जयजिनेंद्र

Preeti Jain Jun 2, 2021

उम्रदराज़ / जिन आँखों में कभी अनंत और सीमाहीन स्वप्न समाहित थे वे आँखे अब बेबस और लाचार हैं उन आँखों पर मोटे फ्रेम का चश्मा चढ़ चुका है। आवाज़ थरथराने लगीं माथे पर सिलवटें पड़ गयीं हैं और चेहरे पर अनगिनत झुर्रियां हाथ अब कँपकँपाने लगे हैं और उँगलियाँ अनियंत्रित होकर हिलने लगी हैं। जिन हाथों में कभी पूरे घर की बागडोर थी उन हाथों की लकीरें धुँधली होकर मिटने लगी हैं अब उन हाथों में सहारे की एक छड़ी आ चुकी हैं। जिन कंधों पर जम्मेदारियों का बोझ था अब वो अपने ही बोझ तले दब चुके हैं जिन बच्चों को अपने हाथों से ममत्व और स्नेह का कभी निवाला बना खिलाया अब उन्हीं बच्चों के मोहताज़ हैं शायद अब उम्रदराज़ हो चुके हैं..✒️

+342 प्रतिक्रिया 96 कॉमेंट्स • 104 शेयर
Preeti Jain May 19, 2021

+232 प्रतिक्रिया 41 कॉमेंट्स • 141 शेयर
aman Dec 14, 2017

https://youtu.be/N5PdWGAZz4Y

+13 प्रतिक्रिया 0 कॉमेंट्स • 119 शेयर
@mahaveer1698 Sep 16, 2021

+20 प्रतिक्रिया 10 कॉमेंट्स • 73 शेयर
Uma Mishra Aug 16, 2021

+22 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 59 शेयर
myjbjvala Oct 27, 2021

+13 प्रतिक्रिया 1 कॉमेंट्स • 69 शेयर

+8 प्रतिक्रिया 4 कॉमेंट्स • 63 शेयर