हर हर महादेव 🚩 🌺 🌿 🙏 🙏

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PRABHAT KUMAR Jan 17, 2022

💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 🔥🔥🔥🔥 *#हर_हर_महादेव_ऊँ_नमः_शिवाय* 🔥🔥🔥🔥 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 *🌜 मधुर सपनों के साथ शुभ रात्रि प्रिय आदरणीय साथियों 🌛* 🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂 *सभी देवी-देवताओं में भगवान शिव को कल्याणकारी माना गया है। भगवान शिव अपने भक्तों पर आने वाले कष्टों का हरण कर लेते हैं। 'ॐ नमः शिवाय' एक ऐसा मंत्र है जिसके नाम मात्र से सभी बाधाएं खत्म हो जाती हैं। इसकी महिमा का गुणगान हमारे पुराणों में किया गया है। प्रणव मंत्र 'ॐ' के साथ 'नमः शिवाय' (पंचाक्षर मंत्र) का मेल करने से षडक्षर मंत्र का निर्माण होता है इसलिए इसे षडक्षर मंत्र के नाम से भी जाना जाता है।* 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 *धन प्राप्ति के लिए शिवलिंग पर बेल पत्र अर्पित करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। इसके बाद भोलेनाथ की विधिवत आरती करें। ऐसा करने से मनचाहे धन की प्राप्ति होगी।* 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 *सुबह नित्यक्रम करने के बाद स्वच्छ श्वेत वस्त्र धारण करके शिवलिंग पर महादेवाय नमः मंत्र का जाप करते हुए कमल के फूल अर्पित करें। इस उपाय से भगवान शिव के साथ देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न हाेती हैं और अपने भक्तों को धन-धान्य से परिपूर्ण करती हैं।* 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 *शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, दुर्वा और बिल्वपत्र चढा़कर शिव मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करने से आयु में वृद्धि होती है।* 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 *भोलेनाथ की अराधना करने वाले जातक अंत समय में शिवलोक जाते हैं। भगवान शिव की पूजा करते समय ऊं नमो भगवते रुद्राय मंत्र का जाप करने से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।* 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 *सुबह स्नानादि कार्यों से निवृत्त होकर भोलेनाथ के स्वरूप पर अगस्त्य फूलों को चढ़ाते हुए ऊं नमः रुद्राय मंत्र का जाप करें। इससे हर क्षेत्र में सम्मान मिलेगा अौर जीवन ऐश्वर्य से परिपूर्ण हाेगा।* 💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧💧 *#नोट : उक्त जानकारी सोशल मीडिया से प्राप्त किया गया है।* 📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰📰 *( इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक आस्था और लौकिक मान्यताओं पर आधारित है जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। )* 🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️🏵️

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X7skr🇮🇳 Jan 19, 2022

🕉️ namah shivay 🙏 @🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~🌞 ⛅ *दिनांक - 20 जनवरी 2022* ⛅ *दिन - गुरुवार* ⛅ *विक्रम संवत - 2078* ⛅ *शक संवत -1943* ⛅ *अयन - उत्तरायण* ⛅ *ऋतु - शिशिर* ⛅ *मास - माघ (गुजरात एवं महाराष्ट्र के अनुसार - पौष)* ⛅ *पक्ष - कृष्ण* ⛅ *तिथि - द्वितीया सुबह 08:04 तक तत्पश्चात तृतीया* ⛅ *नक्षत्र - अश्लेशा सुबह 08:24 तक तत्पश्चात मघा* ⛅ *योग - आयुष्मान् शाम 03:45 तक तत्पश्चात सौभाग्य* ⛅ *राहुकाल - दोपहर 02:13 से शाम 03:35 तक* ⛅ *सूर्योदय - 07:19* ⛅ *सूर्यास्त - 18:19* ⛅ *दिशाशूल - दक्षिण दिशा में* ⛅ *व्रत पर्व विवरण - 💥 *विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞 🌷 *माघ कृष्ण चतुर्थी / संकष्टी चतुर्थी / संकट चौथ* 🌷 ➡ *21 जनवरी 2022 शुक्रवार को संकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी का त्यौहार है। इस चतुर्थी को 'माघी कृष्ण चतुर्थी', 'तिलचौथ', ‘वक्रतुण्डी चतुर्थी’ भी कहा जाता है।* 🙏🏻 *इस दिन गणेश भगवान तथा संकट माता की पूजा का विधान है। संकष्ट का अर्थ है 'कष्ट या विपत्ति', 'कष्ट' का अर्थ है 'क्लेश', सम् उसके आधिक्य का द्योतक है। आज किसी भी प्रकार के संकट, कष्ट का निवारण संभव है। आज के दिन व्रत रखा जाता है। इस व्रत का आरम्भ ' गणपतिप्रीतये संकष्टचतुर्थीव्रतं करिष्ये ' - इस प्रकार संकल्प करके करें । सायंकालमें गणेशजी का और चंद्रोदय के समय चंद्र का पूजन करके अर्घ्य दें।* *'गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्धि प्रदायक।* *संकष्टहर में देव गृहाणर्धं नमोस्तुते।* *कृष्णपक्षे चतुर्थ्यां तु सम्पूजित विधूदये।* *क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहार्धं नमोस्तुते।'* 🙏🏻 *नारदपुराण, पूर्वभाग अध्याय 113 में संकष्टीचतुर्थी व्रत का वर्णन इस प्रकार मिलता है।* *माघकृष्णचतुर्थ्यां तु संकष्टव्रतमुच्यते । तत्रोपवासं संकल्प्य व्रती नियमपूर्वकम् ।। ११३-७२ ।।* *चंद्रोदयमभिव्याप्य तिष्ठेत्प्रयतमानसः । ततश्चंद्रोदये प्राप्ते मृन्मयं गणनायकम् ।। ११३-७३ ।।* *विधाय विन्यसेत्पीठे सायुधं च सवाहनम् । उपचारैः षोडशभिः समभ्यर्च्य विधानतः ।। ११३-७४ ।।* *मोदकं चापि नैवेद्यं सगुडं तिलकुट्टकम् । ततोऽर्घ्यं ताम्रजे पात्रे रक्तचंदनमिश्रितम् ।। ११३-७५ ।।* *सकुशं च सदूर्वं च पुष्पाक्षतसमन्वितम् । सशमीपत्रदधि च कृत्वा चंद्राय दापयेत् ।। ११३-७६ ।।* *गगनार्णवमाणिक्य चंद्र दाक्षायणीपते । गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक ।। ११३-७७ ।।* *एवं दत्त्वा गणेशाय दिव्यार्घ्यं पापनाशनम् । शक्त्या संभोज्य विप्राग्र्यान्स्वयं भुंजीत चाज्ञया ।। ११३-७८ ।।* *एवं कृत्वा व्रतं विप्र संकष्टाख्यं शूभावहम् । समृद्धो धनधान्यैः स्यान्न च संकष्टमाप्नुयात् ।। ११३-७९ ।।* 🙏🏻 *माघ कृष्ण चतुर्थी को ‘संकष्टवव्रत’ बतलाया जाता है। उसमें उपवास का संकल्प लेकर व्रती सबेरे से चंद्रोदयकाल तक नियमपूर्वक रहे। मन को काबू में रखे। चंद्रोदय होने पर मिट्टी की गणेशमूर्ति बनाकर उसे पीढ़े पर स्थापित करे। गणेशजी के साथ उनके आयुध और वाहन भी होने चाहिए। मिटटी में गणेशजी की स्थापना करके षोडशोपचार से विधिपूर्वक उनका पूजन करें । फिर मोदक तथा गुड़ से बने हुए तिल के लडडू का नैवेद्य अर्पण करें।* *तत्पश्चात्‌ तांबे के पात्र में लाल चन्दन, कुश, दूर्वा, फूल, अक्षत, शमीपत्र, दधि और जल एकत्र करके निम्नांकित मंत्र का उच्चारण करते हुए उन्हें चन्द्रमा को अर्घ्य दें -* *गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।* *गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥* *'गगन रूपी समुद्र के माणिक्य, दक्ष कन्या रोहिणी के प्रियतम और गणेश के प्रतिरूप चन्द्रमा! आप मेरा दिया हुआ यह अर्घ्य स्वीकार कीजिए।’* *इस प्रकार गणेश जी को यह दिव्य तथा पापनाशन अर्घ्य देकर यथाशक्ति उत्तम ब्राह्मणों को भोजन कराने के पश्च्यात स्वयं भी उनकी आज्ञा लेकर भोजन करें। ब्रह्मन ! इस प्रकार कल्याणकारी ‘संकष्टवव्रत’ का पालन करके मनुष्य धन-धान्य से संपन्न होता है। वह कभी कष्ट में नहीं पड़ता।* 🙏🏻 *लक्ष्मीनारायणसंहिता में भी कुछ इसी प्रकार वर्णन मिलता है ।* *माघकृष्णचतुर्थ्यां तु संकष्टहारकं व्रतम् ।* *उपवासं प्रकुर्वीत वीक्ष्य चन्द्रोदयं ततः ।। १२८ ।।* *मृदा कृत्वा गणेशं सायुधं सवाहनं शुभम् ।* *पीठे न्यस्य च तं षोडशोपचारैः प्रपूजयेत् ।। १२९ ।।* *मोदकाँस्तिलचूर्णं च सशर्करं निवेदयेत् ।* *अर्घ्यं दद्यात्ताम्रपात्रे रक्तचन्दनमिश्रितम् ।। १३० ।।* *कुशान् दूर्वाः कुसुमान्यक्षतान् शमीदलान् दधि ।* *दद्यादर्घ्यं ततो विसर्जनं कुर्यादथ व्रती ।। १३१ ।।*

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Ramesh agrawal Jan 19, 2022

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