Mansing bhai Sumaniya
Mansing bhai Sumaniya Jan 2, 2022

🙏🙏ओम सूर्या देव नमो नमन🙏🙏 🙏🙏जय श्री राम।जय श्री राम🙏🙏

🙏🙏ओम सूर्या देव नमो नमन🙏🙏
🙏🙏जय श्री राम।जय श्री राम🙏🙏

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कामेंट्स

Radhe Krishna Jan 2, 2022
जय श्री राधे कृष्णा जी 🙏🏻🌹🌹 सुप्रभात वंदन भाई जी 🙏🏻🌹🌹 आप का हर पल शुभ व मंगलमय हो 🌹🌹

Sagar Bhawsar Jan 2, 2022
जय श्री कृष्णा राधे कृष्णा

Ravi Kumar Taneja Jan 2, 2022
_🕉जिस *व्यक्ति* का *विश्वास* अपने *प्रभु* पर हर *परिस्थिति* में *बना* रहता है..._🌺 _ *"ईश्वर"* भी उस *व्यक्ति* का *विश्वास* किसी भी *परिस्थिति* में *टूटने* नहीं देते...!!!_🕉 *🌹ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमो नमः 🌹* *🪴श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,* *हे नाथ नारायण वासुदेवाय!!!🪴* 🍃🍃🍃🕉🍃🍃🍃

Brajesh Sharma Jan 2, 2022
जय जय श्री राधे कृष्णा जी

prem chand shami Jan 2, 2022
💐💐ऊँ श्री आदित्याय नमः 💐💐 💐💐जय जय श्री राधे कृष्णा 🙏🙏 शुभ प्रभात मंगलमय की शुभकामनायें प्रणाम भाई जी 💐💐🙏

Archana Singh Jan 2, 2022
🙏🌹ॐ सूर्य देवाय नमः🌹🙏 मंगल सुप्रभात मेरे सभी भाई बहनों को🙏🌹 सूर्य देव की कृपा से आपकी हर मनोकामना पूर्ण हो🙏🌹🌹🙏

Kailash Pandey Jan 2, 2022
ओम सूर्य देवाय नमः सुप्रभात वंदन भाई जी

Kailash Pandey Jan 2, 2022
भगवान सूर्य देव की कृपा दृष्टि आप पर सदैव बनी रहे

Runa Sinha Jan 2, 2022
🌴💖Jai Suryadev 💖🌴 🌴💖Good afternoon bhai🙏💖🌴 🌴💖Happy Sunday 💖🌴

Madhu Soni Jan 22, 2022

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Babbu Bhai Jan 22, 2022

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*🚩 वृंदावन के बंदर चार चीजों को छीनते हैं पर, क्यूं छीनते हैं आइये एक भाव दृष्टिपात करें।🚩* 1. चप्पल-जूते – तो भैया वृंदावन में आए हो तो वृंदावन हमारे प्रियालालजू की नित्य क्रीडा स्थली है । नित्य विहार स्थली हैं। जहां श्यामा श्याम नंगे पैर विचरण करते हैं। अतः उस रज पर जूते चप्पल पहन कर नही चलना है यही संदेश बंदर देते हैं। 2. चश्मे को छीनते हैं – तो वृंदावन में पधारे प्यारे प्रेमियों वृंदावन को बाह्य नेत्रों से दर्शन करने की आवश्यकता नही है। बाह्य नेत्र से कहीं गंदगी देखोगे कहीं अपशिष्ट देखोगे और घृणा करोगे अपराध बनेगा। अतः उस दिव्यतम श्री धाम वृंदावन का दर्शन आँतरिक नेत्रों से करो। दिव्य यमुना रसरानी जी का दर्शन करो। 3. मोबाइल – भाव - अरे प्यारे भाइयों बडे-बडे योगी यति भी वृंदावन आने के लिए तरसते हैं। श्रीजी की चरण रज बृज रज के लिए बड़े-बड़े देव तरसते हैं। यथा पद में स्वामी हरिराम व्यास जी महाराज कहते हैं- "जो रज शिव सनकादिक याचत सो रज शीश चढाऊं।" तो वृंदावन मे आकर भी बाह्य जगत से संपर्क बनाने का क्या मतलब.? तन वृंदावन में और मन कहाँ मोबाइल में, अतः तन-मन दोनों को वृंदावन में केन्द्रित करें। 4, पर्स – भाव- माया को साथ लेकर चलने की आवश्यकता नहीं है। क्यूंकि यह भजन की भूमि है। यहां पर्स दिखाने की आवश्यकता नहीं। माला झोली पर्याप्त है। अधिक वैभव प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं। क्यूंकि ये शुद्ध माधुर्य लीला की भूमि है। प्रत्येक कण-कण प्रिया लाल जू के रस से आप्लावित है। चूंकि भाव बहुत से हैं। परंतु प्रमुख भावों पर चर्चा की। तो ये बंदर कुछ संदेश देते हैं, परंतु उनके साथ किसी प्रकार का बुरा बर्ताव, सर्वथा अनुचित एवं जघन्य अपराध है। 🌹👣जय श्री राधे कृष्णा जी 👣🌹 🌹 धन धन वृंदावन के बंदर 🌹 🌹जय जय श्री वृंदावन🌹

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