pramod sahoo Oct 16, 2021

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Rama Devi Sahu Oct 16, 2021

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pramod sahoo Oct 16, 2021

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Rama Devi Sahu Oct 16, 2021

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Rama Devi Sahu Oct 16, 2021

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pramod sahoo Oct 16, 2021

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Rama Devi Sahu Oct 15, 2021

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Rama Devi Sahu Oct 16, 2021

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राधा बिना अशोभन नित मैं, रहता केवल कोरा कृष्ण। राधा-संग सुशोभित होकर, बन जाता हूँ मैं ‘श्री’कृष्ण॥ - (ब्रह्मवैवर्तपुराण, श्रीकृष्णजन्मखण्ड) 🌟श्रीराधा प्रेमभक्ति की प्रतीक हैं। श्रीकृष्ण की आराधिका शक्ति हैं। राधा-कृष्ण परस्पर एक-दूसरे की आराधना करते हैं| 🌟ब्रह्माण्डपुराणमें भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है–’राधा की आत्मा सदा मैं श्रीकृष्ण हूँ और मेरी (श्रीकृष्ण की) आत्मा निश्चय ही राधा हैं। 🌟 श्रीराधा वृन्दावन की ईश्वरी हैं, इस कारण मैं राधा की ही आराधना करता हूँ। 🌟भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीराधा को अपना देहार्ध तथा परम शक्तिरूप बताते हुए कहा है–’हे राधे ! गोलोक की भांति ही तुम गोकुल की भी राधा हो। 🌟तुम्हीं वैकुण्ठ की महालक्ष्मी और महासरस्वती हो। 🌟क्षीराब्धिशायी विष्णु की प्रियतमा मर्त्यलक्ष्मी तुम्ही हो। 🌟धर्म की पुत्रवधू शान्ति के रूप में तुम्ही प्राणिमात्र की काम्य हो। 🌟द्वारका में श्री की अंशभूता रुक्मिणी के रूप में तुम्हीं निवास करती हो।

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Rama Devi Sahu Oct 16, 2021

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Rama Devi Sahu Oct 16, 2021

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nutan Oct 16, 2021

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jayashree Oct 16, 2021

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