Bhawna Gupta
Bhawna Gupta Nov 26, 2021

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🌹Arjun. No, 9879770109 Nov 26, 2021
👌बहुत सुंदर पोस्ट, 👌 इंसान ज़िंदा होता है, 🌹जय श्री द्वारका धीश, कृष्ण 🙏 ईश्वर पे थी विश्वास रखे, मनुष्य, बोलते कुछ है! करते कुछ है, परमात्मा के शिवा कोई किसिका नहीं है 🙏जय श्री राधे श्याम, जय श्री कृष्णा 🙏💐🙏💐

hindusthani mohan sen Nov 26, 2021
शुभ रात्रि वंदन जी अटल सत्य है जय भवानी

sn vyas Jan 20, 2022

🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🚩 *"सनातन परिवार"* 🚩 *की प्रस्तुति* 🔴 *आज का प्रात: संदेश* 🔴 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘️ *संसार में जितने भी मनुष्य हैं सबकी उत्पत्ति माता - पिता के संयोग से ही होती है | जन्म लेकर समझदार होने के बाद मनुष्य अपने परिवार के द्वारा बताये गये धर्म का पालन करने लगता है | संतों की कथाओं एवं प्रवचनों के माध्यम से यह जानता है कि इस संसार को ईश्वर ने उत्पन्न किया है वही इस संसार का पालन करता है इसी क्रम में मनुष्य परमपिता परमात्मा को पाने के लिए लालायित होकर अनेकों उद्योग करना प्रारम्भ कर देता है | गृहस्थी को जंजाल मानकर कुछ लोग संयासी या संत होकर परमात्म प्राप्ति का उपाय करते हैं | परंतु विचारणीय यह है कि क्या गृहस्थी को त्याग कर वानप्रस्थी या संयासी बनकर उस परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है जिसे हमने कभी देखा ही नहीं है ?? परमात्मा ने इस संसार को को उत्पन्न किया यह सत्य हो सकता है परंतु यह घटना जब हुई तब हममें से कोई भी न उपस्थित रहा होगा | परमात्मा के द्वारा इस समस्त सृष्टि का पालन होता है यह भी सत्य है परंतु कैसे यह भी हम नहीं जान सकते हैं | हमें पाषाण मूर्तियों में उस परमसत्ता को दिखाया गया हमने मान लिया और उनकी पूजा आराधना करने लगे | हम में से किसी ने भी देवी - देवताओं के दर्शन नहीं किये होंगे परंतु उनके प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं | क्या इस संसार में वर्तमान में भी कोई भगवान है ?? जिसका कि हम सब जीवितावस्था में दर्शन कर सकें ?? इसका जबाब यही होगा कि शायद कलियुग में पाप इतना बढ गया है कि अब देवी - देवताओं या भगवान के दर्शन दुर्लभ ही हैं |* *आज लोग भगवान के विषय में चर्चा किया करते हैं कि वे कैसे होंगे ? क्या वर्तमान में भी कहीं दिख सकते हैं ? ऐसे लोग ध्यान दें कि वर्तमान में भी भगवान इस पृथ्वी पर जीवितावस्था में हैं | आज इनका दर्शन सुलभ भी है परंतु आधुनिकता की चकाचौंध में आज का मनुष्य उनके सामने होने पर भी उन्हें भगवान मानना ही नहीं चाहता | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि भगवान ने सृष्टि को उत्पन्न किया यह तो मैं नहीं जानता परंतु हमारे माता - पिता ने हमको जन्म दिया यह हम सबको मानना ही पड़ेगा | भगवान सृष्टि का पालन करता है कि नहीं यह तो शायद अपने श्रद्धा का विषय है परंतु हमारे माता - पिता ने हमारा पालन किया है यह अकाट्य सत्य है | तो हमारे लिए तो हमारे भगवान हमारे माता - पिता ही होने चाहिए | इस बात को बुद्धि विधाता भगवान गणेश जी ने भी अखिल ब्रह्माण्ड की जगह माता - पिता की ही परिक्रमा करके सिद्ध भी किया है | फिर हम अपने जीवित भगवान (माता - पिता ) की उपेक्षा करके एक ऐसे परमात्मा की खोज में क्यों निकल जाते हैं जिनके विषय में हमने सिर्फ सुना है कभी देखा नहीं है | परमात्मप्राप्ति करना एक सत्कार्य है परंतु परमात्मा भी उनको ही प्राप्त होते हैं जिनके द्वारा अपने माता - पिता की सेवा की जाती है | माता - पिता की अवहेलना करके आप न तो किसी कार्य को पूरा कर सकते हैं और न ही आपको ईश्वर ही मिलेगा | माता - पिता को वृद्धाश्रम में छोड़कर अपने घर संतों का भंडारा और अनुष्ठान कराके सकारात्मक परिणाम की इच्छा रखने वालों को नरारात्मक परिणाम ही प्राप्त होते देखे गये हैं |* *यदि सही मायनों में सफलता अर्जित करनी है या परमात्मा को पाने की इच्छा है तो सर्वप्रथम धरती के भगवान (माता - पिता) की पूजा करनी ही पड़ेगी ! अन्यथा आपको कुछ भी नहीं मिलने वाला है |* 🌺💥🌺 *जय श्री हरि* 🌺💥🌺 🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 सभी भगवत्प्रेमियों को आज दिवस की *"मंगलमय कामना"*----🙏🏻🙏🏻🌹 ♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵️ *सनातन धर्म से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा (सतसंग) करने के लिए हमारे व्हाट्सऐप समूह----* *‼ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼ से जुड़ें या सम्पर्क करें---* आचार्य अर्जुन तिवारी प्रवक्ता श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा संरक्षक संकटमोचन हनुमानमंदिर बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी (उत्तर-प्रदेश) 9935328830 🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟

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#जिन्होंने_आर्डर_नहीं_किया_है_वो_ही_आर्डर_करें । 👍जीने की राह पुस्तक बिल्कुल निशुल्क मंगवाने के लिए नाम:- ...... पता, पिनकोड:- ....... मोबाइल नम्बर :-....... पुस्तक किस भाषा में चाहिए...... comment box में दें या इस whatsaap no. पर दीजिये 7509250415 कोई चार्ज नहीं है बिल्कुल #फ्री पुस्तक प्राप्त करें. नाम पता मोबाइल नंबर अगर आपका सही है तो इस पुस्तक को हम आप तक पहुंचाने की गारंटी लेते हैं. इस पुस्तक की डिलीवरी 30 दिन के अंदर अंदर कर दी जाती है, 1 से ज्यादा बार ओर्डर डालने वालों का ओर्डर केंसल हो जाता है हमको जन्म देने व मारने में किस प्रभु का स्वार्थ? हम सभी देवी- देवताओं की इतनी भक्ति करते हैं फिर भी दुखी क्यों हैं इन अनसुलझे सवालों का जवाब पाने के लिए पढ़िए पुस्तक "जीने की राह" यह धार्मिक पुस्तक 100% निशुल्क है कोई डिलीवरी चार्ज भी नहीं लगेगा । क्यों जिंदगी में दुख आता है?? हम न चाह कर में नशे में लिप्त रहते है।??? क्यों हमे नशे की लत लगती है?? क्यों परेशानी आती है हँसते खेलते परिवार में?? और भी बहुत से प्रश्नों को उत्तर जानना चाहोगे तो पढिये संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तक "जीने की राह" जिसमे है हर समस्या का समाधान तो देर किस बात की जल्दी अपना आर्डर कीजिये यदि आप अपना नाम पता मोबाइल नंबर गुप्त रखना चाहते हैं तो इस व्हाट्सएप नंबर- 7509250415 पर पुस्तक आर्डर करें. Free book with free Home dilevry

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devilakshmi Jan 21, 2022

रावण द्वारा #माता_सीता_का_हरण करके श्रीलंका जाते समय पुष्पक विमान का मार्ग क्या था? उस मार्ग में कौन सा #वैज्ञानिक_रहस्य छुपा हुआ है ? उस मार्ग के बारे में हज़ारों साल पहले कैसे जानकारी थी ? पढ़िए इन प्रश्नों के उत्तर जो वामपंथी इतिहारकारों के लिए मृत्यु समान हैं. . मेरे देशबंधुओं, . रावण ने माँ सीताजी का अपहरण पंचवटी (नासिक, महाराष्ट्र) से किया और पुष्पक विमान द्वारा हम्पी (कर्नाटक), लेपक्षी (आँध्रप्रदेश) होते हुए श्रीलंका पहुंचा. . आश्चर्य होता है जब हम आधुनिक तकनीक से देखते हैं कि नासिक, हम्पी, लेपक्षी और श्रीलंका बिलकुल एक सीधी लाइन में हैं. अर्थात ये पंचवटी से श्रीलंका जाने का सबसे छोटा रास्ता है। . अब आप ये सोचिये कि उस समय Google Map नहीं था जो Shortest Way बता देता. फिर कैसे उस समय ये पता किया गया कि सबसे छोटा और सीधा मार्ग कौन सा है? . या अगर भारत विरोधियों के अहम् संतुष्टि के लिए मान भी लें कि चलो रामायण केवल एक महाकाव्य है जो वाल्मीकि ने लिखा तो फिर ये बताओ कि उस ज़माने में भी गूगल मैप नहीं था तो रामायण लिखने वाले वाल्मीकि को कैसे पता लगा कि पंचवटी से श्रीलंका का सीधा छोटा रास्ता कौन सा है? महाकाव्य में तो किन्ही भी स्थानों का ज़िक्र घटनाओं को बताने के लिए आ जाता। . लेकिन क्यों वाल्मीकि जी ने सीता हरण के लिए केवल उन्हीं स्थानों का ज़िक्र किया जो पुष्पक विमान का सबसे छोटा और बिलकुल सीधा रास्ता था? . ये ठीक वैसे ही है कि आज से 500 साल पहले गोस्वामी तुलसीदास जी को कैसे पता कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी क्या है? (जुग सहस्त्र जोजन पर भानु = 152 मिलियन किमी - हनुमानचालीसा), जबकि नासा ने हाल ही के कुछ वर्षों में इस दूरी का पता लगाया है. . अब आगे देखिये... . पंचवटी वो स्थान है जहां प्रभु श्री राम, माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण वनवास के समय रह रहे थे. . यहीं शूर्पणखा आई और लक्ष्मण से विवाह करने के लिए उपद्रव करने लगी। विवश होकर लक्ष्मण ने शूपर्णखा की नाक यानी नासिका काट दी. और आज इस स्थान को हम नासिक (महाराष्ट्र) के नाम से जानते हैं। आगे चलिए... . पुष्पक विमान में जाते हुए सीताजी ने नीचे देखा कि एक पर्वत के शिखर पर बैठे हुए कुछ वानर ऊपर की ओर कौतुहल से देख रहे हैं तो सीता ने अपने वस्त्र की कोर फाड़कर उसमें अपने कंगन बांधकर नीचे फ़ेंक दिए, ताकि राम को उन्हें ढूढ़ने में सहायता प्राप्त हो सके. . जिस स्थान पर सीताजी ने उन वानरों को ये आभूषण फेंके वो स्थान था 'ऋष्यमूक पर्वत' जो आज के हम्पी (कर्नाटक) में स्थित है. . इसके बाद... वृद्ध गिद्धराज जटायु ने रोती हुई सीताजी को देखा, देखा कि कोई राक्षस किसी स्त्री को बलात अपने विमान में लेके जा रहा है। . जटायु ने सीताजी को छुड़ाने के लिए रावण से युद्ध किया. रावण ने तलवार से जटायु के पंख काट दिए. . इसके बाद जब राम और लक्ष्मण सीताजी को ढूंढते हुए पहुंचे तो उन्होंने दूर से ही जटायु को सबसे पहला सम्बोधन 'हे पक्षी' कहते हुए किया. और उस जगह का नाम दक्षिण भाषा में 'लेपक्षी' (आंधप्रदेश) है। . अब क्या समझ आया आपको? पंचवटी---हम्पी---लेपक्षी---श्रीलंका. सीधा रास्ता.सबसे छोटा रास्ता. हवाई रास्ता, यानि हमारे जमाने में विमान होने के सबूत . गूगल मैप का निकाला गया फोटो नीचे है. . अपने ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति को भूल चुके भारतबन्धुओं रामायण कोई मायथोलोजी नहीं है. . ये महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया सत्य इतिहास है. जिसके समस्त वैज्ञानिक प्रमाण आज उपलब्ध हैं. . इसलिए जब भी कोई वामपंथी हमारे इतिहास, संस्कृति, साहित्य को मायथोलोजी कहकर लोगों को भ्रमित करने का या खुद को विद्वान दिखाने का प्रयास करे तो उसको पकड़कर बिठा लेना और उससे इन सवालों के जवाब पूछना. एक का भी जवाब नहीं दे पायेगा। सत्य सनातन धर्म की जय।🚩🚩

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Deepak Jan 21, 2022

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Deepak Jan 21, 2022

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Ramesh agrawal Jan 21, 2022

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sn vyas Jan 21, 2022

🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞🌸🌞 ‼ *भगवत्कृपा हि केवलम्* ‼ 🚩 *"सनातन परिवार"* 🚩 *की प्रस्तुति* 🔴 *आज का प्रात: संदेश* 🔴 🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘🌻☘️ *भारतीय सनातन संस्कृति सदैव से पूरे विश्व के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करती आई है | समस्त विश्व भारतीय आदर्शों को अपनाकर प्रत्येक क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रहा है | परंतु आज हम भारतीय अपनी संस्कृति और अपने आदर्शों को भूलते जा रहे हैं | पुरातन काल में जब घर में कोई वैवाहिक कार्यक्रम होता था तब घर की सारी व्यवस्थाएं महिलाओं के ऊपर निर्भर होती थी | और वह महिलाएं पूरी जिम्मेदारी के साथ विवाह की सारी व्यवस्था संपन्न करती थीं | भोजन से लेकर के अन्य व्यवस्थाएं सब उन्हीं के हाथ में होती थी उस समय का भोजन बहुत ही स्वादिष्ट एवं सुपाच्य होता था | इन बैबाहिक कार्यक्रमों में बाजे के ऊपर नाचने वाले और नाचने वालियाँ बाहर से बुलाए जाते थे | घर के महिलाओं की एक मर्यादा होती थी जो कि अपनी लक्ष्मण रेखा के अंदर रह कर के एक मर्यादित आदर्श प्रस्तुत करती थी | परंतु आज आधुनिकता के नाम पर जो नाच नाचा जा रहा है वह हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या आदर्श प्रस्तुत करेगा यह शायद हम भी नहीं जानते हैं | आज भोजन बनाने की जिम्मेदारी बाहर वालियों के ऊपर है और बैंड बाजे पर नाचने की जिम्मेदारी घर की बहू और बेटियों ने ले ली है | जो गाने हम घर परिवार में बैठकर सुन नहीं सकते ऐसे गानों पर आज घर की महिलायें भरे समाज में नाचती हैं और हम मूकदर्शक बनकर आनंद उठाते हैं | विचार कीजिए हम किस संस्कृति का पोषण कर रहे हैं |* *आज के कार्यक्रमों की अपेक्षा पहले भोजन कम बर्बाद होते थे , क्योंकि घर की महिलाएं पूरी जिम्मेदारी के साथ भोजन बनाती थी और परोसती थी | जिससे भोजन की बर्बादी ना के बराबर होती थी | परंतु आज हम ऐसे युग में आ गए हैं जहां की महिलाएं एवं पुरुष इतने आधुनिक हो गए हैं कि वे ना तो भोजन बनाना चाहती हैं और ना ही हम परोसना चाहते हैं | एक कैटर्स को जिम्मेदारी देकर ही हम सारी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं | और कै्टर्स इतनी सामग्रियां लिख देता है जितने लोग आपके यहां आने वाले भी नहीं होते हैं | पहले भोजन जब परोसा जाता था तब आदमी न मन रहते हुए भी थोड़ा ज्यादा खाता था | क्योंकि परोसने वालों के द्वारा प्रेम खिलाया जाता है | परंतु आजकल अपने हाथ से परोसना और अपने हाथ से खाना , जब से यह नियम लागू हुआ है तब से भोजन की बर्बादी बढ़ गई है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देखता हूँ कि आज जहां भोजन व्यवस्था होती है अनेक प्रकार के व्यंजनों के पात्र रखे रहते हैं | और समस्या यह है कि भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि मनुष्य सोचता है कि जिस व्यंजन के पास है उसको अधिक से अधिक अपनी थाली में रख ले दोबारा पता नहीं मौका मिले ना मिले | फिर थोड़ा थोड़ा करके थाली में भोजन इतना ज्यादा हो जाता है कि खाने वाला आधा खाता है और आधा फेंक देता है |भारतीय वांग्मय में अन्न को देवता कहा गया है और वहीं अन्न जब बर्बाद होता है फेका जाता है तो उसका दुष्परिणाम भी देखने को मिलता है | एक तो अनेक प्रकार की बीमारियां फैलती हैं दूसरे वह अन्न भी श्राप देता है | आज भारतीयों की बहुत दुर्दशा हो गई है जिससे और रोते तो हैं लेकिन हंसते हंसते रोना पड़ता है | एक दूसरे को देख कर के अपने कार्यक्रम को विशालता प्रदान करने के लिए आज हम सारी मर्यादाओं का उल्लंघन करते हुए अपने कार्यक्रम संपन्न कराते हैं |* *विचार कीजिए कि हम कहां थे और कहां चले आए | समय के साथ बहना अच्छी बात है लेकिन उसके साथ-साथ अपनी संस्कृति और अपनी मर्यादा का ध्यान रखना भी उससे ज्यादा आवश्यक है , अन्यथा भारतीय संस्कृति विलुप्त होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है |* 🌺💥🌺 *जय श्री हरि* 🌺💥🌺 🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳🔥🌳 सभी भगवत्प्रेमियों को आज दिवस की *"मंगलमय कामना"*----🙏🏻🙏🏻🌹 ♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵♻🏵️ *सनातन धर्म से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा (सतसंग) करने के लिए हमारे व्हाट्सऐप समूह----* *‼ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼ से जुड़ें या सम्पर्क करें---* आचार्य अर्जुन तिवारी प्रवक्ता श्रीमद्भागवत/श्रीरामकथा संरक्षक संकटमोचन हनुमानमंदिर बड़ागाँव श्रीअयोध्याजी (उत्तर-प्रदेश) 9935328830 🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟🍀🌟

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raj kamal sharma Jan 21, 2022

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Bhawna Gupta Jan 20, 2022

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