है श्यामसुंदर! कामके बदले काम कर दो, तो कोई बात बने !' 'अच्छा सखी! बता कौन-सा कार्य कर दूँ तुम्हारा ? मेरा मुख प्याससे सूख रहा है।' 'तुम हमारे घड़े उठवा दो और जब तक हम घर न जाय, तब तक तुम यहीं हमारे पास रहो।' 'यह क्या कहती हो! मैं तुम्हारे समीप बैठा रहूँगा तो मेरी गायें कौन फेरेगा? वे इधर-उधर भाग गयीं तो साँझको मैया मारेगी मुझे।' 'तो फिर तुम जल अपने आप पी लो। हम जाकर तुम्हारी मैयासे कह देंगी कि कन्हैयाने जमना झूठी कर दी है। अब वह जल नारायणकी सेवापूजाके योग्य नहीं रहा।' 'अच्छी बात है सखियों! जो तुम कहोगी वही करूँगा; लाओ जल पिलाओ।' 'नंदा! तेरा घड़ा छोटा है, इससे अच्छी धार बँधेगी।'-सुमतिने नंदासे घड़ा लेकर श्यामकी अंजलीमें जल ढालना आरम्भ किया और अन्य सखियाँ अपनी छूटी हुई चर्चाका सुत्र पुनः थामने लगीं। 'क्या कह रही थी वसुधा! तू?'– इन्दूलेखा जीजीने पूछा। । 'कल मेरे बाबाके पास कोई साधु-महात्मा आये थे। वे बाबासे कहने लगे–यहाँ नंदग्राममें परात्पर-ब्रह्मने अवतार लिया है, मैं दर्शनके लिये आया हूँ। वे किसके घरमें अवतीर्ण हुए हैं, कृपा करके मुझे दर्शन करा दो।'वसुधाकी बात सुन सखियाँ मुस्कराने लगीं। 'अच्छा ! फिर तेरे बाबाने क्या उत्तर दिया?' - .... बाबा बेचारे समझे ही नहीं। बोले- क्या कहते हैं महाराज; कैसा परात्पर-ब्रह्म ! हम तो नहीं जानते वह कौन है कैसा है?' साधु घिघियाके बोले-'अरे भैया! भगवान् नारायणने अवतार लिया है। मुझे भुलाओ मत, दर्शन करा दो।' बाबा तो बेचारे अचकचाकर अपने चारों ओर देखने लगे और हाथ जोड़ कर बोले-'नहीं महाराज! हमको नहीं मालूम । यदि नारायणदेव पधारे होते, तो हम सब उनकी पूजा करनेको दौड़ पड़ते !' 'साक्षात नहीं भैया! बालक रूप धारण किया है उन्होंने।'-साधु बोले। 'अब बालक तो महाराज! व्रजकी गली-गलीमें दौड़ते फिरें, न जाने कौनसे नारायणदेव हैं। उनका कुछ अता-पता और चिन्ह बतायें तो कहूँ।' 'सुन भैया! नीलकमल-सा साँवला रंग है, कमलसे कोमल और विशाल नेत्र हैं, धुंघराले केश हैं, छातीमें श्रीवत्सको चिन्ह है, बड़ी मनमोहिनी छवि है देखनेसे तृप्ति न हो ऐसा मनमोहन रूप होगा।' 'ऐसा तो हमारा कन्हैया है महाराज!' बाबा बोले-'पर वह तो महाऊधमी है; नंदरायके बुढ़ापेका पूत है। पर मनुष्यकी कौन कहे, पशु-पक्षी भी उसे घेरे रहते हैं।' 'बस-बस भैया! मैं उनके ही दर्शन चाहता हूँ ! कहाँ होंगे इस समय वे आनंद-घन?' 'जमुना किनारे चले जाओ महाराज; वहीं कहीं गायें चराता होगा!' 'अच्छा वसुधा ! क्या नाम बताया साधु बाबाने?' 'इनसे ही पूछ लो न!'-सुमतिने जल पिलाते हुए कहा। एकाएक श्यामसुंदरको हँसी आ गयी, मुखमें भरा सारा जल फुहारके 4 'परात्पर-ब्रह्म।' 'यह क्या होता है सखी?'-एकने पूछा। मन धावत मग छोर रूपमें घड़ेके भीतर और समीप खड़ी सखियोंपर पड़ा। नंदा खीजकर बोली-'यह क्या किया तुमने? मैयाने नारायणकी पूजाके लिये जल मँगाया था, तुमने घड़ा जूठाकर दिया। मैया मारेगी मुझे !' कन्हाई खड़े हो गये–'मैं क्या करूँ सखी! तुम्हारे परात्पर-पुरुषकी व्याख्या पची नहीं, सो उछलकर बाहर आ गयी।' सब खिलखिलाकर हँस पड़ी। 'लो सखियों! तुम्हारे घड़े उठवा दूँ। मेरी गैया भाग गयी होंगी तो सब सखा पंचायती मार लगायेंगे और नंदा घड़ा झूठा करनेके अपराधमें साँझको मैयासे पिटवायेगी, सो अलग। मुँह क्या देख रही है मेरा! घर जाकर दूसरा घड़ा भरकर ले जा! नारायण बेचारे झूठे घड़ेके पानीसे नहाकर खिसिया जायेंगे।' 'श्याम ! तुमने तो हम सबको जूठा कर दिया। देखो न, तुम्हारे छोटेसे मुखसे कितना सारा पानी निकला कि हम सबकी सब भीग गयीं।' किंतु उनकी बात सुननेसे पूर्व ही श्यामसुंदर वंशीवटकी ओर भाग छूटे पटकेके छोर और घुघराली अलकें वायुके वेगसे लहरा रही हैं। बंसी फेंटमें खोस ली है और दाहिने हाथमें लकुट लिये दौड़े जा रहे हैं। सखियां खड़ी अपलक निहार रही हैं।- 👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣👣 🍁💦🙏Զเधे👣Զเधे🙏🏻💦🍁 जो लोग ठाकुर जी से प्रेम करते हैं.....🌸🌺 प्रेम से लिखें श्री राधे राधे..🍂🌺🍂 *जय-जय श्री राधेकृष्णा 🌺🙇

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Kailash Prasad Jan 21, 2022

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Kanta Kamra Jan 21, 2022

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Kanta Kamra Jan 21, 2022

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