Ramesh Agrawal
Ramesh Agrawal Aug 6, 2022

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Shiv Sharan Vajpeyee Aug 6, 2022
जय श्री गणेश🙏🔱🔱🙏🌹🌹🌸🌸 जय मां आदिशक्ति🔱🔱🙏🙏🌼🌼🍁🍀🌹🌹🌿🌿🌷 हर हर महादेव शंभू🙏🙏🌻🔱🔱🌻🌿🌿🌿🌿 जय हनुमान जय श्री शनि देव शुभ शनिवार

Ramesh Agrawal Jul 30, 2022

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ANIL. PATEL Jul 30, 2022

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Durga Sharma Jul 31, 2022

💠!! बड़ी सुन्दर सत्य कथा है अवश्य पढ़े !!💠 बरसाने के एक संत की कथा....!! एक संत बरसाना में रहते थें और हर रोज सुबह उठकर यमुना जी में स्नान करके राधा जी के दर्शन करने जाया करते थें। यह नियम हर रोज का था। जब तक राधा रानी के दर्शन नहीं कर लेते थें, तब तक जल भी ग्रहण नहीं करते थें। दर्शन करते करते तकरीबन उनकी उम्र अस्सी वर्ष की हो गई। आज सुबह उठकर रोज की तरह उठे और यमुना में स्नान किया और राधा रानी के दर्शन को चलें गए। मन्दिर के पट खुले और राधा रानी के दर्शन करने लगे। दर्शन करते करते संत के मन में भाव आया की :- "मुझे राधा रानी के दर्शन करते करते आज अस्सी वर्ष हो गए लेकिन मैंने आज तक राधा रानी को कोई भी वस्त्र नहीं चढ़ाया। लोग राधा रानी के लिए कोई नारियल लाता है, कोई चुनरिया लाता है, कोई चूड़ी लाता है, कोई बिन्दी लाता है, कोई साड़ी लाता है, कोई लहंगा चुनरिया लाता है। लेकिन मैंने तो आज तक कुछ भी नहीं चढ़ाया है।" यह विचार संत जी के मन में आया की "जब सभी मेरी राधा रानी लिए कुछ ना कुछ लाते हैं, तो मैं भी अपनी राधा रानी के लिए कुछ ना कुछ लेकर जरूर आऊंगा। लेकिन क्या लाऊं? जिससे मेरी राधा रानी खुश हो जायें ? तो संन्त जी यह सोच कर अपनी कुटिया में आ गए। सारी रात सोचते सोचते सुबह हो गई उठे उठ कर स्नान किया और आज अपनी कुटिया में ही राधा रानी के दर्शन पूजन कियें। दर्शन के बाद मार्केट में जाकर सबसे सुंदर वाला लहंगा चुनरिया का कपड़ा लायें और अपनी कुटिया में आकर के अपने ही हाथों से लहंगा-चुनरिया को सिला और सुंदर से सुंदर उस लहंगा-चुनरिया में गोटा लगायें। जब पूरी तरह से लहंगा चुनरिया को तैयार कर लिया तो मन में सोचा कि "इस लहंगा चुनरिया को अपनी राधा रानी को पहनाऊंगा तो बहुत ही सुंदर मेरी राधा रानी लगेंगी।" यह सोच करके आज संन्त जी उस लहंगा-चुनरिया को लेकर राधा रानी के मंदिर को चले। मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने लगे और अपने मन में सोच रहे हैं , "आज मेरे हाथों के बनाएं हुए लहंगा चुनरिया राधा रानी को पहनाऊगां तो मेरी लाड़ली खूब सुंदर लगेंगी" यह सोच कर जा रहे हैं। इतने मे एक बरसाना की लड़की (लाली) आई और बाबा से कहती है :- "बाबा आज बहुत ही खुश हो, क्या बात है ? बाबा बताओ ना !" तो बाबा ने कहा कि :- "लाली आज मे बहुत खुश हूँ। आज मैं अपने हाथों से राधा रानी के लिए लहंगा-चुनरिया बनाया है। इस लहंगा चुनरिया को राधा रानी जी को पहनाऊंगा और मेरी राधा रानी बहुत सुंदर दिखेंगी।" उस लाली ने कहा :- "बाबा मुझे भी दिखाओ ना आपने लहंगा चुनरिया कैसी बनाई है।" लहंगा चुनरिया को देखकर वो लड़की बोली :- "अरे बाबा राधा रानी के पास तो बहुत सारी पोशाक है। तो ये मुझे दे दो ना।" तो महात्मा बोले की :- "बेटी तुमको मैं दूसरी बाजार से दिलवा दूंगा। ये तो मै अपने हाथ से बनाकर राधा रानी के लिये लेकर जा रहा हूँ। तुमको और कोई दुसरा दिलवा दूंगा।" लेकिन उस छोटी सी बालिका ने उस महात्मा का दुपट्टा पकड़ लिया "बाबा ये मुझे दे दो", पर संत भी जिद करने लगे की "दूसरी दिलवाउंगा ये नहीं दूंगा।" लेकिन वो बच्ची भी इतनी तेज थी की संत के हाथ से छुड़ा लहंगा-चुनरिया को छीन कर भाग गई। अब तो बाबा को बहुत ही दुख लगा की "मैंने आज तक राधा रानी को कुछ नहीं चढ़ाया। लेकिन जब लेकर आया तो लाली लेकर भाग गई। "मेरा तो जीवन ही खराब है। अब क्या करूँगा?" यह सोच कर संन्त उसी सीढ़ियों में बैठे करके रोने लगें। इतने मे कुछ संत वहाँ आयें और पूछा :- "क्या बात है, बाबा ? आप क्यों रो रहे हैं।" तो बाबा ने उन संतों को पूरी बात बताई, संतों ने बाबा को समझाया और कहा कि :- "आप दुखी मत हो कल दूसरी लहंगा चुनरिया बना के राधा रानी को पहना देना। चलो राधा रानी के दर्शन कर लेते हैं।" इस प्रकार संतो ने बाबा को समझाया और राधा रानी के दर्शन को लेकर चले गए। रोना तो बन्द हुआ लेकिन मन ख़राब था। क्योंकि कामना पूरी नहीं हुई ना, तो अनमने मन से राधा रानी का दर्शन करने संत जा रहे थें और मन में ये ही सोच रहे हैं " की मुझे लगता है की किशोरी जी की इच्छा नहीं थीं , शायद राधा रानी मेरे हाथों से बनी पोशाक पहनना ही नहीं चाहती थीं ! ", ऐसा सोचकर बड़े दुःखी होकर जा रहे हैं। मंदिर आकर राधा रानी के पट खुलने का इन्तजार करने लगें। थोड़े ही देर बाद मन्दिर के पट खुले तो संन्तो ने कहा :- "बाबा देखो तो आज हमारी राधा रानी बहुत ही सुंदर लग रही हैं।" संतों की बात सुनकर के जैसे ही बाबा ने अपना सिर उठा कर के देखा तो जो लहंगा चुनरिया बाबा ने अपने हाथों से बनाकर लाये थें, वही आज राधा रानी ने पहना था। बाबा बहुत ही खुश हो गए और राधा रानी से कहा हे "राधा रानी, आपको इतना भी सब्र नहीं रहा आप मेरे हाथों से मंदिर की सीढ़ियों से ही लेकर भाग गईं ! ऐसा क्यों?" सर्वेश्वरी श्री राधा रानी ने कहा की "बाबा आपके भाव को देखकर मुझ से रहा नहीं गया और ये केवल पोशाक नहीं है, इस में आपका प्रेम है। इस लिए तो मैं खुद ही आकर के आपसे लहंगा चुनरिया छीन कर भाग गई थी।" इतना सुनकर के बाबा भाव विभोर हो गये और बाबा ने उसी समय किशोरी जी का धन्यवाद किया। ❤️🙏 !! जय श्री राधे राधे !! 🙏❣️

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Rameshannd Guruji Jul 30, 2022

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Ramesh Agrawal Jul 30, 2022

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Ramesh Agrawal Jul 28, 2022

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