Ravi Goswami
Ravi Goswami Jul 20, 2022

🌄 ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹🌹ॐ नमः शिवाय 💚 🌄🌹 ॐ नमः शिवाय 💚

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Panji Panchal Jul 20, 2022
ओम नमः श्री गणेशाय नमः ओम नमः शिवाय

Ravi Goswami Jul 20, 2022
🔱🌼🌿हर हर महादेव🌿🌼🔱

*🕉हिन्दू संस्कार 🕉* सिंजारा आज ************ हरियाली तीज से पहले सिंजारा पर क्या करती हैं महिलाएं ============================ सिंधारा दूज उत्तरी भारत के लगभग सभी हिस्सों में बड़ी धूमधाम से महिलाओं के द्वारा मनाया जाने वाला सबसे शुभ, पवित्र और प्रसिद्ध उत्सव है। यह एक ऐसा उत्सव है जो की सभी बहूओं को समर्पित हैं। कुछ महिलाएं इस दिन व्रत - उपवास भी करती हैं और अपने पति की दीर्घायु के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं। इस बार श्रावण माह यानी सावन माह की द्वितीया तिथि को सिंजारा का पर्व मनाया जाएगा। हरियाली तीज से 1 दिन पहले का दिन सिंजारा पर्व के तौर पर मनाया जाता है। इस वर्ष सिंजारा तिथि 30 जुलाई 2022, शनिवार और हरियाली तीज 31 जुलाई 2022, दिन रविवार को पड़ रही है। देवी पार्वती को तीज माता कहा जाता है । हरियाली तीज भगवान भोलेनाथ और देवी पार्वती के मिलाप का प्रतीक है। इस दिन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करती है , साथ ही पूरे दिन व्रत रखकर देवी पार्वती के लोकगीत गाती है। सिंजारा या सिंधारा पर्व ज्यादातर पंजाबी, राजस्थानी और हरियाणवी महिलाओ का त्यौहार हैं और महिलाएं ये त्योहार मुख्यत मानती है लेकिन आजकल हर जगह तीज का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है । *🕉हिन्दू संस्कार🕉* *कथा/ कहानी/ मुहूर्त/ पंचांग/ हर प्रकार की धार्मिक पोस्ट के लिए हिंदू संस्कार समूह के साथ परिवार सहित जुड़े* *जय श्री राधे कृष्णा🙏* *नितिश बणसिया* *7065354785* https://www.facebook.com/groups/558433761327326/ 🙏🌺🙏🌺🙏 • सिंजारा पर महिलाएं नए कपड़े, नई चूड़ियां पहनती है और इसी दिन स्त्रियां अपने हाथ में मेहंदी लगाती है । • सिंजारा में महिलाएं अनेक पकवान जैसे घेवर , नारियल के लड्डू, साबूदाना खीर , हलवा , मठरी का मजा लेती है। • इस दिन नव विवाहित महिलाएं अपने मायके जाकर यह त्यौहार धूमधाम से मनाते हैं और कुछ औरतें अपने ससुराल में रहकर भी तीज मनाते हैं । यह एक श्रृंगार दिवस है । • इस दिन पति, रिश्तेदारों से उपहार लेने का रिवाज है। • तीज के दिन सभी महिलाएं मां पार्वती की मूर्ति मध्य में रखकर चारों तरफ एकत्रित होकर उनकी पूजा करती है। साथ ही जिन की शादी तय हो गई है वे कन्या भी तीज का व्रत रखती हैं और उन्हें अपना सिंजारा सास -ससुर से मिलता है । • यह भी माना जाता है कि शादी के बाद बहू का रक्षाबंधन में भी मायके से सिंजारा आता है। हरियाली तीज सावन के मौसम का मनचाहा त्यौहार होता है। *🕉हिन्दू संस्कार🕉* *आपका अपना संस्कार* *सनातन धर्म और गौ माता की सदा जय हो* *अपने धर्म और संस्कृति की हमेशा रक्षा करें* *नितिश बणसिया* *जय जय श्री राम* *🙏 हिंदू संस्कार की पोस्ट को आप ज्यादा से ज्यादा अपनों के साथ शेयर करें आपसे हाथ जोड़ कर निवेदन है*

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Bindu Singh Jul 28, 2022

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. "लालची सेठ" एक गरीब ब्राह्मण था। उसको अपनी कन्या का विवाह करना था। उसने विचार किया कि कथा करने से कुछ पैसा आ जायेगा तो काम चल जायेगा। ऐसा विचार करके उसने भगवान् राम के एक मन्दिर में बैठ कर कथा आरम्भ कर दी। उसका भाव यह था कि कोई श्रोता आये, चाहे न आये पर भगवान् तो मेरी कथा सुनेंगे ! पण्डित जी की कथा में थोड़े से श्रोता आने लगे। एक बहुत कंजूस सेठ था। एक दिन वह मन्दिर में आया। जब वह मन्दिर कि परिक्रमा कर रहा था, तब भीतर से कुछ आवाज आई। ऐसा लगा कि दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे हैं। सेठ ने कान लगा कर सुना, भगवान् राम हनुमान जी से कह रहे थे कि इस गरीब ब्राह्मण के लिए सौ रूपए का प्रबन्ध कर देना, जिससे कन्यादान ठीक हो जाये। हनुमान जी ने कहा ठीक है महाराज ! इसके सौ रूपए कल हो जायेंगे। सेठ ने यह सुना तो वह कथा समाप्ति के बाद पण्डित जी से मिले और उनसे कहा कि महाराज ! कथा में रूपए आ रहें कि नहीं ? पण्डित जी बोले–‛श्रोता बहुत कम आते हैं तो रूपए कैसे आयेंगे।’ सेठ ने कहा कि मेरी एक शर्त है–‛कथा में जितना पैसा आये वह मेरे को दे देना और मैं आप को पचास रूपए दे दूँगा।’ पण्डित जी ने सोचा कि उसके पास कौन से इतने पैसे आते हैं पचास रूपए तो मिलेंगे, पण्डित जी ने सेठ कि बात मान ली। उन दिनों पचास रूपए बहुत सा धन होता था। इधर सेठ कि नीयत थी कि भगवान् कि आज्ञा का पालन करने हेतु हनुमान जी सौ रूपए पण्डित जी को जरूर देंगे। मुझे सीधे-सीधे पचास रूपए का फायदा हो रहा है। जो लोभी आदमी होते हैं वे पैसे के बारे में ही सोचते हैं। सेठ ने भगवान् जी कि बातें सुनकर भी भक्ति कि और ध्यान नहीं दिया बल्कि पैसे कि और आकर्षित हो गए। अब सेठ जी कथा के उपरान्त पण्डित जी के पास गए और उनसे कहने लगे कि कितना रुपया आया है। सेठ के मन विचार था कि हनुमान जी सौ रूपए तो भेंट में जरूर दिलवाएंगे। मगर पण्डित जी ने कहा कि पांच सात रूपए ही आये हैं। अब सेठ को शर्त के मुताबिक पचास रूपए पण्डित जी को देने पड़े। सेठ को हनुमान जी पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था कि उन्हों ने पण्डित जी को सौ रूपए नहीं दिए। वह मन्दिर में गया और हनुमान जी कि मूर्ति पर घूँसा मारा। घूँसा मारते ही सेठ का हाथ मूर्ति पर चिपक गया। अब सेठ जोर लगाये अपना हाथ छुड़ाने के लिए पर नाकाम रहा हाथ हनुमान जी कि पकड़ में ही रहा। हनुमान जी किसी को पकड़ लें तो वह कैसे छूट सकता है। सेठ को फिर आवाज सुनाई दी। उसने ध्यान से सुना, भगवान् हनुमान जी से पूछ रहे थे कि तुमने ब्राह्मण को सौ रूपए दिलाये कि नहीं ? हनुमान जी ने कहा–‛महाराज पचास रूपए तो दिला दिए हैं, बाकी पचास रुपयों के लिए सेठ को पकड़ रखा है। ये पचास रूपए दे देगा तो छोड़ देंगे'।’ सेठ ने सुना तो विचार किया कि मन्दिर में लोग आकर मेरे को देखेंगे तो बड़ी बेईज्जती होगी, वह चिल्लाकर बोला–‛हनुमान जी महाराज ! मेरे को छोड़ दो, मैं पचास रूपय दे दूँगा।' हनुमान जी ने सेठ को छोड़ दिया। सेठ ने जाकर पण्डित जी को पचास रूपए दे दिए। ----------::;×:::---------- 🌺"जय श्री राम"🌺 ***********************************************

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. "लालची सेठ" एक गरीब ब्राह्मण था। उसको अपनी कन्या का विवाह करना था। उसने विचार किया कि कथा करने से कुछ पैसा आ जायेगा तो काम चल जायेगा। ऐसा विचार करके उसने भगवान् राम के एक मन्दिर में बैठ कर कथा आरम्भ कर दी। उसका भाव यह था कि कोई श्रोता आये, चाहे न आये पर भगवान् तो मेरी कथा सुनेंगे ! पण्डित जी की कथा में थोड़े से श्रोता आने लगे। एक बहुत कंजूस सेठ था। एक दिन वह मन्दिर में आया। जब वह मन्दिर कि परिक्रमा कर रहा था, तब भीतर से कुछ आवाज आई। ऐसा लगा कि दो व्यक्ति आपस में बात कर रहे हैं। सेठ ने कान लगा कर सुना, भगवान् राम हनुमान जी से कह रहे थे कि इस गरीब ब्राह्मण के लिए सौ रूपए का प्रबन्ध कर देना, जिससे कन्यादान ठीक हो जाये। हनुमान जी ने कहा ठीक है महाराज ! इसके सौ रूपए कल हो जायेंगे। सेठ ने यह सुना तो वह कथा समाप्ति के बाद पण्डित जी से मिले और उनसे कहा कि महाराज ! कथा में रूपए आ रहें कि नहीं ? पण्डित जी बोले–‛श्रोता बहुत कम आते हैं तो रूपए कैसे आयेंगे।’ सेठ ने कहा कि मेरी एक शर्त है–‛कथा में जितना पैसा आये वह मेरे को दे देना और मैं आप को पचास रूपए दे दूँगा।’ पण्डित जी ने सोचा कि उसके पास कौन से इतने पैसे आते हैं पचास रूपए तो मिलेंगे, पण्डित जी ने सेठ कि बात मान ली। उन दिनों पचास रूपए बहुत सा धन होता था। इधर सेठ कि नीयत थी कि भगवान् कि आज्ञा का पालन करने हेतु हनुमान जी सौ रूपए पण्डित जी को जरूर देंगे। मुझे सीधे-सीधे पचास रूपए का फायदा हो रहा है। जो लोभी आदमी होते हैं वे पैसे के बारे में ही सोचते हैं। सेठ ने भगवान् जी कि बातें सुनकर भी भक्ति कि और ध्यान नहीं दिया बल्कि पैसे कि और आकर्षित हो गए। अब सेठ जी कथा के उपरान्त पण्डित जी के पास गए और उनसे कहने लगे कि कितना रुपया आया है। सेठ के मन विचार था कि हनुमान जी सौ रूपए तो भेंट में जरूर दिलवाएंगे। मगर पण्डित जी ने कहा कि पांच सात रूपए ही आये हैं। अब सेठ को शर्त के मुताबिक पचास रूपए पण्डित जी को देने पड़े। सेठ को हनुमान जी पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था कि उन्हों ने पण्डित जी को सौ रूपए नहीं दिए। वह मन्दिर में गया और हनुमान जी कि मूर्ति पर घूँसा मारा। घूँसा मारते ही सेठ का हाथ मूर्ति पर चिपक गया। अब सेठ जोर लगाये अपना हाथ छुड़ाने के लिए पर नाकाम रहा हाथ हनुमान जी कि पकड़ में ही रहा। हनुमान जी किसी को पकड़ लें तो वह कैसे छूट सकता है। सेठ को फिर आवाज सुनाई दी। उसने ध्यान से सुना, भगवान् हनुमान जी से पूछ रहे थे कि तुमने ब्राह्मण को सौ रूपए दिलाये कि नहीं ? हनुमान जी ने कहा–‛महाराज पचास रूपए तो दिला दिए हैं, बाकी पचास रुपयों के लिए सेठ को पकड़ रखा है। ये पचास रूपए दे देगा तो छोड़ देंगे'।’ सेठ ने सुना तो विचार किया कि मन्दिर में लोग आकर मेरे को देखेंगे तो बड़ी बेईज्जती होगी, वह चिल्लाकर बोला–‛हनुमान जी महाराज ! मेरे को छोड़ दो, मैं पचास रूपय दे दूँगा।' हनुमान जी ने सेठ को छोड़ दिया। सेठ ने जाकर पण्डित जी को पचास रूपए दे दिए। ----------::;×:::---------- 🌺"जय श्री राम"🌺 ***********************************************

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gopal gajjar Jul 28, 2022

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gopal gajjar Jul 28, 2022

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